Online TDS Certificate Application : इनकम टैक्स विभाग जल्द ही एक बड़ी राहत देने वाली सुविधा शुरू करने जा रहा है। अब टैक्सपेयर्स घर बैठे ऑनलाइन कम या जीरो TDS (Tax Deducted at Source) सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह सुविधा वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा का हिस्सा है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि इस प्रावधान को लागू करने के लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। यह कदम टैक्स प्रक्रिया को पेपरलेस, तेज और अधिक पारदर्शी बनाएगा।
देखा जाए तो यह डिजिटल इंडिया अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब टैक्सपेयर्स को बार-बार टैक्स ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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TDS सर्टिफिकेट क्या है और क्यों जरूरी है?
TDS यानी Tax Deducted at Source एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें आपकी आय से सीधे टैक्स काट लिया जाता है। जैसे कि सैलरी से, बैंक के ब्याज से, या किसी कॉन्ट्रैक्ट पेमेंट से। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि आपकी कुल आय टैक्सेबल लिमिट से कम है, फिर भी TDS कट जाता है।
ऐसे में आप लो या जीरो TDS सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर सकते हैं। यह सर्टिफिकेट आपको यह अधिकार देता है कि आपकी आय से टैक्स न काटा जाए या कम काटा जाए।
समझने वाली बात यह है कि अगर आप यह सर्टिफिकेट नहीं लेते, तो पहले पूरा TDS कट जाएगा और फिर आपको ITR (Income Tax Return) फाइल करके रिफंड का दावा करना पड़ेगा। यह प्रक्रिया लंबी और झंझट भरी होती है।
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नई ऑनलाइन सुविधा कैसे काम करेगी?
इनकम टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 395(1) के अनुसार, अब टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स पोर्टल पर सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यह आवेदन पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक होगा और इसमें कोई कागजी कार्रवाई नहीं होगी।
आवेदन प्रक्रिया:
सबसे पहले टैक्सपेयर इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करेगा। फिर “Apply for Lower/Nil TDS Certificate” का ऑप्शन चुनेगा। सिस्टम अपने आप Form 26AS, Annual Information Statement (AIS), Taxpayer Information Summary (TIS), और पहले दाखिल की गई रिटर्न से डेटा खींच लेगा।
इस डेटा के आधार पर सिस्टम यह तय करेगा कि आपको सर्टिफिकेट मिलना चाहिए या नहीं। अगर सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो सर्टिफिकेट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तुरंत जारी कर दिया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड होगी। किसी अधिकारी से मिलने या फाइल पुश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
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किन डेटा का इस्तेमाल होगा?
नई व्यवस्था में इनकम टैक्स सिस्टम में पहले से मौजूद डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें शामिल हैं:
Form 26AS: यह आपके TDS का पूरा विवरण दिखाता है। इसमें यह जानकारी होती है कि आपकी आय से कितना टैक्स काटा गया।
Annual Information Statement (AIS): यह आपकी सभी वित्तीय लेनदेन की जानकारी देता है, जैसे कि बैंक खाते में जमा राशि, शेयर बाजार में लेनदेन, आदि।
Taxpayer Information Summary (TIS): यह आपकी टैक्स प्रोफाइल का सारांश है।
पिछली ITR: आपके द्वारा पहले दाखिल की गई रिटर्न से भी जानकारी ली जाएगी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि चूंकि सारा डेटा पहले से सिस्टम में मौजूद है, इसलिए टैक्सपेयर को अलग से कोई दस्तावेज अपलोड नहीं करने पड़ेंगे।
सर्टिफिकेट कब रद्द हो सकता है?
