IMD Weather Forecast 13-26 August 2026: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में अगले दो हफ्तों के दौरान भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। देखा जाए तो, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में 13-14 अगस्त को अत्यधिक भारी बारिश (extremely heavy rainfall) का रेड अलर्ट जारी किया गया है। अगर गौर करें, तो यह मौसम प्रणाली पूर्वी और मध्य भारत में व्यापक प्रभाव डालेगी।
IMD के 13 अगस्त 2026 के प्रेस रिलीज के अनुसार, वर्तमान में तटीय पश्चिम बंगाल के ऊपर एक Depression (अवदाब) स्थित है, जो अगले 24 घंटों में गंगा के मैदानी इलाकों और झारखंड से होते हुए उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा। इसके बाद यह कमजोर होकर पूर्वी और मध्य भारत में आगे बढ़ेगा।
समझने वाली बात यह है कि मानसून ट्रफ (monsoon trough) का पश्चिमी सिरा सामान्य से उत्तर की ओर बना रहेगा, जबकि पूर्वी सिरा सामान्य से दक्षिण की ओर होगा। यही कारण है कि पूर्वी भारत में भारी वर्षा की संभावना बढ़ गई है।
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13-14 अगस्त: रेड अलर्ट, अत्यधिक भारी बारिश का खतरा
IMD ने 13 अगस्त को गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में अत्यधिक भारी वर्षा (300 mm से अधिक) की चेतावनी दी है। 14 अगस्त को भी छत्तीसगढ़ में ऐसी ही स्थिति बन सकती है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 13 अगस्त को गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल और झारखंड में तेज हवाओं (50-60 kmph, झोंके 70 kmph तक) के साथ thundersquall की भी संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि झारखंड और ओडिशा में मध्यम से तेज बिजली गिरने (lightning activity) की भी आशंका है।
प्रभावित राज्य और अवधि:
| राज्य/क्षेत्र | भारी बारिश की तारीख | अत्यधिक भारी बारिश |
|---|---|---|
| गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल | 13, 15 अगस्त | 13 अगस्त |
| झारखंड | 13, 15-17 अगस्त | 13 अगस्त |
| ओडिशा | 13, 15-17 अगस्त | 13 अगस्त |
| छत्तीसगढ़ | 13-14, 16-17 अगस्त | 13-14 अगस्त |
| सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम | 13-14 अगस्त | 15-16 अगस्त (बहुत भारी) |
| बिहार | 17-18 अगस्त | — |
पूर्वोत्तर भारत में भी भारी बारिश
पूर्वोत्तर राज्यों में भी सप्ताह भर भारी वर्षा की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों में भूस्खलन (landslide) और बाढ़ (flood) का खतरा बना रहेगा।
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मध्य भारत: व्यापक वर्षा गतिविधि
मध्य भारत के राज्यों में भी सप्ताह भर व्यापक वर्षा होगी:
- पश्चिम मध्य प्रदेश: 13-15 अगस्त (भारी), 16-17 अगस्त (बहुत भारी)
- पूर्वी मध्य प्रदेश: 13-14, 18 अगस्त (भारी), 15-17 अगस्त (बहुत भारी)
- विदर्भ: 14-16 अगस्त (भारी)
- छत्तीसगढ़: 13-14, 16-17 अगस्त (भारी), 13-14 अगस्त (अत्यधिक भारी), 15 अगस्त (बहुत भारी)
चिंता का विषय यह है कि राजस्थान के कुछ हिस्सों में पहले ही 11 अगस्त को अत्यधिक भारी वर्षा (सुनेल, जिला झालावाड़ में 30 cm) दर्ज की जा चुकी है।
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम के मैदान
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी सप्ताह के कई दिनों में भारी से बहुत भारी वर्षा होगी:
- हिमाचल प्रदेश: 14, 17-18 अगस्त (बहुत भारी)
- उत्तराखंड: 14, 16-17 अगस्त (बहुत भारी)
समझने वाली बात यह है कि पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से भूस्खलन और सड़क अवरोध (road blockage) की समस्या गंभीर हो सकती है।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: तटीय कर्नाटक में लगातार बारिश
दक्षिणी राज्यों में केरल और महे तथा लक्षद्वीप में 13-17 अगस्त के दौरान व्यापक वर्षा होगी। तटीय कर्नाटक में पूरे सप्ताह (13-19 अगस्त) बारिश जारी रहेगी।
दूसरे सप्ताह (20-26 अगस्त) में कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक में कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
वर्षा का समग्र पूर्वानुमान: देशव्यापी स्थिति
