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The News Air - Breaking News - Waris Punjab De नेता Manpreet Ayali का ऐलान: गठजोड़ का फैसला संगत करेगी, BJP से हाथ मिलाने पर मिलेगा एक वोट भी नहीं

Waris Punjab De नेता Manpreet Ayali का ऐलान: गठजोड़ का फैसला संगत करेगी, BJP से हाथ मिलाने पर मिलेगा एक वोट भी नहीं

अमृतपाल सिंघ की विचारधारा वाली पार्टी का साफ रुख - पंथक हितों से कोई समझौता नहीं, सत्ता मुख्य मकसद नहीं

Ajay Kumar by Ajay Kumar
शुक्रवार, 18 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Manpreet Ayali,
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Waris Punjab De BJP Alliance की अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी के प्रमुख नेता मनप्रीत सिंह आयाली ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन करने का सवाल ही नहीं उठता। आयाली ने कहा कि ‘वारिस पंजाब दे’ एक पंथक धड़ा है जो हमेशा संगत के फैसले के अनुसार ही आगे बढ़ेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर पार्टी ने BJP के साथ हाथ मिलाया तो पंजाब के गांवों से एक भी वोट नहीं मिलेगा।

देखा जाए तो यह बयान उस समय आया है जब पंजाब में विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो गई हैं और विभिन्न राजनीतिक समीकरण बनाए जा रहे हैं। अमृतपाल सिंह की विचारधारा से जुड़ी यह पार्टी अब पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरी है।

🔍 यह भी पढ़ें- Amritpal Singh Arrest: NSA से Punjab Police Custody में, MP सीट पर सवाल!

‘संगत करेगी फैसला, हवाई बातें नहीं चलेंगी’

मनप्रीत आयाली ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि जो भी गठजोड़ की चर्चाएं हो रही हैं वे महज हवाई बातें हैं। उन्होंने कहा, “वारिस पंजाब दे किसी से भी समझौता नहीं करेगी। हम एक पंथक धड़ा हैं और हमारा हर फैसला संगत के अनुसार होगा।”

समझने वाली बात है कि ‘संगत’ का अर्थ है सिख समुदाय की सामूहिक राय। यानी पार्टी अपने वोटरों, खासकर पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों और युवाओं की राय के अनुसार ही कोई बड़ा फैसला लेगी।

आयाली ने कहा, “हमारी सबसे बड़ी ताकत गांवों की आबादी और ग्रामीण युवा हैं जो भाई अमृतपाल सिंह की सोच से जुड़े हुए हैं। पंजाब का ग्रामीण क्षेत्र BJP के खिलाफ है। इसलिए वारिस पंजाब दे ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगी जिससे संगत या पंथक विचारधारा रखने वालों के मन को ठेस पहुंचे।”

BJP से गठजोड़ तो गांवों से नहीं मिलेगा एक भी वोट: आयाली

जब मनप्रीत आयाली से सीधे सवाल पूछा गया कि क्या वारिस पंजाब दे या वे खुद भारतीय जनता पार्टी के साथ चुनाव लड़ सकते हैं, तो उनका जवाब बेहद स्पष्ट था।

आयाली ने कहा, “अगर ऐसा होता है तो पार्टी को गांवों से एक भी वोट नहीं मिलेगी। पंजाब का ग्रामीण इलाका RSS और BJP के सख्त खिलाफ है।”

दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने इसके पीछे के कारण भी गिनाए। आयाली ने कहा, “इसके पीछे कई कारण हैं – किसान आंदोलन हो, तीन कृषि कानून हों, या फिर सिखों के संजीदा मामले जिन्हें BJP ने कभी गंभीरता और हमदर्दी से हल करने की कोशिश नहीं की।”

उन्होंने आगे कहा, “ग्रामीण पंजाब का BJP पर भरोसा इतना कम है कि इसे आसानी से नहीं भरा जा सकता। इसलिए हम ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जो हमारे वोटरों को नाराज करे।”

कहने का मतलब साफ है कि किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार और किसानों के बीच जो तल्खी पैदा हुई, वह अभी भी पंजाब के ग्रामीण इलाकों में गहरे तक बैठी हुई है।

सत्ता नहीं, संगत की आवाज बुलंद करना है मकसद

मनप्रीत आयाली ने यह भी स्पष्ट किया कि वारिस पंजाब दे के लिए सत्ता में आना मुख्य उद्देश्य नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद सिख संगत की आवाज, उनकी भावनाओं, विचारधारा और पंजाब की खुशहाली के लिए खड़ा होना है।”

यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि पार्टी खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग एक आंदोलन या पंथक मंच के रूप में देखती है।

अगर गौर करें तो अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद वारिस पंजाब दे ने जमीनी स्तर पर काफी समर्थन जुटाया है। खासकर युवाओं में पार्टी की लोकप्रियता बढ़ी है। लोकसभा चुनावों में अमृतपाल सिंघ का जेल से जीतना इस बात का सबूत है कि उनकी विचारधारा को जनसमर्थन मिल रहा है।

चुनाव के बाद भी गठजोड़ का फैसला संगत करेगी

आयाली ने आगे कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद भी अगर किसी मुख्यधारा की पार्टी के साथ गठजोड़ की कोई संभावना बनती है तो उसका फैसला भी वोटर यानी वारिस पंजाब दे की संगत ही करेगी।

उन्होंने दावा किया, “वारिस पंजाब दे पंजाब की राजनीति के इतिहास में एक बड़ा मोड़ (गेम चेंजर) साबित होगी।”

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पार्टी अपने आप को पूरी तरह लोकतांत्रिक और संगत-संचालित बता रही है। यह रणनीति पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग है जहां शीर्ष नेतृत्व फैसले लेता है।

RSS और BJP के खिलाफ क्यों है ग्रामीण पंजाब?

