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The News Air - Breaking News - Bikram Singh Majithia को मिली जमानत: CCTV फुटेज पेश नहीं कर सकी पुलिस

Bikram Singh Majithia को मिली जमानत: CCTV फुटेज पेश नहीं कर सकी पुलिस

अमृतसर की अदालत ने शिरोमणी अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और दो साथियों को मजीठा थाना मामले में जमानत दे दी है, पुलिस सीसीटीवी सबूत पेश करने में विफल रही।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
सोमवार, 15 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Bikram Singh Majithia Bail
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Bikram Singh Majithia Bail : अमृतसर। Bikram Singh Majithia और उनके साथियों को बड़ी राहत मिली है। वधीक जिला एवं सेशन जज की अदालत ने आज शिरोमणी अकाली दल के सीनियर नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया समेत तीन अन्य को जमानत दे दी है। यह मामला मजीठा पुलिस थाने में कथित टकराव से जुड़ा है, जहां पुलिस अपने आरोपों के समर्थन में सीसीटीवी फुटेज भी पेश नहीं कर पाई।

देखा जाए तो यह फैसला अकाली दल के लिए एक बड़ी कानूनी जीत है। मजीठिया के साथ जोध सिंह समरा और जतिंदर पाल सिंह को भी राहत मिली है। अदालत ने पुलिस की तरफ से सबूतों की कमी को गंभीरता से लिया।

🔍 यह भी पढ़ें- Bikram Singh Majithia केस में गनीव कौर का CM Mann पर पलटवार

वकील बिक्रमजीत सिंह बाठ को पहले ही मिली थी क्लीन चिट

दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले मजीठिया के कानूनी सलाहकार बिक्रमजीत सिंह बाठ, जिनका नाम FIR में दर्ज था, उन्हें स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने बरी कर दिया था। बाठ एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं और अकाली दल के समर्थक जोबनप्रीत सिंह के खिलाफ दर्ज FIR की कॉपी लेने के लिए अपनी पेशेवर हैसियत में मजीठिया के साथ थाने गए थे।

बाठ को FIR में नामित किए जाने पर अमृतसर बार एसोसिएशन ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। वकीलों ने पुलिस और सरकार पर आरोप लगाया कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने एक SIT का गठन किया, जिसने बाद में यह निष्कर्ष निकाला कि बाठ बेगुनाह हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा अपडेट: Bikram Majithia को अदालत से नहीं मिली राहत, अब आगे क्या जानें

पूरे मामले की पृष्ठभूमि: क्या था विवाद?

समझने वाली बात यह है कि जोबनप्रीत सिंह को हाल ही में हुए नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों से संबंधित मामलों में हिरासत में लिया गया था। अकाली दल के नेताओं ने दावा किया कि उसकी हिरासत गैर-कानूनी और राजनीतिक प्रेरित थी। उनका कहना था कि उसके परिवार को गिरफ्तारी की सूचना तक नहीं दी गई।

जब मजीठिया को इस कथित नजरबंदी की जानकारी मिली, तो उन्होंने पार्टी समर्थकों और किसान नेताओं के साथ पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने पुलिस पर दबाव और धक्केशाही का आरोप लगाया।

🔍 यह भी पढ़ें- Bikram Singh Majithia के घर छापा, 50 लोगों पर केस दर्ज

पुलिस का पक्ष: क्या कहती है रिपोर्ट?

पुलिस के अनुसार मजीठिया और उनके समर्थकों ने फिर थाने के अहाते में घुसकर जबरदस्ती जोबनप्रीत को छुड़ाने की कोशिश की। पुलिस ने आरोप लगाया कि मजीठिया ने एक सब-इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन छीन लिया और हंगामे के दौरान सरकारी दस्तावेज फाड़ दिए।

इसके बाद मजीठिया और अन्य के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों को रोकने और पुलिस थाने के अंदर हंगामा करने के आरोपों के तहत केस दर्ज किया गया था।

CCTV फुटेज की गैरमौजूदगी ने पलटा पासा

अमनबीर सिंह सियाली ने कहा कि पुलिस, अदालत द्वारा मांगी गई पुलिस थाने के अंदर हमला करने और हंगामा करने संबंधी सीसीटीवी कैमरे की फुटेज पेश नहीं कर सकी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सबसे बड़ा सबूत था जो पुलिस के आरोपों को साबित कर सकता था।

अगर गौर करें तो यह पहली बार नहीं है जब पंजाब में किसी संवेदनशील मामले में सीसीटीवी फुटेज गायब या प्रस्तुत नहीं की गई हो। इस कमी के चलते अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत देने का फैसला किया।

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राजनीतिक असर: अकाली दल को बड़ी राहत

यह फैसला पंजाब की राजनीति में हलचल पैदा कर सकता है। शिरोमणी अकाली दल ने लगातार आरोप लगाया है कि सरकार उनके नेताओं को राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है। मजीठिया को जमानत मिलना पार्टी के लिए नैतिक बढ़त देगा।

और बस यहीं से शुरू हो सकती है असली कहानी। क्योंकि अब सवाल उठेगा कि पुलिस थाने में सीसीटीवी क्यों काम नहीं कर रहा था? या फिर फुटेज जानबूझकर छिपाई गई?

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी जानकारों का मानना है कि बिना ठोस सबूत के किसी भी आरोप को अदालत में साबित करना मुश्किल है। सीसीटीवी फुटेज की अनुपस्थिति ने पुलिस के मामले को कमजोर कर दिया। वहीं, अमृतसर बार एसोसिएशन का विरोध भी इस मामले में निर्णायक साबित हुआ।

इससे साफ होता है कि न्यायपालिका ने सबूतों के आधार पर फैसला लिया, न कि राजनीतिक दबाव के आधार पर।


मुख्य बातें (Key Points)

• बिक्रम सिंह मजीठिया और दो साथियों को मजीठा थाना मामले में जमानत मिली
• पुलिस अदालत में सीसीटीवी फुटेज पेश करने में विफल रही
• वकील बिक्रमजीत सिंह बाठ को SIT ने पहले ही बरी कर दिया था
• अमृतसर बार एसोसिएशन के विरोध का असर दिखा
• मामला जोबनप्रीत सिंह की कथित अवैध हिरासत से जुड़ा था


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: बिक्रम सिंह मजीठिया को किस मामले में जमानत मिली है?

उत्तर: मजीठिया को मजीठा पुलिस थाने में कथित टकराव, सरकारी कर्मचारियों को रोकने और हंगामा करने के मामले में जमानत मिली है।

प्रश्न 2: पुलिस के मामले में सबसे बड़ी कमी क्या थी?

उत्तर: पुलिस अदालत द्वारा मांगी गई सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं कर पाई, जो उनके आरोपों का मुख्य सबूत होती।

प्रश्न 3: अमृतसर बार एसोसिएशन ने विरोध क्यों किया था?

उत्तर: वकील बिक्रमजीत सिंह बाठ को FIR में नामित किए जाने पर बार एसोसिएशन ने विरोध किया और आरोप लगाया कि वकीलों को निशाना बनाया जा रहा है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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