LIVE | ...
शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Color Blindness India में 7 करोड़ लोग प्रभावित, बड़ा खुलासा

Color Blindness India में 7 करोड़ लोग प्रभावित, बड़ा खुलासा

हाल में जारी रिपोर्ट से पता चला कि भारत में लगभग 7 करोड़ लोग वर्णांधता से पीड़ित हैं, लेकिन ज्यादातर को इसकी जानकारी तक नहीं

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
सोमवार, 1 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, स्पेशल स्टोरी
A A
0
Color Blindness India
104
SHARES
696
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Color Blindness India को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में पता चला है कि भारत में लगभग 7 करोड़ लोग ऐसे हैं जो वर्णांधता यानी कलर ब्लाइंडनेस से पीड़ित हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से अधिकतर लोगों को यह तक नहीं पता कि उन्हें यह समस्या है। देखा जाए तो यह आंकड़ा कई देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है, लेकिन इस मुद्दे पर जागरूकता लगभग शून्य है।

नीट यूजी परीक्षा के दौरान दक्षिण भारत में लिए गए कुछ सैंपल टेस्ट से यह आंकड़े सामने आए हैं। समझने वाली बात यह है कि इनमें से 8% पुरुष हैं और मात्र 0.5% महिलाएं। यह अंतर कोई संयोग नहीं है—इसके पीछे विज्ञान और आनुवंशिकी का खेल है।

🔍 यह भी पढ़ें- Punjab Sugarcane Payment में बड़ी राहत, 100% बकाया किसानों को मिला

क्या है वर्णांधता? रंगों की दुनिया में अंधेरा नहीं, बस थोड़ा कंफ्यूजन

बहुत से लोगों को लगता है कि कलर ब्लाइंड व्यक्ति को सिर्फ काला-सफेद दिखता है। लेकिन यह सच नहीं है। अगर गौर करें तो 99% से अधिक कलर ब्लाइंड लोग काले-सफेद के अलावा दूसरे रंग भी देख सकते हैं। असली समस्या कुछ विशेष रंगों में अंतर न कर पाने की है।

हमारी आंख की रेटिना में तीन तरह की शंकु कोशिकाएं (Cone Cells) होती हैं। L-Cone लाल रंग को पहचानती है, M-Cone हरे रंग को, और S-Cone नीले रंग को। ये तीनों मिलकर हजारों अलग-अलग रंग बनाते हैं। लेकिन जब इन कोशिकाओं में कोई खराबी आ जाती है, तो वर्णांधता की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जो रॉड सेल्स (शलाका कोशिकाएं) होती हैं, वे कम रोशनी में देखने में मदद करती हैं लेकिन रंगों को नहीं पहचान सकतीं।

🔍 यह भी पढ़ें- Mukhyamantri Swasthya Yojana से मिला नया जीवन, भरा दिल का छेद

पुरुषों में ज्यादा क्यों? X-Chromosome का गेम

वर्णांधता मुख्य रूप से एक जन्मजात समस्या है और यह X-linked Recessive Trait है। यानी X क्रोमोसोम ही इसका वाहक होता है। महिलाओं में XX क्रोमोसोम होते हैं—अगर एक X में दोष है तो दूसरा X उसकी भरपाई कर देता है।

लेकिन पुरुषों में XY होता है। जब X में दोष होता है तो Y उसे बैलेंस नहीं कर सकता। और बस यहीं से शुरू होती है असली कहानी। इसीलिए पुरुषों में वर्णांधता की दर महिलाओं से लगभग 16 गुना ज्यादा है।

कुछ मामलों में डायबिटीज, ग्लूकोमा या अन्य बीमारियों के कारण भी Acquired Color Blindness हो सकती है। यानी यह जरूरी नहीं कि यह सिर्फ जन्मजात ही हो।

💡 यह भी पढ़ें- Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, जानें ताजा भाव Gold Price Today Forecast

तीन मुख्य प्रकार की वर्णांधता

भारत में लगभग 95% कलर ब्लाइंड लोग लाल-हरे रंग में अंतर नहीं कर पाते। ट्रैफिक लाइट देखिए—लाल और हरी बत्ती में कंफ्यूजन हो जाए तो समझिए कितनी मुश्किल है।

वर्णांधता के प्रकार:

प्रकारप्रभावित रंगप्रभावित लोगकारण
Red-Green Blindnessलाल-हरा95%X-linked Mutation
Blue-Yellow Blindnessनीला-पीलादुर्लभ (महिलाओं में अधिक)Chromosome 7 दोष
Total Color Blindnessसभी रंग (सिर्फ Black-White)अत्यंत दुर्लभ (1 in 30,000)पूर्ण Cone Cell failure

दूसरा है नीला-पीला वर्णांधता, जो अपेक्षाकृत दुर्लभ होती है और महिलाओं में भी देखी जा सकती है क्योंकि यह Chromosome 7 से जुड़ी होती है। सबसे रेयर है Total Color Blindness—जहां व्यक्ति को सिर्फ Black and White ही दिखता है। यह 30,000 में से किसी एक को होता है।

रोजमर्रा की जिंदगी में कैसी दिक्कतें आती हैं?

