Daraxonrasib Cancer Pill: क्या सिर्फ एक गोली से कैंसर का इलाज हो सकता है? अब तक तो नहीं, लेकिन शायद जल्द ही यह सपना हकीकत बन सकता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवा विकसित की है जो पैनक्रियाटिक कैंसर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। डरेक्सोन रैसिप (Daraxonrasib) नाम की यह दवा क्लीनिकल ट्रायल्स में कमाल के नतीजे दिखा चुकी है – मरीजों का सर्वाइवल रेट लगभग दोगुना हो गया है।
31 मई 2026 को The New England Journal of Medicine में प्रकाशित इस शोध को दुनियाभर के ऑन्कोलॉजिस्ट ‘गेम चेंजर’ बता रहे हैं। देखा जाए तो यह सिर्फ एक दवा नहीं, बल्कि उन लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है जो दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक से जूझ रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह दवा गोली के रूप में है और दिन में सिर्फ एक बार लेनी होती है। कीमोथेरेपी की तरह अस्पताल के चक्कर नहीं, न ही घंटों तक ड्रिप लगवाना। बस एक गोली – और जिंदगी में महीनों का इजाफा।
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500 मरीजों पर हुआ फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल
डरेक्सोन रैसिप का फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो चुका है, जो किसी भी दवा के लिए अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इस ट्रायल में कुल 500 मरीज शामिल थे, जो पैनक्रियाटिक कैंसर के उन्नत चरण (Metastatic Stage) से गुजर रहे थे।
इन मरीजों को दो समूहों में बांटा गया था। पहले समूह के 248 मरीजों को डरेक्सोन रैसिप दी गई, जबकि दूसरे समूह के 252 मरीजों को पारंपरिक कीमोथेरेपी दी गई। समझने वाली बात यह है कि इन सभी मरीजों के ट्यूमर में KRAS जीन की एक विशेष म्यूटेशन थी, जो पैनक्रियाटिक कैंसर के 90% से अधिक मामलों में पाई जाती है।
यह ट्रायल पूरी तरह से वैज्ञानिक मानकों के अनुसार किया गया था – रैंडमाइज्ड, कंट्रोल्ड और डबल-ब्लाइंड। इसके नतीजे शिकागो में हुई American Society of Clinical Oncology की वार्षिक बैठक में भी प्रस्तुत किए गए, जिसने पूरी दुनिया के कैंसर विशेषज्ञों का ध्यान खींचा।
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सर्वाइवल टाइम 6.5 महीने से बढ़कर 13 महीने हुआ
क्लीनिकल ट्रायल के नतीजे चौंकाने वाले हैं। जिन मरीजों को सिर्फ कीमोथेरेपी दी गई, उनका औसत सर्वाइवल टाइम (जीवित रहने की अवधि) मात्र 6.5 महीने था। लेकिन जिन मरीजों ने डरेक्सोन रैसिप ली, वे औसतन 13 महीने से अधिक समय तक जीवित रहे।
यानी सर्वाइवल रेट लगभग दोगुना हो गया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हम बात कर रहे हैं उस कैंसर की जो अपने आक्रामक स्वभाव के लिए कुख्यात है। पैनक्रियाटिक कैंसर में आधे से अधिक मरीजों की मौत बीमारी का पता चलने के तीन महीने के भीतर हो जाती है।
ऐसे में 13 महीने का सर्वाइवल टाइम किसी चमत्कार से कम नहीं। और बस यहीं से शुरू हुई उम्मीद की नई सुबह।
| उपचार प्रकार | औसत सर्वाइवल टाइम | सुधार |
|---|---|---|
| केवल कीमोथेरेपी | 6.5 महीने | बेसलाइन |
| Daraxonrasib | 13+ महीने | ↑ लगभग दोगुना |
मौत का जोखिम 60% तक कम हुआ
डरेक्सोन रैसिप ने न केवल जीवन को लंबा किया, बल्कि मौत के खतरे को भी नाटकीय रूप से कम किया। ट्रायल में देखा गया कि इस दवा ने मरीजों में समग्र मृत्यु जोखिम (Overall Mortality Risk) को 60% तक कम कर दिया।
इसका मतलब है कि डरेक्सोन रैसिप लेने वाले मरीजों की मौत की संभावना कीमोथेरेपी लेने वालों की तुलना में काफी कम थी। राहत की बात यह है कि यह सिर्फ आंकड़ों में बेहतरी नहीं है – यह वास्तविक जीवन, वास्तविक परिवार और वास्तविक उम्मीदें हैं।
चिंता का विषय यह रहा है कि पैनक्रियाटिक कैंसर का इलाज बेहद मुश्किल होता है क्योंकि ज्यादातर मामलों में बीमारी का पता बहुत देर से चलता है, तब तक कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका होता है। ऐसे में यह दवा एक बड़ी सफलता है।
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32% मरीजों में ट्यूमर सिकुड़ गया या गायब हो गया
डरेक्सोन रैसिप के नतीजों में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। करीब 32% मरीजों में – यानी हर तीन में से एक मरीज में – ट्यूमर या तो सिकुड़ गया या पूरी तरह गायब हो गया। इसे मेडिकल भाषा में ‘ट्यूमर रिस्पॉन्स रेट’ कहते हैं।
