Russian Army Indians: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि चल रही रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कुल 217 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों (फौज) में शामिल हुए थे, जिनमें से 49 भारतीयों की जान इस संघर्ष में चली गई है। और बस यहीं से शुरू हुई एक ऐसी त्रासदी जिसने मोटी कमाई के सपने देखने वाले भारतीय युवाओं और उनके परिवारों को तबाह कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एक Status Report में केंद्र ने कहा कि भारत सरकार द्वारा रूसी फेडरेशन के साथ लगातार किए गए कूटनीतिक प्रयासों के चलते 139 भारतीय नागरिकों को रूसी फौज में शामिल होने के लिए किए गए अनुबंधों (Contracts) से मुक्त करवा लिया गया है।
समझने वाली बात यह है कि यह सिर्फ संख्याएं नहीं हैं – ये असली इंसान हैं, परिवार हैं, सपने हैं जो युद्ध की भट्टी में जलकर राख हो गए।
सुप्रीम कोर्ट को क्या-क्या जानकारी दी गई?
रिपोर्ट में केंद्र ने विस्तार से बताया:
मृतकों और लापता की संख्या:
- 49 भारतीय नागरिकों की मौत की रिपोर्ट है
- रूसी पक्ष ने 6 भारतीयों के लापता होने की पुष्टि की
- 23 व्यक्तियों की स्थिति का अभी तक पता नहीं चल सका
वापस लाए गए:
- 139 भारतीयों को अनुबंध से मुक्त करवाया गया
- भारतीय दूतावास लगातार रूसी अधिकारियों से संपर्क में है
| स्थिति | संख्या | प्रतिशत |
|---|---|---|
| कुल शामिल हुए | 217 | 100% |
| मुक्त करवाए गए | 139 | 64% |
| मृतक | 49 | 23% |
| लापता (पुष्ट) | 6 | 3% |
| अज्ञात स्थिति | 23 | 10% |
दिलचस्प बात यह है कि विदेश मंत्रालय के अनुसार, लगभग 217 भारतीय नागरिकों के रूसी फौज में शामिल होने की रिपोर्ट थी। मास्को स्थित भारतीय दूतावास रूसी अधिकारियों के साथ इस मामले पर लगातार संपर्क में है।
DNA सैंपल भेजने की प्रक्रिया
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वरिया भाटी ने शुक्रवार को Chief Justice of India Soorya Kant की अगुवाई वाले बेंच को बताया कि लापता भारतीयों की खोज और मृत शरीरों की पहचान की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए:
- 21 व्यक्तियों के निकटतम परिवार के सदस्यों के DNA सैंपल एकत्र किए गए
- ये सैंपल रूसी अधिकारियों को भेज दिए गए हैं
- पहचान प्रक्रिया को तेज करने के लिए यह कदम उठाया गया
केंद्र ने अदालत को बताया कि ऐसे सभी मामलों को पूरी प्राथमिकता दे कर रूसी अधिकारियों के साथ लगातार पैरवी की जा रही है और प्रभावित परिवारों को भी हर अपडेट के बारे में सूचित किया जा रहा है।
शवों की वापसी और खर्च
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दूतावास ने परिवारों की सहमति से 8 मामलों में मृत शरीरों को भारत लाने में मदद की है। 1 और व्यक्ति का शव वापस लाने के लिए जरूरी कार्रवाई चल रही है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस सारे काम का खर्चा Indian Community Welfare Fund से किया गया है। यानी सरकार ने इन परिवारों पर वित्तीय बोझ नहीं डाला।
26 भारतीयों की याचिका
यह स्टेटस रिपोर्ट उस पिटीशन के जवाब में दायर की गई है जिसमें केंद्र सरकार को रूस में कथित तौर पर बंधक बनाए गए और यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ने के लिए मजबूर किए गए 26 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
केंद्र ने इन 26 व्यक्तियों के बारे में स्पष्ट किया:
- 14 मामले मौत से संबंधित हैं
- रूसी अधिकारियों ने 11 व्यक्तियों को “युद्ध के दौरान लापता” (Missing in Action) या परिवारों से संपर्क टूटने की श्रेणी में रखा है
- 1 मामला छेड़छाड़ के आरोपों के तहत 8 साल की कैद की सजा से संबंधित है
चिंता का विषय यह है कि पिटीशनर्स के वकील ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का मुद्दा भी उठाया।
कैसे फंसे भारतीय युवा?