ट्रैफिक लाइट में कंफ्यूजन सबसे बड़ी समस्या है। कौन सी बत्ती जल रही है—यह समझने में परेशानी होती है।

व्यवसायिक रूप से देखा जाए तो पायलट, लोको पायलट, इलेक्ट्रीशियन जैसी नौकरियों में कलर कोडिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है। वहां इन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। प्रयोगशालाओं में pH Indicator, केमिकल रिएक्शन के रंग पहचानने में दिक्कत होती है।

यह भी पढे़ं 👇

Philippines Plane Crash

Philippines Plane Crash: हवा में टकराए दो जहाज, चार पायलटों की मौत

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
Maharashtra Climate Shift

Maharashtra Climate Shift: धीरे-धीरे मरुस्थल बनता जा रहा अपना महाराष्ट्र

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
Mansa Murder, Rakesh Tikait Mansa

Mansa Murder: टिकैत बोले, दोनों सरकारें बराबर की जिम्मेदार

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
GMADA Land Price

GMADA Land Price: किसानों का दर्द, औने-पौने दाम पर जमीन छीनने का आरोप

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

सब्जी-फल खरीदते समय ताजा है या सड़ गया, पक गया या कच्चा है—यह समझना मुश्किल हो जाता है। और यहीं से सामाजिक कलंक भी शुरू हो जाता है।

💡 यह भी पढ़ें- DA Hike January 2026: 5% बढ़ोतरी से 63% होगा महंगाई भत्ता, जानें कितनी बढ़ेगी सैलरी

सामाजिक कलंक और महिलाओं पर दोहरा बोझ

कुछ समुदायों में वर्णांधता को दोष माना जाता है। शादी में दिक्कतें आती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शून्य है—बच्चों का निदान ही नहीं होता और उन्हें जीवनभर इसी के साथ जीना पड़ता है।

चिंता का विषय यह है कि महिलाओं में यह दुर्लभ होने के कारण उनके संघर्ष को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। घर में सब्जी काटने, रंगों को पहचानने में दिक्कत—और ऊपर से पितृसत्तात्मक समाज का दबाव।

भारतीय कानून क्या कहता है?

अनुच्छेद 14, 15, 21, और 41 समानता और जीवन के अधिकार की बात करते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है Rights of Persons with Disabilities (RPWD) Act 2016।

यह अधिनियम वर्णांधता को Low Vision के तहत मान्यता देता है। धारा 2(व) के अंतर्गत Reasonable Accommodation की कानूनी बाध्यता है। यानी नियोक्ता को इन लोगों को रोजगार में सहायता देनी होगी। सिर्फ इसलिए कि कोई कलर ब्लाइंड है, आप उसका रोजगार नहीं छीन सकते।

ध्यान दीजिए—RPWD Act 2016 UPSC Prelims 2018 में पूछा गया था।

ऐतिहासिक कोर्ट केस जिन्होंने रास्ता बदला

आशुतोष कुमार बनाम FTII केस: Film and Television Institute of India को निर्देश दिया गया कि वर्णांध अभ्यर्थियों को प्रवेश देना होगा। क्योंकि भेदभाव गलत है।

तंगुटुरु केस: एक वर्णांध सहायक अभियंता को नियुक्ति से वंचित किया गया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें नौकरी दी जाए।

आंध्र प्रदेश SRTC ड्राइवर केस: सेवा के दौरान जब पता चला कि ड्राइवर वर्णांध है, तो उसे हटा दिया गया। कोर्ट ने कहा कि उसे वैकल्पिक पद दिया जाए—क्योंकि गलती नियोक्ता की थी जिसने शुरुआत में टेस्ट नहीं कराया।

वैश्विक और राष्ट्रीय प्रयास

National Programme for Control of Blindness and Visual Impairment (NPCBVI) का लक्ष्य अंधेपन को 2.5% तक लाना है। वैश्विक स्तर पर UN Convention on Rights of Persons with Disabilities (UNCRPD), SDG Goals, और WHO Vision 2030 सभी दृष्टि स्वास्थ्य पर जोर देते हैं।

लेकिन समझने वाली बात यह है कि भारत में Color Vision Disorder (CVD) के लिए कोई विशेष राष्ट्रीय नीति नहीं बनी। स्कूलों में CVD स्क्रीनिंग अनिवार्य नहीं है। और कलर ब्लाइंड लोगों के लिए Infrastructure की कोई चर्चा ही नहीं होती।

कुछ मिथक और सच्चाई

मिथक 1: वर्णांध लोग सिर्फ काला-सफेद देखते हैं।
सच: 99% लोग अन्य रंग भी देख सकते हैं, बस कुछ रंगों में कंफ्यूजन होता है।

