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The News Air - Breaking News - Gen Z Indians Are Fatter: भारत के 4.1 करोड़ बच्चे Overweight या Obese, पतले दिखने वाले बच्चों का भी निकला पेट, Visceral Fat का खतरा

Gen Z Indians Are Fatter: भारत के 4.1 करोड़ बच्चे Overweight या Obese, पतले दिखने वाले बच्चों का भी निकला पेट, Visceral Fat का खतरा

5 से 19 साल के बच्चों में मोटापा दोगुना बढ़ा, India दुनिया में दूसरे नंबर पर, पेट का मोटापा सामान्य मोटापे से दोगुना, 10 साल की उम्र में ही Fatty Liver की समस्या

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
रविवार, 9 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, काम की बातें, लाइफस्टाइल
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Gen Z Indians Are Fatter
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Gen Z Obesity India: एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है—दुनिया भर में 5 से 19 साल के बच्चों में करीब 20.7% बच्चे या तो overweight हैं या obese हैं। यानी हर पांच में से एक बच्चा मोटापे का शिकार है। देखा जाए तो 2010 में यह संख्या 14.6% थी, यानी मात्र 15 साल में यह आंकड़ा लगभग दो-तिहाई बढ़ चुका है।

2025 में दुनिया भर में ऐसे बच्चों की संख्या 41 करोड़ 90 लाख है और 2040 तक यह संख्या 50 करोड़ 70 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यानी उस वक्त हर चार में से एक बच्चा या तो overweight होगा या obese होगा।

हैरान करने वाली बात यह है कि पूरी दुनिया ने 2025 तक बच्चों में मोटापा बढ़ने से रोकने का लक्ष्य रखा था और वह पूरी तरह फेल हो चुका है। अब नया लक्ष्य 2030 का है और ज्यादातर देश इस मापदंड पर भी लगभग पीछे ही चल रहे हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- Canada Advisory for Indians: टोरांटो कौंसुलेट की चेतावनी, फर्जी कॉलों से रहें सावधान


India दूसरे नंबर पर: 4.1 करोड़ बच्चे Overweight

अगर आप country-by-country data देखें तो दुनिया के 200 मिलियन से ज्यादा school-going बच्चे जिनका BMI ज्यादा है, वे सिर्फ 10 देशों में concentrated हैं।

देशOverweight/Obese बच्चों की संख्याRank
China6.2 करोड़1st
India4.1 करोड़2nd
अन्य 8 देशशेष3rd-10th

उस लिस्ट में पहला नंबर आता है China का जहां 6 करोड़ 20 लाख बच्चे या तो overweight हैं या obese हैं। और दूसरे नंबर पर आता है हमारा देश यानी India जहां 4 करोड़ 10 लाख बच्चे overweight या obese हैं।


उम्र के हिसाब से Breakdown: असली तस्वीर और भयावह

अब India के data को उम्र के हिसाब से तोड़कर देखते हैं क्योंकि यहां हमको बहुत सारे facts सामने आएंगे:

  • 5 से 9 साल के बच्चे: करीब 1 करोड़ 50 लाख बच्चों में obesity है
  • 10 से 19 साल के बच्चे: करीब 2 करोड़ 60 लाख बच्चे obese हैं
  • इनमें से करीब 1 करोड़ 40 लाख बच्चे medically obese category में आते हैं

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ overweight नहीं है—इनका वजन medically भी unfit है।

🔍 यह भी पढ़ें- Russian Army Indians: 217 भारतीय रूसी सेना में शामिल, 49 की मौत, 139 को वापस लाया गया


सबसे खतरनाक बात: पतले दिखने वाले बच्चों का पेट निकला हुआ

और हमारा देश वो देश है जहां हम जानते हैं कि malnutrition के भी शिकार हैं लोग। यानी एक ही देश में एक ही समय पर दो बिल्कुल उल्टी समस्याएं हैं—एक तरफ बच्चे मोटापे का शिकार हो रहे हैं और दूसरी तरफ malnutrition भी साथ-साथ ही चल रहा है।

अब इन numbers को एक पल के लिए रोककर दूसरी चीज पर ध्यान दीजिए क्योंकि वहां असली कहानी शुरू होती है।

एक national survey में study किए गए 68,261 बच्चों का data लिया गया (उम्र 5 से 19 साल)। इसका नतीजा चौंकाने वाला था:

  • General obesity (पूरे शरीर का मोटापा): मात्र 2.9% बच्चों में
  • Central obesity (पेट के आसपास का मोटापा): 6.1% बच्चों में

यानी पेट का मोटापा पूरे शरीर के मोटापे से लगभग दोगुना ज्यादा निकला!


