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The News Air - Breaking News - बड़ा फैसला: Mohali NIA Court ने कश्मीर के 3 Students को UAPA Case में सुनाई 10 साल की सजा

बड़ा फैसला: Mohali NIA Court ने कश्मीर के 3 Students को UAPA Case में सुनाई 10 साल की सजा

पुलवाड़ा के विद्यार्थी जलंधर के हॉस्टल से हथियार और विस्फोटक समेत गिरफ्तार, आतंकी संगठन से जुड़े थे

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
गुरूवार, 4 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Mohali NIA Court UAPA Case
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Mohali NIA Court UAPA Case में एक बड़ा फैसला आया है। मुहाली की एक विशेष NIA (National Investigation Agency) अदालत ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतीपोरा के रहने वाले तीन विद्यार्थियों को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज 2018 के एक मामले में 10 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है।

दोषियों की पहचान जाहिद गुलजार, यासिर रफीक भट्ट और मुहम्मद इदरीस शाह के रूप में हुई है। देखा जाए तो यह केस 2018 में जलंधर के एक कॉलेज हॉस्टल से हथियार और विस्फोटक बरामद होने से शुरू हुआ था।

दिलचस्प बात यह है कि ये तीनों 10 अक्टूबर 2018 से न्यायिक हिरासत में हैं – यानी लगभग 8 साल से जेल में हैं। समझने वाली बात यह है कि अब उन्हें और 2 साल जेल में रहना होगा।

🔍 यह भी पढ़ें- Mohali Mayor Election में AAP में खींचतान तेज, MLA कुलवंत सिंह ने किया 4 आजाद पार्षदों के समर्थन का दावा

क्या था पूरा मामला?

यह मामला 10 अक्टूबर 2018 को जलंधर में सीटी इंस्टीट्यूट के शाहपुर कैंपस के हॉस्टल से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद होने से संबंधित है। पुलिस ने वहां छापेमारी करने के बाद दोषियों को गिरफ्तार किया था।

बरामद सामग्री का विवरण:

वस्तुमात्रास्थिति
AK राइफल12 मैगजीन के साथ
जिंदा कारतूस (AK)54सक्रिय
माउजर पिस्तौल12 मैगजीन के साथ
जिंदा कारतूस (पिस्तौल)31सक्रिय
विस्फोटक सामग्रीलगभग 1 किलोखतरनाक

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सामान एक कॉलेज हॉस्टल में मिला था, जो बेहद चौंकाने वाला था।

🔍 यह भी पढ़ें- खौफनाक धमकी: Mohali Court Bomb Threat से मचा हड़कंप, 3 दिन एंट्री बंद

अदालत का फैसला: किसे क्या मिला?

अदालत ने तीनों दोषियों को निम्नलिखित अपराधों का दोषी पाया:

दोष:

  1. आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy)
  2. UAPA के तहत अपराध (Unlawful Activities Prevention Act violations)
  3. विस्फोटक अधिनियम की उल्लंघना (Explosives Act violations)

सजा:

  • जाहिद गुलजार: 10 साल की सख्त कैद
  • यासिर रफीक भट्ट: 10 साल की सख्त कैद
  • मुहम्मद इदरीस शाह: 10 साल की सख्त कैद

बरी किया गया:

  • सुहेल अहमद भट्ट: अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों को साबित करने में असफल रहा
आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से कनेक्शन

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषी कथित तौर पर गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे और आतंकवादी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) से जुड़े हुए थे।

AGH के बारे में:

  • यह एक जिहादी आतंकवादी संगठन है
  • जम्मू-कश्मीर में सक्रिय
  • अल-कायदा से संबद्ध
  • भारत में प्रतिबंधित संगठन

और बस यहीं से शुरू हुई जांच की असली कहानी। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि ये तीनों:

  1. संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए फंड प्राप्त कर रहे थे
  2. संस्था के अन्य विद्यार्थियों को इस ग्रुप में शामिल करने की कोशिश कर रहे थे
  3. भविष्य में आतंकवादी गतिविधियां अंजाम देने की योजना बना रहे थे
यासिर रफीक भट्ट: जाकिर मूसा का रिश्तेदार

जांच में एक हैरान करने वाली बात सामने आई। दोषी यासिर रफीक भट्ट, AGH के सांबका मुखिया जाकिर मूसा का रिश्तेदार है।

जाकिर मूसा कौन था?

  • कश्मीर का कुख्यात आतंकवादी
  • अंसार गजवत-उल-हिंद का संस्थापक और कमांडर
  • 2019 में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था
  • अल-कायदा से जुड़ा हुआ था

यासिर की भूमिका:
जांच में खुलासा हुआ कि यासिर ने कथित तौर पर:

  1. विस्फोटक सामग्री मंगवाने में मुख्य भूमिका निभाई
  2. संस्था के कश्मीरी विद्यार्थियों को संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया
  3. गैर-कानूनी गतिविधियों में भाग लेने के लिए उकसाया

समझने वाली बात यह है कि उसका जाकिर मूसा से रिश्ता होना जांच में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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पंजाब पुलिस से NIA तक का सफर

यह मामला शुरुआत में पंजाब पुलिस ने दर्ज किया था:

FIR का विवरण:

  • FIR नंबर: 166/2018
  • थाना: सदर, जलंधर
  • दर्ज तिथि: 10 अक्टूबर 2018
  • धाराएं: UAPA, विस्फोटक अधिनियम, आपराधिक साजिश

NIA को सौंपा गया:
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे बाद में NIA को सौंप दिया गया। NIA ने गहन जांच की और कोर्ट में मजबूत केस पेश किया।

छापेमारी कैसे हुई?

