Iran Oman Hormuz Strait Deal आखिरकार हो गई है, लेकिन एक बड़ी शर्त के साथ। ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने घोषणा की है कि नेविगेशन, जुरिसडिक्शन और कॉस्ट को लेकर ईरान और ओमान के बीच समझौता हो गया है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि Strait of Hormuz तभी खुलेगा जब अमेरिका इस डील को स्वीकार कर ले। IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने बताया कि water sharing, revenue sharing और maritime traffic management पर सहमति बनी है। साथ ही ईरान ने साफ कर दिया है कि कोई भी military vessel यहां से पास नहीं हो सकता। इस घोषणा के बाद crude oil की कीमत $95 से गिरकर $85 के करीब आ गई है।
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IRGC की घोषणा: तीन मुख्य बिंदुओं पर सहमति
देखा जाए तो यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण है। IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने बताया कि ईरान और ओमान के बीच तीन मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनी है:
1. Share of Water (पानी का हिस्सा): Strait of Hormuz में कितना क्षेत्र ईरान के territorial water में होगा और कितना ओमान के, इस पर सहमति
2. Revenue Sharing (राजस्व बंटवारा): जो भी शिप यहां से गुजरेगी, उससे मिलने वाला पैसा दोनों देशों के बीच कैसे बांटा जाएगा
3. Maritime Traffic Management (समुद्री यातायात प्रबंधन): जहाजों की आवाजाही को कैसे मैनेज किया जाएगा
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कोई joint Iran-Oman agreement नहीं है। अभी तक सिर्फ IRGC ने ही इसकी घोषणा की है। ओमान की तरफ से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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Strait of Hormuz: दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोक पॉइंट
अगर गौर करें तो Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण chokepoints में से एक है। दुनिया की लगभग 30% seaborne oil यहीं से गुजरती है। सऊदी अरब, कतर, UAE, बहरेन, कुवैत – सभी देशों का तेल और गैस व्यापार इसी रास्ते से होता है।
समझने वाली बात यह है कि अगर यह रास्ता ब्लॉक हो जाए तो दुनिया की energy supply पर बड़ा असर पड़ता है। यही कारण है कि पिछले 5-6 महीने से जब से ईरान ने इसे ब्लॉक किया है, तब से पूरी दुनिया परेशान है।
रसुवा और मुसंदम गवर्नरेट: किसका कितना हिस्सा
ऊपर की तरफ ईरान है और नीचे अगर देखें तो सिर्फ UAE नहीं है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि Musandam Governorate ओमान का एक छोटा सा क्षेत्र है जो सीधे Strait of Hormuz को छूता है।
यह ओमान की मुख्य भूमि से अलग है लेकिन strategically बेहद महत्वपूर्ण है। इसीलिए यह इलाका खबरों में है। ईरान और ओमान दोनों long-term arrangement देख रहे हैं कि जो शिप यहां से गुजरें, उन्हें कैसे मैनेज किया जाए।
Iran Oman Hormuz Strait Deal: शिप किस तरफ से जाएंगी
अब सबसे दिलचस्प हिस्सा। डील के मुताबिक:
इंडियन ओशन से Persian Gulf जाने वाली शिप्स: सिर्फ ईरान के territorial water से ही गुजर सकती हैं, ओमान की तरफ से नहीं
Persian Gulf से वापस आने वाली शिप्स: दोनों तरफ से आ सकती हैं – ईरान के territorial water से भी और ओमान के territorial water से भी
यह बेहद महत्वपूर्ण है। समझने वाली बात यह है कि ईरान ने अपना नियंत्रण सुनिश्चित कर लिया है। जो भी शिप अंदर जाना चाहती है, उसे ईरान के रास्ते से ही जाना होगा।
No Military Vessels: सबसे बड़ी शर्त
ईरान ने साफ कर दिया है कि कोई भी military vessel यहां से पास नहीं हो सकता। यह सीधे-सीधे अमेरिका को निशाना बनाकर कहा गया है।
देखा जाए तो ईरान कह रहा है कि commercial ships को तो हम allow कर देंगे, लेकिन बड़े-बड़े warships, खासकर अमेरिकी warships को यहां से गुजरने नहीं देंगे।
यह अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है क्योंकि US Navy की Fifth Fleet Bahrain में तैनात है और उनकी आवाजाही के लिए यह रास्ता जरूरी है।
Revenue Sharing: टोल या मेंटेनेंस फी?
