CM Bhagwant Mann: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुवार को संगरूर में एक आधुनिक खेल स्टेडियम की नींव रखकर साफ संकेत दे दिया कि राज्य सरकार युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह स्टेडियम ₹14.63 करोड़ की लागत से 4.38 एकड़ क्षेत्र में बनेगा।
देखा जाए तो यह सिर्फ एक स्टेडियम नहीं, बल्कि पंजाब सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें खेलों के माध्यम से नशे की कमर तोड़ने का लक्ष्य है। Bhagwant Singh Mann ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि जब बच्चों को शिक्षा के लिए अच्छा स्कूल और खेल के लिए उचित मैदान मिलता है, तो वे अपने गांव, राज्य और देश का नाम वैश्विक मंच पर रोशन कर सकते हैं।
30 अप्रैल 2026 को Sangrur में रखी गई इस स्टेडियम की नींव केवल एक औपचारिकता नहीं थी। यह पंजाब की युवा शक्ति को नई दिशा देने का संकल्प था।
ਅੱਜ ਆਪਣੇ ਜੱਦੀ ਪਿੰਡ ਸਤੌਜ ਵਿਖੇ ₹14.63 ਕਰੋੜ ਦੀ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਬਣਨ ਵਾਲੇ ਆਧੁਨਿਕ ਸਪੋਰਟਸ ਸਟੇਡੀਅਮ ਦਾ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਰੱਖਿਆ।
4.38 ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਫੈਲਿਆ ਇਹ ਸਟੇਡੀਅਮ ਸਾਡੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਉਡਾਣ ਦੇਵੇਗਾ। 200 ਮੀਟਰ ਐਥਲੈਟਿਕ ਟ੍ਰੈਕ ਅਤੇ ਇਨਡੋਰ ਹਾਲ ਵਰਗੀਆਂ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰੀ ਸਹੂਲਤਾਂ ਨਾਲ ਲੈਸ ਇਹ ਕੰਪਲੈਕਸ ਇਲਾਕੇ ਦੇ ਬੱਚਿਆਂ… pic.twitter.com/kjo6RLxlU6
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) April 30, 2026
11 खेलों की सुविधा वाला बनेगा स्पोर्ट्स हब
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्टेडियम परिसर में विभिन्न खेल गतिविधियों की मेजबानी की जाएगी। यहां 200 मीटर का एथलेटिक ट्रैक, दर्शकों और खिलाड़ियों के लिए पैवेलियन और एक बहुउद्देशीय इनडोर स्पोर्ट्स हॉल बनाया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि एक ही परिसर में 11 अलग-अलग खेलों की सुविधा होगी। बैडमिंटन, हैंडबॉल, जूडो, नेटबॉल, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जिमनास्टिक्स, कबड्डी, कराटे और अन्य खेलों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
समझने वाली बात यह है कि यह स्टेडियम सिर्फ खेलने की जगह नहीं होगी। यहां बच्चों और युवाओं को पेशेवर प्रशिक्षण के अवसर भी मिलेंगे। इस विकास के साथ, यह क्षेत्र एक खेल केंद्र के रूप में उभरेगा।
नशे की कमर तोड़ने का मास्टर प्लान
Punjab सरकार की रणनीति को अगर गहराई से समझें, तो खेल बुनियादी ढांचे में भारी निवेश का एक बड़ा उद्देश्य है – नशे के खिलाफ लड़ाई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि खेलों को बढ़ावा देने से राज्य में नशे की कमर तोड़ने में मदद मिलेगी।
हैरान करने वाली बात यह है कि पंजाब ने खेलों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का औजार बनाया है। जब युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक तरीके से खेलों में लगाया जाता है, तो वे नशे जैसे अभिशाप से दूर रहते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह परियोजना राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देकर नशे की रीढ़ तोड़ने में मदद करेगी। ऐसे स्टेडियम युवाओं को नशे के अभिशाप से दूर रखने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में पदक जीतने के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”
