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The News Air - Breaking News - Trump Iran Ceasefire Pakistan: ट्रंप ने छोड़ा मैदान, बातचीत की जिम्मेदारी ईरान पर डाली

Trump Iran Ceasefire Pakistan: ट्रंप ने छोड़ा मैदान, बातचीत की जिम्मेदारी ईरान पर डाली

अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीजफायर को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया लेकिन कोई डेडलाइन नहीं दी, इस्लामाबाद वार्ता फेल, हॉर्मुज घेराबंदी जारी, ईरान कहता है बातचीत तभी जब ब्लॉकेड हटे।

The News Air Team by The News Air Team
बुधवार, 22 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, सियासत
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Trump Iran Ceasefire Pakistan
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Trump Iran Ceasefire Pakistan के मामले में एक अजीब मोड़ आ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ा दिया है, लेकिन इस बार कोई तारीख नहीं दी। कहा है कि ईरान पर निर्भर करता है कि वह अपना प्रस्ताव पेश करे, तब तक अमेरिका जंग नहीं करेगा। दिलचस्प बात यह है कि जो ट्रंप हर घंटे डेडलाइन जारी करते थे, वही अब बातचीत को लेकर समयसीमा से तंग आ गए हैं।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बातचीत का दूसरा दौर होना था। मेजबान पहुंच गए, सारा इंतजाम हो गया, लेकिन मेहमान नहीं आया। ईरान ने साफ कह दिया – बातचीत तभी करेंगे जब अमेरिका हॉर्मुज स्ट्रेट से अपनी नाकेबंदी हटाएगा।

अब यहां सवाल उठता है – आखिर किसकी जीत हुई? ट्रंप जंग करते हैं तो हारते दिखते हैं। बातचीत करते हैं तो भागते दिखते हैं। यह कैसी कूटनीति है जहां युद्धविराम है लेकिन नाकेबंदी जारी है, शांति की बात है लेकिन धमकियां भी चल रही हैं?

आइए समझते हैं कि आखिर हो क्या रहा है इस रेंगती हुई जंग में।

इस्लामाबाद में मेज तो सजी, मेहमान नहीं आया

ईरान की स्टेट मीडिया ने एक वीडियो जारी किया है जो पूरी स्थिति को बयान करता है। मेज पर ट्रंप बैठे हैं और सामने की मेज खाली है। ईरान आया ही नहीं। ट्रंप धमकियां ट्वीट किए जा रहे हैं, लेकिन सामने कोई नहीं।

ईरान की इस चाल ने ट्रंप के खेल को पलट दिया। ट्रंप कह रहे थे कि ईरान के कहने पर बातचीत हो रही है। ईरान ने कहा – हम कभी इस्लामाबाद नहीं जा रहे थे, यह आपका झूठ था।

देखा जाए तो, पाकिस्तान की मेहनत बेकार गई। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का तीन दिनों का तेहरान दौरा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का जहाज पर चढ़ना-उतरना – कभी सऊदी, कभी कतर, कभी तुर्की। हर दिन फोटो, अलग-अलग फ्रेम, अलग-अलग देश।

पिछले हफ्ते भर की मुलाकातों की तस्वीरें उम्मीदें पैदा कर रही थीं। अब वे कूटनीति के इतिहास का बेकार का हिस्सा बन चुकी हैं। मुलाकातों की तस्वीरें देखने में अच्छी लगती हैं, मगर केवल ट्वीट करने के लिए होती हैं।

ट्रंप का बयान – पाकिस्तान के कहने पर सीजफायर बढ़ाया

22 अप्रैल की सुबह ट्रंप ने ट्वीट किया कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गुजारिश पर उन्होंने हमला उस समय तक के लिए टाल दिया, जब तक कि ईरान का नेतृत्व किसी एक प्रस्ताव पर राजी होकर अमेरिका के पास नहीं आता।

यहां ध्यान देने वाली बात है – ट्रंप हर बार शहबाज शरीफ का नाम आसिम मुनीर के बाद लेते हैं। क्रम का ध्यान नहीं रखते। इससे हर बार कंफ्यूजन हो जाता है कि पाकिस्तान में बड़ा कौन है – प्रधानमंत्री या फील्ड मार्शल?

