Punjab Group D wheat loan को लेकर भगवंत सिंह मान सरकार ने प्रदेश के ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन कर्मचारियों को गेहूं की खरीद हेतु ब्याज मुक्त ऋण (interest-free loan) को मंजूरी दे दी है। चंडीगढ़ से 22 अप्रैल को सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा जारी बयान के मुताबिक प्रत्येक पात्र कर्मचारी को 10,340 रुपये का ब्याज मुक्त लोन मिलेगा और इसके लिए 15 करोड़ रुपये का विशेष बजट रखा गया है।
देखा जाए तो यह फैसला छोटा ज़रूर लग सकता है, लेकिन उन कर्मचारियों के लिए इसके मायने बड़े हैं जो सरकारी दफ्तरों में सबसे कम वेतन पर काम करते हैं। गर्मी के मौसम में गेहूं खरीदकर साल भर की रोटी का इंतज़ाम करना… यह पंजाब में हर घर की ज़रूरत है।
कैसे हुई ऋण राशि की गणना?
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस फैसले की घोषणा करते हुए बताया कि 10,340 रुपये की राशि सरकार द्वारा प्रति परिवार औसतन चार क्विंटल गेहूं की खपत के निर्धारित मापदंड पर आधारित है।
अगर गौर करें तो इसके पीछे का गणित सीधा है। सरकारी दरों पर चार क्विंटल गेहूं की लागत लगभग 10,340 रुपये बैठती है। यानी एक औसत परिवार को साल भर के लिए जितना गेहूं चाहिए, उतनी रकम ब्याज मुक्त मिल जाएगी। राहत की बात यह है कि इस पर एक पैसा भी ब्याज नहीं देना होगा।
29 मई 2026 तक निकाल सकते हैं लोन राशि
समझने वाली बात है कि इस स्कीम में समय सीमा तय की गई है। पात्र ग्रुप-डी कर्मचारी 29 मई 2026 तक सरकारी कोष से यह ऋण राशि निकाल सकते हैं। इसका मतलब है कि कर्मचारियों के पास करीब पांच हफ्ते का समय है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अप्रैल-मई का वक्त ही वो दौर होता है जब पंजाब में गेहूं की कटाई होती है और मंडियों में ताज़ा गेहूं आता है। ऐसे में सरकार ने सही वक्त पर यह ऋण देने का फैसला लिया ताकि कर्मचारी सीधे किसानों या मंडी से सस्ता गेहूं खरीद सकें।
वापसी आसान: आठ मासिक किस्तों में कटेगा पैसा
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने ऋण वापसी का तरीका भी बेहद सरल रखा है। लोन की कटौती आठ मासिक किस्तों में होगी। पहली किस्त जून माह के वेतन से शुरू होगी जो जुलाई में मिलता है। इस तरह चालू वित्तीय वर्ष पूरा होने से पहले ही पूरा ऋण वसूल हो जाएगा।
इसका मतलब है कि अगर 10,340 रुपये को 8 किस्तों में बांटें तो हर महीने करीब 1,293 रुपये कटेंगे। ग्रुप-डी कर्मचारियों की सैलरी को देखते हुए यह रकम ऐसी है जो ज्यादा बोझ नहीं डालेगी। और बस यहीं से पता चलता है कि सरकार ने इस स्कीम को डिज़ाइन करते वक्त कर्मचारियों की आर्थिक हालत का ध्यान रखा है।
15 करोड़ का बजट, कितने कर्मचारियों को फायदा?
इस कल्याणकारी योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 15 करोड़ रुपये के विशेष बजट की व्यवस्था की गई है। अगर प्रति कर्मचारी 10,340 रुपये दिए जा रहे हैं तो 15 करोड़ के बजट से लगभग 14,500 से अधिक कर्मचारियों को सीधा फायदा मिल सकता है।
सवाल उठता है कि क्या यह बजट पर्याप्त है? पंजाब सरकार के विभिन्न विभागों में ग्रुप-डी कर्मचारियों की कुल संख्या काफी बड़ी है। लेकिन सरकार ने “पात्र” कर्मचारियों का ज़िक्र किया है, जिसका मतलब है कि कुछ निर्धारित शर्तें भी होंगी।
ग्रुप-डी कर्मचारी कौन होते हैं और उनकी स्थिति कैसी है?
दूसरी ओर, यह समझना ज़रूरी है कि ग्रुप-डी कर्मचारी सरकारी तंत्र की रीढ़ हैं। चपरासी, सफाई कर्मचारी, चौकीदार, माली, हेल्पर… ये सब ग्रुप-डी की श्रेणी में आते हैं। सरकारी दफ्तरों में सबसे कम वेतन इन्हीं को मिलता है और अक्सर नीतिगत फैसलों में इनकी ज़रूरतें नज़रअंदाज़ हो जाती हैं।
चिंता का विषय यह रहता है कि महंगाई के इस दौर में इतनी कम सैलरी में परिवार चलाना, बच्चों की पढ़ाई और घर का राशन… सब कुछ मैनेज करना आसान नहीं है। ऐसे में गेहूं जैसी बुनियादी ज़रूरत के लिए ब्याज मुक्त ऋण एक छोटी लेकिन ज़रूरी मदद है।
भगवंत मान सरकार का कर्मचारी कल्याण पर ज़ोर
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस मौके पर सरकार के कर्मचारी-हितैषी रवैये को दोहराया। उन्होंने कहा: “हमारे कर्मचारियों का कल्याण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है और हम उनकी सहायता और वित्तीय समृद्धि को सुनिश्चित करने वाले उपायों को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।”
इससे साफ होता है कि आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार निचले स्तर के कर्मचारियों की छोटी-छोटी ज़रूरतों पर भी ध्यान दे रही है। हालांकि, असली सवाल तो यही है कि ये फैसले ज़मीन पर कितनी तेज़ी से लागू होते हैं और क्या हर पात्र कर्मचारी तक समय पर राशि पहुंचती है या नहीं।
एक बात तो तय है… 10,340 रुपये भले ही बड़ी रकम न हो, लेकिन सबसे कम कमाने वाले कर्मचारी के लिए यह साल भर की रोटी का भरोसा है। और रोटी का भरोसा किसी भी बड़े ऐलान से कम नहीं होता।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब सरकार ने ग्रुप-डी कर्मचारियों को गेहूं खरीदने के लिए प्रति कर्मचारी 10,340 रुपये का ब्याज मुक्त ऋण मंजूर किया
- इस स्कीम के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 15 करोड़ रुपये का विशेष बजट आवंटित किया गया है
- कर्मचारी 29 मई 2026 तक सरकारी कोष से ऋण राशि निकाल सकते हैं
- ऋण की वापसी जून वेतन से शुरू होकर आठ आसान मासिक किस्तों में होगी, कोई ब्याज नहीं लगेगा













