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The News Air - Breaking News - चौंकाने वाला: जीभ के छाले निकले Tongue Cancer, 40% जीभ काटनी पड़ेगी

चौंकाने वाला: जीभ के छाले निकले Tongue Cancer, 40% जीभ काटनी पड़ेगी

25 साल की ओलिविया दो साल से जीभ में छालों से परेशान थी, बायोप्सी में निकला कैंसर का ट्यूमर, जानें लक्षण और बचाव

The News Air Team by The News Air Team
गुरूवार, 4 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, हेल्थ
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Tongue Cancer Symptoms
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Tongue Cancer की एक हैरान करने वाली केस स्टडी सामने आई है। इंग्लैंड की 25 साल की ओलिविया डोनेली पिछले दो सालों से जीभ में छालों से परेशान थी। उन्होंने सोचा यह सामान्य छाले हैं जो ठीक हो जाएंगे। लेकिन जब बायोप्सी हुई तो रिपोर्ट में निकला कैंसर। अब डॉक्टर्स ने बताया है कि उनकी जीभ का 40% हिस्सा निकालना पड़ेगा।

देखा जाए तो यह सिर्फ एक केस नहीं है बल्कि एक चेतावनी है कि जीभ के छालों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, ओलिविया को अब दोबारा बोलना सीखना होगा, दोबारा खाना सीखना होगा। यह सब स्वीकार करना बहुत मुश्किल है।

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कैसे शुरू हुआ यह सब?

ओलिविया बताती हैं कि पिछले दो सालों से उनकी जीभ में छाले हो रहे थे। छालों में दर्द की वजह से अक्सर उनके लिए बोलना मुश्किल हो जाता था। शुरुआत में उन्होंने दवा खाई लेकिन कोई आराम नहीं मिला।

फिर वह डॉक्टर के पास गईं। वहां उनके टेस्ट हुए और रिपोर्ट्स एकदम नॉर्मल आईं। इसीलिए डॉक्टर्स को लगा कि शायद ओलिविया को इम्यून सिस्टम से जुड़ी कोई बीमारी होगी।

लेकिन इस साल की शुरुआत में उन्हें अपनी जीभ पर एक सख्त गांठ महसूस हुई। अगर गौर करें तो यही वह संकेत था जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए था।

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बायोप्सी में आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

ओलिविया ने दोबारा टेस्ट कराए, बायोप्सी कराई और इस बार जांच में निकला Tongue Cancer। डॉक्टर्स ने उन्हें बताया कि उनकी जीभ पर जो गांठ थी वो असल में कैंसर का ट्यूमर था।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अब उनकी जीभ का 40% हिस्सा निकालकर दोबारा बनाया जाएगा। यही नहीं, उनके लिंफ नोड्स भी निकालने होंगे क्योंकि डॉक्टर्स को डर है कि शायद कैंसर वहां तक फैल चुका हो।

अपने TikTok अकाउंट पर ओलिविया ने अपनी कहानी शेयर की। उन्होंने कहा कि कभी मैं ठीक महसूस करती हूं तो कभी बहुत दुखी हो जाती हूं। लेकिन शायद यह सामान्य प्रक्रिया है।

दिलचस्प बात यह है कि ओलिविया अपनी कहानी इसलिए शेयर कर रही हैं ताकि कम उम्र में होने वाले Tongue Cancer को लेकर लोग जागरूक हो सकें।

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क्या है टंग कैंसर और क्यों होता है?

सर गंगा राम हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरपर्सन डॉ. श्याम अग्रवाल बताते हैं कि टंग कैंसर हेड-नेक कैंसर का एक हिस्सा होता है। भारत में हेड-नेक कैंसर नंबर वन कैंसर है।

लगभग 16 से 17 लाख नए कैंसर के केसेज होते हैं भारत में हर साल और उसमें से एक तिहाई से भी ज्यादा ओरल कैंसर होते हैं। इस कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू चबाना है।

समझने वाली बात यह है कि किसी भी फॉर्म में तंबाकू का सेवन खतरनाक है। चाहे आप उसको चबाएं, मुंह में जुबान में रखें, खैनी रखें या किसी भी तरह से स्मोकिंग करें, बीड़ी पीएं, सिगरेट पीएं – इन सब से कैंसर का इंसिडेंस बढ़ता है।

टंग कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि आमतौर पर काफी लोगों को मुंह में छाले पड़ते रहते हैं और वो ठीक हो जाते हैं। कुछ गरम खा लिया, कुछ तली हुई चीज खा ली या कोई ऐसी हेवी चीज खा ली तो छाले हो जाते हैं।