सप्ताह 1 (13-19 अगस्त):
- मध्य भारत, इंडो-गंगा के मैदान, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: सामान्य से अधिक या सामान्य वर्षा
- प्रायद्वीपीय भारत: सामान्य से कम वर्षा
- देश समग्र: सामान्य वर्षा
सप्ताह 2 (20-26 अगस्त):
- मध्य और पूर्वी भारत तथा पश्चिमी घाट: सामान्य से अधिक वर्षा
- शेष भारत: सामान्य से कम वर्षा
- देश समग्र: सामान्य से कम वर्षा
तापमान का पूर्वानुमान: गर्मी का कोई खतरा नहीं
अच्छी खबर यह है कि देश के किसी भी हिस्से में अगले दो हफ्तों में हीट वेव (लू) की कोई संभावना नहीं है। अधिकतम तापमान उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सामान्य से 2-3°C अधिक रह सकता है, लेकिन गर्म रातें (warm nights) की कोई आशंका नहीं है।
El Niño और Indian Ocean Dipole का प्रभाव
IMD के अनुसार, वर्तमान में मध्यम El Niño स्थितियां प्रशांत महासागर में बनी हुई हैं, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान और मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि, हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) अभी तटस्थ (neutral) है और शेष मानसून अवधि में ऐसा ही रहने की संभावना है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय पूर्वानुमान केंद्रों का सुझाव है कि सितंबर 2026 में सकारात्मक IOD विकसित हो सकता है, जो भारत में मानसून वर्षा को प्रभावित कर सकता है।
मौसम से जुड़ी चेतावनियां और सुझाव
सामान्य जनता के लिए:
- सुरक्षित स्थानों पर रहें, बिगड़ती स्थिति पर नजर रखें
- पेड़ों के नीचे शरण न लें, क्योंकि बिजली गिरने का खतरा है
- बिजली की आशंका होने पर तुरंत इलेक्ट्रिकल उपकरण अनप्लग करें
- पर्यटन और मनोरंजन गतिविधियों को नियंत्रित करें
- हेलीकॉप्टर सेवाओं को विनियमित किया जाए
किसानों के लिए कृषि सलाह:
- ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़: धान, मक्का, दलहन, कपास और सब्जियों के खेतों से लगातार जल निकासी सुनिश्चित करें
- उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय: धान, सोयाबीन, अदरक, हल्दी के खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखें
- जलभराव वाले इलाकों में बीजाई/रोपाई टालें
- टमाटर, केला, पपीता जैसी फसलों को सहारा दें (staking/propping)
- परिपक्व फसलों की कटाई करें और उपज को सुरक्षित स्थान पर रखें
पशुपालन:
- भारी वर्षा के दौरान पशुओं को शेड के अंदर रखें
- चारा और खाद्य सामग्री सुरक्षित स्थान पर संग्रहित करें
संचयी मानसून वर्षा: अब तक की स्थिति
1 जून से 12 अगस्त 2026 तक, देश में कुल मिलाकर सामान्य से 12% कम वर्षा दर्ज की गई है। क्षेत्रवार विवरण:
| क्षेत्र | वास्तविक वर्षा (mm) | सामान्य वर्षा (mm) | विचलन (%) |
|---|---|---|---|
| पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत | 648.8 | 878.3 | -26% |
| उत्तर-पश्चिम भारत | 331.4 | 371.7 | -11% |
| मध्य भारत | 623.7 | 626.0 | 0% |
| दक्षिण प्रायद्वीप | 360.7 | 445.9 | -19% |
| देश समग्र | 486.2 | 552.6 | -12% |
समझने वाली बात यह है कि मध्य भारत में वर्षा सामान्य रही है, जबकि पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा कमी (-26%) दर्ज की गई है।
आगे क्या होगा?
IMD का अनुमान है कि अगले दो हफ्तों में मध्य और पूर्वी भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होगी, जो इस घाटे को कम करने में मदद करेगी। हालांकि, किसानों और स्थानीय प्रशासन को बाढ़, जलभराव और भूस्खलन के लिए तैयार रहना होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में 13 अगस्त को अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट
- छत्तीसगढ़ में 13-14 अगस्त को 300 mm से अधिक बारिश की संभावना
- तटीय पश्चिम बंगाल के ऊपर Depression (अवदाब) स्थित, जो उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा
- हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कई दिनों तक भारी बारिश, भूस्खलन का खतरा
- अगले दो हफ्तों में किसी भी हिस्से में हीट वेव की संभावना नहीं
- 1 जून से अब तक देश में 12% कम वर्षा, पूर्वी भारत में 26% की कमी