39% बच्चों का पेट निकला, पर Weight Normal

एक दूसरी study North India के बच्चों पर की गई। इसमें पाया गया कि जिन बच्चों के पेट में मोटापा था, उनमें से 39.3% का BMI के हिसाब से actually obese नहीं थे।

यानी हर तीन में से एक से ज्यादा बच्चे का weighing machine पर number बिल्कुल normal आ रहा था, लेकिन उसका पेट तब भी निकला हुआ था।

Punjab में यह संख्या और भी ज्यादा थी। 10 से 16 साल के बच्चों में 1,408 बच्चों पर की गई study में पता चला:

  • BMI से मोटापे का number: 12.2%
  • पेट का मोटापा: 32.4%

समझने वाली बात यह है कि बच्चे पतले भी हैं और भारी भी हैं। ये दोनों चीज एक साथ कैसे हो सकती है? वो दिखते दुबले हैं लेकिन उनका पेट निकला हुआ है। आखिर ऐसा कैसे हो सकता है?


Thin but Fat Phenotype: दो तरह की Fat होती है शरीर में

हमारे शरीर में दो तरह की fats होती हैं:

1. Subcutaneous Fat (चमड़ी के नीचे की चर्बी):

  • यह skin के ठीक नीचे होती है
  • हाथ, पैर, जांघों में होती है
  • यह वो चर्बी है जो आपको नजर आती है
  • Relatively कम खतरनाक होती है

2. Visceral Fat (आंतरिक अंगों के आसपास की चर्बी):

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रविवार, 9 अगस्त 2026
  • यह पेट के अंदर organs के आसपास जमा होती है
  • Liver, pancreas, intestines के पास
  • यह बाहर से नजर नहीं आती
  • बेहद खतरनाक है

दिलचस्प बात यह है कि visceral fat एक निष्क्रिय चीज नहीं है—यह एक active organ की तरह काम करती है। यह लगातार ऐसे chemicals छोड़ती है जो शरीर के अंदर inflammation को बढ़ाते हैं और insulin के काम में रुकावट डालते हैं।


South Asian Body Type: हमारी खास बनावट

South Asian bodies की एक खास बनावट है। हमारे शरीर में उतने ही weight पर:

  • Visceral fat का ratio ज्यादा आता है
  • Muscles का ratio कम आता है

यानी आपका weight बाकी किसी population के जैसा भी दिखेगा, लेकिन आपका visceral fat ज्यादा होगा और आपके अंदर muscle कम होगा।

इसको research में कहते हैं “Thin-Fat Phenotype”। इसलिए एक Indian बच्चे का BMI 19 हो सकता है (जो बिल्कुल normal है) और उसी बच्चे के अंदर पेट में खतरनाक visceral fat जमा हो रहा होगा।


सबसे चौंकाने वाली Study: 10 साल के बच्चों में Fatty Liver

Haryana के Faridabad में 13 private schools के 1,961 बच्चों पर study हुई (उम्र 5 से 10 साल)। उन सबका ultrasound किया गया और results जो आए वो यह थे:

  • 22.4% बच्चों में fatty liver मिला
  • Overweight बच्चों में: 45.6%
  • Normal weight वाले बच्चों में भी: 18.9%

यानी पांच में से लगभग एक normal दिखने वाले बच्चे का liver 10 साल की उम्र से पहले ही fat जमा करना शुरू कर देता है। और उनके माता-पिता को इसका कोई अंदाजा तक नहीं था क्योंकि बच्चे का weight तो देखने में ठीक-ठाक दिख रहा था।

चिंता का विषय यह है कि fatty liver में शुरुआत में आपको कोई symptoms भी नजर नहीं आते। आपके पेट में दर्द भी नहीं होता।


पांच मुख्य कारण: पिछले 25-30 साल में क्या बदला?

अब असली सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और यह पीढ़ी पहली ऐसी पीढ़ी क्यों बन गई है जिसके साथ यह problem है? पांच मुख्य कारण हैं जो पिछले 25 से 30 साल में एक साथ change हो रहे हैं:

1. Ultra-Processed Food का बाजार:

  • पहले: घर में बना खाना, भुने चने, मौसमी फल
  • आज: Chips, biscuits, instant noodles, energy drinks
  • विशेषता: कैलोरी बहुत ज्यादा, nutrition बहुत कम
  • ऐसे बनाई जाती हैं कि पेट भरने पर भी हाथ नहीं रुकता