10 अक्टूबर 2018 को पंजाब पुलिस को सूचना मिली थी कि सीटी इंस्टीट्यूट के शाहपुर कैंपस के हॉस्टल में कुछ संदिग्ध गतिविधियां हो रही हैं।

छापेमारी की प्रक्रिया:

  1. सूचना: गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली
  2. योजना: पुलिस ने रणनीति बनाई
  3. छापेमारी: सुबह जल्दी हॉस्टल पर छापा मारा
  4. बरामदगी: हथियार और विस्फोटक बरामद हुए
  5. गिरफ्तारी: तीनों छात्रों को तुरंत गिरफ्तार किया

दिलचस्प बात यह है कि ये सभी विद्यार्थी कश्मीर से पंजाब में पढ़ाई के लिए आए थे। लेकिन जांच में पता चला कि वे पढ़ाई के साथ-साथ आतंकवादी गतिविधियों की योजना बना रहे थे।

UAPA क्या है और क्यों खतरनाक?

UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) भारत का एक सख्त आतंकवाद विरोधी कानून है।

UAPA की विशेषताएं:

पहलूविवरण
जमानतबहुत मुश्किल, लगभग असंभव
जांच अवधि180 दिन तक बढ़ाई जा सकती है
सजामृत्युदंड तक
संगठन प्रतिबंधकेंद्र सरकार प्रतिबंधित कर सकती है
अभियुक्त का बोझखुद को निर्दोष साबित करना पड़ता है

क्यों सख्त है:

  1. आतंकवाद से निपटने के लिए विशेष प्रावधान
  2. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक
  3. आतंकवादी गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई
विशेष NIA कोर्ट की भूमिका

मुहाली में विशेष NIA अदालत स्थापित की गई है जो ऐसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई करती है।

विशेष अदालत की विशेषताएं:

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  1. तेज सुनवाई: सामान्य अदालतों से तेज
  2. विशेषज्ञ जज: आतंकवाद मामलों में प्रशिक्षित
  3. सुरक्षा: अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था
  4. गोपनीयता: संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस केस की सुनवाई लगभग 8 साल चली। यह दर्शाता है कि मामला कितना जटिल था।

अभियोजन पक्ष के साक्ष्य

अदालत में NIA ने मजबूत सबूत पेश किए:

साक्ष्यों के प्रकार:

  1. भौतिक साक्ष्य: हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक
  2. डिजिटल साक्ष्य: मोबाइल, लैपटॉप से डेटा
  3. गवाही: पुलिस अधिकारी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ
  4. दस्तावेजी साक्ष्य: फंडिंग के रिकॉर्ड
  5. इकबालिया बयान: जांच के दौरान दिए गए बयान

फॉरेंसिक जांच:

  • हथियारों की पुष्टि
  • विस्फोटक की प्रकृति की पहचान
  • फिंगरप्रिंट मिलान
  • डीएनए जांच
बचाव पक्ष की दलीलें

बचाव पक्ष ने कई दलीलें दीं:

  1. फर्जी केस: आरोप झूठे और गढ़े गए हैं
  2. पुलिस बर्बरता: जबरन इकबालिया बयान लिए गए
  3. सबूतों में छेड़छाड़: सबूत रोपे गए हैं
  4. युवा विद्यार्थी: ये सिर्फ पढ़ने आए थे

लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को मजबूत पाया।

सुहेल अहमद भट्ट क्यों बरी हुआ?

अदालत ने चौथे आरोपी सुहेल अहमद भट्ट को बरी कर दिया। इसके कारण:

  1. सबूतों की कमी: उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं
  2. संदेह का लाभ: कानून में संदेह का लाभ आरोपी को
  3. अभियोजन की विफलता: प्रासिक्यूशन आरोप साबित नहीं कर सका

यह दर्शाता है कि अदालत ने हर आरोपी के मामले को व्यक्तिगत रूप से देखा।

कश्मीरी छात्रों पर निगरानी

इस केस के बाद पंजाब में कश्मीरी छात्रों पर निगरानी बढ़ाई गई:

सुरक्षा उपाय:

  1. हॉस्टल निरीक्षण: नियमित जांच
  2. पुलिस संपर्क: छात्रों की पुलिस से लिंकेज
  3. सतर्कता: संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
  4. सूचना तंत्र: गुप्त सूत्रों का नेटवर्क

