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The News Air - NEWS-TICKER - Mohali Mayor Election में AAP में खींचतान तेज, MLA कुलवंत सिंह ने किया 4 आजाद पार्षदों के समर्थन का दावा

Mohali Mayor Election में AAP में खींचतान तेज, MLA कुलवंत सिंह ने किया 4 आजाद पार्षदों के समर्थन का दावा

पिता-पुत्र की जोड़ी बनाम पार्टी महासचिव, 50 सदस्यीय सदन में AAP के 27 पार्षद, कांग्रेस 12 और अन्य दलों के सदस्य भी मौजूद

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
बुधवार, 3 जून 2026
in NEWS-TICKER, पंजाब
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Mohali Mayor Election
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Mohali Mayor Election AAP Infighting एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। Mohali के विधायक Kulwant Singh ने आज दावा किया कि चार नवनिर्वाचित आजाद पार्षद मोहाली नगर निगम (Municipal Corporation) के मेयर चुनाव में Aam Aadmi Party (AAP) का समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ये पार्षद AAP में शामिल भी हो सकते हैं।

देखा जाए तो यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के अंदर मेयर पद के लिए घमासान जोरों पर है। एक तरफ विधायक कुलवंत सिंह अपने बेटे सरबजीत सिंह समाना (वार्ड नंबर 42 के पार्षद) को मेयर बनाने के लिए जोर-अजमाइश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के जनरल सेक्रेटरी सनी सिंह आहलूवालिया (वार्ड नंबर 6 से विजयी) भी इस दौड़ में हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- खौफनाक धमकी: Mohali Court Bomb Threat से मचा हड़कंप, 3 दिन एंट्री बंद

संख्या बल का खेल – किसके पास कितनी ताकत

कुल 50 सदस्यों वाले सदन में ताजा नगर निगम चुनावों में AAP ने 27 पार्षदों के साथ बहुमत हासिल किया है। लेकिन मेयर चुनने के लिए पार्टी को अपने खेमे में एकता की जरूरत है।

पार्टी/समूहपार्षदों की संख्या
AAP27
कांग्रेस12
शिरोमणि अकाली दल (SAD)4
भाजपा3
आजाद पार्षद4
कुल50

समझने वाली बात यह है कि AAP के पास 27 पार्षद हैं, जो साधारण बहुमत (26) से सिर्फ एक ज्यादा हैं। ऐसे में अगर कोई गुट बन जाता है तो पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है।

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यही वजह है कि आजाद पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर 4 आजाद पार्षद AAP के साथ आ जाते हैं, तो पार्टी की संख्या 31 हो जाएगी, जो एक मजबूत स्थिति होगी।

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विधायक कुलवंत सिंह का दावा – “आजाद पार्षद AAP में आ सकते हैं”

पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधायक कुलवंत सिंह ने कहा, “कई बार हर योग्य उम्मीदवार को टिकट देनी मुश्किल हो जाती है, इसी कारण कुछ लोग आजाद तौर पर चुनाव लड़ते हैं। पर मुझे लगता है कि वे मेयर चुनाव में AAP का साथ देंगे और शायद AAP में आ भी जाएं।”

दिलचस्प बात यह है कि यह बयान पार्टी लीडरशिप द्वारा अहम मीटिंग बुलाए जाने से ठीक पहले आया। कुलवंत सिंह अपनी ताकत दिखाने के लिए मंगलवार को अपने घर पर नवनिर्वाचित पार्षदों के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग का आयोजन भी कर चुके हैं।

हैरान करने वाली बात यह है कि इस मीटिंग में सनी सिंह आहलूवालिया और दूसरे दावेदार सुखदेव सिंह पटवारी मौजूद नहीं थे – यानी पार्टी में साफ विभाजन की रेखाएं दिख रही हैं।

पिता-पुत्र की जोड़ी – कुलवंत सिंह और सरबजीत सिंह समाना

विधायक कुलवंत सिंह मोहाली विधानसभा क्षेत्र से AAP के विधायक हैं और पार्टी में उनका काफी प्रभाव है। अब वे अपने बेटे सरबजीत सिंह समाना को मेयर बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