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है:
केंद्र ने कहा, “ऐसा लगता है कि कुछ भारतीय नागरिकों ने मोटी कमाई के लालच में आकर खुद रूसी फौज में शामिल होने के अनुबंध साइन किए थे।”
उन्हें क्या लालच दिया गया था?
| लालच | राशि/विवरण |
|---|---|
| साइनिंग बोनस | लगभग $5,000 (₹4-4.5 लाख) |
| मासिक वेतन | लगभग $2,500 (₹2-2.25 लाख) |
| रूसी नागरिकता | वादा किया गया |
| सामाजिक लाभ | विभिन्न सुविधाएं |
| मृत्यु पर मुआवजा | लगभग $1,68,000 (₹1.4 करोड़) |
समझने वाली बात यह है कि भारत में जहां औसत मासिक वेतन ₹30,000-40,000 है, वहां $2,500 (₹2 लाख+) मासिक और ₹4 लाख का तत्काल बोनस – यह गरीब और बेरोजगार युवाओं के लिए एक अप्रतिरोध्य प्रलोभन था।
लेकिन यह सवाल उठता है – क्या उन्हें बताया गया था कि वे सक्रिय युद्ध क्षेत्र में भेजे जाएंगे? क्या उन्हें मौत के खतरे की पूरी जानकारी थी?
कैसे हुई भर्ती?
सूत्रों के अनुसार, इन युवाओं को विभिन्न तरीकों से भर्ती किया गया:
- फर्जी एजेंट्स: जॉब कंसलटेंसी के नाम पर रूस में “सुरक्षा कर्मी” की नौकरी का वादा
- सोशल मीडिया विज्ञापन: अच्छी सैलरी के साथ रूस में काम के झूठे विज्ञापन
- विजिटर वीजा पर बुलाना: पहले टूरिस्ट वीजा पर बुलाना, फिर सैन्य अनुबंध पर हस्ताक्षर करवाना
- भाषा की बाधा: रूसी भाषा में अनुबंध, जिसे भारतीय समझ नहीं पाए
राहत की बात यह है कि भारत सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप किया।
भारत सरकार के प्रयास
केंद्र ने बताया कि “जैसे ही किसी भारतीय के रूसी फौज में शामिल होने की जानकारी मिलती है, दूतावास तुरंत रूसी अधिकारियों के पास सुरक्षा और जल्दी रिहाई के साथ-साथ वापसी सुनिश्चित करने के लिए मुद्दा उठाता है।”
दूतावास की भूमिका:
- 139 लोगों को सफलतापूर्वक मुक्त करवाया
- 8 शवों को भारत लाने में सहायता की
- 21 परिवारों के DNA सैंपल एकत्र कर रूस भेजे
- लगातार रूसी अधिकारियों से संपर्क
दिलचस्प बात यह है कि भारत-रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी के बावजूद, यह मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों में एक संवेदनशील बिंदु बन गया है।
मुआवजे का मुद्दा
पिटीशनर्स के वकील ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है। सवाल उठते हैं:
- क्या केंद्र सरकार मृतकों के परिवारों को मुआवजा देगी?
- रूसी सरकार ने जो $1,68,000 का मुआवजा वादा किया था, वह मिला या नहीं?
- अगर युवाओं ने “स्वेच्छा से” अनुबंध साइन किए, तो क्या भारत सरकार जिम्मेदार है?
ये जटिल कानूनी और नैतिक सवाल हैं जिन पर अदालत को फैसला करना होगा।
भविष्य में कैसे रोकें?
यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए:
- जागरूकता अभियान: विदेश में नौकरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के बारे में
- एजेंटों की जांच: विदेशी नौकरी देने वाले एजेंटों का सत्यापन
- एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग: संदिग्ध मामलों में यात्रियों से पूछताछ
- कानूनी कार्रवाई: भर्ती करने वाले एजेंटों के खिलाफ सख्त कदम
- द्विपक्षीय समझौता: रूस के साथ स्पष्ट समझौता कि भारतीयों को सेना में नहीं लिया जाएगा
मुख्य बातें (Key Points)
- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 217 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए
- इनमें से 49 की मौत, 6 लापता (पुष्ट), 23 की स्थिति अज्ञात
- 139 भारतीयों को अनुबंध से मुक्त करवाया गया
- 21 परिवारों के DNA सैंपल रूस भेजे गए पहचान के लिए
- 8 शवों को भारत लाया गया, खर्च Indian Community Welfare Fund से
- युवाओं को $5,000 बोनस, $2,500 मासिक वेतन और $1,68,000 मृत्यु मुआवजे का लालच दिया गया
- मोटी कमाई के चक्कर में युवाओं ने खुद अनुबंध साइन किए
- भारतीय दूतावास लगातार रूसी अधिकारियों से संपर्क में
- 26 भारतीयों की याचिका के जवाब में यह रिपोर्ट दाखिल की गई













