UPI MDR Charges – देखा जाए तो UPI MDR Charges को लेकर देश में एक नई बहस छिड़ गई है। सरकार के इस फैसले पर विपक्ष जहां अमेरिकी दबाव का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार इसे टैक्स नहीं बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर फीस बता रही है। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह फैसला विदेशी ताकतों के दबाव में लिया गया है।
अब सवाल उठता है कि आखिर ₹2000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाला यह चार्ज किसकी जेब में जाएगा? क्या सच में यह अमेरिकी कंपनियों Google Pay और PhonePe को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है? या फिर यह भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने की कोशिश है?
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क्या है नया UPI MDR फॉर्मूला
सरकार ने साफ किया है कि ₹2000 से कम के किसी भी मर्चेंट पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। लेकिन इससे ऊपर के ट्रांजैक्शन पर एक निर्धारित फीस देनी होगी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पर्सन-टू-पर्सन यानी अपने दोस्तों या परिवार को भेजे जाने वाले पैसे पर अब भी कोई चार्ज नहीं है। चाहे आप ₹10,000 भेजें या ₹1 लाख, कोई फर्क नहीं पड़ता।
मगर दुकान पर QR कोड स्कैन करके पेमेंट करते समय अब आपको फीस देनी होगी। समझने वाली बात है कि यह फीस ट्रांजैक्शन अमाउंट के हिसाब से अलग-अलग होगी।
| ट्रांजैक्शन राशि | MDR चार्ज | उदाहरण |
|---|---|---|
| ₹2,000 से ऊपर | 0.4% | ₹3,000 पर ₹12 |
| ₹10,000 | ₹40 | फिक्स्ड चार्ज |
| ₹50,000 | ₹200 | फिक्स्ड चार्ज |
| ₹75,000 से ऊपर | ₹300 (अधिकतम) | ₹1 लाख पर भी ₹300 |
इसके अलावा कुछ विशेष कैटेगरी के लिए अलग चार्ज तय किए गए हैं। पेट्रोल पंप, टेलीकॉम बिल, यूटिलिटी बिल पर फिक्स्ड ₹5 का चार्ज लगेगा। रेलवे टिकट बुकिंग में भी ₹5 की फीस जोड़ी गई है। म्यूचुअल फंड और कैपिटल मार्केट से जुड़े निवेश पर काफी कम चार्ज रखा गया है।
यह टैक्स है या फीस? सरकार का सफाई नामा
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह एक नया टैक्स है? सरकार का स्पष्ट जवाब है: नहीं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यह पैसा सरकार के खजाने में नहीं जा रहा। बल्कि इसे पूरे UPI इकोसिस्टम को चलाने वाली संस्थाओं के बीच बांटा जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि जो MDR फीस आप देंगे, उसका वितरण इस तरह होगा:
MDR का Distribution (100% में से):
- 40% → आपका बैंक (जिससे पैसा कटा)
- 30% → दुकानदार का बैंक (जिसमें पैसा क्रेडिट हुआ)
- 20% → UPI ऐप (Google Pay, PhonePe, Paytm आदि)
- 10% → पेमेंट गेटवे बैंक
मान लीजिए आपने ₹10,000 की शॉपिंग की और ₹40 MDR चार्ज लगा। तो इसका ब्रेकअप कुछ यूं होगा:
- आपका बैंक (जैसे SBI): ₹16
- दुकानदार का बैंक: ₹12
- UPI ऐप (PhonePe/Google Pay): ₹8
- पेमेंट गेटवे बैंक: ₹4
इससे साफ होता है कि लगभग 70-80% हिस्सा बैंकों के पास जा रहा है, न कि सीधे सरकार के पास।
राहुल गांधी का आरोप: ‘वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी’
राहुल गांधी ने X (पूर्व में Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा, “पहले शिवसेना, फिर NCP, और अब TMC। हर बार, वही पैटर्न – BJP और चुनाव आयोग किसी पार्टी को बांटने के लिए ताकतें जोड़ते हैं।”
हालांकि उनकी यह टिप्पणी चुनाव आयोग के TMC संबंधी फैसले पर थी, लेकिन UPI MDR के मसले पर भी विपक्ष का स्वर यही है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि United States Trade Representative (USTR) ने भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लेकर जो चिंताएं जताई थीं, उसी के दबाव में यह फैसला लिया गया।
USTR ने कुछ महीने पहले ही भारत की UPI नीति को “non-level playing field” करार दिया था। अमेरिकी संस्था का कहना था कि भारत RuPay को बढ़ावा देकर Visa और Mastercard जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क को नुकसान पहुंचा रहा है।
अमेरिकी कंपनियों को फायदा या भारतीय इकोसिस्टम को बढ़ावा?