4.38 एकड़ में फैला होगा आधुनिक खेल परिसर
यह स्टेडियम 4.38 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा, जो काफी विशाल है। इतने बड़े क्षेत्र में विभिन्न खेल सुविधाओं को वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन किया जाएगा।
अगर गौर करें तो 200 मीटर का एथलेटिक ट्रैक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बनाया जाएगा। यह ट्रैक एथलीटों को पेशेवर प्रशिक्षण का मौका देगा। दर्शकों के लिए अलग से पैवेलियन होगा जहां बैठकर वे खेल प्रतियोगिताओं का आनंद ले सकेंगे।
खिलाड़ियों के लिए भी विशेष पैवेलियन बनाया जाएगा जहां वे आराम कर सकें और प्रतियोगिता की तैयारी कर सकें। इनडोर स्पोर्ट्स हॉल में मौसम की परवाह किए बिना साल भर खेल गतिविधियां चल सकेंगी।
विश्वस्तरीय सुविधाओं से बनेगा खिलाड़ियों का स्वर्ग
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार शिक्षा और खेल के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं सफलतापूर्वक उपलब्ध करा रही है। यह गर्व और संतोष की बात है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार केवल बुनियादी ढांचा नहीं बना रही, बल्कि उसमें गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान दे रही है। विश्वस्तरीय सुविधाएं का मतलब है कि पंजाब के युवाओं को अब दूसरे राज्यों या विदेशों में जाने की जरूरत नहीं होगी।
बैडमिंटन और बास्केटबॉल जैसे लोकप्रिय खेलों से लेकर जूडो और कराटे जैसे मार्शल आर्ट्स तक – हर खेल के लिए पेशेवर कोचिंग और उपकरण उपलब्ध होंगे। कबड्डी तो पंजाब का पारंपरिक खेल है, और इसके लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
संतुलित विकास का नया मॉडल
मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण बात कही जो हर माता-पिता को समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा के लिए अच्छा स्कूल और खेल के लिए उचित मैदान होता है, तो बच्चा वैश्विक मंच पर अपने गांव, राज्य और देश के लिए गौरव ला सकता है।
इससे साफ होता है कि पंजाब सरकार केवल खेल या केवल शिक्षा पर नहीं, बल्कि दोनों पर समान रूप से ध्यान दे रही है। यह संतुलित विकास का मॉडल है जो बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करता है।
राहत की बात यह है कि यह पहल संगरूर तक सीमित नहीं रहेगी। पंजाब के अन्य हिस्सों में भी ऐसे स्टेडियम बनाने की योजना है ताकि हर क्षेत्र के युवाओं को समान अवसर मिले।
पेशेवर प्रशिक्षण से तैयार होंगे भविष्य के चैंपियन
केवल सुविधाएं बनाना काफी नहीं है। असली बदलाव तब आता है जब उन सुविधाओं का सही उपयोग हो। इसीलिए इस स्टेडियम में पेशेवर प्रशिक्षण की विशेष व्यवस्था की जाएगी।
बच्चों और युवाओं को अनुभवी कोचों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा। यह दर्शाता है कि सरकार सिर्फ इमारतें नहीं बना रही, बल्कि खिलाड़ी तैयार करने की पूरी व्यवस्था कर रही है।
जब पेशेवर प्रशिक्षण मिलेगा, तो प्रतिभाशाली युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले सकेंगे। पंजाब पहले से ही खेलों में मजबूत राज्य रहा है, और अब यह सुविधा उसे और मजबूत बनाएगी।
₹14.63 करोड़ का निवेश, अनमोल भविष्य
₹14.63 करोड़ की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह युवाओं के भविष्य में किया गया निवेश है। सवाल उठता है कि क्या यह निवेश पर्याप्त है?
