Cancer Drugs Price Hike : देश में कैंसर के मरीजों और छोटे बच्चों के माता-पिता के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने वीरवार को तीन अलग-अलग सरकारी नोटिफिकेशन जारी किए। इनके जरिए कैंसर के इलाज में काम आने वाली अहम कीमोथेरेपी दवाओं, एंटी-टेटनस इंजेक्शन और बच्चों के मुख्य टीकों की कीमतों में 50 फीसदी तक के इजाफे को हरी झंडी दे दी गई है।
अथॉरिटी का कहना है कि यह फैसला कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और बाजार में इन जरूरी दवाओं की किल्लत के खतरे को देखते हुए लिया गया है। देखा जाए तो यह सीधे-सीधे करोड़ों लोगों की जेब और सेहत से जुड़ा मामला है।
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कैंसर की दो बड़ी दवाएं 50% महंगी
सबसे पहले बात कैंसर की। NPPA ने ‘ड्रग्स (प्राइसेज कंट्रोल) ऑर्डर’ (DPCO) 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया। और इसी के सहारे कैंसर के इलाज की दो फर्स्ट-लाइन दवाओं: कार्बोप्लाटिन (Carboplatin) और सिसप्लाटिन (Cisplatin) की कीमत एक ही बार में 50 फीसदी बढ़ा दी।
अब कार्बोप्लाटिन (10 मिलीग्राम/मिलीलीटर) इंजेक्शन की कीमत बढ़कर 90.74 रुपये प्रति मिलीलीटर हो गई है। वहीं सिसप्लाटिन (1 मिलीग्राम/मिलीलीटर) की कीमत 10.89 रुपये प्रति मिलीलीटर तय की गई है।
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आखिर कीमत क्यों बढ़ानी पड़ी
यहां समझने वाली बात यह है कि पिछले कुछ सालों में इन दवाओं को बनाने वाले कच्चे माल (API) की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। नतीजा यह हुआ कि कंपनियों के लिए इन्हें बनाना घाटे का सौदा बनने लगा।
अस्पतालों, कैंसर विशेषज्ञों और दवा निर्माताओं ने पहले ही सप्लाई में आ रही रुकावट को लेकर चिंता जताई थी। चिंता का विषय यह था कि अगर ये दवाएं बाजार से गायब हो जातीं, तो मरीजों को मजबूरी में और भी महंगे विकल्प चुनने पड़ते। राहत की बात इतनी है कि इन नई कीमतों की छह महीने बाद दोबारा समीक्षा की जाएगी।
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एंटी-टेटनस इंजेक्शन भी 50% महंगा
इसी तरह एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की कीमत में भी 50 फीसदी इजाफे को मंजूरी मिली है। दिलचस्प बात यह है कि इस इंजेक्शन को सिर्फ एक ही कंपनी मैसर्स भारत सीरम्स एंड वैक्सीन्स लिमिटेड बनाती है।
अब इसके 250 IU वाले वायल की कीमत 1,912.02 रुपये और 500 IU वाले वायल की कीमत 2,881.19 रुपये हो गई है।
असल कहानी यहां से शुरू होती है। दिसंबर 2024 में NPPA ने कीमत तय करते समय अकेली कंपनी होने के चलते 7.67% की ‘मोनोपोली कटौती’ लगाई थी। लेकिन कंपनी ने इसका विरोध किया। उसका तर्क था कि विदेश से मंगाए जाने वाले कच्चे माल की बढ़ती लागत और करेंसी के उतार-चढ़ाव के कारण वह लगातार घाटे में चल रही है। फार्मास्युटिकल विभाग के दखल के बाद, 18 मई 2026 की बैठक में इस बात को मानते हुए कीमतें बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई।
बच्चों के तीन टीके भी हुए महंगे
तीसरे नोटिफिकेशन के तहत सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के बनाए तीन मुख्य टीकों की कीमतें संशोधित की गई हैं। इस फैसले में पहले लगाई गई 17.10% की मोनोपोली कटौती हटा दी गई और साल 2026 के लिए 0.64956% का ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (WPI) असर जोड़ा गया।
इस बदलाव के बाद कीमतें एक नजर में इस तरह बदलीं:
| टीका | पुरानी कीमत | नई कीमत |
|---|---|---|
| BCG वैक्सीन (प्रति 0.10 मिली खुराक) | 8.20 रुपये | 9.89 रुपये |
| खसरा-रूबेला (Measles-Rubella) वैक्सीन (0.5 मिली वायल) | 72.90 रुपये | 87.93 रुपये |
| खसरा (Measles) वैक्सीन | 51.40 रुपये | 62.00 रुपये |
सीरम इंस्टीट्यूट का तर्क था कि टीकों को आम दवाओं की तरह नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इनके निर्माण की तकनीक और प्रक्रिया बिल्कुल अलग होती है। सरकार ने बच्चों की सेहत और टीकों की लगातार सप्लाई को ध्यान में रखते हुए इस मांग को जायज माना।
नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई
NPPA ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माताओं को इन नई दरों (प्लस GST) के मुताबिक अपनी कीमतें तुरंत संशोधित करनी होंगी। अगर कोई कंपनी तय कीमत से ज्यादा वसूलती है, तो उससे ब्याज समेत अतिरिक्त रकम ‘जरूरी वस्तुएं अधिनियम 1955’ के तहत वापस ली जाएगी।
इतना ही नहीं: अगर कोई कंपनी इन दवाओं का उत्पादन बंद करना चाहती है, तो उसे 6 महीने पहले सरकार को सूचित करना होगा।
आम आदमी पर क्या असर
अब सीधा सवाल उठता है कि इसका असर किस पर पड़ेगा। एक तरफ मरीज की जेब पर थोड़ा बोझ बढ़ेगा, क्योंकि कैंसर के इलाज और टीकाकरण का खर्च ऊपर जाएगा। लेकिन दूसरी ओर, इससे यह भी साफ होता है कि सरकार दवाओं की किल्लत रोकना चाहती है। मतलब, थोड़ी ज्यादा कीमत चुकाकर भी अगर जरूरी दवा बाजार में बनी रहती है, तो लंबे समय में यह मरीज के लिए उम्मीद की किरण ही है।
जानें पूरा मामला
यह पूरा मामला कच्चे माल की कीमतों से जुड़ा है। कैंसर की इन दवाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री महंगी होती जा रही थी, जिससे कंपनियां उत्पादन से पीछे हट रही थीं। टेटनस इंजेक्शन और बच्चों के टीके बनाने वाली कंपनियां भी अकेली निर्माता होने और घाटे का हवाला देकर लंबे समय से कीमत बढ़ाने की मांग कर रही थीं। आखिरकार सरकार ने सप्लाई बनाए रखने के लिए इन सभी की कीमतों में संशोधन को मंजूरी दे दी।
मुख्य बातें (Key Points)
- NPPA ने कैंसर की दो दवाओं कार्बोप्लाटिन और सिसप्लाटिन की कीमत 50% बढ़ाई।
- एंटी-टेटनस इम्यूनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की कीमत भी 50% तक बढ़ी।
- BCG, खसरा-रूबेला और खसरा वैक्सीन की कीमतों में भी इजाफा हुआ।
- तय कीमत से ज्यादा वसूली पर ब्याज समेत रकम वापस लेने का नियम लागू।













