LIVE | ...
मंगलवार, 16 जून 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - How Bill Becomes Law in India: एनिमेशन से समझें कैसे बिल बनता है कानून, 4 तरह के बिल्स की पूरी जानकारी

How Bill Becomes Law in India: एनिमेशन से समझें कैसे बिल बनता है कानून, 4 तरह के बिल्स की पूरी जानकारी

नारी शक्ति वंदन से लेकर नए क्रिमिनल लॉ तक, जानें भारतीय संसद में बिल को कानून बनने की पूरी प्रक्रिया, क्या है मनी बिल और संविधान संशोधन बिल

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 25 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय, स्पेशल स्टोरी
A A
0
How Bill Becomes Law in India
104
SHARES
690
VIEWS
ShareShareShareShareShare

How Bill Becomes Law in India को समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है, खासकर तब जब देश में लगातार नए कानून बन रहे हों। हाल ही में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद के दोनों सदनों से आवश्यक बहुमत के साथ पारित किया गया। जहां लोकसभा में 454 वोट और राज्यसभा में 214 वोट के साथ इस बिल को संसद की मंजूरी मिली।

देखा जाए तो पिछले कुछ समय से वर्तमान सरकार ने ऐसे कई सारे विधेयकों को संसद में प्रस्तुत किया है। उदाहरण के लिए 11 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन बड़े बिल पेश किए थे।

पहला – 1860 के इंडियन पीनल कोड को रिप्लेस करने के लिए भारतीय न्याय संहिता 2023। दूसरा – 1973 के कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर को बदलने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023। और तीसरा – 1872 के इंडियन एविडेंस एक्ट को रिप्लेस करने के लिए भारतीय साक्ष्य बिल 2023।

चुनाव से पहले बिलों की बाढ़ क्यों?

अगर गौर करें तो हाल के समय में संसद ने दिल्ली सर्विस बिल को भी पास किया है। वहीं UCC (समान नागरिक संहिता) को भी DPSP से हटाकर लागू करने का विचार किया जा सकता है, जिसके लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी।

लेकिन सवाल उठता है कि आखिर सरकार पिछले कुछ साल में इतने सारे कानूनों को लेकर क्यों आ रही है? अचानक संसद में इतने सारे बिलों की बयार कैसे आ गई है?

कुछ विशेषज्ञ सरकार के इस कदम को अगले साल होने वाले जनरल इलेक्शन से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल अगले साल देश अपने लोकसभा चुनावों के लिए तैयार है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है।

समझने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ विपक्ष सरकार को पिछले कार्यकाल के लिए घेर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ सरकार बचे हुए समय में कुछ बड़े फैसले लेकर 2024 चुनावों को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रही है।

संसद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य: विधान निर्माण

दोस्तों, संसद का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है कानून बनाना। इस विधायी प्रक्रिया की मुख्यतः तीन अलग-अलग अवस्थाएं होती हैं।

पहला है बिल जो कि प्रस्तावित कानून का एक ड्राफ्ट होता है और इसे संसद में प्रस्तुत किया जाता है। यही बिल जब संसद से पास हो जाता है तो एक्ट कहलाता है। तीसरी अवस्था है कानून (Law) जो कि एक बाध्यकारी नियमों का समूह है और इसे किसी शासी प्राधिकरण द्वारा लागू किया जाता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि संसद से पास होने के बाद बनने वाला एक्ट जब लागू होता है तभी कानून कहलाता है। लेकिन इस पूरी विधायी प्रक्रिया की शुरुआत बिल के रूप में ही होती है।

लोकसभा और राज्यसभा: दोनों सदनों की भूमिका

बिल को पास करने के लिए केंद्रीय विधानमंडल यानी संसद में दो सदन शामिल होते हैं।

पहला सदन है लोकसभा या हाउस ऑफ कॉमंस जिसे निचला सदन भी कहा जाता है। भारतीय संविधान लोकसभा में 550 की अधिकतम संख्या की अनुमति देता है। लेकिन वर्तमान सदस्यों की संख्या 543 है।