अगर आवेदन में कोई गड़बड़ी पाई जाती है या शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो सर्टिफिकेट को रद्द किया जा सकता है। उदाहरण के लिए:
- अगर आपने गलत जानकारी दी है
- अगर आपकी वास्तविक आय अनुमानित आय से काफी ज्यादा निकली
- अगर आपने ITR दाखिल नहीं की
- अगर आपके खिलाफ कोई टैक्स डिमांड पेंडिंग है
इसलिए टैक्सपेयर्स को सही और ईमानदारी से जानकारी देनी चाहिए। गलत जानकारी देने पर पेनल्टी भी लग सकती है।
यह सुविधा क्यों जरूरी थी?
पहले की प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली थी। टैक्सपेयर को फॉर्म भरना पड़ता था, कई दस्तावेज लगाने पड़ते थे, और फिर टैक्स ऑफिस जाकर सब कुछ जमा करना पड़ता था। उसके बाद महीनों इंतजार करना पड़ता था।
अगर गौर करें तो छोटे टैक्सपेयर्स के लिए यह प्रक्रिया बहुत मुश्किल थी। कई लोग तो इसी झंझट से बचने के लिए TDS कटवा लेते थे और फिर रिफंड का दावा करते थे। लेकिन रिफंड आने में भी महीनों लग जाते थे।
नई ऑनलाइन व्यवस्था से:
- समय की बचत होगी
- कागजी कार्रवाई खत्म होगी
- ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी
- भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं रहेगी
- टैक्स ऑफिस के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं
टैक्स विभाग के अन्य सुधार
पंकज चौधरी ने यह भी बताया कि इनकम टैक्स विभाग लगातार अपनी सेवाओं में सुधार कर रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान विभाग ने 224,000 अपीलों का निपटारा किया, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में केवल 111,000 अपीलें निपटाई गई थीं। यह दोगुनी वृद्धि है।
हालांकि, फेसलेस असेसमेंट की संख्या में कमी आई है। वित्त वर्ष 2024 में 273,000 की तुलना में वित्त वर्ष 2026 में सिर्फ 213,000 फेसलेस असेसमेंट पूरे किए गए।
| वित्त वर्ष | अपील निपटान | फेसलेस असेसमेंट |
|---|---|---|
| 2023-24 | 111,000 | 273,000 |
| 2024-25 | 180,000 (अनुमानित) | 245,000 (अनुमानित) |
| 2025-26 | 224,000 | 213,000 |
यह आंकड़े दिखाते हैं कि विभाग अपील निपटान में तेजी ला रहा है, जो टैक्सपेयर्स के लिए अच्छी खबर है।
टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?
जैसे ही यह नोटिफिकेशन जारी हो और पोर्टल पर सुविधा उपलब्ध हो, टैक्सपेयर्स को निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए:
- अपना Form 26AS नियमित रूप से चेक करें
- AIS और TIS को वेरिफाई करें
- अगर आपकी अनुमानित आय टैक्सेबल लिमिट से कम है, तो तुरंत आवेदन करें
- सभी जानकारी सही और ईमानदारी से भरें
- सर्टिफिकेट मिलने के बाद इसकी कॉपी अपने एंप्लॉयर या पेयर को दें ताकि वे कम TDS काटें
विशेषज्ञों का सुझाव है कि छोटे टैक्सपेयर्स, फ्रीलांसरों, और सीनियर सिटिजन्स को इस सुविधा का पूरा फायदा उठाना चाहिए।
मुख्य बातें (Key Points)
- इनकम टैक्स विभाग जल्द ही ऑनलाइन लो/जीरो TDS सर्टिफिकेट की सुविधा शुरू करेगा
- यह वित्त वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधान का हिस्सा है, नियम तैयार हो रहे हैं
- पूरी प्रक्रिया पेपरलेस और ऑटोमेटेड होगी, Form 26AS, AIS, TIS जैसे मौजूदा डेटा का इस्तेमाल होगा
- शर्तें पूरी होने पर सर्टिफिकेट तुरंत इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जारी होगा
- इससे कागजी कार्रवाई और टैक्स ऑफिस के चक्कर खत्म होंगे, प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी










