AAP Rajya Sabha MPs Defection को लेकर देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के 10 सांसदों में से सात ने भाजपा का दामन थाम लिया है। यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि अरविंद केजरीवाल की लीडरशिप पर सीधा सवाल है।
देखा जाए तो यह पहली बार नहीं है जब AAP से बड़ी संख्या में लोग दूसरी पार्टियों में गए हैं। लेकिन इस बार मामला अलग है। इस बार जो लोग गए हैं उनमें करोड़पति उद्योगपति, विश्व प्रसिद्ध क्रिकेटर, PhD धारक बुद्धिजीवी और युवा चेहरे शामिल हैं।
आखिर क्या वजह है जिस कारण आप पार्टी से इतनी बड़ी संख्या में सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं? आइए एक-एक करके जानते हैं इन सातों सांसदों के बारे में विस्तार से।
पंजाब से 4, दिल्ली से 3 सांसद
अगर गौर करें तो आम आदमी पार्टी को छोड़ने वाले सात राज्यसभा सदस्यों में से चार पंजाब के रहने वाले हैं। इनमें राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी, अशोक मित्तल और क्रिकेटर हरभजन सिंह शामिल हैं।
बाकी सदस्यों में स्वाति मालीवाल (दिल्ली), राघव चड्ढा (दिल्ली) और डॉ. संदीप पाठक भी दिल्ली से हैं। दिलचस्प बात यह है कि ये सभी अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं लेकिन एक ही समय पर एक साथ BJP में शामिल हुए।
राजेंद्र गुप्ता: 10,000 करोड़ के मालिक
राजेंद्र गुप्ता पंजाब के सबसे अमीर उद्योगपतियों में से एक हैं। वे ट्राइडेंट ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन हैं। यह ग्रुप टेक्सटाइल, पेपर और केमिकल्स का बिजनेस देखता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उनकी नेट वर्थ करीब 1.2 बिलियन यानी कि लगभग ₹10,000 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है। राजेंद्र गुप्ता भटिंडा के रहने वाले हैं। 1985 में छोटे स्तर पर बिजनेस शुरू किया था और बाद में टेक्सटाइल में बड़ा नाम कमाया।
साल 2007 में उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला था। राजनीति में वे 2025 में AAP के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा सदस्य चुने गए। वे पंजाब के सबसे धनी सांसद माने जाते हैं और अब भाजपा में शामिल हो गए हैं।
विक्रमजीत सिंह साहनी: पद्मश्री सम्मानित उद्योगपति
साहनी फरीदकोट जिले के कोटकपुरा के रहने वाले हैं। वे एक सफल उद्योगपति, समाजसेवी और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति हैं। साहनी सन इंटरनेशनल लिमिटेड से जुड़े हुए हैं और फर्टिलाइजर, केमिकल्स का बिजनेस करते हैं।
वे विश्व पंजाबी संगठन के अंतरराष्ट्रीय सदस्य भी रह चुके हैं। साल 2008 में इन्हें पद्मश्री से नवाजा गया था। समझने वाली बात यह है कि यह 2022 में AAP के टिकट पर पंजाब से राज्यसभा सदस्य चुने गए।
इन्होंने सामाजिक कार्यों खासकर बेटी बचाओ जैसे मुद्दों पर सक्रिय रूप में काम किया। अब वे AAP छोड़कर भाजपा में आ गए हैं।
अशोक मित्तल: LPU के संस्थापक, ED छापे के बाद बदला रुख
डॉ. अशोक कुमार मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी कि LPU के संस्थापक और चांसलर हैं। LPU पंजाब की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटीयों में से एक है।
वे जालंधर के रहने वाले हैं। इन्होंने शिक्षा क्षेत्र में बहुत बड़ा काम किया है। 2022 में AAP ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा था।
दिलचस्प बात यह है कि हाल ही में AAP ने उन्हें राज्यसभा में अपना उपनेता यानी कि डिप्टी लीडर भी बनाया था जो कि राघव चड्ढा की जगह पर बनाए गए थे। लेकिन कुछ दिनों पहले ED छापे के बाद उन्होंने AAP छोड़ दिया और अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
वे व्यापारी पृष्ठभूमि से राजनीति में आए थे। चिंता का विषय यह है कि ED की कार्रवाई के तुरंत बाद पार्टी बदलना कई सवाल खड़े करता है।
हरभजन सिंह: टर्मिनेटर का राजनीतिक सफर
हरभजन सिंह भारत के प्रसिद्ध क्रिकेटर हैं जिन्हें “टर्मिनेटर” के नाम से भी जाना जाता है। वे जालंधर के रहने वाले हैं। उन्होंने देश के लिए सैकड़ों क्रिकेट मैच खेले हैं।
2007 और 2011 की विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे हैं। 2021 में क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद वह राजनीति में आए। मार्च 2022 में AAP ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा सदस्य बनाया।
अब वे AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। और बस यहीं से शुरू होती है उनकी नई राजनीतिक पारी की कहानी। क्रिकेट की लोकप्रियता की वजह से वे युवाओं और पंजाब में बहुत ज्यादा फेमस हैं।
स्वाति मालीवाल: अन्ना आंदोलन से राज्यसभा तक
स्वाति मालीवाल दिल्ली से राज्यसभा सांसद हैं। वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर थीं और इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन यानी कि अन्ना हजारे आंदोलन में शामिल थीं और उसके बाद वह राजनीति में आईं।