पहले अधिकतम संख्या 552 थी जिसमें राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत दो एंग्लो-इंडियन सदस्य भी शामिल थे। लेकिन जनवरी 2020 में इनके आरक्षित सीटों के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया।

दिलचस्प बात यह है कि अगर कोई पार्टी सरकार बनाना चाहती है तो उसे लोकसभा में 272 प्लस सदस्यों का विश्वास चाहिए। लोकसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है लेकिन इस सदन को समय से पहले भी भंग किया जा सकता है।

दूसरा सदन है राज्यसभा या हाउस ऑफ स्टेट्स जिसे ऊपरी सदन भी कहा जाता है। राज्यसभा की अधिकतम संख्या 250 सदस्यों की है। जिसमें से 238 सदस्य चुनकर और 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होकर आते हैं।

यह ऊपरी सदन कहलाता है क्योंकि यह स्थायी सदन है। यानी इसे किसी भी स्थिति में भंग नहीं किया जा सकता। इसके सदस्य 6 साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं और हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

राष्ट्रपति: संसद का तीसरा घटक

इसके अलावा, परंपरागत रूप से भारत के राष्ट्रपति को संसद का तीसरा सदन माना जाता है। क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार राष्ट्रपति भारतीय संसद का अभिन्न अंग हैं।

इसलिए दोनों सदनों से बिल सफलतापूर्वक पास होने के बाद भी उस पर राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति मिलना महत्वपूर्ण होता है। और बस यहीं से शुरू होती है राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका की कहानी।

बिलों के चार प्रकार

अब बात करें बिलों की तो बिलों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

  1. साधारण बिल (Ordinary Bill)
  2. वित्तीय बिल (Financial Bill)
  3. धन विधेयक (Money Bill)
  4. संविधान संशोधन बिल (Constitutional Amendment Bill)

संविधान में इन सभी बिलों के पारित होने के लिए अलग-अलग प्रक्रियाएं बताई गई हैं।

इन चार श्रेणियों के अलावा बिलों को दो श्रेणियों में और वर्गीकृत किया जा सकता है – सार्वजनिक बिल (Public Bill) और निजी बिल (Private Bill)।

सार्वजनिक बिल को सरकारी बिल भी कहा जाता है और इस तरह के बिल किसी मंत्री द्वारा पेश किए जाते हैं। इस तरह के बिल को पेश करने के लिए 7 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य होता है।

अगर सार्वजनिक बिल लोकसभा में अस्वीकार हो जाए तो ऐसा माना जाता है कि सरकार के पास सदन में आवश्यक बहुमत या विश्वास नहीं है।

साधारण बिल की यात्रा: तीन वाचन

सबसे पहले और सबसे सामान्य रूप के बिल को साधारण बिल कहा जाता है। आपको याद होगा कि साल 2020 में भारतीय सरकार द्वारा तीन कृषि कानूनों को पास किया गया था। ये बिल साधारण बिलों का ही उदाहरण थे।

समझने वाली बात यह है कि वित्तीय बिल, धन विधेयक और संविधान संशोधन बिल के अलावा जितने भी बिल संसद में पेश होते हैं उन सभी बिलों को साधारण बिल कहा जाता है।

इस तरह के बिल को संसद के दोनों में से किसी भी सदन यानी लोकसभा या राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। बिल को पास होने के लिए तीन चरणों से गुजरना पड़ता है जिन्हें वाचन (Readings) कहा जाता है।

पहला चरण है प्रथम वाचन जिसमें बिल को सदन में पेश किया जाता है और इस चरण में उस पर कोई चर्चा नहीं होती। पेश करने के बाद संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी बिल को संसदीय स्थायी समिति के पास परीक्षण और रिपोर्ट बनाने के लिए भेज देते हैं।