2. Physical Activity में भारी गिरावट:

  • India में 11 से 17 साल के 74% बच्चे WHO की physical activity recommendations को meet नहीं कर पाते
  • शहरों में खेलने के मैदान लगभग खत्म
  • स्कूल के बाद tuition, फिर screen time (laptop, iPad, mobile)
  • बचपन चार दीवारी के अंदर सिमट गया है

3. School में क्या खाना मिलता है:

  • India में सिर्फ 35.5% school-going बच्चों को regulated school meal मिलता है
  • बाकी बच्चे canteen या बाहर की ठेलों से सबसे सस्ता और attractive खाना खरीदते हैं

4. शुरुआत के 1000 दिन (First 1000 Days):

  • India में 32.6% बच्चों को sub-optimal breastfeeding मिलती है
  • शुरुआती पोषण बच्चे के metabolism को लंबे समय के लिए set कर देता है

5. माँ की खुद की सेहत:

  • India में 15 से 50 साल की 13.4% औरतों का BMI ज्यादा है
  • 4.2% को Type 2 Diabetes है
  • यह दोनों चीजें बच्चे के लिए खतरा बढ़ा देती हैं
  • यह जंजीर गर्भ में ही शुरू हो जाती है

Malnutrition और Obesity: एक ही सिक्के के दो पहलू

याद कीजिए India में आज भी stunting (उम्र के हिसाब से छोटी लंबाई) करीब 35% बच्चों में है। यानी कुपोषण अभी तक हमारे बच्चों से गया नहीं है।

तो एक ही देश में कुपोषण और मोटापा दोनों एक साथ चल रहे हैं। ये आखिर कैसे चल रहे हैं?

इसका जवाब है—ये दो अलग-अलग समस्याएं नहीं हैं। ये एक ही समस्या के दो चेहरे हैं। क्योंकि दोनों की जड़ एक ही है:

कम nutrition लेकिन calories से भरा खाना।

एक बच्चा जिसे सिर्फ चावल और चीनी मिले—वो दो चीजें एक साथ हो सकती हैं:

  • वो calorie से भरा होगा
  • Protein, vitamins, iron सब कम होंगे
  • उसका पेट तो भर जाएगा
  • लेकिन उसका शरीर कभी develop नहीं होगा

इसलिए एक ही घर में, एक ही plate में एक बच्चा कमजोर भी हो सकता है और उसका पेट भी निकला हुआ हो सकता है।


2040 तक के Projections: भयावह तस्वीर

World Obesity Atlas ने साफ अनुमान दिए हैं कि 2040 तक India में:

बीमारी2019 के आंकड़े2040 का अनुमान
BMI से जुड़ा Hypertension29.5 लाख42.1 लाख
Hyperglycemia (बढ़ी हुई sugar)–19.1 लाख बच्चे
Fatty Liver–1 करोड़ 15 लाख बच्चे

हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया भर में अभी भी 5 करोड़ 70 लाख से ज्यादा बच्चों में लंबी बीमारियों के शुरुआती संकेत दिख चुके हैं।

Type 2 Diabetes को कभी “Adult Onset Diabetes” कहा जाता था क्योंकि वह बड़ों को होती थी। आज वह नाम इस्तेमाल होना बंद हो गया है क्योंकि अब वह बच्चों में भी मिलने लगी है।


Economic Impact: GDP का 1.5% नुकसान

इसका economy पर क्या असर पड़ता है?

Atlas के मुताबिक 2019 में India को मोटापे और overweight की वजह से करीब 28.9 billion dollars का नुकसान हुआ—यानी हमारी GDP का लगभग 1.02%।

अगर कुछ नहीं किया गया तो 2030 तक यह figure बढ़कर 1.5% हो जाएगा।


Solution क्या है? Policy Level पर जरूरी कदम

World Obesity Federation ने खुद कुछ चीजें साफ कर दी हैं:

  1. Sugary drinks पर tax होना चाहिए
  2. बच्चों को target करने वाली advertising पर रोक होनी चाहिए (खासकर digital platforms पर)
  3. School के खाने के standards बेहतर करने चाहिए
  4. Breastfeeding को बढ़ावा देना चाहिए
  5. इन सबको primary health system से direct जोड़ देना चाहिए

India में इसकी शुरुआत अभी तक हुई भी नहीं है। FSSAI जो हमारा food regulatory body है, वो Front-of-Pack Labeling के प्रयास करता है। Eat Right India और Fit India Movement भी हैं। School में junk food ban वाला पुराना नियम भी है।

