Majitha Police Station Case में बिक्रम सिंह मजीठिया को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। जिला अदालत ने उनकी Bikram Majithia Anticipatory Bail की अर्जी पर सुनवाई 11 जून तक के लिए टाल दी है। हालांकि इस दौरान उनके कानूनी सलाहकार एडवोकेट बिक्रमजीत बाठ को इस केस से राहत मिल गई है। देखा जाए तो यह मामला पंजाब की राजनीति में गर्मागर्म बहस का विषय बना हुआ है।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और अन्य के खिलाफ 31 मई को पुलिस थाना मजीठा में एक केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि उन्होंने जबरन थाने में प्रवेश किया और एक बंधक को छुड़ाने का प्रयास किया। इस मामले में मजीठिया सहित कई अन्य लोगों को नामजद किया गया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस घटना के बाद से ही पंजाब की राजनीति में तनाव का माहौल बना हुआ है। शिरोमणि अकाली दल ने इसे राजनीतिक बदला लेने की कार्रवाई करार दिया है।
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अदालत में क्या हुआ?
बिक्रम मजीठिया ने 9 जून को जिला अदालत में गिरफ्तारी रोकने और Bikram Majithia Anticipatory Bail की अर्जी दायर की थी। आज इसकी सुनवाई हुई लेकिन अदालत ने मामले को 11 जून तक के लिए टाल दिया। दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान विशेष जांच टीम (SIT) ने अदालत को बताया कि एडवोकेट बिक्रमजीत बाठ घटना वाले दिन मजीठिया के साथ केवल कानूनी सलाहकार के रूप में थे और उनका इस मामले में कोई रोल नहीं है। इस कारण उन्हें गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं है।
मजीठिया के वकील एडवोकेट अमनबीर सिंह सियाली ने यह जानकारी दी। अगर गौर करें तो यह राहत कम से कम मजीठिया की कानूनी टीम के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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पुलिस की कार्रवाई
केस दर्ज होने के बाद 1 जून को जिला ग्रामीण पुलिस ने बिक्रम सिंह मजीठिया को गिरफ्तार करने के लिए अमृतसर के ग्रीन एवेन्यू स्थित उनके आवास पर छापेमारी की थी। लेकिन वे उस समय घर पर नहीं मिले। समझने वाली बात है कि तब से लेकर अब तक मजीठिया सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
इसी बीच मजीठा कस्बे में बिक्रम सिंह मजीठिया के लापता होने संबंधी पोस्टर लगाए गए हैं। वहीं दूसरी ओर मजीठिया के समर्थकों ने “टाइगर अभी जिंदा है” के नाम से पोस्टर लगाए हैं, जो इस मामले को और भी दिलचस्प बना देते हैं।
राजनीतिक बयानबाजी
शिरोमणि अकाली दल ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बदलाखोरी की भावना से दर्ज किया गया केस करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह AAP सरकार द्वारा विपक्षी नेताओं को परेशान करने की साजिश है। चिंता का विषय यह है कि ऐसे मामले पंजाब की राजनीति में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- बिक्रम सिंह मजीठिया को अदालत से फिलहाल कोई राहत नहीं
- अग्रिम जमानत पर सुनवाई 11 जून को होगी
- एडवोकेट बिक्रम बाठ को केस से राहत मिली
- 31 मई को मजीठा थाने में जबरन घुसने का आरोप
- 1 जून को पुलिस ने घर पर छापा मारा था
- अकाली दल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई













