Punjab Roadways Strike: पंजाब में सरकारी बस सेवा ठप होने के कगार पर है। पंजाब रोडवेज/पनबस/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब 25/11 ने मांगों की पूर्ति न होने के कारण 22 से 24 जून तक हड़ताल करके मुख्यमंत्री भगवंत मान की रिहायश के सामने धरना देने का ऐलान किया है। यह कदम लाखों यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।
यूनियन के प्रांतीय अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने बताया कि पंजाब में सरकार बनी हुई 4 साल से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन ट्रांसपोर्ट विभाग की स्थिति सुधरने की बजाय बिगड़ती जा रही है। सरकार द्वारा विभाग की मालिकी वाली बसें डालने की बजाय किलोमीटर स्कीम (प्राइवेट बसें) के जरिए विभाग को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है।
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क्या हैं कर्मचारियों की मांगें
देखा जाए तो कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की मांगें बुनियादी हैं। वे चाहते हैं कि:
- स्थायी नियुक्ति दी जाए
- सरकार मालिकी वाली नई बसें खरीदे
- निजीकरण की नीति बंद की जाए
- जेल में बंद यूनियन कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए
- लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान हो
यूनियन कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार ने यूनियन के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर नाजायज मुकदमे दर्ज करके उन्हें जेलों में बंद कर दिया है। रेशम सिंह गिल ने आरोप लगाया कि सरकार अपने पसंदीदा लोगों को लाभ देने के लिए किलोमीटर स्कीम बसें चला रही है।
यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करके उन्हें पिछले 6 महीनों से नाजायज तरीके से जेलों में बंद किया गया है। यह आरोप गंभीर है और सरकार की श्रमिक विरोधी छवि बनाता है।
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4 जून की बैठक में क्या हुआ
प्रांतीय सचिव शमशेर सिंह धिल्लों, सीनियर उपाध्यक्ष हरकेश कुमार विक्की और बलविंदर सिंह राठ ने बताया कि 4 जून को सरकार के साथ एक बैठक हुई थी। इस बैठक में कुछ सहमति बनी थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं हुआ।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगों का पक्का समाधान नहीं किया गया और जेल में बंद साथियों को रिहा नहीं किया गया, तो:
- 10 जून को पंजाब भर के सभी डिपो गेटों पर रैलियां निकालकर सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया जाएगा
- 22 से 24 जून तक पूर्ण हड़ताल करके मुख्यमंत्री की रिहायश के सामने धरना दिया जाएगा
यात्रियों पर पड़ेगा सीधा असर
समझने वाली बात है कि अगर यह हड़ताल हुई तो इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ेगा। पंजाब में लाखों लोग रोजाना सरकारी बसों से यात्रा करते हैं। खासकर गरीब, मजदूर वर्ग और विद्यार्थी सरकारी बसों पर निर्भर हैं।
तीन दिन की हड़ताल से:
- दैनिक यात्री परेशान होंगे
- प्राइवेट बस ऑपरेटर मनमाना किराया वसूल सकते हैं
- आपातकालीन यात्रा करने वालों को दिक्कत होगी
- विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है
निजीकरण की नीति पर सवाल
यूनियन का सबसे बड़ा आरोप है कि सरकार जानबूझकर परिवहन विभाग को कमजोर कर रही है। किलोमीटर स्कीम के तहत प्राइवेट बस ऑपरेटरों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि सरकारी बसें खरीदने में कोताही बरती जा रही है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने सत्ता में आने से पहले सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने का वादा किया था। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नज़र आ रही है।
अगर गौर करें तो निजीकरण से प्राइवेट ऑपरेटरों को तो फायदा होगा, लेकिन आम जनता को नुकसान। सरकारी बसों में किराया नियंत्रित होता है और गरीब यात्रियों के लिए सुलभ होता है।
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सरकार के सामने चुनौती
पंजाब सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती है। अगर वह कर्मचारियों की मांगों को नहीं मानती, तो हड़ताल होगी और जनता परेशान होगी। दोनों ही स्थितियों में सरकार की छवि खराब होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार को बातचीत के जरिए इस मामले को सुलझाना चाहिए। कर्मचारियों की बुनियादी मांगें उचित लगती हैं और जेल में बंद यूनियन कार्यकर्ताओं को रिहा करना भी जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब रोडवेज/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने 22-24 जून को हड़ताल का ऐलान किया
- 10 जून को पंजाब भर के डिपो गेटों पर रोष प्रदर्शन होंगे
- यूनियन की मुख्य मांग है सरकारी बसें खरीदना और निजीकरण बंद करना
- कई यूनियन कार्यकर्ता पिछले 6 महीनों से जेल में बंद हैं
- हड़ताल से लाखों यात्री प्रभावित होंगे