लेकिन Tongue Cancer का पहला लक्षण यह होता है कि एक घाव बनना शुरू होता है जुबान के ऊपर और वो घाव धीरे-धीरे करके बढ़ता जाता है। यूजुअली यह शुरुआती दौर में पेनलेस होता है, इसमें कोई दर्द नहीं होता है।

लेकिन जब वो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है और उसमें सुधार नहीं होता है तो उसमें दर्द भी हो सकता है और वहां से ब्लीडिंग भी आ सकती है।

यहां चिंता का विषय यह है कि कैंसर सेल्स का काम डिवाइड करना होता है। यह बढ़ता जाएगा, बढ़ता जाएगा। एक तो जुबान पर लेकिन जुबान की जो ड्रेनिंग एरिया नोड्स है वो गर्दन में होती है।

अगर जुबान पर राइट साइड पर कैंसर हो रहा है तो उनकी जो ड्रेनिंग लिंफ नोड्स है वो गर्दन में राइट साइड में होती है। उनकी गांठों के अंदर भी एक वृद्धि होनी शुरू हो जाएगी।

मुख्य लक्षण:

लक्षणविवरण
जुबान में घावजो ठीक नहीं हो रहा, धीरे-धीरे बढ़ रहा है
ब्लीडिंगघाव से खून आना
गर्दन में गांठेंलिंफ नोड्स में सूजन
दर्दशुरुआत में नहीं, बाद में हो सकता है
बोलने में दिक्कतजीभ की गति प्रभावित होना
कैसे होता है डायग्नोसिस?

डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि यदि किसी पेशेंट को ऐसे नॉन-हीलिंग अल्सर हो रहा है जो कि घाव है जो ठीक नहीं हो रहा या गांठें आ रही हैं गर्दन में तो उसकी बायोप्सी होना एसेंशियल है।

घाव बनने के और भी कारण हो सकते हैं, गांठों के और भी कारण हो सकते हैं। तो हमारे पेशेंट्स बहुत ज्यादा बायोप्सी करने से कतराते हैं। लेकिन कैंसर को एस्टेब्लिश करने के लिए, कंफर्म करने के लिए वहां की बायोप्सी का होना अत्यंत ही लाजमी है।

जब एक बार यह एस्टेब्लिश हो गया कि वो कैंसर है तो फिर स्टेजिंग करनी पड़ती है। गांठों को और डिटेल में स्टडी करने के लिए, उस ट्यूमर का कितना डेप्थ में इन्वेशन है, इसके लिए MRI भी करते हैं और छाती का एक्स-रे करते हैं देखने के लिए कि कैंसर का फैलाव तो नहीं है।

क्या है इलाज और क्योर रेट?

डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि यदि आप पेशेंट का कैंसर एक ही जगह पर यानी टंग में है तो आप उसको ऑपरेशन के जरिए निकाल सकते हैं। आपको कितनी टंग निकालनी है वो उसकी लोकेशन पर डिपेंड करता है और साइज पर डिपेंड करता है।

अगर ट्यूमर बहुत छोटा सा है एक सेंटीमीटर का है वेल डिफरेंशिएटेड है तो उतना ही हिस्सा निकालते हैं और गर्दन से गांठों को भी निकाला जाता है।

स्टेज के अनुसार इलाज:

स्टेजइलाजक्योर रेट
1st-2nd Stageऑपरेशन + Neck Dissection70-90%
Loco-RegionalConcurrent Chemo-Radiation60-70%
4th Stage (Metastatic)Immunotherapy + Targeted Therapy10-20%

अगर फर्स्ट या सेकंड स्टेज में है जिसमें ट्यूमर केवल टंग में और गांठों तक सीमित है तो ऑपरेशन के जरिए या तो उतना ही हिस्सा या थोड़ा और जिसको हेमिग्लोसेक्टमी बोलते हैं – आधी टंग को भी निकाल सकते हैं।

गर्दन से रेडिकल नेक डिसेक्शन करते हैं क्योंकि यह देखना बहुत जरूरी होता है कि भी गांठों में कैंसर फैला है कि नहीं। अगर वो गांठें बढ़ी भी नहीं हैं तो एक माइक्रोस्कोपिक लेवल पर वहां पर कैंसर फैल सकता है।

उसके बाद का जो इलाज है वो उस ऑपरेशन के रिजल्ट पर डिपेंड करता है कि क्या एडजेवेंट रेडियोथेरेपी दें या ना दें।

अगर इलाज नहीं कराया तो क्या होगा?