मनप्रीत आयाली ने जो तर्क दिए हैं वे वास्तव में पंजाब की जमीनी हकीकत को दर्शाते हैं। किसान आंदोलन के दौरान जो कुछ हुआ उसने पंजाब के ग्रामीण समाज और केंद्र सरकार के बीच गहरी खाई पैदा कर दी।

तीन कृषि कानूनों का विरोध पंजाब में सबसे तीव्र था। किसानों ने महीनों तक दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहकर आंदोलन किया। इस दौरान कई किसानों की मौत हुई। लखीमपुर खीरी कांड ने आग में घी का काम किया।

इसके अलावा, सिख समुदाय के कुछ धार्मिक और ऐतिहासिक मुद्दे भी हैं जिन पर वे महसूस करते हैं कि केंद्र सरकार संवेदनशील नहीं है। 1984 के दंगों के मामले, सिख बंदी रिहाई का मुद्दा, और चंडीगढ़ के हस्तांतरण जैसे मसले अभी भी लंबित हैं।

समझने वाली बात है कि ये मुद्दे सिर्फ राजनीतिक नहीं हैं बल्कि भावनात्मक भी हैं। इसलिए पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में BJP के प्रति एक प्राकृतिक अविश्वास है।

अमृतपाल सिंह का प्रभाव और वारिस पंजाब दे की ताकत

अमृतपाल सिंह इस समय असम की दिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उन्हें हिरासत में रखा गया है। इसके बावजूद, 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने खड़गे संसदीय सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की।

यह जीत साबित करती है कि पंजाब के एक बड़े वर्ग में, खासकर युवाओं में, अमृतपाल की विचारधारा को समर्थन है। वारिस पंजाब दे इसी समर्थन आधार पर खड़ा होना चाहता है।

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आयाली का कहना है कि उनकी पार्टी की असली ताकत गांवों के युवा हैं जो खालिस्तान समर्थक नहीं बल्कि पंजाब की अस्मिता, सिख पहचान और किसानों के हितों के लिए आवाज उठाना चाहते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने अभी तक अपना चुनाव चिह्न या विस्तृत घोषणापत्र जारी नहीं किया है। लेकिन उनकी बुनियादी मांगें स्पष्ट हैं: सिख कैदियों की रिहाई, 1984 के दंगों के दोषियों को सजा, किसानों के लिए MSP की गारंटी, और पंजाब के जल संसाधनों पर पंजाब का अधिकार।

पंजाब की राजनीति में नया समीकरण

वारिस पंजाब दे के इस स्पष्ट रुख से पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। अब तक पंजाब में मुख्य रूप से तीन बड़ी पार्टियां थीं: कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, और शिरोमणि अकाली दल।

लेकिन अब वारिस पंजाब दे एक चौथी ताकत के रूप में उभर रहा है। यह पार्टी वोटों को बांट सकती है, खासकर ग्रामीण और युवा वोटरों में।

अगर वारिस पंजाब दे 15-20 सीटें भी जीत लेती है तो वह किंगमेकर की भूमिका में आ सकती है। तब उनका यह बयान कि “संगत फैसला करेगी” और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।

कहने का मतलब साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाले हैं। पारंपरिक दलों को अब एक नई ताकत से निपटना होगा जो न तो पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष है और न ही पूरी तरह अलगाववादी, बल्कि पंथक पहचान और क्षेत्रीय हितों की बात करती है।

क्या AAP या कांग्रेस के साथ गठजोड़ संभव?

हालांकि आयाली ने BJP के साथ गठजोड़ को पूरी तरह खारिज कर दिया है, लेकिन उन्होंने AAP या कांग्रेस के बारे में सीधे कुछ नहीं कहा।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर चुनाव के बाद किसी को भी बहुमत नहीं मिलता है तो वारिस पंजाब दे AAP या कांग्रेस को समर्थन दे सकती है। लेकिन इसकी शर्तें होंगी – सिख बंदियों की रिहाई, 1984 के मामलों में न्याय, और पंजाब के हितों को प्राथमिकता।

लेकिन यह सब “संगत के फैसले” पर निर्भर करेगा। आयाली ने साफ कर दिया है कि पार्टी का कोई भी बड़ा फैसला अपने समर्थकों से पूछकर ही लिया जाएगा।

मुख्य बातें (Key Points)
  • वारिस पंजाब दे ने किसी भी मुख्यधारा की पार्टी के साथ गठजोड़ से इनकार किया
  • मनप्रीत आयाली ने कहा BJP से हाथ मिलाने पर गांवों से एक भी वोट नहीं मिलेगा
  • पार्टी का हर फैसला ‘संगत’ यानी सिख समुदाय की सामूहिक राय से होगा
  • ग्रामीण पंजाब RSS और BJP के खिलाफ है – किसान आंदोलन और सिख मुद्दों की वजह से
  • सत्ता नहीं, संगत की आवाज बुलंद करना है मुख्य मकसद
  • अमृतपाल सिंह की विचारधारा से जुड़े युवा पार्टी की असली ताकत
  • चुनाव बाद भी गठजोड़ का फैसला वोटर करेंगे
  • वारिस पंजाब दे खुद को पंजाब की राजनीति में गेम चेंजर मानती है
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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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