सच्चाई पाकिस्तान के लोगों को मालूम है। लेकिन जब ट्रंप दूसरे तमाम मामलों में आसानी से झूठ बोल लेते हैं, तो क्यों हर बार शाहबाज शरीफ का नाम आसिम मुनीर के बाद लेते हैं?

ट्रंप के पोस्ट के एक घंटे बाद शहबाज शरीफ ने जब ट्रंप को शुक्रिया अदा किया तो पहले अपना नाम लिखा, फिर जनरल मुनीर का। लिखा कि पाकिस्तान अपनी तरफ से शांति के लिए पूरी कोशिश करता रहेगा।

हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रंप ने इतनी दोस्ती निभा दी – शाहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के कहने पर सीजफायर बढ़ा दिया। लेकिन हॉर्मुज से नाकेबंदी नहीं हटाई।

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ट्रंप का “पागलपन” – कूटनीति की नई रणनीति?

शेक्सपियर का नाटक है हैमलेट। उसमें मुख्य किरदार हैमलेट की दिमागी हालत को लेकर संदेह बना रहता है। असल में पागल हो चुका है या पागल होने का नाटक करता है? पागलपन की आड़ में हैमलेट अपनी रणनीति बनाता जाता है।

दूसरे किरदार कभी उसे गंभीरता से लेते हैं और कभी नहीं भी। लेकिन दर्शक नाटक के आंतरिक तर्क को स्वीकार कर लेते हैं कि हैमलेट के डेनमार्क में ऐसा ही होता है।

हम लोगों के साथ भी तो यही हो रहा है। हम सभी ने स्वीकार कर लिया है कि ट्रंप के अमेरिका में ऐसा होता है। नेतन्याहू के इजराइल में यही होता है।

अगर गौर करें तो, सोशल मीडिया पर एक देश को गालियां देना, उसकी सभ्यता को मिटा देने की धमकी देना, नरसंहार की बात करना – यह सब नॉर्मल नहीं है। लेकिन हम ट्रंप के पागलपन में शामिल किए जा रहे हैं।

द गार्डियन अखबार के एक लेख में यही कहा गया है कि घूम-फिरकर ट्रंप के पागलपन में भागीदार होने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं।

समझने वाली बात यह है कि ट्रंप ने कूटनीति में पागलपन की भूमिका की नई लकीर खींच दी है। जब वे शांति की बात करते हैं, आप यकीन नहीं करते। जब बातचीत की बात करते हैं, आप अनुमान लगाते हैं कि हमला कब होगा।

ईरान का अविश्वास – अमेरिका किस पर भरोसा करे?

इस जंग में अविश्वास ही सब कुछ तय कर रहा है। ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान – तीनों अपने-अपने अविश्वास को लेकर बातचीत की मेज पर आ रहे हैं। लेकिन भरोसा करते ही तीनों को करंट लग जाता है।

अमेरिका से आने वाली खबरें ईरान के अविश्वास को और बढ़ा देती हैं। सोशल मीडिया में एक वायरल वीडियो की काफी चर्चा है। इसमें अमेरिका के केमिकल परमाणु सुरक्षा विभाग के एक प्रमुख एंड्रयू हग एक रेस्तरां में बैठकर एक अंडरकवर पत्रकार से कह रहे हैं कि अमेरिका मुस्तफा खामेनेई की हत्या करने का प्लान बना रहा है।

ये यह भी कह रहे हैं कि मुमकिन है मीनाब के स्कूल पर जो हमला हुआ, अमेरिका ने किया। इनका काम है अमेरिका में परमाणु और केमिकल सुरक्षा की निगरानी रखना, और ये रेस्तरां में बैठकर अपनी सरकार की पोल खोल रहे हैं।

खबर है इन्हें पेंटागन की इमारत से बाहर ले जाया गया है और छुट्टी पर भेज दिया गया है। लेकिन नुकसान हो चुका है।

इसीलिए अमेरिका से आने वाला हर बयान अविश्वास के धुएं से घिरा रहता है। ऐसी खबरों के बीच क्या ईरान के लिए मुमकिन है कि वह ट्रंप के बयान पर भरोसा कर ले?