सरबजीत सिंह समाना ने वार्ड नंबर 42 से जीत दर्ज की है। युवा और ऊर्जावान सरबजीत के पास अपने पिता का पूरा राजनीतिक नेटवर्क है। कुलवंत सिंह के नवनिर्वाचित पार्षदों पर काफी प्रभाव है और मंगलवार की ब्रेकफास्ट मीटिंग में यह साफ दिख गया।

अगर गौर करें तो यह एक क्लासिक राजनीतिक रणनीति है – स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ और पार्षदों के साथ व्यक्तिगत संबंध।

प्रतिद्वंद्वी – सनी सिंह आहलूवालिया, पार्टी संरचना में मजबूत

दूसरी ओर सनी सिंह आहलूवालिया AAP के जनरल सेक्रेटरी हैं और पार्टी संरचना में उनकी मजबूत उपस्थिति है। उन्होंने वार्ड नंबर 6 से जीत हासिल की है।

आहलूवालिया की ताकत यह है कि:

  • वे पार्टी के उच्च नेतृत्व के करीब हैं
  • संगठनात्मक स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत है
  • पार्टी हाई कमान का समर्थन मिलने की संभावना

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि AAP जैसी पार्टी में जहां केंद्रीयकृत निर्णय लेने की परंपरा है, वहां पार्टी संगठन से नजदीकी फायदेमंद हो सकती है।

ब्रेकफास्ट मीटिंग – ताकत का प्रदर्शन

मंगलवार को विधायक कुलवंत सिंह ने अपने घर पर नवनिर्वाचित पार्षदों के लिए ब्रेकफास्ट मीटिंग का आयोजन किया। यह एक क्लासिक “शो ऑफ स्ट्रेंथ” (ताकत का प्रदर्शन) था।

मीटिंग की खास बातें:

  • कई नवनिर्वाचित पार्षद शामिल हुए
  • सनी सिंह आहलूवालिया और सुखदेव सिंह पटवारी गायब थे
  • मीडिया को बुलाकर संदेश दिया गया कि कुलवंत सिंह के पास संख्या बल है
  • पार्टी लीडरशिप को दबाव बनाने की कोशिश

समझने वाली बात यह है कि राजनीति में ऐसे प्रदर्शन महत्वपूर्ण होते हैं। यह न सिर्फ पार्टी लीडरशिप को संदेश देता है बल्कि अन्य पार्षदों को भी यह दिखाता है कि “विजेता” कौन है।

AAP में निर्णय प्रक्रिया – कौन लेगा अंतिम फैसला

AAP एक ऐसी पार्टी है जहां अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व लेता है। Arvind Kejriwal (हालांकि अभी वे जेल में हैं) और Bhagwant Mann (पंजाब के मुख्यमंत्री) का इस निर्णय में महत्वपूर्ण रोल होगा।

कुलवंत सिंह ने उम्मीद जताई कि पार्टी अगले हफ्ते नवनिर्वाचित पार्षदों की मीटिंग बुला सकती है, क्योंकि नतीजा घोषित होने के 15 दिनों के अंदर मेयर का चुनाव करना लाजमी है।

दिलचस्प बात यह है कि AAP में अक्सर केंद्रीय नेतृत्व स्थानीय नेताओं की महत्वाकांक्षाओं पर भारी पड़ता है। लेकिन इस बार स्थानीय समीकरण इतने जटिल हैं कि दिल्ली को भी सावधानी से कदम उठाना होगा।

15 दिन की समय सीमा – कब होगा मेयर चुनाव

नगर निगम के नियमों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर मेयर का चुनाव करना अनिवार्य है। इसलिए समय बहुत कम है और पार्टी को जल्द ही निर्णय लेना होगा।

यह समय सीमा दोनों गुटों के लिए चुनौती है:

  • कुलवंत सिंह को अपने समर्थकों को साधे रखना होगा
  • आहलूवालिया को पार्टी नेतृत्व से समर्थन पक्का करना होगा
  • दोनों को आजाद पार्षदों को अपने पक्ष में करना होगा
कांग्रेस और अन्य दलों की भूमिका

50 सदस्यीय सदन में Indian National Congress के 12 पार्षद हैं। अगर AAP में गंभीर विभाजन हो जाता है, तो कांग्रेस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि AAP का कोई गुट कांग्रेस से हाथ मिलाएगा, लेकिन राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।

