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The News Air - Breaking News - Delhi High Court: पालतू कुत्ते परिवार का हिस्सा, संपत्ति नहीं

Delhi High Court: पालतू कुत्ते परिवार का हिस्सा, संपत्ति नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला कुत्तों की कस्टडी मामले में भावनात्मक जुड़ाव को सर्वोपरि माना, तीन Toy Pomeranian को गोद लेने वालों को सौंपा

Ajay Kumar by Ajay Kumar
गुरूवार, 2 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Delhi High Court Pet Dog Custody: अगर आपके घर में भी कोई पालतू कुत्ता है, तो दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला आपके लिए बेहद अहम है। अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि पालतू कुत्तों को केवल संपत्ति नहीं माना जा सकता। वे परिवार का हिस्सा होते हैं और उनकी कस्टडी तय करते समय सिर्फ मालिकाना हक नहीं, बल्कि जानवरों का कल्याण और उनका भावनात्मक जुड़ाव भी सबसे अहम होना चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान आई जिसमें तीन पालतू कुत्तों की कस्टडी को लेकर विवाद चल रहा था।

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मामला क्या था?

देखा जाए तो यह मामला क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पुलिस की छापेमारी से शुरू हुआ था। पुलिस ने एक परिसर में छापा मारकर कुछ कुत्तों को खराब हालत में पाया और उन्हें बचाया। इन कुत्तों को फिर एक NGO को सौंपा गया।

NGO ने इनमें से तीन कुत्तों – मिस्टी, कोको और कॉटन – को याचिकाकर्ताओं को गोद दे दिया। यह तीनों Toy Pomeranian नस्ल के कुत्ते थे।

बाद में तीसरे पक्ष ने खुद को कुत्तों का असली मालिक बताते हुए ट्रायल कोर्ट में सुपुर्दगी (अस्थाई कस्टडी) की मांग की। ट्रायल कोर्ट ने यह मांग स्वीकार कर ली और कुत्तों को उन्हें सौंपने का आदेश दिया।

इसी आदेश को याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?

समझने वाली बात यह है कि न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने अप्रैल में ट्रायल कोर्ट के आदेश को संशोधित करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

कोर्ट ने कहा: “जानवरों की कस्टडी को बेजान वस्तुओं की तरह नहीं देखा जा सकता।”

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि पालतू कुत्तों और उनके मालिकों के बीच एक गहरा भावनात्मक बंधन होता है। इस बंधन को तोड़ना न केवल कुत्तों के लिए, बल्कि उनके मालिकों के लिए भी भावनात्मक आघात पहुंचाता है।

कोर्ट ने कहा कि कस्टडी तय करते समय सिर्फ यह नहीं देखा जाना चाहिए कि कानूनी रूप से कौन मालिक है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि:

  • कुत्तों का कल्याण किसके पास बेहतर होगा
  • कौन उन्हें बेहतर देखभाल दे सकता है
  • कुत्तों का किसके साथ भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा है
कोर्ट का फैसला क्या था?

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में बदलाव करते हुए तीन कुत्तों को उनके गोद लेने वाले लोगों के पास ही वापस भेजने का निर्देश दिया।

हालांकि, अदालत ने यह फैसला कुछ शर्तों के साथ दिया:

₹50,000 का बॉन्ड: गोद लेने वालों को ₹50,000 का बॉन्ड जमा करना होगा।

सुपुर्दगी पर कस्टडी: कुत्ते सुपुर्दगी (अस्थाई कस्टडी) के आधार पर गोद लेने वालों को दिए जाएंगे।

मुकदमे के दौरान पेश करना होगा: जरूरत पड़ने पर मुकदमे के दौरान कुत्तों को अदालत में पेश करना होगा।

दोनों पक्षों की सहमति: यह फैसला दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर लिया गया।

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यह फैसला क्यों अहम है?

अगर कानूनी नजरिये से देखें तो यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक है:

पहला: इसने स्थापित किया कि पालतू जानवर केवल संपत्ति नहीं हैं, बल्कि परिवार के सदस्य हैं।

दूसरा: इसने भावनात्मक बंधन को कानूनी मान्यता दी।

तीसरा: यह भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

भारत में तलाक या संपत्ति विवादों में अक्सर पालतू जानवरों की कस्टडी को लेकर झगड़े होते हैं। अब तक कानून में इस बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं थे। यह फैसला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जानवरों के अधिकारों की दिशा में कदम

यहां समझने वाली बात यह है कि यह फैसला जानवरों के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। पिछले कुछ सालों में भारतीय अदालतों ने जानवरों के कल्याण पर कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट ने जानवरों को “legal person” का दर्जा दिया
  • कई राज्यों में जानवरों के प्रति क्रूरता के खिलाफ सख्त कानून बनाए गए
  • पालतू जानवरों की देखभाल और उनके अधिकारों पर जागरूकता बढ़ी है

दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला इसी क्रम में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

पालतू जानवर रखने वालों के लिए सीख

दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला पालतू जानवर रखने वाले सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है:

रिकॉर्ड रखें: अपने पालतू जानवर के सभी कागजात, टीकाकरण रिकॉर्ड, और गोद लेने के दस्तावेज संभाल कर रखें।

अच्छी देखभाल करें: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जानवर का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है।

भावनात्मक बंधन बनाएं: आपका और आपके पालतू जानवर का रिश्ता कानूनी रूप से मान्य है।

क्रूरता से बचें: जानवरों के साथ किसी भी तरह की क्रूरता कानूनन दंडनीय है।


मुख्य बातें (Key Points)

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पालतू कुत्ते परिवार का हिस्सा हैं, केवल संपत्ति नहीं
  • तीन Toy Pomeranian कुत्तों (मिस्टी, कोको, कॉटन) की कस्टडी गोद लेने वालों को सौंपी गई
  • न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने भावनात्मक बंधन को महत्व दिया
  • ₹50,000 का बॉन्ड जमा कर सुपुर्दगी पर कस्टडी दी गई
  • यह फैसला जानवरों के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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