ट्रंप के बयानों का कोई भरोसा नहीं

चंद घंटे पहले ट्रंप अमेरिका के न्यूज चैनल CNBC से कह रहे थे – सीजफायर नहीं बढ़ेगा। मैं करना नहीं चाहता हूं। मेरे पास ज्यादा समय नहीं है। अगर डील नहीं हुई तो मैं फिर से बॉम्बिंग शुरू कर दूंगा।

कहते-कहते ट्रंप ने यह भी कह दिया कि ईरान की लीडरशिप में यूनिटी नहीं है। जब वे किसी प्रपोजल पर रेडी हो जाएंगे, हमारे पास लाएंगे, तभी बातचीत होगी।

जिस अमेरिका में बहस चल रही थी कि ट्रंप परमाणु बटन दबाने के करीब आ गए हैं, उसी अमेरिका के ट्रंप ने बातचीत के प्रस्तावों को हवा में उछालकर सीजफायर की उम्र लंबी कर दी है।

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप कहना चाहते हैं कि ईरान का नेतृत्व विभाजित है – अराकची, खालिबाफ, अहमद वाहिदी, अजीज – इन सबके बीच फूट पड़ गई है।

तब तो यह ट्रंप के लिए गोल्डन अपॉर्चुनिटी होनी चाहिए। रिजीम चेंज करने चले जाना चाहिए। लेकिन हो रहा है उल्टा। ट्रंप के हिसाब से ईरान में फूट पड़ गई है और ट्रंप ईरान को यूनिटी का मौका देना चाहते हैं कि आप लोग एकजुट हो जाइए, फिर प्रस्ताव लेकर आइए।

ट्रंप उलझ गए हैं। उनका दिल फारस की खाड़ी से चला गया है।

हॉर्मुज नाकेबंदी – असली समस्या यहीं है

अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ट्वीट किया है कि अमेरिका की नौसेना ईरान के बंदरगाहों पर ब्लॉकेज जारी रखेगी। कुछ ही दिनों में खार्ग द्वीप की स्टोरेज पूरी भर जाएगी और ईरान के तेल के कुएं बंद करने पड़ जाएंगे।

ईरान के मेरिटाइम ट्रेड को रोकने से रिजीम की आमदनी का प्राथमिक स्रोत टारगेट होता है। अमेरिका का ट्रेजरी विभाग “ऑपरेशन इकोनॉमिक थियेटर” के माध्यम से फंड जनरेट करने की ईरान की क्षमता पर दबाव बनाए रखेगा।

कोई भी व्यक्ति या जहाज जो चोरी-छिपे इस तेल को बाहर ले जाने का प्रयास करेगा, उस पर अमेरिका के प्रतिबंध लग सकते हैं।

अमेरिका की ऐंठन देखिए। यह रोका-रोकी से कुछ होने वाला नहीं। टोका-टोकी से बात नहीं बदलेगी। ब्लॉकेड से ईरान बर्बाद नहीं हुआ है।

गए थे जंग लड़ने और पाइप में सीमेंट डाल रहे हैं ताकि पानी की सप्लाई बंद हो जाए। ऐसा स्कूलों के झगड़े में होता है। हॉर्मुज का ब्लॉकेड टिफिन बॉक्स गायब करने जैसा लगने लगा है।

यहां ध्यान देने वाली बात है – जब ट्रंप ने 22 अप्रैल की सुबह ट्वीट किया कि जंग नहीं होगी, तो अमेरिका के दूसरे अधिकारी इस तरह का बयान क्यों दे रहे हैं?

ईरान का जवाब – बातचीत तभी जब ब्लॉकेड हटे

तेहरान टाइम्स ने अपने एक लेख के लिए शीर्षक लगाया है – “समुद्री डाकुओं (पायरेट) से बात करना न तो समझदारी है न ही इससे कोई फायदा।” अमेरिका ईरान से निकल ही गया था, मगर उसका ईगो हॉर्मुज में फंस गया।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सैद इराबानी ने कहा है कि जैसे ही अमेरिका हॉर्मुज से ब्लॉकेड हटा लेगा, ईरान बातचीत के लिए इस्लामाबाद चला जाएगा।

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से भी कहा है कि किसी भी बातचीत के लिए जरूरी है कि अमेरिका पहले हॉर्मुज से ब्लॉकेड हटाए। अगर अमेरिका राजनीतिक समाधान चाहता है तो हम तैयार हैं। और जंग चाहता है तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।

