Punjab Stray Dogs: उद्योग एवं वाणिज्य, निवेश प्रोत्साहन, बिजली और स्थानीय निकाय मामलों के कैबिनेट मंत्री श्री संजीव अरोड़ा ने आज नगर निगम कमिश्नरों और अतिरिक्त उपायुक्तों (G&UD) को पंजाब भर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तुरंत, समन्वित और परिणाममुखी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
देखा जाए तो यह पंजाब सरकार द्वारा नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछले कुछ समय से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के काटने और हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा का मुद्दा
इस मुद्दे को गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य का मामला बताते हुए मंत्री ने कहा कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाली बड़ी चुनौती बन गई है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कुत्तों के काटने, बच्चों और बुजुर्गों पर हमले तथा रिहायशी इलाकों में घूमते आक्रामक झुंडों की घटनाओं ने लोगों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
समझने वाली बात यह है कि यह समस्या अब केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि पूरे पंजाब में फैल चुकी है। स्कूल जाने वाले बच्चे, पैदल चलने वाले और दोपहिया वाहन चालक विशेष रूप से इस खतरे से प्रभावित हैं।
रेबीज का जानलेवा खतरा
श्री अरोड़ा ने कहा कि आवारा कुत्तों का खतरा केवल सुरक्षा का ही नहीं, बल्कि एक बड़ा जनस्वास्थ्य जोखिम भी है, क्योंकि कुत्तों के काटने से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि पैदल चलने वाले, दोपहिया वाहन चालक और स्कूल जाने वाले बच्चे आवारा कुत्तों से परेशान हैं, जिससे कई बार हादसे और चोटें भी होती हैं।
चिंता का विषय यह है कि रेबीज एक ऐसी बीमारी है जिसका अगर समय पर इलाज न किया जाए तो मृत्यु निश्चित है। भारत में हर साल हजारों लोग रेबीज से मरते हैं, जिनमें से ज्यादातर मामले आवारा कुत्तों के काटने से होते हैं।
समस्या का मूल कारण
मंत्री ने बताया कि आवारा कुत्तों की अनियंत्रित आबादी बढ़ने का मुख्य कारण योजनाबद्ध नसबंदी की कमी और खराब कचरा प्रबंधन है, जिससे उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है। सार्वजनिक स्थानों पर खुले कूड़े के ढेर और खाद्य अपशिष्ट उनके फैलाव का बड़ा कारण हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अगर कचरा प्रबंधन को सुधार दिया जाए और सड़कों पर खुले में कूड़ा न फेंका जाए, तो आवारा कुत्तों के लिए भोजन की उपलब्धता कम हो जाएगी और उनकी संख्या स्वाभाविक रूप से घट सकती है।
सात सूत्री कार्ययोजना
इस समस्या के व्यापक समाधान के लिए श्री अरोड़ा ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
1. नसबंदी कार्यक्रम का विस्तार: मानवीय और वैज्ञानिक तरीके से आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने हेतु नसबंदी कार्यक्रमों का तुरंत विस्तार किया जाए।
2. टीकाकरण अभियान: रेबीज और अन्य ज़ूनोटिक बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाए जाएं।
3. डॉग शेल्टर मजबूत करना: आक्रामक या घायल पशुओं के प्रबंधन हेतु डॉग शेल्टर और होल्डिंग सुविधाओं को मजबूत किया जाए।
4. कचरा प्रबंधन सुधार: आवारा कुत्तों के भोजन स्रोत खत्म करने के लिए कचरे के समय पर निपटान और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली में सुधार किया जाए।
5. निगरानी टीमें: नियमित समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला और शहर स्तर पर निगरानी टीमें गठित की जाएं।
6. जनजागरूकता अभियान: नागरिकों को सुरक्षित व्यवहार और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं।
7. पशु कल्याण नियमों का पालन: उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी उपाय पशु कल्याण नियमों के अनुरूप सख्ती से लागू किए जाएं और साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे।
युद्ध स्तर पर कार्रवाई
श्री अरोड़ा ने निर्देश दिए कि इन पहलों को युद्ध स्तर पर लागू किया जाए ताकि ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थानीय निकायों, पशुपालन विभाग और गैर-सरकारी संगठनों के साथ मिलकर प्रभावी समन्वय बनाए रखने के लिए भी कहा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल निर्देश देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई और परिणाम दिखाने होंगे।
7 दिन में विस्तृत रिपोर्ट
इस मामले में जवाबदेही और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए मंत्री ने सभी नगर निगम कमिश्नरों और ADC (G&UD) को सात दिनों के भीतर अपने कार्यालय में विस्तृत कार्य योजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अगर गौर करें तो यह एक सख्त डेडलाइन है जो दर्शाती है कि सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है। राहत की बात यह है कि अब अधिकारियों को स्पष्ट समय सीमा मिल गई है।
सरकार की प्रतिबद्धता
सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्री अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार सुरक्षित, स्वच्छ और नागरिक-अनुकूल शहरी वातावरण बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सवाल उठता है कि क्या यह उपाय वास्तव में प्रभावी होंगे? जानकार मानते हैं कि अगर इन निर्देशों को ईमानदारी से लागू किया गया तो निश्चित रूप से समस्या में कमी आएगी।
Animal Birth Control कार्यक्रम
भारत में Animal Birth Control (ABC) कार्यक्रम पहले से चल रहा है, लेकिन इसका क्रियान्वयन ज्यादातर जगहों पर संतोषजनक नहीं रहा है। पंजाब सरकार अब इसे तेज करने जा रही है।
ABC कार्यक्रम के तहत आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता है, उनकी नसबंदी की जाती है, रेबीज का टीका लगाया जाता है और फिर उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है। नसबंदी के बाद वे प्रजनन नहीं कर पाते, जिससे आबादी नियंत्रित होती है।
NGO और सरकार का समन्वय
दिलचस्प बात यह है कि कई NGOs पशु कल्याण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सरकार को इन संगठनों के साथ मिलकर काम करना होगा। पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया भी इस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।
उम्मीद की किरण यह है कि अगर सरकार, नगर निगम और NGOs मिलकर काम करें तो यह समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है।
नागरिकों की भूमिका
हैरान करने वाली बात यह है कि कई बार लोग ही सड़कों पर खाना डालकर आवारा कुत्तों को खिलाते हैं, जो समस्या को बढ़ाता है। जनजागरूकता अभियान से लोगों को यह समझाना होगा कि दया दिखाना अच्छा है, लेकिन इसका सही तरीका क्या है।
कचरा खुले में न फेंकना, सड़कों पर खाना न फेंकना और आवारा कुत्तों को organized तरीके से भोजन देने की व्यवस्था करना जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने आवारा कुत्तों पर युद्ध स्तर पर कार्रवाई के निर्देश दिए
- नगर निगम कमिश्नरों को 7 दिन में विस्तृत कार्य योजना देनी होगी
- नसबंदी कार्यक्रम और रेबीज टीकाकरण अभियान तेज किया जाएगा
- डॉग शेल्टर और होल्डिंग सुविधाओं को मजबूत बनाया जाएगा
- कचरा प्रबंधन सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
- जिला और शहर स्तर पर निगरानी टीमें गठित होंगी
- जनजागरूकता अभियान चलाए जाएंगे
- पशु कल्याण नियमों के साथ सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी
- पशुपालन विभाग, स्थानीय निकाय और NGOs के साथ समन्वय जरूरी