यह भी पढे़ं 👇

June 16 History

16 जून का इतिहास: June 16 History में दर्ज हुईं ये बड़ी घटनाएं

मंगलवार, 16 जून 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

मंगलवार, 16 जून 2026
Southwest Monsoon 2026

Southwest Monsoon 2026 ने पकड़ी रफ्तार, 6 राज्यों में Entry Complete

मंगलवार, 16 जून 2026
Breaking News Live Updates 16 June 2026

Breaking News Live Updates 16 June 2026: Top Headlines, हर अपडेट सबसे तेज

मंगलवार, 16 जून 2026

दूसरा चरण है द्वितीय वाचन जिसके दो भाग होते हैं। पहले भाग में उस बिल पर सामान्य चर्चा की जाती है। इसके बाद दूसरे भाग में उस बिल पर खंड-दर-खंड चर्चा की जाती है।

अंतिम चरण है तृतीय वाचन जिसमें संबंधित सदस्य बिल को पास करवाने के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू करवा सकता है। इस चरण में बिल के ऊपर एक संक्षिप्त सामान्य चर्चा होती है जिसमें बिल के समर्थन और अस्वीकृति पर तर्क होते हैं।

सरल बहुमत vs विशेष बहुमत

अंत में बिल पर मतदान होता है। इस तरह के बिल को पास करने के लिए दोनों सदनों में सरल बहुमत या कार्यशील बहुमत की आवश्यकता होती है।

सरल बहुमत का मतलब है कि जितने लोग सदन में उपस्थित हैं और मतदान कर रहे हैं, उसका 50% से अधिक। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि लोकसभा में 543 सदस्यों में से 43 अनुपस्थित हैं और 100 सदस्यों ने मतदान से परहेज किया है।

इसका मतलब है उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या सिर्फ 400 है। तो सरल बहुमत होगी 50% of 400 + 1 यानी 201।

दिलचस्प बात यह है कि इस तरह के बिल में दोनों सदनों के पास समान अधिकार क्षेत्र और समान अधिकार होते हैं। यानी एक सदन से पास होने के बाद दूसरे सदन के पास उस बिल को अस्वीकार करने का पूरा अधिकार होता है।

गतिरोध की स्थिति: संयुक्त बैठक

किसी भी कारण से बिल पर दोनों सदनों के बीच अगर गतिरोध की स्थिति आती है तो ऐसे में इस गतिरोध को हल करने के लिए संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का इस्तेमाल किया जाता है।

संयुक्त बैठक के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 108 में दिए गए हैं। संयुक्त बैठक का अर्थ है जब संसद के दोनों सदन एक साथ बैठते हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि संयुक्त बैठक को बुलाने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति के पास होता है। और इस बैठक को लोकसभा अध्यक्ष या उनकी अनुपस्थिति में लोकसभा के उपाध्यक्ष या फिर राज्यसभा के उप सभापति द्वारा संचालित किया जाता है।

राहत की बात यह है कि संयुक्त बैठक के मामले में लोकसभा के पास राज्यसभा पर अधिक शक्ति होती है। क्योंकि लोकसभा में 543 सदस्य हैं तो वहीं राज्यसभा में 245 सदस्य हैं।

धन विधेयक: लोकसभा का विशेष अधिकार

दूसरे प्रकार के बिल वित्त से संबंधित होते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है धन विधेयक (Money Bill)। इससे संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 110 में दिए गए हैं।

धन विधेयक का सबसे बड़ा उदाहरण है भारत का वार्षिक बजट या वार्षिक वित्तीय विवरण जिसके प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 112 में दिए गए हैं। 1 फरवरी 2023 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2023-24 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया।

धन विधेयक के मामले में लोकसभा के पास विशेष अधिकार होते हैं। उदाहरण के लिए इस बिल को सिर्फ लोकसभा में पेश किया जा सकता है और इसे पेश करने के लिए राष्ट्रपति की सिफारिश अनिवार्य होती है।

साथ ही कोई भी बिल धन विधेयक है या नहीं इस बात का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करते हैं और उनका निर्णय अंतिम माना जाता है।

संविधान संशोधन बिल: सबसे जटिल प्रक्रिया

तीसरे प्रकार के बिल हैं जिनको संविधान संशोधन बिल कहा जाता है। भारतीय संविधान का संशोधन किसी भी प्रावधान में परिवर्तन, जोड़ या रद्दीकरण के लिए किया जाता है।

