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The News Air - Breaking News - Oil Packing में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ Standard Sizes में ही बिकेगा तेल

Oil Packing में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ Standard Sizes में ही बिकेगा तेल

सरकार ने Edible Oil के लिए 9 मानक आकार तय किए हैं, कंपनियां अब मनमाना Pack Size नहीं बना सकेंगी। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने 3 महीने का समय दिया है।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
गुरूवार, 11 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, काम की बातें, बिज़नेस
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Oil Packing
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Edible Oil Packing Rules: आपने कभी गौर किया है कि दुकान पर एक ब्रांड का तेल 1 लीटर का मिलता है तो दूसरा 850ml या 950ml का? यह कोई संयोग नहीं, बल्कि कंपनियों की एक सोची-समझी चाल है। लेकिन अब यह खेल खत्म होने वाला है। भारत सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) ने Cooking Oil की पैकेजिंग को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए हैं।

देखा जाए तो रोजमर्रा की जिंदगी में हम जो सामान इस्तेमाल करते हैं, चाहे वह Edible Oil हो, बिस्किट का पैकेट हो या कोई भी चीज, कंपनियां अक्सर यह चाल करती हैं कि साइज घटा देती हैं और कीमत वही रखती हैं। दिखाती नहीं कि हम दाम बढ़ा रहे हैं, लेकिन असल में उसकी कॉस्ट बढ़ जाती है। और अब इसी को रोकने के लिए सरकार सख्त हुई है।

🔍 यह भी पढ़ें- अमेरिकी वारप्लेन ने Oil Tanker पर किया हमला, 24 भारतीयों की जान खतरे में

क्या है नया नियम: 9 Standard Pack Sizes तय

समझने वाली बात यह है कि अब चाहे नारियल का तेल हो, पाम ऑयल हो, रिफाइंड ऑयल हो, मूंगफली का तेल हो या सरसों का तेल, सभी को तय साइज में ही बेचा जा सकेगा। सरकार ने 9 स्टैंडर्ड साइज निर्धारित किए हैं।

Pack Sizeविवरण
200mlसबसे छोटा मानक आकार
500mlआधा लीटर
1 लीटरपरिवार के लिए सामान्य साइज
2 लीटरबड़े परिवार के लिए
3 लीटरथोक उपयोग
4 लीटरथोक उपयोग
5 लीटरथोक उपयोग
15 लीटरव्यावसायिक उपयोग
20 लीटरव्यावसायिक उपयोग

अब कोई भी कंपनी 550ml, 850ml, 950ml जैसे मनमाने आकार नहीं बना सकती। यह नियम घरेलू स्तर पर उत्पादित और आयातित दोनों तरह के Edible Oil पर लागू होगा।

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दिलचस्प बात यह है कि 200ml से नीचे के पैकेट के लिए छूट दी गई है। यानी 100ml, 160ml, 180ml जैसे छोटे पैकेट बनाए जा सकते हैं ताकि छोटी कंपनियों पर ज्यादा बोझ न पड़े।

3 महीने का Transition Period, उसके बाद सख्ती

सरकार ने सभी कंपनियों को 3 महीने का समय दिया है अपनी पैकेजिंग बदलने के लिए। इस दौरान कंपनियां अपने पुराने स्टॉक को खत्म कर सकती हैं और नए मानकों के अनुसार उत्पादन शुरू कर सकती हैं।

यह नियम सभी प्रकार के Edible Oil पर लागू होगा: सूरजमुखी का तेल, सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, नारियल तेल, पाम ऑयल, सोयाबीन तेल सभी पर। कोई अपवाद नहीं है।

🔍 यह भी पढ़ें- 1973 Oil Crisis: जब Arab-Israel War ने दुनिया की अर्थव्यवस्था हिला दी

समस्या क्या थी: Shrinkflation का खेल

अगर गौर करें तो उपभोक्ता आमतौर पर कीमत की तुलना करते हैं, मात्रा की नहीं। और यही कंपनियों की चालाकी थी। आप किसी सुपरमार्केट जाएं या ऑनलाइन खरीदारी करें, आप क्या देखते हैं? ब्रांड का नाम, MRP, डिस्काउंट, पैकेजिंग। बहुत कम लोग Price per Liter पर ध्यान देते हैं।

