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The News Air - NEWS-TICKER - CJI Surya Kant on AI in Courts: जजों की जगह नहीं ले सकती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

CJI Surya Kant on AI in Courts: जजों की जगह नहीं ले सकती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि अदालतों में AI सिर्फ सहायक साधन, फैसले जज ही लेंगे, स्थायी कमेटी बनाने का प्रस्ताव

Ajay Kumar by Ajay Kumar
गुरूवार, 27 अगस्त 2026
in NEWS-TICKER, Breaking News, राष्ट्रीय
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AI in Indian Courts
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AI in Indian Courts की भूमिका को लेकर अब साफ दिशानिर्देश आ गए हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने बुधवार को कहा कि अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वर्तों सिर्फ कामों में मदद के लिए हो सकती है। यह कदी भी जजों के फैसले या उनकी जमीर की जगह नहीं ले सकती। उन्होंने यह भी बताया कि AI की सही वर्तों और इसकी देखभाल के लिए एक स्थायी कमेटी बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

🔍 यह भी पढ़ें- CJI Suryakant के Controversial Remarks पर बवाल: ‘Unemployed Youth like Cockroaches’ बयान पर क्लेरिफिकेशन जारी

जर्मनी के जज के साथ खास बैठक में CJI का बयान

जर्मनी में Federal Court of Justice के प्रधान जज उलरिख हरमन के साथ मीटिंग के दौरान, CJI कांत ने बताया कि अदालतों में AI की वर्तों सिर्फ छोटे-मोटे कामों के लिए की जा रही है। देखा जाए तो इनमें कानूनी जानकारी ढूंढना, फैसलों का 16 विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करना और लोगों को केस की स्थिति के बारे में जानकारी देना शामिल है।

दिलचस्प बात यह है कि CJI ने साफ किया कि भले ही ये तकनीकी साधन काम को आसान बनाते हैं, लेकिन ये अदालती फैसले नहीं करते।

🔍 यह भी पढ़ें- ‘Entry Ban करवा देंगे Supreme Court में’: CJI Suryakant ने Frivolous Petition पर याचिकाकर्ता को लगाई फटकार

AI केवल सोच-विचार में मदद कर सकता है

CJI सूर्य कांत ने अपने बयान में कहा: “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सोच-विचार में मदद कर सकती है, पर यह जज के फैसले की जगह नहीं ले सकती। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत AI को सिर्फ दफ्तरी कामों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसे गवाहों की भरोसेयोगता या जमानत जैसे संवेदनशील मामलों में फैसला लेने की इजाजत नहीं है।”

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि CJI ने तकनीक और न्यायिक स्वतंत्रता के बीच एक स्पष्ट लकीर खींच दी है। AI को एक टूल के रूप में देखा जा रहा है, न कि निर्णयकर्ता के रूप में।

भारतीय अदालतों में AI का मौजूदा इस्तेमाल

अगर गौर करें तो भारतीय न्यायपालिका में AI का इस्तेमाल पिछले कुछ सालों से बढ़ रहा है। लेकिन इसका दायरा सीमित रखा गया है:

1. कानूनी रिसर्च: वकीलों और जजों को पुराने फैसले और कानूनी प्रावधान खोजने में मदद

2. अनुवाद सेवाएं: सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का 16 भारतीय भाषाओं में अनुवाद

3. केस स्टेटस: लोगों को उनके मामलों की स्थिति के बारे में स्वचालित जानकारी

4. दस्तावेज प्रबंधन: केस फाइलों का डिजिटल प्रबंधन और खोज

AI के इस्तेमाल की सीमाएं: क्या नहीं करेगा AI

CJI ने स्पष्ट किया कि AI को निम्नलिखित कामों में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा:

AI नहीं करेगाजज करेंगे
गवाहों की विश्वसनीयता तय करनासाक्ष्य का मूल्यांकन
जमानत देने का फैसलासंवेदनशील मामलों में निर्णय
सजा की मात्रा तय करनाकानून की व्याख्या
नैतिक मुद्दों पर फैसलान्यायिक विवेक का प्रयोग
स्थायी कमेटी बनाने का प्रस्ताव

समझने वाली बात यह है कि AI की निगरानी और सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि:

  • AI का इस्तेमाल निर्धारित सीमाओं में ही हो
  • डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा बनी रहे
  • तकनीक अपडेट और सुरक्षित रहे
  • न्यायिक स्वतंत्रता पर कोई असर न पड़े
तकनालॉजी और अदालती कामकाज: भारत और जर्मनी की सहमति

CJI ने कहा कि भारत और जर्मनी दोनों इस बात से सहमत हैं कि अदालतों में भले ही कितनी भी तकनालॉजी आ जाए, लेकिन अंतिम फैसले सिर्फ कानूनी तौर पर अधिकृत जज ही लेंगे।

उन्होंने कहा कि भारत का मकसद अदालतों को सिर्फ तकनीकी बनाना नहीं, बल्कि हर आम आदमी के लिए उन्हें ज्यादा आसान, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।

देखा जाए तो यह दृष्टिकोण “न्याय तक पहुंच” (Access to Justice) के सिद्धांत पर आधारित है। तकनीक को न्याय व्यवस्था को आम लोगों के करीब लाने का माध्यम बनाया जा रहा है।