अगर हम तुलना करें तो कई राज्यों में खेल बुनियादी ढांचे पर बहुत कम खर्च होता है। लेकिन पंजाब ने युवाओं को प्राथमिकता दी है। यह रकम स्टेडियम निर्माण, उपकरण खरीद और बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त है।
उम्मीद की किरण यह है कि जब यह स्टेडियम बनकर तैयार होगा, तो यह क्षेत्र का सबसे बड़ा खेल केंद्र बन जाएगा। आस-पास के गांवों और शहरों के युवा यहां आकर अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे।
जनता की प्रतिक्रिया: उत्साह और उम्मीद
हालांकि मुख्यमंत्री के भाषण में जनता की सीधी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है, लेकिन ऐसी घोषणाओं का स्वागत होना स्वाभाविक है। खिलाड़ी, युवा और खेल प्रेमी इस पहल से उत्साहित होंगे।
माता-पिता के लिए यह राहत की बात है कि उनके बच्चों को अब बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी सुविधाओं की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पाते। अब उन्हें मौका मिलेगा।
स्थानीय समुदाय के लिए भी यह गर्व की बात होगी कि उनके क्षेत्र में विश्वस्तरीय स्टेडियम बन रहा है। यह रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा – निर्माण के दौरान और बाद में रखरखाव और संचालन में।
खेल संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यह परियोजना राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देगी। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब है कि खेलों को जीवन का हिस्सा बनाना, न कि केवल शौक।
जब बच्चे नियमित रूप से खेलेंगे, तो वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे। खेल संस्कृति से अनुशासन, टीम भावना और प्रतिस्पर्धा की सकारात्मक भावना विकसित होती है।
पंजाब में कबड्डी और हॉकी की समृद्ध परंपरा रही है। लेकिन अब बैडमिंटन, जूडो, कराटे जैसे खेलों में भी युवा आगे आएंगे। यह विविधता खेल संस्कृति को और समृद्ध करेगी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकेंगे पंजाब के सितारे
मुख्यमंत्री की दृष्टि केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस स्टेडियम का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में पदक जीतने के सपने को साकार करने में मदद करना है।
यह दर्शाता है कि पंजाब सरकार ऊंचे लक्ष्य रख रही है। ओलंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स – इन सभी में पंजाब के खिलाड़ियों ने पहले भी नाम किया है। अब और अधिक खिलाड़ी तैयार होंगे।
जब विश्वस्तरीय सुविधाएं और पेशेवर प्रशिक्षण मिलेगा, तो प्रतिभा को निखरने में देर नहीं लगेगी। अगले कुछ वर्षों में संगरूर क्षेत्र से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उभर सकते हैं।
नशा मुक्ति से खेल विकास तक का सफर
पंजाब सरकार की यह पहल एक व्यापक सामाजिक रणनीति का हिस्सा है। नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून और कार्रवाई काफी नहीं है। युवाओं को सकारात्मक विकल्प देना जरूरी है।
खेल वह विकल्प है जो युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा देता है। जब कोई युवा खेल में व्यस्त होता है, लक्ष्य होता है, तो वह नशे जैसी बुराइयों से दूर रहता है।
इस तरह यह स्टेडियम केवल खेल सुविधा नहीं, बल्कि नशा मुक्ति अभियान का एक हथियार भी है। यह बहुआयामी दृष्टिकोण है जो समस्या की जड़ पर हमला करता है।
संगरूर का बदलता चेहरा
संगरूर जिला अब खेलों के नक्शे पर एक महत्वपूर्ण स्थान बनाने जा रहा है। जब यह स्टेडियम बनकर तैयार होगा, तो यह क्षेत्र का सबसे बड़ा आकर्षण बन जाएगा।
यहां बड़ी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हो सकेगा। राज्य स्तर और शायद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं भी यहां हो सकती हैं। इससे क्षेत्र की पहचान बढ़ेगी।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। जब प्रतियोगिताएं होंगी, तो दर्शक आएंगे, जिससे स्थानीय व्यवसायों को फायदा होगा।
जानें पूरा मामला
पंजाब सरकार ने युवाओं के विकास और नशा मुक्ति को अपनी प्राथमिकता बनाया है। इसके लिए पूरे राज्य में खेल बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। संगरूर में बनने वाला यह स्टेडियम इसी योजना का हिस्सा है।
30 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस स्टेडियम की नींव रखी। यह ₹14.63 करोड़ की लागत से 4.38 एकड़ में बनेगा। इसमें 11 खेलों की सुविधा होगी और पेशेवर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
यह केवल खेल सुविधा नहीं, बल्कि युवाओं को नशे से बचाने और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाने का माध्यम है। इससे खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
• मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 30 अप्रैल 2026 को संगरूर में आधुनिक खेल स्टेडियम की नींव रखी
• स्टेडियम की लागत ₹14.63 करोड़ है और यह 4.38 एकड़ क्षेत्र में बनेगा
• 200 मीटर का एथलेटिक ट्रैक, दर्शक पैवेलियन और बहुउद्देशीय इनडोर स्पोर्ट्स हॉल होगा
• बैडमिंटन, हैंडबॉल, जूडो, नेटबॉल, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, फुटबॉल, जिमनास्टिक्स, कबड्डी, कराटे सहित 11 खेलों की सुविधा
• बच्चों और युवाओं को पेशेवर प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे
• यह क्षेत्र एक खेल केंद्र (स्पोर्ट्स हब) के रूप में विकसित होगा
• खेलों के माध्यम से नशे की कमर तोड़ने की रणनीति का हिस्सा
• विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने का लक्ष्य