इसके विपरीत, केवल कीमोथेरेपी लेने वाले मरीजों में यह दर मात्र 10% थी। इससे साफ होता है कि डरेक्सोन रैसिप न केवल मरीजों को लंबा जीवन दे रही है, बल्कि उनकी बीमारी को वास्तव में नियंत्रित भी कर रही है।
अगर गौर करें तो यह सिर्फ संख्याएं नहीं हैं। जब एक मरीज का ट्यूमर छोटा होता है या गायब होता है, तो उसका दर्द कम होता है, जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है, और परिवार के साथ बिताने के लिए कीमती समय मिलता है।
साइड इफेक्ट्स कीमोथेरेपी से बहुत कम
कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी समस्या साइड इफेक्ट्स की होती है। कीमोथेरेपी बेहद कष्टदायक होती है – बाल झड़ना, लगातार उल्टी, थकान, संक्रमण का खतरा, और कई गंभीर जटिलताएं। कई बार मरीज इन साइड इफेक्ट्स की वजह से इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं।
लेकिन डरेक्सोन रैसिप के साथ यह समस्या काफी कम है। क्लीनिकल ट्रायल में पाया गया कि कीमोथेरेपी लेने वाले 51% मरीजों को गंभीर साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ा, जबकि डरेक्सोन रैसिप लेने वालों में यह आंकड़ा केवल 43% था।
दिलचस्प बात यह है कि जो साइड इफेक्ट्स हुए भी, वे अपेक्षाकृत कम गंभीर थे:
| साइड इफेक्ट | गंभीरता |
|---|---|
| त्वचा पर चकत्ते (Skin Rash) | हल्की से मध्यम |
| उबकाई आना (Nausea) | प्रबंधनीय |
| दस्त (Diarrhea) | नियंत्रणीय |
| मुंह में छाले (Mouth Sores) | अस्थायी |
समझने वाली बात यह है कि ये साइड इफेक्ट्स कीमोथेरेपी की तुलना में बहुत कम तकलीफदेह हैं और इन्हें आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।
KRAS जीन म्यूटेशन को टारगेट करती है यह दवा
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल – यह दवा काम कैसे करती है? डरेक्सोन रैसिप एक RAS Inhibitor है। यह म्यूटेटेड KRAS जीन को निशाना बनाती है और उसे काम करने से रोक देती है।
KRAS जीन क्या है? यह एक ऐसा जीन है जो सामान्य रूप से कोशिकाओं की वृद्धि और विभाजन को नियंत्रित करता है। लेकिन जब इसमें म्यूटेशन (विकृति) आ जाती है, तो यह कैंसर कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने और फैलने का संकेत देने लगता है।
यह म्यूटेटेड KRAS जीन निम्नलिखित कैंसरों में पाया जाता है:
- पैनक्रियाटिक कैंसर: 90% से अधिक मामलों में
- कोलोरेक्टल कैंसर: 40-45% मामलों में
- नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर: करीब 30% मामलों में
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि डरेक्सोन रैसिप इस “ऑन स्विच” को बंद कर देती है। जब KRAS जीन काम नहीं कर पाता, तो कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने का संकेत नहीं मिलता और उनकी वृद्धि रुक जाती है या धीमी हो जाती है।
दिन में एक बार, गोली के रूप में
डरेक्सोन रैसिप की पहली बड़ी खासियत यह है कि यह पिल फॉर्म में आती है। यानी मरीज को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं, न ही घंटों इंजेक्शन या ड्रिप लगवाना पड़ता है। बस पैकेट खोला, गोली निकाली और दिन में एक बार खा ली।
यह कितना बड़ा बदलाव है, इसे समझने के लिए कीमोथेरेपी की प्रक्रिया को देखना होगा। पारंपरिक कीमोथेरेपी में मरीज को हर हफ्ते या हर दो हफ्ते अस्पताल जाना पड़ता है, वहां 4-6 घंटे तक ड्रिप लगवानी पड़ती है, और फिर कई दिनों तक साइड इफेक्ट्स झेलने पड़ते हैं।
इसके विपरीत, डरेक्सोन रैसिप से मरीज घर पर रहते हुए, सामान्य जीवन जीते हुए इलाज करा सकता है। उम्मीद की किरण यह है कि यह दवा न केवल जान बचाएगी, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर बनाएगी।
पैनक्रियाटिक कैंसर – सबसे घातक कैंसरों में से एक
पैनक्रियाटिक कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है। इसे यह नाम इसलिए मिला क्योंकि शुरुआती चरणों में इसके कोई लक्षण नहीं होते। जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक कैंसर काफी फैल चुका होता है।
World Health Organization के ग्लोबल कैंसर डेटाबेस के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनियाभर में पैनक्रियाटिक कैंसर के 5 लाख से अधिक नए मामले सामने आए। और सबसे दुखद बात – उसी साल 4.5 लाख से अधिक मौतें भी हुईं।
इसका मतलब है कि लगभग 90% मरीज एक साल के भीतर अपनी जान गंवा देते हैं। आधे से अधिक मरीजों की मौत तो निदान के मात्र तीन महीने के भीतर हो जाती है। यह आंकड़े कितने डरावने हैं!