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि UPI ट्रांजैक्शन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी PhonePe और Google Pay की है। ये दोनों अमेरिकी मूल की कंपनियां हैं। PhonePe अब Walmart के स्वामित्व में है जबकि Google Pay तो खुद Google की सर्विस है।
मार्केट डेटा के अनुसार:
- PhonePe: लगभग 48% मार्केट शेयर
- Google Pay: करीब 37% मार्केट शेयर
- Paytm: लगभग 9% मार्केट शेयर
- बाकी सभी: 6%
अब चूंकि MDR का 20% हिस्सा UPI ऐप को मिलेगा, तो स्वाभाविक है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा PhonePe और Google Pay को होगा। यही वजह है कि विपक्ष का तर्क है कि यह फैसला अमेरिकी कंपनियों के हित में है।
लेकिन सरकार का पलटवार भी कमजोर नहीं है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि MDR लगने से भारतीय फिनटेक कंपनियां भी टिकाऊ हो पाएंगी। अब तक ये कंपनियां सब्सिडी और निवेश पर चल रही थीं। MDR से मिलने वाली कमाई इन्हें बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करने में मदद करेगी।
सरकार ने क्यों कहा ‘कोई विदेशी दबाव नहीं’
सरकार का साफ रुख है कि UPI MDR Charges का फैसला पूरी तरह घरेलू जरूरतों को देखते हुए लिया गया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर विदेशी दबाव होता तो सरकार Visa और Mastercard को UPI में एंट्री दे देती।
फिलहाल भी अगर आपके पास Visa या Mastercard का क्रेडिट कार्ड है तो आप उसे UPI से लिंक नहीं कर सकते। सिर्फ RuPay क्रेडिट कार्ड ही UPI से जुड़ सकता है। यह नीति अभी भी बरकरार है। सरकार का तर्क है कि अगर हम अमेरिकी दबाव में होते तो सबसे पहले यहीं से समझौता करते।
अगर गौर करें तो सरकार की नीति स्पष्ट रही है – “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” के तहत घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देना। RuPay नेटवर्क भी इसी का हिस्सा है।
5% हिस्सा छोटे दुकानदारों के लिए रिजर्व करने की योजना
सरकार और Reserve Bank of India (RBI) के बीच एक और प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। योजना यह है कि कुल MDR का लगभग 5% हिस्सा एक डेडिकेटेड फंड में डाला जाए। इस फंड का इस्तेमाल छोटे रिटेलर्स और ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों को UPI अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में किया जाएगा।
यह फंड किराना स्टोर, सब्जी विक्रेताओं, छोटी दुकानों को QR कोड, POS मशीन और डिजिटल साक्षरता प्रदान करने में खर्च होगा। RBI इस प्रस्ताव पर जल्द ही फैसला लेगी।
ग्रामीण इलाकों में अभी भी फ्री रहेगी UPI
राहत की बात यह है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में अभी भी कोई MDR चार्ज नहीं लगेगा। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में अभी भी UPI को तेजी से अपनाया जा रहा है। वहां चार्ज लगाने से यह प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
यह रणनीति दिखाती है कि सरकार अभी भी UPI को जन-जन तक पहुंचाना चाहती है। सिर्फ बड़े शहरों में ही MDR लागू होगा जहां डिजिटल पेमेंट पहले से स्थापित है।
क्या लोग फिर से कैश की तरफ जाएंगे?
UPI MDR Charges लगने के बाद कई विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया है कि क्या लोग फिर से नकद भुगतान की ओर लौटेंगे? हालांकि, ज्यादातर एनालिस्ट्स इससे इनकार करते हैं।
कारण साफ है: ज्यादातर ट्रांजैक्शन ₹2,000 से कम के होते हैं जो अभी भी पूरी तरह फ्री हैं। बड़े ट्रांजैक्शन में भी लोग अब आसानी खोज लेंगे – जैसे ₹5,000 की जगह दो बार ₹2,500 का पेमेंट करना।
डिजिटल पेमेंट की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए यह संभावना कम है कि लोग बड़े पैमाने पर कैश का इस्तेमाल शुरू कर देंगे। हां, अगर भविष्य में सरकार यह सीमा घटाकर ₹500 कर दे या MDR परसेंटेज 1% तक बढ़ा दे तो स्थिति बदल सकती है।
विपक्ष की मांग: फैसला वापस लें
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सरकार से UPI MDR Charges का फैसला वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यह आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ है। खासकर महंगाई के इस दौर में जब पेट्रोल-डीजल, खाद्य सामग्री सब महंगे हैं, तब डिजिटल पेमेंट पर भी चार्ज लगाना गलत है।
हालांकि सरकार का स्पष्ट रुख है कि यह कदम जरूरी था। कभी न कभी UPI को आत्मनिर्भर बनाना ही था। सब्सिडी पर यह सिस्टम हमेशा नहीं चल सकता था।
मुख्य बातें (Key Points)
- ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर अब 0.4% या फिक्स्ड MDR चार्ज लगेगा
- पर्सन-टू-पर्सन पेमेंट पूरी तरह फ्री रहेगा, कोई सीमा नहीं
- MDR का 70-80% हिस्सा बैंकों को जाएगा, 20% UPI ऐप्स को
- PhonePe और Google Pay को सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना
- विपक्ष का आरोप: यह अमेरिकी दबाव का नतीजा है
- सरकार का जवाब: कोई विदेशी प्रभाव नहीं, यह इंफ्रास्ट्रक्चर फीस है
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में अभी फ्री रहेगा UPI
- 5% MDR छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहन देने के लिए रिजर्व करने की योजना
आगे क्या होगा?
RBI और वित्त मंत्रालय अगले कुछ दिनों में इस नीति के बारीक नियम जारी करेंगे। बैंकों और फिनटेक कंपनियों को यह तय करना होगा कि वे अपने ग्राहकों को कैसे इसकी जानकारी देंगे।
कहने का मतलब साफ है कि UPI की यात्रा में यह एक बड़ा मोड़ है। अब देखना होगा कि क्या यह भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करता है या फिर विदेशी कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचाता है। जनता की प्रतिक्रिया और आने वाले महीनों का डेटा इस सवाल का जवाब देगा।