वे दिल्ली महिला आयोग की सबसे कम उम्र की चेयरपर्सन रहीं और अरविंद केजरीवाल की सलाहकार भी रह चुकी हैं। वे महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार विरोध और सामाजिक मुद्दों पर काफी मुखर रही हैं।
2024 में वे दिल्ली से राज्यसभा पहुंचीं। समझने वाली बात यह है कि अब वे AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई हैं। यह आश्चर्य की बात है क्योंकि वे केजरीवाल के बेहद करीबी मानी जाती थीं।
डॉ. संदीप पाठक: IIT प्रोफेसर से राजनीति तक
संदीप पाठक AAP के प्रमुख रणनीतिकार और संगठन में मजबूत नेता रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखते हैं, लेकिन पंजाब कोटे से राज्यसभा सदस्य हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से PhD किया हुआ है। IIT दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुके हैं। ऑक्सफोर्ड और MIT में पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च भी की है।
वे AAP के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पार्टी में विस्तार और रणनीति में उनकी बहुत बड़ी भूमिका थी। अब वे भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
राहत की बात यह है कि एक बुद्धिजीवी का राजनीतिक पार्टी बदलना आम बात नहीं है। यह गहरे असंतोष को दर्शाता है।
राघव चड्ढा: सबसे युवा और चर्चित चेहरा
राघव चड्ढा AAP के बहुत चर्चित और मुखर चेहरे माने जाते रहे हैं। 2022 में पंजाब से राज्यसभा के सबसे कम उम्र में वह नेता के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे।
पहले वे दिल्ली के राजेंद्र नगर से विधायक रहे और दिल्ली के जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे। AAP पार्टी में अहम भूमिका निभाई। संसद में वे हल्के-फुल्के लेकिन तीखे सवालों के लिए जाने जाते थे।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया गया। अब वे AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं और इस पूरे समूह का नेतृत्व भी कर रहे हैं।
उनकी पत्नी बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रणीति चोपड़ा हैं। और बस यहीं से शुरू होती है AAP के सबसे युवा और चमकते चेहरे की नई राजनीतिक यात्रा।
प्रताप सिंह बाजवा की प्रतिक्रिया: लूट की लड़ाई
पंजाब के विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही टूट ने पार्टी का असली चेहरा उजागर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि यह संकट विचारधारा का नहीं बल्कि पंजाब के संसाधनों और जनता के धन की लूट की लड़ाई है। अगर गौर करें तो बाजवा ने कहा कि जो कुछ सामने आ रहा है वह सिद्धांतों का टकराव नहीं बल्कि सत्ता, संरक्षण और पैसे की लड़ाई है।
यह एक गंभीर आरोप है और इससे AAP की छवि पर सीधा असर पड़ेगा।
केजरीवाल की अक्लमंदी का इम्तिहान
इन सांसदों के जाने के बाद अब आम आदमी पार्टी टूटती नजर आ रही है। चिंता का विषय यह है कि ऐसे में अपनी अक्लमंदी के लिए जाने जाने वाले केजरीवाल अब क्या कदम उठाएंगे और कैसे अपने कार्यकर्ताओं को जोश से फिर से भरेंगे, यह आगे देखने वाली बात होगी।
समझने वाली बात यह है कि यह केवल 7 सांसदों का जाना नहीं है। यह AAP की विश्वसनीयता पर सवाल है। यह नेतृत्व की क्षमता पर सवाल है। और सबसे बड़ी बात, यह उन वॉलंटियरों के सपनों पर सवाल है जिन्होंने इस पार्टी को बनाया था।
क्या और लोग भी जाएंगे?
सवाल उठता है कि क्या AAP पार्टी में अभी और लोग हैं जो भाजपा में जा सकते हैं? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ और विधायक और नेता भी बेचैन हैं।
यह दर्शाता है कि AAP Rajya Sabha MPs Defection केवल एक घटना नहीं बल्कि एक सिलसिले की शुरुआत हो सकती है। आने वाले दिन AAP के लिए बेहद कठिन साबित होने वाले हैं।
AAP के लिए संकट की घड़ी
हैरान करने वाली बात यह है कि जिस पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से जन्म लिया था, आज उसी पार्टी के नेताओं पर ED की कार्रवाई हो रही है। और जिन लोगों पर कार्रवाई हो रही है वे तुरंत भाजपा में शामिल हो रहे हैं।
यह पूरा प्रकरण भारतीय राजनीति की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है जहां विचारधारा से ज्यादा सत्ता और सुरक्षा महत्वपूर्ण हो जाती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP Rajya Sabha MPs Defection में 10 में से 7 सांसद BJP में शामिल, 4 पंजाब से और 3 दिल्ली से
- राजेंद्र गुप्ता सबसे अमीर, ₹10,000 करोड़ की संपत्ति, ट्राइडेंट ग्रुप के मालिक, पद्मश्री 2007
- अशोक मित्तल LPU के संस्थापक, ED छापे के बाद पार्टी छोड़ी
- हरभजन सिंह विश्व कप विजेता क्रिकेटर, 2021 में सन्यास के बाद राजनीति में आए
- राघव चड्ढा सबसे युवा और मुखर चेहरा, पूरे समूह का नेतृत्व कर रहे हैं, पत्नी प्रणीति चोपड़ा
- डॉ. संदीप पाठक कैंब्रिज से PhD, IIT दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर, AAP के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव
- प्रताप सिंह बाजवा ने कहा यह सत्ता, पैसे और संरक्षण की लड़ाई है