भारत में भी हालात बेहतर नहीं हैं। हालांकि पैनक्रियाटिक कैंसर के मामले कुछ अन्य कैंसरों की तुलना में कम हैं, लेकिन इसकी घातकता सबसे अधिक है। इसीलिए जब इसके इलाज की कोई नई उम्मीद सामने आती है, तो यह वाकई में बड़ी खबर बन जाती है।
डॉ. अंकित जैन: “नतीजे उत्साहवर्धक हैं”
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अंकित जैन का कहना है कि यह ट्रायल के नतीजे बेहद उत्साहवर्धक हैं।
डॉ. जैन के अनुसार, “मेटास्टेटिक पैनक्रियाटिक कैंसर बेहद आक्रामक होता है और ऐसे मरीजों का इलाज करना काफी मुश्किल होता है। लेकिन डरेक्सोन रैसिप दवा के ट्रायल में देखा गया है कि इसे लेने से मरीज ज्यादा समय तक जीवित रहे और बीमारी पर उनका नियंत्रण भी बेहतर था।”
वे आगे कहते हैं, “यह दवा पैनक्रियाटिक कैंसर के मरीजों के इलाज में काफी असरदार साबित हो सकती है। हालांकि अभी इस पर और रिसर्च की जरूरत है और साथ ही इसके इस्तेमाल की नियामक मंजूरी मिलना भी बाकी है।”
समझने वाली बात यह है कि यह दवा पूरा इलाज (Complete Cure) नहीं है। यह पैनक्रियाटिक कैंसर के इलाज का एक हिस्सा होगी – एक महत्वपूर्ण हथियार जो मरीजों को ज्यादा समय और बेहतर जीवन दे सकता है।
किन मरीजों को होगा फायदा?
डरेक्सोन रैसिप सभी पैनक्रियाटिक कैंसर मरीजों के लिए नहीं है। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए है जिनके ट्यूमर में KRAS म्यूटेशन मौजूद है। सौभाग्य से, यह म्यूटेशन पैनक्रियाटिक कैंसर के 90% से अधिक मामलों में पाई जाती है।
इसका मतलब है कि अधिकांश पैनक्रियाटिक कैंसर मरीज इस दवा से लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, किसी भी मरीज को यह दवा देने से पहले उसके ट्यूमर का जेनेटिक टेस्ट (Molecular Profiling) करना जरूरी होगा ताकि यह पता चल सके कि KRAS म्यूटेशन मौजूद है या नहीं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि यह दवा अन्य कैंसरों – जैसे कोलोरेक्टल कैंसर और लंग कैंसर – के उन मामलों में भी काम कर सकती है जहां KRAS म्यूटेशन पाई जाती है। इस पर अलग से ट्रायल चल रहे हैं।
कब उपलब्ध होगी यह दवा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह चमत्कारी दवा मरीजों तक कब पहुंचेगी? डॉ. अंकित जैन के अनुसार, “अभी इस दवा को आने में समय लगेगा। पहले इसके ट्रायल्स पूरे होंगे, जिसके बाद इसे सरकारी नियामक अधिकारियों से मंजूरी मिलेगी। तभी यह दवा इलाज में इस्तेमाल की जा सकेगी।”
आमतौर पर फेज-3 ट्रायल के बाद FDA (अमेरिका) और अन्य देशों की नियामक एजेंसियों से मंजूरी मिलने में 1-2 साल का समय लग सकता है। भारत में DCGI (Drugs Controller General of India) से अप्रूवल के लिए अलग से ट्रायल या डेटा जमा करना होगा।
उम्मीद है कि 2027-28 तक यह दवा अमेरिका और यूरोप में उपलब्ध हो सकती है। भारत में इसकी उपलब्धता थोड़ी देर से हो सकती है, जब तक कि भारतीय नियामकों द्वारा तेजी से अनुमोदन प्रक्रिया नहीं की जाती।
कीमत कितनी हो सकती है?
