Bikram Singh Majithia Bail : अमृतसर। Bikram Singh Majithia और उनके साथियों को बड़ी राहत मिली है। वधीक जिला एवं सेशन जज की अदालत ने आज शिरोमणी अकाली दल के सीनियर नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया समेत तीन अन्य को जमानत दे दी है। यह मामला मजीठा पुलिस थाने में कथित टकराव से जुड़ा है, जहां पुलिस अपने आरोपों के समर्थन में सीसीटीवी फुटेज भी पेश नहीं कर पाई।
देखा जाए तो यह फैसला अकाली दल के लिए एक बड़ी कानूनी जीत है। मजीठिया के साथ जोध सिंह समरा और जतिंदर पाल सिंह को भी राहत मिली है। अदालत ने पुलिस की तरफ से सबूतों की कमी को गंभीरता से लिया।
🔍 यह भी पढ़ें- Bikram Singh Majithia केस में गनीव कौर का CM Mann पर पलटवार
वकील बिक्रमजीत सिंह बाठ को पहले ही मिली थी क्लीन चिट
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले मजीठिया के कानूनी सलाहकार बिक्रमजीत सिंह बाठ, जिनका नाम FIR में दर्ज था, उन्हें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बरी कर दिया था। बाठ एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं और अकाली दल के समर्थक जोबनप्रीत सिंह के खिलाफ दर्ज FIR की कॉपी लेने के लिए अपनी पेशेवर हैसियत में मजीठिया के साथ थाने गए थे।
बाठ को FIR में नामित किए जाने पर अमृतसर बार एसोसिएशन ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। वकीलों ने पुलिस और सरकार पर आरोप लगाया कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने एक SIT का गठन किया, जिसने बाद में यह निष्कर्ष निकाला कि बाठ बेगुनाह हैं।
🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा अपडेट: Bikram Majithia को अदालत से नहीं मिली राहत, अब आगे क्या जानें
पूरे मामले की पृष्ठभूमि: क्या था विवाद?
समझने वाली बात यह है कि जोबनप्रीत सिंह को हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से संबंधित मामलों में हिरासत में लिया गया था। अकाली दल के नेताओं ने दावा किया कि उसकी हिरासत गैर-कानूनी और राजनीतिक प्रेरित थी। उनका कहना था कि उसके परिवार को गिरफ्तारी की सूचना तक नहीं दी गई।
जब मजीठिया को इस कथित नजरबंदी की जानकारी मिली, तो उन्होंने पार्टी समर्थकों और किसान नेताओं के साथ पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने पुलिस पर दबाव और धक्केशाही का आरोप लगाया।
🔍 यह भी पढ़ें- Bikram Singh Majithia के घर छापा, 50 लोगों पर केस दर्ज
पुलिस का पक्ष: क्या कहती है रिपोर्ट?
पुलिस के अनुसार मजीठिया और उनके समर्थकों ने फिर थाने के अहाते में घुसकर जबरदस्ती जोबनप्रीत को छुड़ाने की कोशिश की। पुलिस ने आरोप लगाया कि मजीठिया ने एक सब-इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन छीन लिया और हंगामे के दौरान सरकारी दस्तावेज फाड़ दिए।
इसके बाद मजीठिया और अन्य के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों को रोकने और पुलिस थाने के अंदर हंगामा करने के आरोपों के तहत केस दर्ज किया गया था।
CCTV फुटेज की गैरमौजूदगी ने पलटा पासा
अमनबीर सिंह सियाली ने कहा कि पुलिस, अदालत द्वारा मांगी गई पुलिस थाने के अंदर हमला करने और हंगामा करने संबंधी सीसीटीवी कैमरे की फुटेज पेश नहीं कर सकी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सबसे बड़ा सबूत था जो पुलिस के आरोपों को साबित कर सकता था।
अगर गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब पंजाब में किसी संवेदनशील मामले में सीसीटीवी फुटेज गायब या प्रस्तुत नहीं की गई हो। इस कमी के चलते अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत देने का फैसला किया।
राजनीतिक असर: अकाली दल को बड़ी राहत
यह फैसला पंजाब की राजनीति में हलचल पैदा कर सकता है। शिरोमणी अकाली दल ने लगातार आरोप लगाया है कि सरकार उनके नेताओं को राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है। मजीठिया को जमानत मिलना पार्टी के लिए नैतिक बढ़त देगा।
और बस यहीं से शुरू हो सकती है असली कहानी। क्योंकि अब सवाल उठेगा कि पुलिस थाने में सीसीटीवी क्यों काम नहीं कर रहा था? या फिर फुटेज जानबूझकर छिपाई गई?
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि बिना ठोस सबूत के किसी भी आरोप को अदालत में साबित करना मुश्किल है। सीसीटीवी फुटेज की अनुपस्थिति ने पुलिस के मामले को कमजोर कर दिया। वहीं, अमृतसर बार एसोसिएशन का विरोध भी इस मामले में निर्णायक साबित हुआ।
इससे साफ होता है कि न्यायपालिका ने सबूतों के आधार पर फैसला लिया, न कि राजनीतिक दबाव के आधार पर।
मुख्य बातें (Key Points)
• बिक्रम सिंह मजीठिया और दो साथियों को मजीठा थाना मामले में जमानत मिली
• पुलिस अदालत में सीसीटीवी फुटेज पेश करने में विफल रही
• वकील बिक्रमजीत सिंह बाठ को SIT ने पहले ही बरी कर दिया था
• अमृतसर बार एसोसिएशन के विरोध का असर दिखा
• मामला जोबनप्रीत सिंह की कथित अवैध हिरासत से जुड़ा था