लेकिन यह भी सुनिश्चित किया गया कि निर्दोष छात्रों को परेशानी न हो।

परिवारों की प्रतिक्रिया

दोषियों के परिवारों ने फैसले पर निराशा व्यक्त की:

परिवार का कहना:

  • हमारे बच्चे निर्दोष हैं
  • उन्हें फंसाया गया है
  • हम उच्च न्यायालय जाएंगे
  • न्याय मांगते हैं

लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च न्यायालय में अपील मुश्किल होगी क्योंकि सबूत मजबूत हैं।

आतंकवाद और शिक्षण संस्थान

यह केस एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करता है:

समस्या:

  1. आतंकवादी शिक्षण संस्थानों को निशाना बना रहे हैं
  2. युवाओं को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है
  3. छात्रों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए

समाधान:

  1. जागरूकता कार्यक्रम
  2. काउंटर-रेडिकलाइजेशन प्रयास
  3. छात्रों की काउंसलिंग
  4. अभिभावकों की भागीदारी
पंजाब में आतंकवाद का खतरा

पंजाब का आतंकवाद से पुराना नाता है:

ऐतिहासिक संदर्भ:

  • 1980-90 का दशक: खालिस्तानी आतंकवाद
  • 2000 के बाद: शांति की अवधि
  • हाल के वर्ष: फिर से खतरे के संकेत

वर्तमान चुनौतियां:

  1. पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार
  2. कट्टरपंथी विचारधारा का प्रसार
  3. युवाओं को भड़काना
  4. सोशल मीडिया का दुरुपयोग
NIA की भूमिका और सफलता

NIA ने इस केस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

NIA की सफलताएं:

  1. गहन जांच: हर पहलू की जांच
  2. तकनीकी विशेषज्ञता: डिजिटल फॉरेंसिक
  3. अंतर्राज्यीय समन्वय: कश्मीर से पंजाब तक
  4. मजबूत केस: अदालत में ठोस साक्ष्य

यह केस NIA की क्षमता को दर्शाता है।

क्या संदेश मिलता है?

इस फैसले से कई संदेश मिलते हैं:

  1. आतंकवाद बर्दाश्त नहीं: कानून सख्ती से लागू होगा
  2. युवाओं को चेतावनी: गलत रास्ते पर न जाएं
  3. सुरक्षा एजेंसियां सतर्क: कोई भी साजिश नाकाम होगी
  4. न्याय मिलता है: देर से ही सही, न्याय होता है
आगे क्या होगा?

दोषियों के पास अब कुछ विकल्प हैं:

  1. उच्च न्यायालय में अपील: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट
  2. सुप्रीम कोर्ट: अंतिम उपाय
  3. सजा भुगतना: यदि अपील खारिज

अगली कानूनी लड़ाई उच्च न्यायालय में होगी।


मुख्य बातें (Key Points)
  • मुहाली की NIA अदालत ने 3 कश्मीरी छात्रों को 10 साल की सजा सुनाई
  • दोषी: जाहिद गुलजार, यासिर रफीक भट्ट, मुहम्मद इदरीस शाह
  • 2018 में जलंधर के हॉस्टल से AK राइफल, पिस्तौल और विस्फोटक बरामद
  • आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे
  • यासिर कुख्यात आतंकवादी जाकिर मूसा का रिश्तेदार
  • चौथा आरोपी सुहेल अहमद भट्ट बरी
  • तीनों 2018 से जेल में, अब और 2 साल रहना होगा

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: NIA कोर्ट क्या है और यह सामान्य अदालत से कैसे अलग है?

उत्तर: NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) कोर्ट विशेष अदालतें हैं जो आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई करती हैं। ये अदालतें सामान्य अदालतों से तेज काम करती हैं, इनमें विशेषज्ञ जज होते हैं जो आतंकवाद कानूनों में प्रशिक्षित हैं, और अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था होती है। UAPA जैसे संवेदनशील मामले इन्हीं अदालतों में सुने जाते हैं।

प्रश्न 2: UAPA में सजा इतनी सख्त क्यों होती है?

उत्तर: UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) भारत का आतंकवाद विरोधी कानून है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसमें सजा सख्त इसलिए है क्योंकि आतंकवाद देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस कानून में जमानत मिलना बहुत मुश्किल है, जांच अवधि 180 दिन तक हो सकती है, और सजा मृत्युदंड तक हो सकती है। यह कानून आतंकवादियों को रोकने और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

प्रश्न 3: अंसार गजवत-उल-हिंद क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है?

उत्तर: अंसार गजवत-उल-हिंद (AGH) एक जिहादी आतंकवादी संगठन है जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय है और अल-कायदा से संबद्ध है। इसकी स्थापना कुख्यात आतंकवादी जाकिर मूसा ने की थी। यह संगठन भारत में प्रतिबंधित है क्योंकि यह हिंसक आतंकवादी गतिविधियां अंजाम देता है, युवाओं को कट्टरपंथी बनाता है, और भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले करता है। AGH का उद्देश्य भारत में अस्थिरता फैलाना और अल-कायदा की विचारधारा को बढ़ावा देना है।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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