लेकिन सबसे जरूरी बदलाव दूसरे स्तर पर आना जरूरी है—हमारी सोच में।


माता-पिता को क्या पता होना चाहिए? तीन जरूरी बातें

1. Weighing Machine पूरा सच नहीं बताती:

  • 39% से ज्यादा बच्चे जिनका पेट निकला था, उनका BMI normal था
  • इसलिए उनकी कमर का नाप (waist circumference) भी उतना ही जरूरी है
  • आसान नियम: बच्चे की कमर उसकी लंबाई से आधे से कम होनी चाहिए

2. “गोलमटोल बच्चा = सेहतमंद बच्चा” वाली सोच छोड़ें:

  • हमारे घरों में आज भी भरे हुए बच्चे को “खाते-पीते घर का बच्चा” कहा जाता है
  • यह पुरानी सोच है जो उस दौर की है जब असली खतरा भूख था
  • आज का खतरा empty calories है

3. असली Target Weight नहीं, Movement है:

  • रोजाना एक घंटा बाहर खेलना वही चीज ठीक करता है
  • यह muscles बनाता है, insulin को better करता है, visceral fat को कम करता है
  • किसी बच्चे का weight उसके सामने चर्चा का विषय बनाना नुकसान पहुंचाता है, फायदा नहीं
  • बच्चों के साथ यह बात सेहत की भाषा में होनी चाहिए, शक्ल की भाषा में नहीं

असली संदेश: खतरा आईने में नजर नहीं आ रहा

एक पीढ़ी जो यह कहकर बड़ी हुई कि “हमारे जमाने में तो रोटी-सब्जी ही मिलती थी”—उसी पीढ़ी के बच्चे आज India के इतिहास की पहली ऐसी पीढ़ी है जिनके शरीर में मोटापे से जुड़ी बीमारियां उनके माता-पिता से कम उम्र में onset हो रही हैं।

और इसमें उन बच्चों की कोई गलती भी नहीं है। उन्होंने:

  • अपना खाना नहीं चुना
  • अपना शरीर नहीं बनाया
  • अपना मैदान नहीं बेचा

वे बस उस दुनिया में बड़े हो रहे हैं जो हमने उनके लिए बनाई है—जहां खाना सबसे सस्ता और सबसे पास है, और खेलना सबसे महंगा और दूर है।

इसलिए इस खबर का असली संदेश यह नहीं है कि अपने बच्चों को तोलना शुरू कर दीजिए। असली संदेश यह है कि अपने बच्चों को सिर्फ देखकर यह मत मान लीजिए कि वे ठीक हैं।

क्योंकि जो सबसे बड़ा खतरा है, वो आईने में आपको नजर नहीं आ रहा है। वो उस बच्चे के liver में, उसके pancreas में और उसके खून में चुपचाप develop हो रहा है। और वह आज से 20 साल बाद उसको दिखना शुरू होगा—उस वक्त तक वो बच्चा खुद एक माता-पिता बन चुका होगा।


मुख्य बातें (Key Points)

  • India में 4.1 करोड़ बच्चे overweight या obese हैं, दुनिया में दूसरे नंबर पर
  • पेट का मोटापा (6.1%) सामान्य मोटापे (2.9%) से दोगुना, 39% बच्चों का पेट निकला पर BMI normal
  • 10 साल की उम्र में 22.4% बच्चों में fatty liver, normal weight वालों में भी 18.9%
  • Visceral fat खतरनाक है क्योंकि यह inflammation और insulin resistance बढ़ाती है
  • 2040 तक India में 1.15 करोड़ बच्चों में fatty liver और 42.1 लाख में hypertension का अनुमान

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Thin-Fat Phenotype क्या है और यह South Asians में ज्यादा क्यों है?

Thin-Fat Phenotype का मतलब है कि बाहर से पतले दिखने वाले व्यक्ति के शरीर में visceral fat (आंतरिक अंगों के आसपास की चर्बी) ज्यादा हो। South Asian body type में muscle mass कम और visceral fat ratio ज्यादा होता है, इसलिए BMI normal होने पर भी health risks बढ़ जाते हैं।

Q2: बच्चे के पेट का मोटापा कैसे check करें?

सबसे आसान तरीका waist circumference नापना है। बच्चे की कमर उसकी लंबाई से आधे से कम होनी चाहिए। अगर इससे ज्यादा है तो pediatrician से consult करें। Ultrasound से fatty liver भी detect हो सकता है।

Q3: Ultra-processed foods से बच्चों को कैसे दूर रखें?

घर पर healthy snacks रखें (fruits, nuts, homemade snacks), packaged foods की जगह home-cooked meals को promote करें, बच्चों को nutrition education दें, और सबसे जरूरी—खुद example set करें। Advertising के प्रभाव को कम करने के लिए screen time limit करें।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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