मिथक 2: यह कम बुद्धिमत्ता या अंधेपन से जुड़ा है।
सच: बिल्कुल नहीं। यह सिर्फ Chromosome का खेल है।

मिथक 3: केवल पुरुष ही वर्णांध होते हैं।
सच: महिलाएं भी होती हैं, लेकिन संख्या कम है।

निदान और समाधान: आशा की किरण

Ishihara Test: यह सबसे सामान्य टेस्ट है। कलर्ड डॉट्स के बीच नंबर छिपे होते हैं। अगर वर्णांध हैं तो नंबर नहीं दिख पाता। बच्चों को यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

Color Filter Glasses: जैसे EnChroma जैसे चश्मे आ गए हैं जो विशेष फिल्टर से सही रंग दिखाते हैं।

AI Apps: कई ऐप्स आ गए हैं जो कैमरे से रंग पहचानकर बता देते हैं कि यह क्या रंग है।

Gene Therapy और CRISPR: भविष्य में जीन एडिटिंग के जरिए Chromosome में सुधार करके इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकेगा।

क्या करना चाहिए हमें?

शिक्षा में CVD स्क्रीनिंग अनिवार्य करनी चाहिए। कार्यस्थल पर RPWD Act के तहत Reasonable Accommodation को लागू करवाना चाहिए। डिजिटल और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में इन्हें शामिल करना होगा।

उम्मीद की किरण यह है कि अगर हम 7 करोड़ लोगों को साथ लेकर चलें, तो यह कई देशों की जनसंख्या से ज्यादा ताकत है। विविधता को दोष नहीं, शक्ति मानना होगा।


मुख्य बातें (Key Points):

  • भारत में लगभग 7 करोड़ लोग कलर ब्लाइंडनेस से प्रभावित (8% पुरुष, 0.5% महिलाएं)
  • 95% मामले Red-Green Color Blindness के, X-linked Recessive Trait
  • RPWD Act 2016 के तहत Low Vision में मान्यता, रोजगार में भेदभाव गैरकानूनी
  • Ishihara Test, EnChroma Glasses, AI Apps और Gene Therapy जैसे समाधान उपलब्ध
  • भारत में CVD के लिए कोई विशेष राष्ट्रीय नीति नहीं, जागरूकता की कमी

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: कलर ब्लाइंड व्यक्ति को क्या दिखता है?

उत्तर: अधिकतर कलर ब्लाइंड लोग केवल काला-सफेद नहीं देखते। 95% मामलों में उन्हें लाल-हरे रंग में अंतर करने में समस्या होती है, लेकिन अन्य रंग दिखते हैं।

प्रश्न 2: कलर ब्लाइंडनेस पुरुषों में ज्यादा क्यों होती है?

उत्तर: यह X-linked Recessive Trait है। महिलाओं में XX होता है (एक दोषपूर्ण हो तो दूसरा बैलेंस करता है), लेकिन पुरुषों में XY होता है और Y क्रोमोसोम दोष की भरपाई नहीं कर सकता।

प्रश्न 3: क्या कलर ब्लाइंडनेस का इलाज संभव है?

उत्तर: वर्तमान में पूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन EnChroma Glasses, AI Apps जैसे सहायक उपकरण हैं। भविष्य में Gene Therapy और CRISPR से इलाज संभव हो सकता है।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Mukhyamantri Swasthya Yojana से मिला नया जीवन, भरा दिल का छेद

Next Post

Nepal India Border Dispute पर बड़ा बयान, बालेन शाह ने कहा सच

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

Philippines Plane Crash

Philippines Plane Crash: हवा में टकराए दो जहाज, चार पायलटों की मौत

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
Maharashtra Climate Shift

Maharashtra Climate Shift: धीरे-धीरे मरुस्थल बनता जा रहा अपना महाराष्ट्र

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
Mansa Murder, Rakesh Tikait Mansa

Mansa Murder: टिकैत बोले, दोनों सरकारें बराबर की जिम्मेदार

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
GMADA Land Price

GMADA Land Price: किसानों का दर्द, औने-पौने दाम पर जमीन छीनने का आरोप

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
Ashirwad Yojana

Ashirwad Yojana: 12,784 परिवारों की बदली तकदीर, जानें कैसे

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
Punjab Tirtha Yatra Bus

Punjab Tirtha Yatra Bus: मानवाधिकार आयोग का नोटिस

शनिवार, 24 अक्टूबर 2026
Next Post
Nepal India Border Dispute

Nepal India Border Dispute पर बड़ा बयान, बालेन शाह ने कहा सच

Skincare Mistakes

Skincare Mistakes गलतियां कर रहे हैं रोज, डैमेज हो रही स्किन

Honey Singh Bipolar Disorder

Honey Singh Bipolar Disorder दवाओं से झड़ गए बाल, विग पहनते हैं

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।