Dr Gurpreet Kaur Defamation Case –पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann की पत्नी Dr. Gurpreet Kaur ने अपने ऊपर झूठे दोष लगाने के मामले में अकाली आगू Bikram Singh Majithia, Harsimrat Kaur Badal और कांग्रेसी आगू Sukhpal Singh Khaira के खिलाफ अदालत में अपराधिक मानहानि का केस दर्ज करवाया है।
देखा जाए तो यह मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर अदालत तक पहुंच गया है। दिलचस्प बात यह है कि एक महिला डॉक्टर के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए और अब वह कानूनी लड़ाई लड़ने को मजबूर हुई हैं।
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किन धाराओं के तहत केस दर्ज?
डॉ. गुरप्रीत कौर ने Chandigarh Court में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 210 और 222 के तहत शिकायत दर्ज करवाई है, जो भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 के अधीन आने वाले अपराध से संबंधित है।
समझने वाली बात यह है कि BNS धारा 356 अपराधिक मानहानि से संबंधित है, जिसमें किसी की प्रतिष्ठा को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने पर सजा का प्रावधान है।
शिकायत में क्या कहा गया?
अपनी शिकायत में डॉ. गुरप्रीत कौर ने बताया कि वह एक योग्य मेडिकल पेशेवर हैं और समाज में उनका एक अच्छा रुतबा और वक्कार है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शिकायत में उन्होंने अपनी professional पहचान पर जोर दिया है। वह सिर्फ CM की पत्नी नहीं हैं, बल्कि एक qualified doctor हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार मुलजमों द्वारा लगाए गए बेबुनियाद दोषों से उनके चरित्र और शोहरत को न सिर्फ सामाजिक तौर पर बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी ऐसा बड़ा घाटा पहुंचा है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती।
मजीठिया ने क्या आरोप लगाए थे?
डॉ. गुरप्रीत कौर ने बताया कि Bikram Singh Majithia ने उनके विरुद्ध झूठी मुहिम छेड़ी है। 1 सितंबर, 2026 को चंडीगढ़ में की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मजीठिया ने बेबुनियाद और झूठे बयान दिए।
आरोप क्या था?
मजीठिया ने दोष लगाया था कि डॉ. गुरप्रीत कौर ने अपने एक रिश्तेदार के जरिए बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के मुलजम को बचाने के लिए सरकारी तंत्र को प्रभावित करने बदले पैसों की मांग की थी।
और बस यहीं से शुरू होती है पूरी कहानी। यह बेहद गंभीर आरोप है जो एक महिला और एक डॉक्टर की छवि को पूरी तरह धूमिल करने वाला है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या दिखाया गया?
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झूठी ऑडियो रिकॉर्डिंग, तस्वीरें और CCTV फुटेज दिखाकर यह दावा किया गया था कि शिकायतकर्ता के नजदीकी पैसों के लेन-देन में शामिल हैं।
अगर गौर करें तो यह एक सुनियोजित तरीके से की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस थी जहां तथाकथित ‘सबूत’ पेश किए गए।
एक महिला को विशेष रूप से निशाना बनाया
डॉ. गुरप्रीत कौर ने कहा कि सारे मुलजमों ने अपने बयानों में उन्हें खास तौर पर निशाना बनाया है। एक औरत होने के बावजूद उन्हें पैसों की खातिर बलात्कार के मुलजम की मदद करने वाली के रूप में पेश किया गया है।
समझने वाली बात यह है कि यह double insult है – एक तो झूठा आरोप, दूसरे एक महिला के खिलाफ ऐसा आरोप जो उनकी संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।
इन झूठे दोषों से उनके अक्स, शान और निजी पहचान को गहरी ठेस पहुंची है।
अदालत से क्या मांग की?
डॉ. गुरप्रीत कौर ने अदालत के सामने अपील की है कि:
- मुलजमों को अपराधिक मानहानि के दोषों का जवाब देने के लिए तलब किया जाए
- BNS की धारा 356 के तहत सजा दी जाए
- उचित न्याय मिले
यह दर्शाता है कि डॉ. गुरप्रीत कौर ने सिर्फ बयान देने की बजाय कानूनी रास्ता अपनाया है।
पहले भी लग चुकी है अंतरिम रोक
उल्लेखनीय है कि इससे पहले एक अलग मामले में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) Dr. Preekshit की अदालत ने जस्टिस (सेवामुक्त) Ranjit Singh, अकाली आगू Bikram Singh Majithia और कांग्रेसी आगू Sukhpal Singh Khaira पर अगले हुक्मों तक सोशल मीडिया या किसी भी अन्य माध्यम पर रिश्वत की मांग से संबंधित कोई भी अन-प्रमाणित और मानहानियोग्य सामग्री प्रकाशित या शेयर करने पर अंतरिम रोक लगाई हुई है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अदालत पहले ही यह मान चुकी है कि प्रकाशित सामग्री मानहानिकारक हो सकती है, इसलिए अंतरिम रोक लगाई गई।
हरसिमरत कौर बादल और खहिरा भी आरोपी
इस मामले में सिर्फ मजीठिया ही नहीं, बल्कि Harsimrat Kaur Badal (अकाली दल) और Sukhpal Singh Khaira (कांग्रेस) भी आरोपी हैं।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों विपक्षी दलों के नेता एक साथ इस मामले में फंसे हैं। यह दर्शाता है कि राजनीतिक विरोधियों ने मिलकर CM की पत्नी को निशाना बनाया।
राजनीतिक षड्यंत्र या सच्चाई?
यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है – क्या यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है या आरोपों में कोई सच्चाई है?
AAP का पक्ष:
- यह पूरी तरह से झूठे और बेबुनियाद आरोप हैं
- विपक्ष CM और उनके परिवार को बदनाम करना चाहता है
- कोई सबूत नहीं, सिर्फ edited ऑडियो और तस्वीरें
विपक्ष का पक्ष:
- उनके पास ‘सबूत’ हैं
- सच्चाई सामने लानी जरूरी है
- सरकार में भ्रष्टाचार है
अदालत अब तय करेगी कि सच क्या है।
महिला के खिलाफ इस तरह के आरोप कितने गंभीर?
यह मामला इस बात की भी मिसाल है कि राजनीति में महिलाओं को कैसे निशाना बनाया जाता है। एक qualified doctor और CM की पत्नी के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगाना कितना उचित है?
अगर आरोप झूठे साबित होते हैं तो यह एक महिला की गरिमा के साथ खिलवाड़ है। अगर सच हैं तो कानून अपना काम करेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
✅ CM की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर ने मजीठिया, हरसिमरत, खहिरा पर मानहानि का केस
✅ BNS की धारा 356 के तहत चंडीगढ़ कोर्ट में शिकायत
✅ 1 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए थे गंभीर आरोप
✅ रिश्वत मांगने और बलात्कार आरोपी को बचाने का झूठा दोष
✅ पहले ही अदालत ने सोशल मीडिया पर अंतरिम रोक लगाई
✅ चरित्र और प्रतिष्ठा को अपूरणीय नुकसान का दावा










