Mohali Land Scam ED की जांच ने अब रफ्तार पकड़ ली है। Enforcement Directorate (ED) ने खड़ (Kharar) अदालत तक पहुंचकर मुल्लांपुर थाने के SHO को निर्देश देने की मांग की है कि Altus Space Builders Private Limited और इसके डायरेक्टरों समेत पांच निजी पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए। यह मामला सनटेक सिटी प्रोजेक्ट में Change of Land Use (CLU) की मंजूरी लेने के लिए किसानों के जाली सहमति पत्र तैयार करने और उनके साथ ₹348 करोड़ की धोखाधड़ी से जुड़ा है।
देखा जाए तो यह कदम उस समय उठाया गया है जब 10 सितंबर को मोहाली के SSP, ED के समन पर पेश नहीं हुए। केंद्रीय एजेंसी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत यह पटीशन दायर की है। अदालत ने अब संबंधित SHO से रिपोर्ट मांग ली है।
समझने वाली बात है कि सूत्रों के अनुसार ED का मुख्य निशाना आम आदमी पार्टी का एक सीनियर नेता है। AAP ने इस कार्रवाई को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बदलाखोरी की राजनीति करार दिया है।
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कौन हैं आरोपी? किन पर लगे हैं आरोप?
ED ने जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है उनमें शामिल हैं:
- मेसर्स Altus Space Builders Private Limited
- इसके मैनेजिंग डायरेक्टर हरप्रीत सिंह
- महिंदर सिंह
- मेसर्स धीर कंस्ट्रक्शन
- गौरव धीर
दिलचस्प बात यह है कि सूत्रों के अनुसार ED की असली नजर किसी बड़े राजनीतिक नाम पर है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी राजनेता का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन चर्चा है कि आम आदमी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता इस मामले में घिर सकते हैं।
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₹348 करोड़ की हेराफेरी का खेल
ED की जांच में अब तक ₹348 करोड़ की हेराफेरी का पता चला है। यह रकम किसानों की जमीनों का गलत इस्तेमाल करके, उनके जाली दस्तावेज बनाकर और CLU की अवैध मंजूरी लेकर बनाई गई।
कहने का मतलब साफ है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है। यह व्यवस्थित तरीके से की गई धोखाधड़ी है जिसमें रियल एस्टेट कंपनियां, बिल्डर्स, और संभवतः कुछ सरकारी अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
क्या है Change of Land Use (CLU) घोटाला?
CLU यानी भूमि उपयोग परिवर्तन एक कानूनी प्रक्रिया है। इसके तहत कृषि भूमि को व्यावसायिक या आवासीय उपयोग के लिए बदला जाता है। इसके लिए सरकारी मंजूरी जरूरी होती है।
इस मामले में आरोप है कि Altus Builders ने न्यू चंडीगढ़ में सनटेक सिटी प्रोजेक्ट के लिए CLU मंजूरी लेने के दौरान किसानों के जाली सहमति पत्र तैयार किए। किसानों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनकी जमीन का उपयोग बदला जा रहा है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि CLU की मंजूरी मिलने के बाद जमीन की कीमत कई गुना बढ़ जाती है। कृषि भूमि की कीमत लाखों में होती है जबकि कमर्शियल जमीन करोड़ों में बिकती है। इसी अंतर को भुनाने के लिए यह घोटाला किया गया।
ED की बार-बार चिट्ठियां, पुलिस ने नहीं दिया जवाब
ED ने जुलाई और अगस्त महीने के दौरान मोहाली पुलिस को कई पत्र लिखकर नए मामले दर्ज करने की मांग की थी। इसके अलावा सनटेक प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी लेने के लिए मोहाली के SSP को PMLA (Prevention of Money Laundering Act) की धारा 54 के तहत समन भी भेजे गए।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने ED की किसी भी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया। 10 सितंबर को जब SSP को ED के सामने पेश होना था तो वे नहीं आए।
यह घटना गंभीर सवाल उठाती है। क्या स्थानीय पुलिस केंद्रीय एजेंसी के साथ सहयोग नहीं कर रही? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव है? या फिर कुछ और?
