US Tariff on India Forced Labour के नाम पर लगाए जाने की तैयारी एक बड़े व्यापारिक झटके का संकेत है। ट्रंप को ईरान वॉर में कुछ ज्यादा मजा नहीं आ रहा, इसलिए उन्होंने वापस से टैरिफ का गेम स्टार्ट कर दिया है। भारत के ऊपर आरोप लगाया है कि फोर्स्ड लेबर के माध्यम से जो कई सारे प्रोडक्ट्स हैं वो अमेरिका भेजे जा रहे हैं।
देखा जाए तो आज यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा एक स्टेटमेंट जारी किया गया। इसको देखते हुए 10% से 12.5% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि यह सब कुछ तब हो रहा है जब US की तरफ से डेलीगेशन भारत में आया हुआ है ताकि यूएस और भारत के बीच का जो ट्रेड डील है वो यहां पर कंप्लीट हो सके।
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सेक्शन 301 के तहत जांच
USTR ने बताया कि जो यूएस का ट्रेड एक्ट 1974 है, इसके अंदर सेक्शन 301 है और इसी के तहत यहां पर इन्वेस्टिगेशन किया गया था। समझने वाली बात यह है कि जिसमें 60 कंट्रीज के ऊपर पाया गया कि वे अनरीजनेबल और बर्डनसम हैं और यूएस कॉमर्स को रिस्ट्रिक्ट करते हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि इन 60 देशों में से 54 देश ऐसे हैं जिनके ऊपर फोर्स्ड लेबर का आरोप है। यहां पर लिखा हुआ है – “These countries have failed to impose and effectively enforce a prohibition on imports made with forced labor.”
अगर गौर करें तो सिर्फ भारत की बात नहीं है। यहां पर अच्छे-खासे देश शामिल हैं:
- ऑस्ट्रेलिया
- बहरीन
- बांग्लादेश
- चीन
- जापान
- कुवैत
- सऊदी अरब
- सिंगापुर
- यूनाइटेड किंगडम
- यूएई
ट्रेड डील के बीच दबाव की रणनीति
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि एक तरफ यहां पर नेगोशिएशंस चल रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है तो मामला तो बिगड़ेगा ही। एनालिस्ट का यह मानना है कि अमेरिका जानबूझकर भारत पर प्रेशर बना रहा है।
अक्सर अमेरिका की यही चाल होती है कि जब कोई नेगोशिएशन चल रहा हो तो तुरंत कुछ न कुछ अतिरिक्त प्रेशर डाल दो। डोनाल्ड ट्रंप तो इसमें काफी माहिर हैं। तो यह सेक्शन 301 के तहत भारत पर और प्रेशर डालने की कोशिश की जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट के बाद अल्टरनेटिव मैकेनिज्म
आपको याद होगा कि जब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने तो उन्होंने धड़ाधड़ सभी देशों पर टैरिफ लगाना स्टार्ट कर दिया। लेकिन मामला यूएस के सुप्रीम कोर्ट गया। इसी साल फरवरी में यूएस सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को स्ट्राइक डाउन कर दिया।
इसका नतीजा यह निकला कि ट्रंप को कुछ न कुछ अल्टरनेटिव मैकेनिज्म निकालना था। क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप मानने वाले तो हैं नहीं। यहां पर उनके पास जो आखिरी रास्ता बचा था वो था सेक्शन 301 ऑफ ट्रेड एक्ट 1974। इसी को देखते हुए मार्च में USTR ने इन्वेस्टिगेशन स्टार्ट कर दिया।
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दो तरह की जांच
देखिए, इन्वेस्टिगेशन बेसिकली दो चीजों को कवर करता है:
पहली जांच – Manufacturing Overcapacity: 16 देशों में यह जांच की गई (जिसमें भारत भी था) कि क्या यहां सरकार ज्यादा सब्सिडी दे रही है? क्या और भी चीजें प्रोवाइड कर रही है जिसकी वजह से कॉस्ट कम हो जाता है और सस्ते दाम में अमेरिका में चीजें बेची जा सकती हैं? इस मामले में भारत पर आरोप नहीं लगा।
दूसरी जांच – Forced Labour: 60 देशों पर यह जांच की गई जिसमें से 54 देशों पर आरोप सिद्ध हुआ है। भारत के ऊपर आरोप इसी दूसरी जांच में है।
सेक्शन 301 क्या कहता है?