तेहरान और ईरान के अन्य शहरों में सेना की परेड ईरान की जीत और इरादे को बता रही है। जिस दिन ट्रंप ने युद्ध विराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने की घोषणा की, उस दिन तेहरान में सेना की परेड हो रही है।

अलजजीरा ने लिखा है, काफी बड़ी भीड़ के सामने परेड की गई। मिसाइलों का प्रदर्शन किया गया।

युद्ध में मरने वालों की संख्या और पुनर्निर्माण

ईरान में जंग में मरने वालों की संख्या 3,375 हो गई है। लेबनान में 294 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। मरने वालों की संख्या इस वक्त इसलिए बढ़ी क्योंकि सीजफायर के दौरान उनकी गिनती ठीक से की गई।

ईरान ने युद्ध में क्षतिग्रस्त हुए 1,300 स्कूलों में से 775 की मरम्मत कर ली। यानी आधे से अधिक। सरकार का बयान है कि जो ज्यादा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त इमारतें हैं, अक्टूबर तक ठीक कर ली जाएंगी।

मगर ईरान कैसे भूल जाएगा? IRGC कह रही है कि वह युद्ध के मैदान पर ऐसा जवाब देने के लिए तैयार है जो युद्ध के भूखे और धोखेबाज दुश्मन की अक्ल और रणनीति के दायरे से बाहर की बात होगी।

एसोसिएटेड प्रेस में रिपोर्ट आई है कि ईरान ने अपने फील्ड कमांडर्स की मिलिशिया पर नियंत्रण की शक्तियां बढ़ा दी हैं। हमला करने से पहले उन्हें तेहरान से अनुमति लेने की जरूरत अब नहीं होगी।

ईरान का विश्लेषण – हारने वाला शर्तें नहीं लगा सकता

ईरान ट्रंप की घोषणा को अलग नजर से देख रहा है। उसका मानना है युद्ध विराम बढ़ा नहीं, बल्कि इसके नाम पर उल्लंघन ही बढ़ता जा रहा है।

ईरान के विश्लेषक लिख रहे हैं कि हारने वाला पक्ष शर्तें नहीं लगा सकता। ब्लॉकेड करना बमबारी के समान है और इसे खत्म होना चाहिए।

ट्रंप बड़ा हमला करने के लिए तैयार है – यह बात कई दिनों से कही जा रही है। लेकिन ट्रंप ने अभी तक कोई बड़ा हमला नहीं किया है। इतना क्रेडिट देना चाहिए।

22 अप्रैल की ट्रंप की बातों से इतना साफ हो गया कि ईरान ने कोई प्रस्ताव नहीं भेजा। ट्रंप ने लिखा है कि ईरान की सरकार पूरी तरह से विभाजित है।

Israel का अल-अक्सा में घुसना – नया विवाद

इजराइल के सेटलर्स ने पुराने जेरूसलम में अल-अक्सा मस्जिद में घुसकर अपवित्र किया है। इजराइल का झंडा लहराया है। यह सब इजराइल की सेना की देखरेख में किया गया।

पाकिस्तान, कुवैत, कतर, इजिप्ट – सबने निंदा की। इजराइल ऐसा कई बार कर चुका है।

रिपोर्ट है कि इस हफ्ते भी अमेरिका में लेबनान और इजराइल की बातचीत होगी। एक बात बताइए – लेबनान पर जिस तरह से नेतन्याहू ने बमबारी की, गजा पर की, क्या किसी भी तरह से नेतन्याहू को कोई सजा मिली?

अमेरिका ने निंदा भी की क्या? अमेरिका गारंटी दे सकता है कि नेतन्याहू का जो भी प्लान है, अब उस पर अमल नहीं करेंगे?

पहलगाम हमला – एक साल पूरा, न्याय कहां?