अगर गौर करें तो पुलिस की यह अनदेखी केंद्र और राज्य के बीच की खींचतान को भी दर्शाती है। AAP की सरकार है पंजाब में जबकि ED केंद्र सरकार की एजेंसी है।
केस का पिछोकड़: नवंबर 2022 की FIR से शुरू हुआ मामला
यह पूरा मामला नवंबर 2022 में मुल्लांपुर थाने में दर्ज एक FIR से जुड़ा है। तब शिकायत की गई थी कि सनटेक सिटी प्रोजेक्ट के लिए CLU की मंजूरी लेने के दौरान किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उनकी सहमति के बिना, उनके हस्ताक्षर जाली बनाकर, दस्तावेज तैयार किए गए और सरकार से CLU की मंजूरी ले ली गई। इसके बाद उनकी जमीन का कमर्शियल इस्तेमाल शुरू हो गया।
ED ने इस FIR के आधार पर PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। जांच में अब तक ₹348 करोड़ की हेराफेरी का पता चला है।
समझने वाली बात है कि यह सिर्फ जमीन का घोटाला नहीं है बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग भी है। धोखाधड़ी से कमाया गया पैसा विभिन्न तरीकों से सफेद किया गया।
AAP का आरोप: चुनाव से पहले बदलाखोरी की राजनीति
आम आदमी पार्टी ने ED की इस कार्रवाई को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बदलाखोरी की राजनीति करार दिया है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं तो केंद्रीय एजेंसियां विपक्षी दलों को निशाना बनाना शुरू कर देती हैं।
AAP के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह राजनीतिक प्रतिशोध है। पंजाब में AAP की सरकार है और दिल्ली में भी हमारी सरकार थी। केंद्र सरकार हमें तोड़ने की कोशिश कर रही है।”
लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि AAP खुद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़कर सत्ता में आई थी। अगर पार्टी के नेता ही ऐसे घोटालों में शामिल होंगे तो यह पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि AAP ने अभी तक यह नहीं कहा कि आरोप गलत हैं। वे सिर्फ यह कह रहे हैं कि यह राजनीतिक प्रतिशोध है। यानी कहीं न कहीं वे भी स्वीकार कर रहे हैं कि मामला है तो सही।
कोर्ट ने SHO से मांगी रिपोर्ट
खड़ अदालत ने ED की पटीशन पर सुनवाई करते हुए संबंधित SHO से रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने पूछा है कि ED ने जो पत्र लिखे थे उनका जवाब क्यों नहीं दिया गया? और FIR क्यों नहीं दर्ज की गई?
अब SHO को अदालत में स्पष्टीकरण देना होगा। अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कोर्ट खुद FIR दर्ज करने के आदेश दे सकती है।
कहने का मतलब साफ है कि अब मामला कानूनी दांव-पेच से आगे बढ़ चुका है। अदालत ने सीधे हस्तक्षेप किया है जो दर्शाता है कि मामला गंभीर है।
PMLA की धारा 54 क्या है?
PMLA (Prevention of Money Laundering Act) भारत में मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए बनाया गया कानून है। इसकी धारा 54 के तहत ED किसी भी व्यक्ति को सम्मन भेजकर जांच के लिए बुला सकती है।
इस धारा के तहत बुलाए गए व्यक्ति को पेश होना अनिवार्य है। अगर कोई बिना वैध कारण के पेश नहीं होता तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
मोहाली के SSP को भी इसी धारा के तहत बुलाया गया था। उनका पेश न होना कानूनी रूप से गलत है। इसीलिए ED ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सनटेक सिटी प्रोजेक्ट क्या है?
सनटेक सिटी न्यू चंडीगढ़ (मोहाली) में एक बड़ा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट है। इसमें रिहायशी फ्लैट्स, कमर्शियल स्पेस, मॉल्स, और ऑफिस स्पेस बनाए जाने की योजना थी।
इस प्रोजेक्ट के लिए Altus Builders ने बड़ी मात्रा में कृषि भूमि खरीदी और फिर CLU के लिए आवेदन किया। आरोप है कि CLU की मंजूरी धोखाधड़ी से ली गई।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर CLU नहीं मिलती तो यह प्रोजेक्ट कानूनी रूप से संभव नहीं था। इसलिए बिल्डर्स ने किसी भी तरीके से CLU हासिल करने की कोशिश की, भले ही उसके लिए किसानों को धोखा देना पड़े।
आगे क्या होगा?
अब अदालत SHO की रिपोर्ट का इंतजार करेगी। अगर रिपोर्ट संतोषजनक नहीं रही तो कोर्ट FIR दर्ज करने के आदेश दे सकती है।
एक बार FIR दर्ज हो जाने के बाद ED की जांच को और बल मिलेगा। तब एजेंसी गिरफ्तारियां कर सकती है, संपत्तियां कुर्क कर सकती है, और बैंक खाते फ्रीज कर सकती है।
अगर सचमुच किसी बड़े राजनीतिक नाम का इसमें कनेक्शन मिलता है तो यह पंजाब की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है। खासकर जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
दूसरी ओर, अगर AAP का आरोप सही है और यह सचमुच राजनीतिक प्रतिशोध है तो यह मामला राजनीतिक बहस का मुद्दा बनेगा। विपक्ष इसे केंद्र सरकार द्वारा एजेंसियों के दुरुपयोग का उदाहरण बताएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- ED ने कोर्ट से Altus Builders और 5 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की
- सनटेक सिटी प्रोजेक्ट में ₹348 करोड़ की हेराफेरी का आरोप
- किसानों के जाली सहमति पत्र बनाकर CLU की मंजूरी ली गई
- मोहाली SSP ने ED के समन पर पेश नहीं होकर सहयोग नहीं किया
- ED ने जुलाई-अगस्त में कई पत्र लिखे, पुलिस ने जवाब नहीं दिया
- AAP का एक सीनियर नेता ED के निशाने पर: सूत्र
- AAP ने इसे चुनाव से पहले राजनीतिक प्रतिशोध बताया
- खड़ कोर्ट ने SHO से रिपोर्ट मांगी