यह काफी जटिल प्रक्रिया है और इसे दक्षिण अफ्रीकी संविधान से लिया गया है। भारतीय संसद के पास संविधान संशोधन करने की शक्ति तो है लेकिन यह शक्ति पूर्ण नहीं बल्कि सीमित है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बताए गए मूल ढांचे (Basic Structure) के अंदर आने वाले किसी भी प्रावधान को संशोधित करने की शक्ति संसद के पास नहीं है।

संविधान संशोधन तीन प्रकार के होते हैं:

  1. सरल बहुमत से संशोधन
  2. विशेष बहुमत से संशोधन
  3. विशेष बहुमत + राज्यों की पुष्टि से संशोधन

विशेष बहुमत का मतलब है कि सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के वोट बिल के पक्ष में होने चाहिए। इसके अलावा पूर्ण बहुमत भी होनी चाहिए यानी सदन की कुल संख्या के 50% से अधिक वोट बिल के पक्ष में होने चाहिए।

राष्ट्रपति की वीटो शक्तियां

साधारण बिल के मामले में राष्ट्रपति के पास तीन विकल्प होते हैं। पहला विकल्प है कि वो इस बिल पर अपनी अनुमति यानी स्वीकृति दे दें।

दूसरे विकल्प में राष्ट्रपति अपने पास मौजूद वीटो शक्तियों (Veto Powers) का इस्तेमाल कर सकते हैं जो संविधान का अनुच्छेद 111 उन्हें प्रदान करता है।

राष्ट्रपति के पास तीन प्रकार की वीटो शक्तियां होती हैं:

  1. निरपेक्ष वीटो (Absolute Veto) – इस वीटो का इस्तेमाल करके राष्ट्रपति किसी भी बिल को पूरी तरह अस्वीकार कर सकते हैं।
  2. निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto) – जिसे किसी भी बिल को विलंबित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस शक्ति का इस्तेमाल करके राष्ट्रपति किसी बिल को सिर्फ एक बार संसद के पास पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं।
  3. पॉकेट वीटो (Pocket Veto) – जिसमें राष्ट्रपति अनिश्चित समय के लिए किसी बिल को अपने पास रोक सकते हैं। पॉकेट वीटो का इस्तेमाल 1986 में पोस्टल बिल पर राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह द्वारा किया गया था।
वन नेशन वन इलेक्शन का उदाहरण

कुछ समय से देश में वन नेशन वन इलेक्शन की चर्चा जोर पकड़ रही है। 2 सितंबर को केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में एक समिति बनाई थी ताकि एक साथ चुनाव की व्यवहार्यता को परखा जा सके।

वन नेशन वन इलेक्शन को लागू करने के लिए संविधान को संशोधित करने की जरूरत होगी। और यह ऐसे संविधान संशोधन का उदाहरण है जिसमें विशेष बहुमत के साथ-साथ राज्यों की पुष्टि की भी आवश्यकता होगी।

यह आमतौर पर ऐसे बिल होते हैं जो संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं। क्योंकि चुनाव राज्य विधानसभाओं के भी होते हैं और इस पर संसद अगर अकेले फैसला लेती है तो यह संघीय ढांचे को बाधित करेगा।

How Bill Becomes Law in India: एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया

भारत में बिलों का पारित होना एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया है जिसमें सावधानीपूर्वक जांच, बहस और निर्णय लेना शामिल है।

एक बिल के कानून बनने का सफर लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति से होकर गुजरता है। यह सफर सुनिश्चित करता है कि प्रस्तावित कानून पूरी तरह से जांचा और बहस किया जाए।

भारतीय संसद का द्विसदनीय यानी दो सदन वाला सिस्टम व्यापक समीक्षा को सुनिश्चित करता है, कानून की गुणवत्ता को बढ़ाता है और उसकी प्रभावशीलता को भी बढ़ाता है।