डॉ. अंकित जैन ने यह भी संकेत दिया कि चूंकि यह एक नई टारगेटेड थेरेपी है, इसलिए शुरुआती दौर में इसकी कीमत काफी अधिक हो सकती है।
टारगेटेड थेरेपी दवाएं आमतौर पर बहुत महंगी होती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ लंग कैंसर की टारगेटेड थेरेपी दवाओं की कीमत भारत में ₹1-2 लाख प्रति महीने तक हो सकती है।
डरेक्सोन रैसिप की कीमत का अनुमान लगाना अभी मुश्किल है, लेकिन यह भी इसी रेंज में हो सकती है। हालांकि, समय के साथ जब पेटेंट समाप्त होगा और जेनेरिक वर्जन आएंगे, तो कीमत में काफी कमी आ सकती है।
चिंता का विषय यह है कि गरीब और मध्यम वर्ग के मरीज इतनी महंगी दवा का खर्च कैसे उठाएंगे। सरकार को इसे आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में शामिल करने पर विचार करना होगा।
अन्य कैंसरों में भी संभावनाएं
डरेक्सोन रैसिप की सबसे रोमांचक बात यह है कि यह सिर्फ पैनक्रियाटिक कैंसर तक सीमित नहीं है। KRAS म्यूटेशन कई अन्य कैंसरों में भी पाई जाती है:
कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर): 40-45% मामलों में
नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर: लगभग 30% मामलों में
इन कैंसरों पर भी डरेक्सोन रैसिप के ट्रायल चल रहे हैं। अगर इनमें भी सफलता मिलती है, तो यह दवा हजारों-लाखों कैंसर मरीजों के लिए वरदान साबित हो सकती है।
इससे साफ होता है कि यह सिर्फ एक दवा नहीं, बल्कि कैंसर इलाज में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।
यह पूरा इलाज नहीं, लेकिन बड़ी उम्मीद है
डॉ. अंकित जैन ने स्पष्ट किया कि डरेक्सोन रैसिप को “पूरा इलाज” (Complete Cure) नहीं माना जा सकता। यह पैनक्रियाटिक कैंसर के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी, न कि एकमात्र समाधान।
वास्तविकता यह है कि कैंसर जैसी जटिल बीमारी का इलाज बहु-आयामी होता है। सर्जरी, रेडिएशन, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी – सभी का संयोजन जरूरी हो सकता है।
लेकिन डरेक्सोन रैसिप एक शक्तिशाली हथियार है जो:
- जीवन को लंबा कर सकती है
- बीमारी को नियंत्रित कर सकती है
- जीवन की गुणवत्ता बेहतर बना सकती है
- साइड इफेक्ट्स कम कर सकती है
और यही सबसे बड़ी उम्मीद है।
वैश्विक स्तर पर मान्यता
यह शोध The New England Journal of Medicine में प्रकाशित हुआ है, जो दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल्स में से एक है। साथ ही, इसे American Society of Clinical Oncology (ASCO) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया गया, जो कैंसर चिकित्सा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच है।
यह मान्यता इस बात का प्रमाण है कि यह शोध विश्वसनीय, वैज्ञानिक रूप से मजबूत और नैदानिक रूप से महत्वपूर्ण है। दुनियाभर के ऑन्कोलॉजिस्ट इस पर ध्यान दे रहे हैं और इसे अपने अभ्यास में शामिल करने की तैयारी कर रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
• Daraxonrasib नामक नई दवा ने पैनक्रियाटिक कैंसर के मरीजों का सर्वाइवल टाइम 6.5 महीने से बढ़ाकर 13+ महीने कर दिया, यानी लगभग दोगुना; 31 मई 2026 को The New England Journal of Medicine में प्रकाशित शोध
• फेज-3 क्लीनिकल ट्रायल में 500 मरीज शामिल थे; दवा KRAS जीन म्यूटेशन को टारगेट करती है जो 90% पैनक्रियाटिक कैंसर मामलों में मौजूद है; दिन में एक बार गोली के रूप में लेनी होती है
• कीमोथेरेपी की तुलना में साइड इफेक्ट्स 51% से घटकर 43% हुए; मुख्य साइड इफेक्ट्स: त्वचा पर चकत्ते, उबकाई, दस्त और मुंह में छाले – सभी प्रबंधनीय
• 32% मरीजों में ट्यूमर सिकुड़ा या गायब हुआ (बनाम कीमोथेरेपी में केवल 10%); नियामक मंजूरी मिलने में 1-2 साल लग सकते हैं, शुरुआती कीमत अधिक होने की संभावना