यहां पर एक interesting बात है। ईरान और ओमान इसे ‘toll’ नहीं कहना चाहते। वे इसे ‘maintenance fee’ या ‘navigation service charge’ कह रहे हैं।
ईरान का तर्क है कि Strait of Hormuz को मेंटेन करना होता है – navigation aids, traffic management, mine clearing (युद्ध के समय बिछी हुई बारूदी सुरंगें हटाना), route administration – इन सबका खर्च लगता है। इसलिए जो शिप यहां से गुजरती हैं, उन्हें यह फी देनी होगी।
लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी फी ली जाएगी और ईरान-ओमान के बीच कितना-कितना शेयर होगा।
Iran Oman Hormuz Strait Deal का असली कारण: ईरान का economic pressure
अगर गौर करें तो ईरान यह डील क्यों कर रहा है? जाहिर सी बात है – आर्थिक दबाव। जिस तरह से अमेरिका ने ईरान पर sanctions लगाए हैं, oil export रोका है, military expenditure बढ़ गया है, economic war छेड़ा है – इन सबसे ईरान की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई है।
समझने वाली बात यह है कि ईरान को लगता है कि Strait of Hormuz उसका एक बड़ा source of revenue हो सकता है। साथ ही यह उसकी geopolitical power भी बढ़ाता है।
दिलचस्प बात यह है कि युद्ध शुरू होने से पहले ईरान को भी नहीं पता था कि उसके पास इतनी बड़ी ताकत है। लेकिन जब अमेरिका ने war छेड़ा और ईरान ने इसे block किया, तब ईरान को समझ आया कि यह strategic point उसके लिए कितना महत्वपूर्ण है।
45 शिप्स ब्लैकलिस्ट: Ship-to-Ship Transfer पर रोक
इस डील के बाद ईरान ने 45 शिप्स को blacklist कर दिया है। ईरान का आरोप है कि ये शिप्स ‘ship-to-ship transfer’ कर रहे थे।
क्या होता था? ईरान के blockade को bypass करने के लिए शिप्स oil को एक जहाज से दूसरे में transfer करती थीं, फिर तीसरे में – ताकि ईरान को पता न चले कि असल में oil कहां से आ रहा है।
ईरान ने इस पर रोक लगा दी है और 45 ऐसे जहाजों को blacklist कर दिया है जो यहां से अब गुजर नहीं सकते।
अमेरिका की सहमति क्यों जरूरी: ईरान की शर्त
सबसे बड़ा सवाल: यह डील लागू कब होगी?
ईरान ने साफ कहा है कि यह तभी होगा जब अमेरिका इसे स्वीकार कर ले। लेकिन अमेरिका क्यों स्वीकार करे?
देखा जाए तो युद्ध से पहले Strait of Hormuz international water था। कोई भी बिना toll के यहां से गुजर सकता था। लेकिन अमेरिका की बेवकूफी की वजह से – जिस तरह से उसने ईरान पर war छेड़ा, सोचा कि regime change हो जाएगा – अब सारा मामला यहीं आकर अटक गया है।
अब ईरान चाहता है कि:
- अमेरिका यहां से अपनी naval blockade हटाए
- अपने warships वापस बुलाए
- ईरान पर लगे sanctions हटाए
- Compensation दे
तभी यह डील लागू होगी और Strait of Hormuz खुलेगा।
Crude Oil Price: $95 से $85 पर आया
इस डील की घोषणा के बाद थोड़ी राहत मिली है। जब अमेरिका ने वापस से sanctions लगाए थे तो crude oil की कीमत $95 तक पहुंच गई थी। लेकिन अब यह $85 के करीब आ रही है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर यह डील पूरी तरह लागू हो जाती है और Strait of Hormuz खुल जाता है, तो oil prices और भी नीचे आ सकते हैं। इससे पूरी दुनिया को राहत मिलेगी।
अमेरिका के लिए बड़ी बेइज्जती
समझने वाली बात यह है कि यह अमेरिका के लिए बहुत बड़ी हार होगी। युद्ध शुरू करने से पहले ऐसा कोई scenario नहीं था। अब अगर अमेरिका इस डील को मानता है तो:
- ईरान का Strait of Hormuz पर नियंत्रण स्वीकार करना होगा
- US military vessels को रोकने की ईरान की शक्ति माननी होगी
- Sanctions हटाने होंगे
- ईरान को revenue share देना होगा
यह सब अमेरिका के लिए बड़ी बेइज्जती है। लेकिन दूसरी तरफ अगर वह नहीं मानता तो Strait of Hormuz बंद रहेगा और दुनिया की energy crisis बढ़ती रहेगी।
ओमान की भूमिका: Neutral Intermediary
ओमान एक neutral stance लेता है। वह ईरान के साथ भी बात करता है और अमेरिका के साथ भी। यही कारण है कि ओमान को इस डील में शामिल किया गया है।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में Donald Trump ने ओमान को भी धमकी दे दी थी कि अगर वह इसमें interfere करेगा तो अमेरिका ओमान को भी bomb कर देगा।
फिर भी ओमान एक intermediary की तरह काम कर रहा है। वह दोनों पक्षों के बीच बातचीत करवा रहा है।
Traffic Management vs Territory Deal
यहां एक important clarification जरूरी है। यह कोई territorial deal नहीं है। यह traffic management और security arrangement deal है।
आमतौर पर दो देशों के बीच समझौते में यह होता है कि इतनी territory आपकी, इतनी मेरी। लेकिन यहां context थोड़ा अलग है। यह deal इस बारे में है कि शिप्स कैसे गुजरेंगी, किसका कितना revenue होगा, security कैसे maintain होगी।
मुख्य बातें (Key Points)
- ईरान-ओमान के बीच Strait of Hormuz पर डील, IRGC ने की घोषणा
- Water sharing, revenue sharing और maritime traffic management पर सहमति
- Indian Ocean से आने वाली शिप्स सिर्फ ईरान के territorial water से गुजरेंगी
- वापसी में दोनों तरफ से आ सकती हैं
- कोई military vessel नहीं गुजर सकता, अमेरिकी warships पर सीधा प्रहार
- ओमान का Musandam Governorate strategically महत्वपूर्ण
- 45 शिप्स को blacklist किया ship-to-ship transfer के आरोप में
- डील तभी लागू होगी जब अमेरिका सहमति दे और sanctions हटाए
- Crude oil price $95 से गिरकर $85 के करीब आया
- ईरान को economic pressure से राहत मिलेगी, अमेरिका के लिए बड़ी हार













