Bikram Majithia Attacks Bhagwant Mann को लेकर पंजाब की राजनीति में तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने आम आदमी पार्टी में मची भगदड़ और सियासी संकट को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान पर जोरदार हमला बोला है।
देखा जाए तो यह हमला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी था। मजीठिया ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “वॉलंटियर झाड़ू लगाते रह गए और मलाई दिल्ली वालों ने खा ली… चोरों को मोर पड़ गए और उन्होंने झाड़ू को तोड़-मरोड़ दिया।”
कुर्सी डगमगाई तो राष्ट्रपति की याद आई
उन्होंने कहा कि जैसे ही कुर्सी डगमगाई, मुख्यमंत्री को राष्ट्रपति की याद आ गई, लेकिन पंजाब के ज्वलंत मुद्दों—बंदी सिंहों की रिहाई, राज्य के अधिकार, किसानों और युवाओं के मुद्दे—पर कभी राष्ट्रपति से मिलने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
अगर गौर करें तो यह बेहद तीखा और सीधा आरोप है। समझने वाली बात यह है कि जब अपनी कुर्सी बचाने की बात आती है तो नेताओं को सब कुछ याद आ जाता है लेकिन जनता के मुद्दों पर वे चुप रहते हैं।
दूसरों के घर में आग पर ताली बजाना
मजीठिया ने मुख्यमंत्री पर और तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जब दूसरों के घर आग लगती है तो ये लोग ताली बजाते हैं, लेकिन आज जब अपने ही घर में आग लगी है तो राष्ट्रपति के दरवाजे खटखटाए जा रहे हैं।”
यह दर्शाता है कि राजनीति में दोहरे मानदंड कितने आम हैं। जब दूसरी पार्टियों में टूट होती है तो खुशी मनाई जाती है लेकिन जब अपनी पार्टी में वही होता है तो रोना-धोना शुरू हो जाता है।
गद्दार कौन हैं? मजीठिया का सवाल
उन्होंने दोहरे मापदंड पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आपकी पार्टी छोड़ने वाले “गद्दार” हैं, तो दूसरी पार्टियों से आपकी पार्टी में शामिल होने वाले कौन थे? क्या सत्ता के लिए वे ईमानदार थे और अब गद्दार हो गए?
दिलचस्प बात यह है कि मजीठिया ने नाम लेकर सवाल पूछा कि क्या अकाली दल के विधायक सुखविंदर सुखी, हरमीत सिंह संधू, हरदीप सिंह डिंपी ढिल्लों, मोहिंदर भगत, राजकुमार चब्बेवाल, जसवीर सिंह गढ़ी, गुरप्रीत सिंह GP आदि लोग गद्दार नहीं हैं?
यह सवाल AAP की नैतिक स्थिति पर सीधा प्रहार था।
तुरंत इस्तीफा देना चाहिए: मजीठिया
मजीठिया ने कहा कि मुख्यमंत्री को चार साल में दिल्ली हाईकमान द्वारा पंजाब के संसाधनों की कथित लूट और दखलंदाजी की जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
और राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की सिफारिश करनी चाहिए, ताकि पंजाब की जनता खुद फैसला कर सके। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सीधे तौर पर मध्यावधि चुनाव की मांग थी।
राघव चड्ढा को दी गई कोठी याद आई?
उन्होंने आरोप लगाया कि अब मुख्यमंत्री को राघव चड्ढा को दी गई कोठी याद आ रही है, लेकिन पंजाब का खजाना पहले ही दिल्ली के नेताओं की ऐशो-आराम, “शीश महल” और सरकारी जहाजों के हवाई सफर पर लुटाया जा चुका है—उसका हिसाब कौन देगा?
समझने वाली बात यह है कि पंजाबियों को मुख्यमंत्री जवाब देगा। तब जब पंजाब का खजाना दोनों हाथों से लूटा जा रहा था तब मुख्यमंत्री के मुंह पर टेप क्यों लगी हुई थी।
वॉलंटियरों के सपनों का सौदा
मजीठिया ने कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं ने पंजाब को नहीं, बल्कि उन लोगों को झटका दिया है जिन्होंने पंजाब के साथ विश्वासघात कर दिल्ली के नेताओं को पद बांटे और पोस्टर लगाने वाले वालंटियरों को सिर्फ धक्के मुक्के ही मिले हैं।
आज वही वालंटियर देख रहे हैं कि किस तरह उनके सपनों का सौदा कर दिया गया और दिल्ली ने पंजाब को दोनों हाथों से लूट लिया जो अब भी जारी है।
यह दर्शाता है कि जमीनी कार्यकर्ताओं को धोखा देने का आरोप लगाया जा रहा है।
पैसे, सत्ता और सौदेबाजी की लड़ाई
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के भीतर पैदा हुआ संकट पैसे, सत्ता, लालच और सौदेबाजी की गंदी लड़ाई का नतीजा है, और अब कई मंत्री व विधायक भी अपने भ्रष्टाचार की फाइलें खुलने के डर से बाहर निकलने की तैयारी में हैं।
चिंता का विषय यह है कि अगर यह सच है तो पंजाब की राजनीति में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
दिल्ली वालों को सुपर सीएम किसने बनाया?
उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए पंजाबियों से कहा कि भगवंत मान से पूछें जब मुख्यमंत्री वह है तो दिल्ली वालों को सुपर सीएम किसने बनाया? किसके कहने पर इनको पंजाब पुलिस की सुरक्षा, गाड़ियां, कोठियां दी गईं?
इसके लिए सीधा जिम्मेदार भगवंत मान है जिसको मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहने का कोई हक नहीं है और अपने पद से तुरंत त्यागपत्र देना चाहिए।
राहत की बात यह है कि मजीठिया ने साफ शब्दों में अपनी बात रख दी।
न वॉलंटियरों के सपने पूरे, न पंजाबियों के
अंत में उन्होंने कहा कि भगवंत मान न तो अपने वॉलंटियरों के सपनों को पूरा कर पाया और नहीं ही पंजाबियों के सपनों को। इसलिए उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
यह दर्शाता है कि Bikram Majithia Attacks Bhagwant Mann सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं बल्कि सत्ता की नैतिकता पर सवाल है।
मुख्य बातें (Key Points)
- Bikram Majithia Attacks Bhagwant Mann पर तीखा हमला, कहा कुर्सी डगमगाई तो राष्ट्रपति याद आए
- पंजाब के मुद्दों—बंदी सिंह, किसान, युवा—पर कभी राष्ट्रपति से नहीं मिले
- दोहरे मापदंड पर सवाल, AAP में आए अकाली विधायक क्या गद्दार नहीं?
- दिल्ली वालों ने पंजाब लूटा, मुख्यमंत्री के मुंह पर टेप लगी थी
- वॉलंटियरों के सपनों का सौदा, पैसे और सत्ता की गंदी लड़ाई का नतीजा