उदाहरण से समझिए:

  • ब्रांड A: 1 लीटर का तेल, कीमत ₹180
  • ब्रांड B: 850ml का तेल, कीमत ₹165

पहली नजर में ब्रांड B सस्ता लगेगा। लेकिन अगर Per Liter निकालें तो ब्रांड B का ₹194 पड़ता है, जबकि ब्रांड A का ₹180 ही है। मतलब असल में ब्रांड B महंगा है, लेकिन लोग धोखे में आकर उसे खरीद लेते हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि कंपनियों के पास दो विकल्प होते हैं: या तो कीमत बढ़ाओ (जो उपभोक्ता तुरंत नोटिस कर लेगा) या फिर मात्रा घटा दो और कीमत वही रखो (जो कम लोग नोटिस करते हैं)। कंपनियां दूसरा रास्ता अपनाती थीं।

💡 यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों को मिल सकता है ₹75 लाख का HBA!

2023 में Deregulation हुआ था, अब फिर Regulation

देखा जाए तो 2023 से पहले कंपनियां ज्यादातर 200ml, 500ml, 1 लीटर, 2 लीटर, 5 लीटर जैसे मानक आकारों में ही तेल बेचती थीं। लेकिन 2023 में सरकार ने Deregulation कर दिया, यानी कंपनियों को आजादी दे दी कि जो चाहे वह आकार बनाएं।

नतीजा? 810ml, 850ml, 900ml, 950ml जैसे अजीबोगरीब साइज बाजार में आ गए। और शुरू हुआ Shrinkflation का दौर। जैसे बचपन में आप ₹5 का Parle-G खाते थे, आज भी ₹5 का मिलता है, लेकिन वजन आधा हो गया है। वही खेल यहां भी चला।

इंडस्ट्री की खुद की मांग थी यह नियम

ऐसा नहीं है कि सरकार ने खुद से यह फैसला ले लिया। असल में यह मांग सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Soyabean Processors Association of India) जैसे संगठनों ने की थी।

उनका तर्क था कि इस मनमानी की वजह से जो ईमानदार कंपनियां सही तरीके से 500ml और 1 लीटर के पैकेट बना रही हैं, उन्हें नुकसान होता है। वहीं जो कंपनियां चालाकी से 900ml का पैकेट बनाती हैं, वे फायदा उठा लेती हैं।

Legal Metrology से जुड़ा है यह मामला

यहां एक और महत्वपूर्ण टर्म है जो आपको समझनी चाहिए: Legal Metrology। यह कानून वजन, माप और पैकेजिंग से जुड़े सभी मामलों को नियंत्रित करता है। इसका उद्देश्य यही है कि पैकेट पर जो लिखा है, बिल्कुल वही उपभोक्ता को मिले।

उदाहरण के लिए:

  • 1 किलो चीनी में वास्तव में 1 किलो चीनी हो
  • 1 लीटर पेट्रोल में वास्तव में 1 लीटर हो
  • Packaged Goods में सही मात्रा लिखी हो

Cooking Oil का यह सुधार भी इसी सिद्धांत का विस्तार है।

Cooking Oil को ही पहले क्यों चुना गया

समझने वाली बात यह है कि यह तो शुरुआत है। आगे चलकर आटा, चावल, मसाले और अन्य घरेलू सामानों पर भी ऐसे नियम आ सकते हैं। लेकिन Cooking Oil से शुरुआत क्यों?

कारण बहुत स्पष्ट हैं:

  • भारत में हर साल 24 से 25 मिलियन टन Cooking Oil की खपत होती है
  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा Edible Oil बाजार है
  • बहुत बड़ी मात्रा में Palm Oil का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से होता है
  • हर घर में, चाहे अमीर हो या गरीब, सभी तेल खरीदते हैं
  • करोड़ों परिवारों पर सीधा असर पड़ता है

अगर हर परिवार से ₹5-10 भी छुपाए जाते हैं, तो पूरे देश में हजारों करोड़ का नुकसान हो जाता है।