डॉ. अग्रवाल चेतावनी देते हैं कि अगर आप कैंसर का इलाज नहीं कराएंगे और वो बढ़ता रहेगा तो गर्दन की जो गांठें हैं वो फट भी सकती हैं। उनमें भी घाव बन सकता है। यह बहुत ही खराब बात होती है।

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अगर उसके बाद भी इलाज नहीं कराएंगे तो वो कैंसर फेफड़े में, हड्डियों में, लिवर में या शरीर के किसी और हिस्से में फैल सकता है जिसको चौथी स्टेज बोलते हैं।

चौथी स्टेज के कैंसर में अमूमन जो इलाज है वो कीमोथेरेपी, कैंसर की दवाइयां और इम्यूनोथेरेपी जैसे Pembrolizumab या Nivolumab इस तरह की दवाइयां हैं जो कि कैंसर को कंट्रोल कर सकती हैं।

फाइनली टारगेटेड थेरेपी भी है जिसमें कि Cetuximab (EGFR Inhibitor) या Bevacizumab का इलाज होता है। इम्यूनोथेरेपी से भी पेशेंट को क्योर किया जा सकता है एडवांस स्टेज में। लेकिन उसकी जो ठीक होने की संभावना है, क्योर होने की जो संभावना है वो 10-20% ही है।

कैसे करें बचाव?

डॉ. अग्रवाल कहते हैं कि सबसे पहला तो एक ही बात है कि अगर कैंसर हो ही ना तो वो बेस्ट है। तो अगर आप तंबाकू का सेवन करते हैं, पान खाते हैं उसमें तंबाकू का सेवन होता है या जर्दा खाते हैं या कोई और तंबाकू से जुड़ी हुई चीज खाते हैं, उसके सेवन को आप बंद करें।

प्रिवेंशन इज द बेस्ट फॉर्म ऑफ क्योर – यही सबसे बड़ा मंत्र है।

यहां राहत की बात यह है कि हर छाला कैंसर नहीं होता। लेकिन अगर जीभ पर कोई ऐसा घाव है जो काफी वक्त से ठीक नहीं हो रहा तो उसे नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर को दिखाने में ही भलाई है।

ओलिविया का संदेश

ओलिविया अपनी कहानी शेयर करके दूसरों को जागरूक करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि मुझे फिर से बोलना सीखना होगा, दोबारा खाना सीखना होगा। यह सब स्वीकार करना बहुत मुश्किल है।

लेकिन अगर मेरी कहानी से किसी एक व्यक्ति की भी जान बच सके तो यह सब worth it है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि अगर जीभ में कोई भी असामान्य बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

सवाल उठता है कि हम कब तक अपनी सेहत को नजरअंदाज करते रहेंगे? छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना कितना जरूरी है, यह केस इसका जीता-जागता उदाहरण है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • 25 साल की ओलिविया डोनेली को दो साल से जीभ में छाले थे जो Tongue Cancer निकले
  • भारत में हेड-नेक कैंसर नंबर वन कैंसर है, मुख्य कारण तंबाकू का सेवन
  • शुरुआती लक्षण: जीभ में नॉन-हीलिंग अल्सर, ब्लीडिंग, गर्दन में गांठें
  • बायोप्सी से ही कैंसर की पुष्टि होती है, शुरुआती स्टेज में क्योर रेट 70-90%
  • बचाव का सबसे अच्छा तरीका: तंबाकू का सेवन बंद करना और समय पर जांच

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: जीभ के छाले कब कैंसर में बदल सकते हैं?

अगर जीभ में कोई छाला या घाव 2-3 हफ्ते से ज्यादा समय तक ठीक नहीं हो रहा, उसमें ब्लीडिंग हो रही है, और साथ में गर्दन में गांठें महसूस हो रही हैं तो यह Tongue Cancer का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से मिलें और बायोप्सी कराएं।

Q2: Tongue Cancer का मुख्य कारण क्या है?

Tongue Cancer का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है – चाहे वो चबाने के रूप में हो (पान, गुटखा, जर्दा, खैनी) या स्मोकिंग के रूप में (बीड़ी, सिगरेट)। भारत में हर साल 16-17 लाख कैंसर के केस होते हैं जिसमें एक तिहाई ओरल कैंसर होते हैं।

Q3: Tongue Cancer का क्योर रेट कितना है?

Tongue Cancer का क्योर रेट स्टेज पर निर्भर करता है। अगर 1st या 2nd स्टेज में पकड़ लिया जाए तो ऑपरेशन से 70-90% तक क्योर रेट है। लेकिन अगर 4th स्टेज (मेटास्टेटिक) में पहुंच जाए तो क्योर रेट सिर्फ 10-20% रह जाता है।

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