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The News Air - Breaking News - Great Nicobar Project बड़ा स्कैम: राहुल गांधी का बड़ा आरोप, जानें पूरा मामला

Great Nicobar Project बड़ा स्कैम: राहुल गांधी का बड़ा आरोप, जानें पूरा मामला

अंडमान निकोबार दौरे पर गए राहुल गांधी ने ₹81,000 करोड़ के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को देश का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया और पर्यावरण तथा आदिवासी समुदायों पर खतरे की चेतावनी दी।

The News Air Team by The News Air Team
गुरूवार, 30 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस, राष्ट्रीय
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Great Nicobar Project
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Great Nicobar Project : देखा जाए तो भारत की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी परियोजनाओं में से एक Great Nicobar Project इन दिनों राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अंडमान निकोबार आइलैंड्स का दौरा किया और वहां के स्थानीय लोगों व आदिवासी समुदायों से मुलाकात के बाद इस परियोजना को “प्रकृति और आदिवासी समुदायों के खिलाफ अपराध” करार दिया है। उन्होंने इसे अब तक का सबसे बड़ा स्कैम बताते हुए कहा कि यह परियोजना पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचाएगी और हजारों आदिवासियों को उनकी जमीन से बेदखल कर देगी।

₹81,000 करोड़ की विशालकाय परियोजना क्या है?

Great Nicobar Project भारत सरकार की सबसे बड़ी एकीकृत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है। इस पर करीब ₹81,000 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। यह परियोजना अंडमान निकोबार के सबसे दक्षिणी द्वीप ग्रेट निकोबार पर विकसित की जा रही है, जो रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है।

समझने वाली बात यह है कि दुनिया के 40% तेल व्यापार और वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। ऐसे में इस चोक पॉइंट के पास भारत की मजबूत उपस्थिति का भू-राजनीतिक महत्व बहुत बढ़ जाता है।

परियोजना में क्या-क्या शामिल है?

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत कई बड़े निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। सबसे पहले गैलेथिया बे में एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनाया जाएगा। यह डीप पोर्ट इतना बड़ा होगा कि सिंगापुर और कोलंबो से प्रतिस्पर्धा कर सके।

इसके अलावा एक ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाएगा जो नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगा। वहीं 3 से 5 लाख लोगों को बसाने के लिए टाउनशिप विकसित की जाएगी। बिजली संयंत्र, सड़कें, लॉजिस्टिक नेटवर्क और अन्य शहरी बुनियादी ढांचा भी इस परियोजना का हिस्सा है।

राहुल गांधी ने क्यों कहा ‘सबसे बड़ा स्कैम’?

अगर गौर करें तो राहुल गांधी ने इसे सामान्य अर्थों में घोटाला नहीं बताया है। उनका आरोप नैतिक, पर्यावरणीय और शासन की विफलता से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है।

राहुल गांधी के मुताबिक इस परियोजना से 160 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र को डायवर्ट किया जाएगा। लगभग 10 लाख पेड़ खतरे में हैं। यह भारत की आखिरी बची अछूती उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी प्रणालियों में से एक है, जिसे एक बार नुकसान पहुंचने पर दोबारा बहाल नहीं किया जा सकता।

आदिवासी समुदायों पर मंडराता खतरा

दिलचस्प बात यह है कि ग्रेट निकोबार द्वीप पर शोम्पेन और निकोबारी जैसी अत्यंत संवेदनशील आदिवासी जनजातियां निवास करती हैं। शोम्पेन जनजाति तो विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों (PVTG) की सूची में शामिल है, जिनकी आबादी बेहद कम है।

राहुल गांधी का कहना है कि ये आदिवासी समुदाय अपनी पुश्तैनी जमीन खो देंगे। उनके सांस्कृतिक विलुप्त होने का खतरा है। चूंकि ये समुदाय बाहरी दुनिया से बहुत कम जुड़े हैं, इसलिए बाहर से आने वाली बीमारियों के प्रति उनके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं है। एक बार संपर्क में आने पर पूरी आबादी ही खत्म हो सकती है।

पर्यावरणीय चुनौतियां और जैव विविधता का नुकसान

Great Nicobar Project जिस क्षेत्र में विकसित हो रहा है, वह इंडो-बर्मा बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट का हिस्सा है। यहां लेदरबैक टर्टल, साल्टवाटर क्रोकोडाइल और निकोबार मेगापोड जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। निकोबार मेगापोड तो एक स्थानिक पक्षी है, जो दुनिया में केवल यहीं पाया जाता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस क्षेत्र में कोरल रीफ, मैंग्रोव और समुद्री कछुओं के घोंसले भी हैं। बंदरगाह बनने से तेल रिसाव का खतरा, जहाजों की आवाजाही से समुद्री जीवन में गड़बड़ी और प्रकाश प्रदूषण जैसी समस्याएं पैदा होंगी।