आपसी समझौतों (मध्यस्थता) पर जोर

CJI ने बताया कि केस के निपटारे के लिए आपसी समझौतों (मीडिएशन) और लोक अदालतों को प्रोत्साहित करना उनकी पहली प्राथमिकता रही है। इससे बड़े शहरों से दूर बैठे आम लोगों के लिए भी इंसाफ तक पहुंच बहुत आसान हो गई है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि AI को भी मध्यस्थता प्रक्रिया में सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। जैसे केसों को उनकी प्रकृति के अनुसार वर्गीकृत करना, जो मामले समझौते के लिए उपयुक्त हैं उन्हें चिन्हित करना आदि।

CJI की जर्मनी-UK यात्रा: अंतरराष्ट्रीय सहयोग

बताने योग्य है कि CJI सूर्य कांत इस समय चार दिनों के दौरे पर जर्मनी और UK गए हुए हैं, जहां वे कई खास प्रोग्रामों में हिस्सा लेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य न्यायिक सुधारों और तकनीक के इस्तेमाल पर अनुभव साझा करना है।

अगर गौर करें तो यह यात्रा भारतीय न्यायपालिका के अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव को दिखाती है। दुनिया भर की अदालतें इस समय AI के इस्तेमाल को लेकर नीतियां बना रही हैं। ऐसे में अनुभव साझा करना बेहद जरूरी है।

दुनिया भर में AI और न्यायपालिका

दुनिया के कई देशों में AI का न्यायपालिका में इस्तेमाल शुरू हो चुका है:

अमेरिका: कुछ राज्यों में जमानत के फैसलों में AI-आधारित रिस्क असेसमेंट का इस्तेमाल (विवादास्पद)

चीन: “Internet Courts” जहां AI जज की भूमिका निभाता है (छोटे मामलों में)

एस्टोनिया: छोटे दावों के लिए “AI Judge” का प्रयोग

UK: केस मैनेजमेंट और प्रशासनिक कामों में AI का इस्तेमाल

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समझने वाली बात यह है कि भारत ने एक संतुलित रास्ता चुना है – AI का इस्तेमाल करें, लेकिन न्यायिक निर्णय मानव जजों के पास ही रहे।

भारतीय न्यायपालिका का डिजिटल सफर

पिछले कुछ सालों में भारतीय न्यायपालिका ने डिजिटलीकरण में बड़ी छलांग लगाई है:

  • ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट: पूरे देश में डिजिटल अदालतें
  • वर्चुअल हियरिंग: COVID के दौरान शुरू हुई, अब नियमित
  • ई-फाइलिंग: ऑनलाइन केस दर्ज करने की सुविधा
  • SUPACE: सुप्रीम कोर्ट का पोर्टल
  • SUVAS: वर्चुअल केस सुनवाई सिस्टम
चुनौतियां और आगे की राह

AI in Indian Courts को लेकर कुछ चुनौतियां भी हैं:

1. डेटा प्राइवेसी: न्यायिक डेटा बेहद संवेदनशील है
2. बायस: AI सिस्टम में पूर्वाग्रह का खतरा
3. पारदर्शिता: AI के निर्णय की प्रक्रिया समझना जरूरी
4. तकनीकी साक्षरता: जजों और वकीलों को प्रशिक्षण की जरूरत

CJI का यह बयान इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक सुरक्षित रास्ता दिखाता है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • CJI सूर्य कांत ने कहा AI अदालतों में सिर्फ सहायक साधन, फैसले जज ही लेंगे
  • सुप्रीम कोर्ट में AI का इस्तेमाल कानूनी रिसर्च, अनुवाद और केस स्टेटस तक सीमित
  • गवाहों की विश्वसनीयता, जमानत जैसे संवेदनशील मामलों में AI का इस्तेमाल नहीं होगा
  • AI की निगरानी के लिए स्थायी कमेटी बनाने का प्रस्ताव
  • जर्मनी के Federal Court प्रमुख उलरिख हरमन के साथ मीटिंग में यह बयान
  • भारत और जर्मनी दोनों सहमत: अंतिम फैसला मानव जजों का ही होगा
  • CJI चार दिन की जर्मनी-UK यात्रा पर, न्यायिक सुधारों पर चर्चा
  • मध्यस्थता और लोक अदालतों को बढ़ावा देना प्राथमिकता

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारतीय अदालतों में AI का इस्तेमाल कैसे हो रहा है?

उत्तर: भारतीय अदालतों में AI का इस्तेमाल सीमित दायरे में हो रहा है – कानूनी रिसर्च, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का 16 भाषाओं में अनुवाद, केस स्टेटस की जानकारी देना और दस्तावेज प्रबंधन। CJI सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ सहायक साधन है।

प्रश्न 2: क्या AI भारत में जज की जगह ले सकता है?

उत्तर: नहीं। CJI सूर्य कांत ने साफ कहा है कि AI कभी भी जजों के फैसले या उनकी जमीर की जगह नहीं ले सकती। गवाहों की विश्वसनीयता, जमानत जैसे संवेदनशील मामलों में फैसला सिर्फ मानव जज ही लेंगे। AI को सिर्फ दफ्तरी कामों तक सीमित रखा जाएगा।

प्रश्न 3: AI की निगरानी कौन करेगा?

उत्तर: CJI सूर्य कांत ने AI की सही वर्तों और देखभाल के लिए एक स्थायी कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा है। यह कमेटी सुनिश्चित करेगी कि AI का इस्तेमाल निर्धारित सीमाओं में हो और न्यायिक स्वतंत्रता पर कोई असर न पड़े।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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