हैरान करने वाली बात यह है कि इसके सामने राजनीतिक गतिशीलता, देरी और पक्षपात जैसी चुनौतियां भी आती हैं। जो बताता है कि इस पूरी प्रक्रिया को अनुकूलित करने के लिए निरंतर प्रयासों की जरूरत है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • How Bill Becomes Law in India में तीन मुख्य चरण – बिल, एक्ट और कानून
  • बिलों के 4 प्रकार – साधारण बिल, वित्तीय बिल, धन विधेयक और संविधान संशोधन बिल
  • साधारण बिल के लिए तीन वाचन – प्रथम (पेश), द्वितीय (चर्चा) और तृतीय (मतदान)
  • धन विधेयक सिर्फ लोकसभा में पेश हो सकता है, राष्ट्रपति की सिफारिश जरूरी
  • संविधान संशोधन तीन तरह – सरल बहुमत, विशेष बहुमत और विशेष बहुमत + राज्यों की पुष्टि
  • राष्ट्रपति के पास तीन वीटो शक्तियां – निरपेक्ष, निलंबनकारी और पॉकेट वीटो
  • गतिरोध की स्थिति में संयुक्त बैठक का प्रावधान, लोकसभा को अधिक शक्ति

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: How Bill Becomes Law in India की प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

जवाब: यह बिल के प्रकार पर निर्भर करता है। साधारण बिल को पास होने में कुछ सप्ताह से लेकर कई महीने लग सकते हैं। जबकि संविधान संशोधन बिल में और अधिक समय लग सकता है क्योंकि कुछ मामलों में राज्यों की पुष्टि भी चाहिए होती है।

प्रश्न 2: धन विधेयक और वित्तीय बिल में क्या अंतर है?

जवाब: धन विधेयक केवल कर लगाने, सरकारी उधार और संचित निधि से संबंधित होता है और इसे केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है। वित्तीय बिल में राजस्व और व्यय के अन्य मामले भी हो सकते हैं और इसे दोनों सदनों में पेश किया जा सकता है।

प्रश्न 3: क्या राष्ट्रपति किसी बिल को हमेशा के लिए रोक सकते हैं?

जवाब: साधारण बिल के मामले में राष्ट्रपति पॉकेट वीटो का इस्तेमाल कर बिल को अनिश्चित काल के लिए रोक सकते हैं। लेकिन संविधान संशोधन बिल के मामले में उन्हें स्वीकृति देनी ही पड़ती है, वे इसे अस्वीकार नहीं कर सकते।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Anti Defection Law India Cases: राघव चड्ढा से पहले ये 5 बड़े दल-बदल, सरकारें तक बदल गईं

Next Post

Punjab Gangstran Te Vaar Day 95: 577 छापे मारे, 309 गिरफ्तार, 7 हथियार बरामद

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

June 16 History

16 जून का इतिहास: June 16 History में दर्ज हुईं ये बड़ी घटनाएं

मंगलवार, 16 जून 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

मंगलवार, 16 जून 2026
Southwest Monsoon 2026

Southwest Monsoon 2026 ने पकड़ी रफ्तार, 6 राज्यों में Entry Complete

मंगलवार, 16 जून 2026
Breaking News Live Updates 16 June 2026

Breaking News Live Updates 16 June 2026: Top Headlines, हर अपडेट सबसे तेज

मंगलवार, 16 जून 2026
Aaj Ka Rashifal 16 June 2026

Aaj Ka Rashifal 16 June 2026 : जानें सभी 12 राशियों का संपूर्ण भविष्यफल

मंगलवार, 16 जून 2026
Bhagwant Mann Video Controversy

फोरेंसिक रिपोर्ट पर AAP का पलटवार: वीडियो में कौन है, बताए Shri Akal Takht

सोमवार, 15 जून 2026
Next Post
Gangstran Te Vaar

Punjab Gangstran Te Vaar Day 95: 577 छापे मारे, 309 गिरफ्तार, 7 हथियार बरामद

mohinder bhagat

AIF Scheme Punjab: छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही कृषि अवसंरचना योजना, 7,496 करोड़ वितरित

8th Pay Commission

8th Pay Commission Latest Update: 28-30 अप्रैल को दिल्ली में बैठकें, कर्मचारियों को बताया पूरा प्लान

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।