बात पाकिस्तान की हो रही है तो पहलगाम हमले की भी तुरंत कर लेनी चाहिए। एक साल पहले पहलगाम की भसारण घाटी में आतंकी हमला हुआ। आज के दिन ही एक साल हो गया।

शुभम द्विवेदी, लेफ्टिनेंट विनय नरवाल, एक्साइज इंस्पेक्टर मनीष रंजन मिश्रा, वितना अधिकारी समीर गुहा, आदिल शाह, यतीश परमार, उनके बेटे सुमित परमार, अतुल श्रीकांत मोनी, भारत भूषण, नीरज उधवानी, एन. रामचंद्र, शैलेश हिम्मत भाई, कौस्तुभ गणबोते, सुशील नाथ्याल, हेमंत सुभाष जोशी, मंजूनाथ राव, दिनेश अग्रवाल, नेपाल के सुदीप न्यूपानी।

इन घरों में आज का दिन जाने किस हाल में गुजरेगा। लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल का फोटो कितना वायरल हुआ। कितने मीम बनाए गए। हिमांशी की तस्वीरों को लेकर लोगों ने अपने भीतर जज्बा पैदा किया। पूरे देश में गुस्सा उबल आया।

आज क्या उन्हें याद किया जा रहा है? ऐशिया द्विवेदी की 2 महीने पहले शादी हुई थी। उनके पति शुभम द्विवेदी को आतंकवादियों ने उनके सामने ही मार दिया।

और हम आज तक नहीं जानते कि आतंकी हमला करने वाले कहां हैं। जहां इतने पर्यटक थे, वहां सुरक्षा क्यों नहीं थी? अगर किसी की चूक थी तो किस-किस को सजा मिली, क्या मिली? हम नहीं जानते।

हम बस यही जानते हैं कि उस समय गृह मंत्री अमित शाह थे। आज भी वही हैं। और वे इन दिनों गुंडों को उल्टा लटकाकर सजा देने की बात कर रहे हैं बंगाल में।

एक साल बाद पहलगाम की घटना का जिक्र करने के लिए सरकार की तरफ से कुछ भी जज्बाती बयान नहीं मिला।

भारत की कूटनीति – 59 सांसदों की यात्रा का क्या फायदा?

भारत के 59 सांसदों का दल 32 देशों की यात्रा पर निकला। उस समय प्रधानमंत्री मोदी के इस कूटनीतिक कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। लेख लिखे गए कि पाकिस्तान को अलग-थलग (आइसोलेट) किया जा रहा है।

पाकिस्तान को अलग-थलग करने में कितनी सफलता मिली? उन सभी 59 सांसदों को आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए और बताना चाहिए कि क्या वाकई ऐसी यात्राओं से कुछ फर्क पड़ता है।

आप बताइए – पहलगाम की घटना के एक साल बाद भारत कहां खड़ा है? पाकिस्तान कहां नजर आ रहा है? क्या उस हमले में मारे गए लोगों के परिवारों को इंसाफ मिल गया है?

चिंता का विषय यह है कि हर बार गले मिलने से ईद नहीं हो जाती और गले मिलने वाला दोस्त नहीं बन जाता।

आगे क्या होगा – अनिश्चितता का दौर

शहबाज शरीफ ने उम्मीद जताई है कि दोनों साइड सीजफायर का पालन करेंगे और इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत में ठोस नतीजा निकल आएगा। दूसरे दौर की बातचीत कब होगी, इसकी बात उन्होंने नहीं की।

ईरान के प्रेस को पढ़ते हुए लगा कि बातचीत अभी भी हो सकती है – बस अमेरिका हॉर्मुज से ब्लॉकेड हटा ले।

अमेरिका अगर नाकेबंदी नहीं हटाएगा तो हॉर्मुज में तनाव बना रहेगा। जहाजों का आना-जाना शुरू नहीं होगा तो स्थिति नॉर्मल नहीं होगी। दुनिया की अर्थव्यवस्था त्राहिमाम करती रहेगी।

तेल के टैंकरों ने अलग रूट ले लिया है। उस रूट से लौटकर हॉर्मुज के रूट पर आने में तीन-चार महीने लग जाएंगे। इसलिए तेल का संकट इस सीजफायर से बेहतर नहीं होने वाला, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है।

यही कारण है कि सीजफायर की खबर सुनकर भारत का बाजार कभी उछल जाया करता था – दो महीने से आज बैठ ही गया। सेंसेक्स और निफ्टी का भी दिल टूट गया।

ईरान के लिए भी चुनौती

चुनौती ईरान के लिए भी है। ईरान की सभ्यता के वीडियो अब बोर करने लगे हैं। इन शानदार विरासतों को देखकर जी भर गया। एक तस्वीर से आप बहुत कुछ नहीं जान पाते और एक तस्वीर को महीना भर नहीं देख सकते।

ईरान ने प्रोपेगेंडा में बढ़त बनाई। वह भी बोरियत का शिकार होने लगा है। ईरान बातचीत की मेज पर नहीं लौटेगा तो इस दौरान दुनिया से क्या कहेगा?

