8th Pay Commission DA merger को लेकर केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों ने अपनी सबसे बड़ी मांग सरकार के सामने रख दी है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया में तेज़ी आने के साथ ही NC-JCM (नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) के कर्मचारी पक्ष ने अपना ताज़ा ज्ञापन आयोग को सौंप दिया है। और बस इसी ज्ञापन में ऐसी मांगें शामिल हैं जो अगर मानी गईं तो करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का पूरा सैलरी स्ट्रक्चर बदल सकता है।
सबसे अहम प्रस्ताव: जब महंगाई भत्ता (DA) 25% से ऊपर पहुंच जाए तो उसे मूल वेतन में मर्ज कर दिया जाए। साथ ही कई भत्तों को तीन गुना करने और उन्हें महंगाई से सीधा जोड़ने की मांग भी रखी गई है।
DA को बेसिक में मर्ज करने का प्रस्ताव क्यों है इतना अहम?
देखा जाए तो यह प्रस्ताव सुनने में तकनीकी लगता है, लेकिन इसका असर इतना गहरा है कि हर कर्मचारी और पेंशनभोगी की जेब पर सीधा फर्क पड़ेगा। फिलहाल DA और DR (Dearness Relief) 60% पर चल रहा है। केंद्र सरकार ने हाल ही में इसे 2% बढ़ाया था।
NC-JCM का प्रस्ताव है कि जब DA/DR 25% से ऊपर जाए तो उसे मूल वेतन और मूल पेंशन के साथ मिला दिया जाए।
समझने वाली बात है कि इसका मतलब क्या होगा: अगर DA बेसिक में मर्ज हो जाता है तो बेसिक सैलरी का आधार ही बढ़ जाएगा। और चूंकि HRA, ग्रेच्युटी, रिटायरमेंट बेनिफिट्स… सब कुछ बेसिक सैलरी पर कैलकुलेट होता है, इसलिए सभी लाभों में एक साथ बढ़ोतरी हो जाएगी। यानी एक फैसला, कई फायदे।
HRA में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित
बढ़ते आवास खर्चे को देखते हुए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भी बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है। NC-JCM ने मांग की है कि:
- X श्रेणी के शहर (50 लाख से ज्यादा आबादी): मूल वेतन का 40% HRA मिले
- Y श्रेणी के शहर में: मूल वेतन का 35% HRA
- Z श्रेणी के शहर में: मूल वेतन का 30% HRA
दिलचस्प बात यह है कि ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया है कि HRA को DA से जोड़ दिया जाए ताकि इसमें अपने आप बदलाव होता रहे। शहरों के वर्गीकरण की हर 5 साल में समीक्षा करने का सुझाव भी दिया गया है। पेंशनभोगियों के लिए भी HRA की मांग रखी गई है, जो अभी तक नहीं मिलता।
कई भत्ते तीन गुना करने की मांग
अगर गौर करें तो NC-JCM ने सिर्फ DA मर्जर की बात नहीं की है, बल्कि पूरे अलाउंस सिस्टम को ओवरहॉल करने का प्रस्ताव दिया है। रहने-सहने के बढ़ते खर्चे का हवाला देते हुए कर्मचारी पक्ष ने कई भत्तों को तीन गुना करने की मांग की है।
खासतौर पर जोखिम और कठिनाई भत्ता (Risk and Hardship Allowance) को लेकर मांग यह है कि यह कम से कम ₹10,000 प्रतिमाह हो और इसे DA से जोड़ दिया जाए ताकि समय-समय पर इसमें अपने आप बढ़ोतरी होती रहे।
CPI और महंगाई गणना पर भी उठाए सवाल
हैरान करने वाली बात यह है कि NC-JCM ने महंगाई की गणना के पूरे तरीके पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्ञापन में कहा गया कि मौजूदा कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सरकारी कर्मचारियों के असल खर्चे को ठीक से नहीं दिखाता।
कर्मचारी पक्ष की दो ठोस मांगें हैं:
पहली, कीमतों की गणना सरकारी दरों की बजाय बाज़ार की असल कीमतों पर की जानी चाहिए, क्योंकि दोनों में करीब 25% का अंतर होता है। दूसरी, DA कैलकुलेशन के लिए मौजूदा 12 महीने के औसत को 6 महीने पर शिफ्ट किया जाए ताकि महंगाई का असल असर जल्दी दिखे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर यह प्रस्ताव मान लिया जाता है तो DA की दर और तेज़ी से बढ़ेगी, जिसका सीधा फायदा कर्मचारियों को होगा।
8वें वेतन आयोग की टाइमलाइन क्या है?
सवाल उठता है कि ये सिफारिशें कब लागू होंगी? 8वां वेतन आयोग नवंबर 2025 में गठित किया गया था और इसकी संदर्भ तिथि (reference date) 1 जनवरी 2026 रखी गई है। ज्ञापन जमा करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 है।
आयोग के पास अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय है, यानी अंतिम रिपोर्ट 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है। अगर सरकार इन्हें पूर्वव्यापी (retrospective) तरीके से लागू करती है तो कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर्स भी मिल सकते हैं।
लेकिन एक ज़रूरी बात… NC-JCM के प्रस्ताव अभी सिफारिशें हैं, अंतिम फैसला नहीं। आयोग इन्हें स्वीकार भी कर सकता है और खारिज भी। इसलिए अभी जो आंकड़े सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं, उन्हें किसी को “पक्का” मानकर नहीं चलना चाहिए।
केंद्रीय कर्मचारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
राहत की बात यह है कि अगर NC-JCM की प्रमुख मांगें मानी जाती हैं तो करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आय में भारी इज़ाफा हो सकता है। DA मर्जर से बेसिक बढ़ेगी, HRA में बढ़ोतरी से किराये का बोझ कम होगा और भत्ते तीन गुना होने से हर महीने की टेक-होम सैलरी में ठीकठाक बढ़ोतरी दिखेगी।
लेकिन दूसरी तरफ सरकार के खज़ाने पर भी बड़ा बोझ पड़ेगा। एक बात तो तय है… इस बार 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों की उम्मीदें आसमान छू रही हैं। अब देखना यह है कि आयोग किन मांगों को मानता है और सरकार क्या लागू करती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग को ज्ञापन सौंपा: DA 25% से ऊपर होने पर बेसिक में मर्ज करने की मांग
- HRA में बड़ी बढ़ोतरी का प्रस्ताव: X शहर में 40%, Y में 35%, Z में 30% मूल वेतन
- कई भत्ते तीन गुना करने और जोखिम भत्ता कम से कम ₹10,000/माह करने की मांग
- 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट 2027 मध्य तक आने की उम्मीद, ज्ञापन जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026