Inflation के आंकड़ों पर भी असर

यहां एक दिलचस्प पहलू और है। Shrinkflation से मुद्रास्फीति (Inflation) के आंकड़े सही नहीं आते। हर महीने CPI (Consumer Price Index) और WPI जारी होते हैं।

लेकिन अगर पिछले साल 1 लीटर का दाम ₹150 था और इस साल 850ml का दाम ₹150 है, तो आंकड़ों में यह Inflation नहीं दिखता। ऐसा लगता है कि महंगाई नहीं बढ़ी।

कई बार आप भी सोचते होंगे कि सरकार कहती है महंगाई 3% है, लेकिन जमीन पर ऐसा लग नहीं रहा। इसके पीछे Shrinkflation भी एक बड़ा कारण होता है।

Unit Price Labeling काम क्यों नहीं करता

कुछ लोग पूछ सकते हैं कि सरकार यह नियम क्यों नहीं बना देती कि हर पैकेट पर Per Liter Price लिखा हो?

दरअसल, यह नियम पहले से ही है। लेकिन समस्या यह है कि:

  • उपभोक्ता को जल्दबाजी होती है
  • दर्जनों प्रोडक्ट्स की तुलना करना मुश्किल होता है
  • Decimal में calculation कौन करता है?
  • कंपनियां बहुत छोटे फॉन्ट में छुपाकर लिख देती हैं

इसलिए सरकार का कहना है कि यह सब काम नहीं कर पाया, इसलिए अब Standard Sizes की तरफ जा रहे हैं।

पर्यावरण को भी होगा फायदा

Standardization से कचरा भी कम होगा। जब सभी कंपनियां तय आकारों में उत्पादन करेंगी तो:

  • Packaging variants कम होंगे
  • Production run optimize होगा
  • Excess inventory कम होगी
  • Transport efficiency बढ़ेगी
  • Packaging waste घटेगा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही चलन

कई विकसित देशों ने यह व्यवस्था पहले से लागू कर रखी है। भारत भी Global Best Practices की ओर बढ़ रहा है। यूरोप और अमेरिका में Standardized Packaging काफी समय से है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • सरकार ने Edible Oil के लिए 9 मानक आकार तय किए: 200ml से 20 लीटर तक
  • 200ml से कम के पैकेट के लिए छूट दी गई है
  • 3 महीने का Transition Period दिया गया है
  • यह नियम घरेलू और आयातित दोनों तेलों पर लागू होगा
  • Shrinkflation से उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा था
  • Legal Metrology के सिद्धांत पर आधारित है यह नियम
  • भारत 24-25 मिलियन टन Edible Oil की खपत करता है
  • आगे अन्य घरेलू सामानों पर भी ऐसे नियम आ सकते हैं

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: क्या यह नियम सभी तरह के Cooking Oil पर लागू होगा?

हां, यह नियम सभी प्रकार के Edible Oil पर लागू होगा। चाहे वह सरसों का तेल हो, सूरजमुखी का तेल, नारियल तेल, पाम ऑयल, सोयाबीन तेल या रिफाइंड ऑयल कोई भी हो। घरेलू और आयातित दोनों तरह के तेलों पर यह नियम समान रूप से लागू होगा।

Q2: कंपनियों को अपनी पैकेजिंग बदलने के लिए कितना समय मिला है?

सरकार ने सभी कंपनियों को 3 महीने का Transition Period दिया है। इस दौरान वे अपने पुराने स्टॉक को बेच सकती हैं और नए मानकों के अनुसार उत्पादन शुरू कर सकती हैं। 3 महीने बाद केवल Standard Sizes में ही तेल बिक सकेगा।

Q3: Shrinkflation क्या है और यह उपभोक्ताओं को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

Shrinkflation एक रणनीति है जिसमें कंपनियां उत्पाद की मात्रा कम कर देती हैं लेकिन कीमत वही रखती हैं। उदाहरण के लिए, पहले 1 लीटर का तेल ₹150 में मिलता था, अब 850ml का ₹150 में मिलता है। उपभोक्ता को लगता है कि कीमत नहीं बढ़ी, लेकिन वास्तव में Per Liter कीमत बढ़ गई है। इससे छुपे तरीके से महंगाई बढ़ती है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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