यह कहता है कि यूएस की सरकार किसी भी देश की फॉरेन ट्रेड प्रैक्टिसेस के बारे में इन्वेस्टिगेट कर सकती है। यह देख सकती है कि क्या प्रैक्टिस अनफेयर तो नहीं है। चिंता का विषय यह है कि इसको देखते हुए रिटेलिएटरी मेजर्स लगा सकती है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका का यह कानून बेसिकली WTO से अलग चलता है। अमेरिका चाहता है कि पूरी दुनिया WTO को फॉलो करे, लेकिन अमेरिका का अपना इंडिपेंडेंट कानून है जिसके तहत वह अपनी मर्जी से एक्शन ले सकता है।
फोर्स्ड लेबर इन्वेस्टिगेशन का सच
अमेरिका जो है वो देशों को एग्जामिन कर रहा था कि अमेरिका के अंदर जो प्रोडक्ट्स आ रहे हैं – जैसे मान लो कोई पेन आ रहा है, गाड़ी बनकर आ रही है, कार बनकर आ रही है, कुछ भी आ रहा है – उसमें से कोई भी हिस्सा क्या जबरदस्ती लेबर से बना है?
आपने देखा होगा कई बार आरोप लगते हैं लोअर इकोनॉमीज के ऊपर जो अंडर डेवलप्ड कंट्रीज हैं कि वहां पर बच्चे काम करते हैं। तो क्या इस तरह की चीजें हो रही हैं? क्या ह्यूमन ट्रैफिकिंग के माध्यम से कोई काम कराया जा रहा है?
भारत पर विशेष आरोप
USTR ने कंक्लूड किया है कि इंडिया उन देशों में है जो allegedly एडिक्वेटली एनफोर्स नहीं करते हैं रेस्ट्रिक्शंस ऑन इंपोर्ट्स लिंक्ड टू फोर्स्ड लेबर।
समझने वाली बात यह है कि अमेरिका यह नहीं कह रहा है कि भारत सरकार जबरदस्ती फोर्स्ड लेबर करा रही है या भारत में इंडस्ट्रीज जबरदस्ती फोर्स्ड लेबर करा रहे हैं। अमेरिका यह कह रहा है कि भारत में फोर्स्ड लेबर चल रहा है कुछ-कुछ प्रोडक्ट्स में लेकिन भारत सरकार उसको रोक नहीं पा रही है।
10% से 12.5% टैरिफ की संभावना
यूएसटीआर का यह कहना है कि जिस तरह से चीजें हुई हैं, इसको देखते हुए 10% से 12.5% का अतिरिक्त टैरिफ यहां पर लगाया जा सकता है। राहत की बात यह है कि अभी टैरिफ लगा नहीं है। अभी तो क्या है थोड़ा बहुत पब्लिक कमेंट्स लिया जाएगा, स्टेकहोल्डर से कंसल्टेशन होगा।
फाइनली डिटरमाइन होगा कि क्या भारत के ऊपर 10%, 11% या 12.5% एग्जैक्टली कितना लगेगा, वो तो आगे चलकर पता चलेगा।
किन सेक्टर्स पर होगा असर?
जाहिर सी बात है अगर यह टैरिफ इंपोज होता है तो बहुत सारे सेक्टर्स पर इंपैक्ट आएगा:
- टेक्सटाइल और गारमेंट: हमारा ज्यादा बहुत सारा एक्सपोर्ट अमेरिका में होता है
- इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत का उभरता हुआ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, इस पर कॉस्ट बढ़ेगा
- इंजीनियरिंग गुड्स: यह भारत की सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कैटेगरी में से एक है
- सोलर: रिसेंटली जो सोलर बूम आया था वो अब पूरी तरह से जीरो हो चुका है
- केमिकल और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स: इन पर भी असर आएगा
भारत का संभावित रिस्पांस
भारत जबरदस्ती कोई बहुत ज्यादा यहां पर कंफ्रंटेशन तो नहीं करेगा क्योंकि अभी तक नहीं करते आए हैं। यहां पर बेसिकली भारत यह बताएगा कि:
- हमारे यहां पर ऑलरेडी लॉज एग्जिस्ट करते हैं
- लेबर कोर्ट्स वगैरह एग्जिस्ट करते हैं
- आपका यह जो आरोप है वो सही नहीं है
- WTO का प्रिंसिपल है कि यूनिलैटरल टैरिफ न हो
- सप्लाई चेन रिफॉर्म अभी चल रहा है भारत के अंदर
तो यह आरोप लगाना कि भारत सरकार उसको रोक नहीं रही है, यह चीज गलत होगा। यही भारत का रिस्पांस हो सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- US Tariff on India Forced Labour के नाम पर 10-12.5% अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव
- सेक्शन 301 ट्रेड एक्ट 1974 के तहत 54 देशों पर फोर्स्ड लेबर का आरोप
- ट्रेड डील बातचीत के बीच अमेरिका का दबाव की रणनीति
- टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सेक्टर पर होगा असर
- भारत का कहना है कि मौजूदा कानून पर्याप्त हैं, सुधार जारी हैं