Shiromani Akali Dal के 4 पार्षद और BJP के 3 पार्षद भी हैं, लेकिन उनकी संख्या इतनी कम है कि वे निर्णायक भूमिका नहीं निभा सकते।

आजाद पार्षद – किंगमेकर की भूमिका में

4 आजाद पार्षद अब किंगमेकर की भूमिका में हैं। कुलवंत सिंह का दावा है कि वे AAP का समर्थन करेंगे और AAP में शामिल भी हो सकते हैं।

लेकिन सवाल यह है:

  • क्या वे कुलवंत सिंह के बेटे को वोट देंगे या आहलूवालिया को?
  • क्या उन्हें AAP में शामिल होने के लिए कोई पद या प्रोत्साहन दिया जाएगा?
  • क्या वे एकजुट रहेंगे या अलग-अलग फैसले लेंगे?

अगर गौर करें तो आजाद पार्षद अक्सर बेहतर सौदेबाजी की स्थिति में होते हैं। वे अपने समर्थन के बदले में वार्ड के विकास, व्यक्तिगत पदों या अन्य लाभों की मांग कर सकते हैं।

पंजाब की राजनीति में यह पैटर्न – नया नहीं है

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि Punjab की राजनीति में नगर निगम चुनावों के बाद ऐसा घमासान नया नहीं है। अमृतसर, लुधियाना, जालंधर – हर जगह मेयर चुनाव में खींचतान देखने को मिली है।

AAP ने पंजाब में सत्ता संभाली है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अभी भी पार्टी को अपनी जड़ें मजबूत करनी हैं। ऐसे में नगर निगम चुनावों में जीत और फिर मेयर पद पर अपने विश्वसनीय व्यक्ति को बिठाना महत्वपूर्ण है।

क्या होगा अगला कदम – संभावित परिदृश्य

परिदृश्य 1 – पार्टी हाई कमान का हस्तक्षेप:
पार्टी केंद्रीय नेतृत्व दोनों गुटों को बुलाकर सहमति बनाने की कोशिश करेगा। संभव है कि मेयर एक गुट से और डिप्टी मेयर दूसरे गुट से बनाया जाए।

परिदृश्य 2 – कुलवंत सिंह की जीत:
अगर आजाद पार्षद वाकई उनका समर्थन करते हैं और पर्याप्त पार्षद उनके साथ हैं, तो सरबजीत सिंह समाना मेयर बन सकते हैं।

परिदृश्य 3 – पार्टी संगठन की जीत:
अगर पार्टी हाई कमान सनी सिंह आहलूवालिया के पक्ष में फैसला लेती है, तो कुलवंत सिंह को झुकना पड़ सकता है (हालांकि यह मुश्किल होगा)।

परिदृश्य 4 – तीसरा विकल्प:
संभव है कि पार्टी किसी तीसरे, कम विवादास्पद उम्मीदवार पर सहमति बनाए।

मुख्य बातें (Key Points)
  • Mohali Mayor Election के लिए AAP में खींचतान तेज, विधायक कुलवंत सिंह बनाम पार्टी जनरल सेक्रेटरी सनी सिंह आहलूवालिया
  • 50 सदस्यीय सदन में AAP के 27 पार्षद, कांग्रेस के 12, SAD के 4, BJP के 3 और 4 आजाद पार्षद
  • कुलवंत सिंह ने दावा किया कि 4 आजाद पार्षद AAP का समर्थन करेंगे और पार्टी में शामिल भी हो सकते हैं
  • विधायक अपने बेटे सरबजीत सिंह समाना (वार्ड 42 पार्षद) को मेयर बनाना चाहते हैं
  • मंगलवार को ब्रेकफास्ट मीटिंग में ताकत का प्रदर्शन, आहलूवालिया गायब रहे
  • नतीजा घोषित होने के 15 दिनों के अंदर मेयर चुनाव करना अनिवार्य
  • पार्टी हाई कमान अगले हफ्ते मीटिंग बुला सकती है
  • स्थानीय प्रभाव बनाम पार्टी संगठन की ताकत का संघर्ष
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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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