Punjab Assembly: पंजाब के 6 राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ BJP जॉइन करने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार विधानसभा में विश्वास मत ला सकती है। पार्टी के 94 MLA की ‘वफादारी टेस्ट’ के लिए फ्लोर टेस्ट कराया जा रहा है।
सरकार से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक पार्टी के पंजाब अध्यक्ष व मंत्री अमन अरोड़ा ये प्रस्ताव पेश करेंगे। मई दिवस को लेकर बुलाए विधानसभा सेशन को 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
विधानसभा में हंगामा
सीएम भगवंत मान ने कांग्रेस विधायकों को लेकर कहा कि वह सदन में मोबाइल यूज कर रहे हैं। इसको लेकर कांग्रेस और AAP के विधायकों में बहस हो गई और सदन में हंगामा हो गया।
इसके बाद कांग्रेस MLA सुखपाल खैहरा के बैठने के तरीके को लेकर विवाद हो गया। AAP के विधायकों ने कहा कि वह पैर नीचे करके बैठें। CM मान ने भी इस पर ऐतराज जताया। देखा जाए तो छोटी-छोटी बातों पर भी टकराव हो रहा है।
CM मान भावुक हुए
इसके बाद वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि विपक्ष हर बार सदन को प्रभावित करने की कोशिश करता है। स्पीकर कुलतार संधवां ने भी खैहरा को पैर पर पैर रखकर न बैठने को कहा।
इसके बाद बहस होने लगी तो CM भगवंत मान भावुक होकर कहने लगे – “स्पीकर साहब, यह गवर्नर गैलरी है। बड़े मान्योग लोग आते हैं। यहां अफसर बैठे हैं। गैलरी में पहले बताया जाता है पैर पर पैर नहीं रखना।”
समझने वाली बात यह है कि CM ने आगे कहा – “तू (खैहरा) तो मेरी बेटी के बारे में बोले जाता है। मैं पंजाबी पढ़ाऊंगा। यह बकवास करता है। इसका विधानसभा के खर्च पर इलाज करवाओ जी।”
कांग्रेस का वॉकआउट
इसी दौरान कांग्रेस MLA सुखपाल खैहरा ने CM भगवंत मान को लेकर आपत्तिजनक आरोप लगाए, जिसको लेकर हंगामा हो गया। इस पर कांग्रेस विधायकों ने सीएम के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कांग्रेस MLA वॉकआउट कर गए।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि कांग्रेस विधायक दल नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि यह सेशन सिर्फ ड्रामा है। हैरान करने वाली बात यह है कि विपक्ष पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में है।
BJP का पैरलल सेशन
इसी बीच भाजपा के पंजाब प्रधान सुनील जाखड़ ने चंडीगढ़ में दावा किया कि सेशन से पहले हुई कैबिनेट मीटिंग में 2 मंत्रियों और चीफ सेक्रेटरी को जलील किया गया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।
सरकारी प्रवक्ता या AAP का भी अभी इस पर कोई रिएक्शन नहीं आया है। भाजपा चंडीगढ़ में अपना पैरलल विधानसभा सत्र चला रही है। वहीं कांग्रेस भी चंडीगढ़ में प्रदर्शन कर रही है।
फ्लोर टेस्ट की नौबत क्यों
छह सांसदों ने पार्टी छोड़ी: पंजाब में सरकार बनने के बाद AAP ने 7 राज्यसभा सांसद बनाए थे। इनमें से उनके 6 सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह भज्जी और राजिंदर गुप्ता पार्टी छोड़ BJP में चले गए।
इसके बाद पंजाब में AAP को विधायकों की टूट का डर सता रहा है। खासकर, राघव चड्ढा और संदीप पाठक से, क्योंकि सरकार बनाने से बनने तक उनकी पार्टी में पंजाब को लेकर अहम भूमिका थी।
एकजुटता मीटिंग में कम MLA
सांसदों के पार्टी छोड़ने और विधायकों के बगावत के खतरे के बीच AAP के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने जालंधर में MLA की मीटिंग बुलाई थी। इसमें 94 में से सिर्फ 65 ही MLA आए।
हालांकि 117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में बहुमत का आंकड़ा 59 सीटों का है। ऐसे में सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं है लेकिन सरकार फ्लोर टेस्ट के जरिए विधायकों की वफादारी का टेस्ट कर सकती है।
चुनाव से पहले विरोधियों को जवाब
पंजाब में अगले साल, 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर विधायकों की टूट हुई तो फिर AAP सरकार पर बहुमत साबित करने का दबाव बन सकता है। विरोधी पार्टियां अविश्वास प्रस्ताव ला सकती हैं।
अब पहले ही फ्लोर टेस्ट के जरिए AAP उन्हें जवाब दे सकती है कि वह बहुमत साबित कर चुके हैं। ऐसे में ऐन चुनाव के मौके उन्हें फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया में नहीं उलझना पड़ेगा।
चिंता का विषय यह है कि पंजाब कांग्रेस पहले ही दावा कर रही है कि करीब 50 से 65 MLA पार्टी छोड़ सकते हैं। बस भाजपा बंगाल चुनाव के रिजल्ट का इंतजार कर रही है।
मजदूर दिवस पर विशेष सत्र
दिलचस्प बात यह है कि यह सत्र मई दिवस (मजदूर दिवस) के अवसर पर बुलाया गया था। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध ने मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव पेश किया।
लेकिन राजनीतिक हंगामे में मजदूरों के मुद्दे पीछे रह गए। विपक्ष का आरोप है कि यह सत्र सिर्फ AAP की राजनीतिक जरूरतों के लिए बुलाया गया है।
कांग्रेस की मांगें
विपक्षी दल कांग्रेस के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि रजिस्टर्ड मजदूरों को पैसे दिए जाएं। साढ़े 7 लाख सरकारी मुलाजिमों का DA बकाया है, उन्हें दे दो। उम्मीद की किरण यह है कि बाजवा ने सरकार को पूरा सहयोग देने का भरोसा भी दिया।
फ्लोर टेस्ट क्या होता है
अगर विपक्ष सरकार के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ लाता है और सरकार उसे जीतकर अपना बहुमत साबित कर देती है, तो विधानसभा के नियमों के अनुसार विपक्ष अगले 6 महीने तक दोबारा ऐसा प्रस्ताव नहीं ला सकता।
वहीं सरकार अगर खुद विश्वास प्रस्ताव लाती है और जीत जाती है, तो सामान्य परिस्थितियों में छह महीने तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP के 6 राज्यसभा सांसद (राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत) पार्टी छोड़ BJP में गए
- पंजाब विधानसभा में AAP सरकार फ्लोर टेस्ट कराने की तैयारी में
- CM भगवंत मान कांग्रेस MLA सुखपाल खैहरा से भावुक होकर भड़के
- विधानसभा सत्र में हंगामा, कांग्रेस ने वॉकआउट किया
- 94 MLA में से सिर्फ 65 एकजुटता मीटिंग में पहुंचे (बहुमत 59)
- BJP चंडीगढ़ में पैरलल सेशन चला रही है
- 2027 में विधानसभा चुनाव से पहले AAP वफादारी टेस्ट करना चाहती है
- मई दिवस पर विशेष सत्र में मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव पेश हुआ