क्या उसकी ललकारों पर दुनिया हमदर्दी जताएगी या ईरान को किसी की हमदर्दी नहीं चाहिए? वह जंग का फैसला दुश्मन की चालाकियों को समझकर ही करेगा?

ईरान को लेबनान का मामला भी चुभ रहा है। जब इस्लामाबाद बातचीत के लिए चला गया था, तब लेबनान पर बमबारी कर नेतन्याहू ने पहले दौर की बातचीत को पटरी से उतार दिया।

उसके बाद ट्रंप ने लेबनान में भी सीजफायर कराया और नेतन्याहू को हिदायत दी कि हमला नहीं करना है। मगर ईरान का कहना है कि जब इजराइल पर हमला करने की उसने धमकी दी, तब जाकर अमेरिका ने नेतन्याहू को समझाया।

रेंगती हुई जंग का अंत कहां?

आपने किसी जंग को रेंगते देखा है? ईरान, अमेरिका और इजराइल की जंग रेंगने लगी है। डेडलाइन देते-देते ट्रंप अब डेडलाइन से भी तंग आ गए।

पिछले 53 दिनों में जंग ने कई रंग बदले। ट्रंप जंग करना चाहते हैं तो हारते दिखते हैं। बातचीत करना चाहते हैं तो भागते दिखते हैं।

देखा जाए तो, ट्रंप को अब इस जंग से कुछ नहीं मिलने वाला, यह बात वो जानते हैं। लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि जंग से निकलने का रास्ता क्यों नहीं मिल रहा है।

इतिहास विजेताओं के इतिहास से बोर हो गया है। जिन विजेताओं ने जीत के बाद महल बनाए, इतिहास के चैप्टर में शामिल हुए – उन्हें मामूली सरकारों ने एक झटके में चैप्टर से निकाल दिया।

इसीलिए विजेता बनना इस युग में घाटे का सौदा है। कम से कम ऐसा विजेता बिल्कुल न बनें जिसे इतिहास याद रखना चाहता है।

शुक्र मनाइए ट्रंप का सीना 56 इंच का नहीं। इस तरह के मर्द होने के झांसे में फंसे रहते तो एक बार बमबारी की बात कर दी तो बमबारी ही करते रहते और दुनिया गजा में बदल जाती।

उम्मीद की किरण यह है कि ट्रंप की तारीफ होनी चाहिए – भले दो दिनों के लिए सही – कि वे अपनी किसी बात पर कायम नहीं रहते। उनके पलट जाने के कारण अप्रैल में दुनिया ने शांति की झलक देखी।


मुख्य बातें (Key Points)

• ट्रंप ने Iran America Ceasefire को अनिश्चितकाल तक बढ़ा दिया लेकिन कोई डेडलाइन नहीं दी – कहा ईरान प्रस्ताव लाए तब बातचीत होगी

• इस्लामाबाद वार्ता पूरी तरह फेल – ईरान ने डेलीगेशन नहीं भेजा, कहा हॉर्मुज स्ट्रेट से ब्लॉकेड हटाए तो बातचीत होगी

• पाकिस्तान की भूमिका – फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और PM शहबाज शरीफ की मेहनत बेकार, ट्रंप ने उन्हें क्रेडिट दिया

• अमेरिकी अधिकारी एंड्रयू हग का वायरल वीडियो – रेस्तरां में अपनी सरकार की पोल खोलते पकड़े गए, ईरान का अविश्वास बढ़ा

• हॉर्मुज नाकेबंदी जारी – अमेरिका के ट्रेजरी सचिव ने कहा ब्लॉकेज जारी रहेगा, ईरान की आमदनी टारगेट की जा रही है

• ईरान में 3,375 लोग मारे गए, 1,300 स्कूलों में से 775 की मरम्मत हो चुकी, अक्टूबर तक बाकी भी ठीक होंगे

• पहलगाम हमला की आज पहली बरसी – 17 मासूम मारे गए थे, न्याय अभी तक नहीं मिला, सरकार चुप

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