भूकंपीय संवेदनशीलता का सवाल

ग्रेट निकोबार भूकंप संवेदनशील क्षेत्र है। 2004 की विनाशकारी सुनामी का केंद्र भी यही था। ऐसे में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकसित करने से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में नुकसान की संभावना और बढ़ जाती है।

कानूनी और संस्थागत पहलू

राहुल गांधी का आरोप है कि पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) बेहद कमजोर था। आदिवासी समुदायों से परामर्श बहुत सीमित रहा। अंडमान एंड निकोबार ट्राइबल प्रोटेक्शन रेगुलेशन 1956 और वन अधिकार अधिनियम 2006 जैसे कानूनों को कमजोर किया जा रहा है।

हालांकि सरकार का कहना है कि परियोजना को पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है। वन मंजूरी भी दी गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ इसे मंजूरी दी है।

कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने का आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस परियोजना से प्रधानमंत्री के करीबी कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने अडानी और अंबानी का नाम लेते हुए कहा कि निजी खिलाड़ियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह परियोजना लाई गई है।

सरकार का पक्ष: रणनीतिक जरूरत और आर्थिक लाभ

वहीं सरकार का तर्क है कि यह परियोजना भारत की रणनीतिक जरूरत है। चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का मुकाबला करने के लिए हिंद महासागर में भारत की मजबूत उपस्थिति जरूरी है। ग्वादर, हंबनटोटा और जिबूती में चीन की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए ग्रेट निकोबार को नौसैनिक और हवाई शक्ति केंद्र बनाना आवश्यक है।

आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना भारत के लिए फायदेमंद है। फिलहाल भारत के जहाज सिंगापुर और कोलंबो जाते हैं, जिससे देश को राजस्व का नुकसान होता है। यह बंदरगाह बनने से लाखों नौकरियां पैदा होंगी। भारत एक वैश्विक व्यापार केंद्र और लॉजिस्टिक हब बन सकेगा।

दो धाराओं में बंटी राय

इस परियोजना को लेकर समाज दो धड़ों में बंट गया है। परियोजना के पक्ष में लोगों का मानना है कि व्यापार केंद्र बनने से रोजगार सृजन होगा। पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सकती है। आदिवासियों को विकास का लाभ मिलेगा। चीन का मुकाबला करने के लिए यह जरूरी है।

दूसरी ओर परियोजना विरोधियों का कहना है कि यह एक अस्थिर विकास मॉडल है। पर्यावरण को हुआ नुकसान अपूरणीय होगा। आदिवासी संस्कृति का विलुप्त होने का खतरा है। इससे सैन्यीकरण बढ़ेगा और क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।

राजनीतिक घमासान तेज होने की संभावना

समझने वाली बात यह है कि राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज होने की उम्मीद है। विपक्ष इसे पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। वहीं सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास से जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास करेगी।

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अंतिम फैसला अब यह देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का जवाब कैसे देती है और क्या परियोजना में कोई संशोधन किया जाता है या नहीं।


मुख्य बातें (Key Points)

• राहुल गांधी ने ₹81,000 करोड़ की Great Nicobar Project को देश का सबसे बड़ा स्कैम करार दिया

• परियोजना में गैलेथिया बे में अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, हवाई अड्डा और 3-5 लाख लोगों की टाउनशिप शामिल है

• 160 वर्ग किमी वन क्षेत्र और 10 लाख पेड़ खतरे में, शोम्पेन और निकोबारी आदिवासी समुदायों के अस्तित्व पर संकट

• सरकार का तर्क है कि यह चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का मुकाबला करने और भारत को व्यापार केंद्र बनाने के लिए जरूरी है


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट क्या है और इसकी लागत कितनी है?

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार की ₹81,000 करोड़ की एक विशाल बुनियादी ढांचा परियोजना है जिसमें अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, हवाई अड्डा, बिजली संयंत्र और टाउनशिप का निर्माण शामिल है।

2. राहुल गांधी ने इसे स्कैम क्यों कहा?

राहुल गांधी ने इसे पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के खिलाफ अपराध करार दिया है। उनका आरोप है कि 160 वर्ग किमी वन नष्ट होंगे, आदिवासी विस्थापित होंगे और पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन कमजोर था।

3. यह परियोजना रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

यह परियोजना मलक्का जलडमरूमध्य के करीब है जहां से दुनिया के 40% तेल व्यापार और वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यह भारत को चीन की बढ़ती समुद्री शक्ति का मुकाबला करने में मदद करेगा।

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