सोमवार, 25 मई 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Two-Thirds Rule Raghav Chadha: क्यों नहीं लगेगा दलबदल कानून, समझें गणित और कानूनी पहलू

Two-Thirds Rule Raghav Chadha: क्यों नहीं लगेगा दलबदल कानून, समझें गणित और कानूनी पहलू

राघव चड्ढा ने Two-Thirds Merger Rule का इस्तेमाल कर AAP के 7 सांसदों को BJP में मिलाया, संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत कोई सीट नहीं जाएगी।

The News Air Team by The News Air Team
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब, सियासत
A A
0
Two-Thirds Rule Raghav Chadha
104
SHARES
691
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Two-Thirds Rule Raghav Chadha ने जिस तरह से इस्तेमाल किया है, वह भारतीय राजनीति में एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। शुक्रवार को पंजाब से आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कहा कि वह और उनके साथी संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय (merger) कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने यह फैसला किया है कि हम, जो AAP के राज्यसभा सदस्यों के दो-तिहाई से अधिक हैं, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए BJP में विलय करेंगे।”

देखा जाए तो यह कोई साधारण पार्टी बदलने का मामला नहीं है। यह एक सुनियोजित कानूनी कदम है जिसमें दलबदल कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों का चतुराई से इस्तेमाल किया गया है।

राज्यसभा में AAP की कुल संख्या और Two-Thirds का गणित

फिलहाल राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं। इनमें से 7 सांसद पंजाब से हैं और 3 सांसद दिल्ली से। राघव चड्ढा के अनुसार, इन 10 में से 7 सांसद BJP में जाने का फैसला कर चुके हैं।

अब गणित समझिए:

  • कुल AAP राज्यसभा सांसद = 10
  • Two-Thirds (दो-तिहाई) = 10 का 2/3 = 6.66
  • BJP में जाने वाले सांसद = 7

चूंकि 7 सांसद, 10 के दो-तिहाई (6.66) से अधिक हैं, इसलिए यह एक वैध विलय (Valid Merger) माना जाएगा। इस वजह से दलबदल कानून नहीं लगेगा और न ही किसी सांसद की सीट जाएगी।

संविधान की 10वीं अनुसूची: दलबदल कानून क्या है

भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची (Tenth Schedule) में दलबदल कानून के प्रावधान हैं। यह कानून 1985 में लाया गया था ताकि सांसदों और विधायकों को पार्टी बदलने से रोका जा सके।

दलबदल कानून के मुताबिक:

  • अगर कोई सांसद स्वेच्छा से अपनी पार्टी छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता खत्म हो जाती है।
  • अगर कोई सांसद पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करता है, तो भी उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है।

लेकिन इसी कानून में एक अपवाद (Exception) भी है – विलय (Merger)।

विलय का नियम: Two-Thirds Merger Rule क्या है

10वीं अनुसूची में साफ लिखा है कि अगर किसी विधायी दल (Legislative Party) के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय करने पर सहमत हों, तो उन्हें दलबदल कानून से छूट मिलती है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि:

  1. यह नियम केवल थोक विलय (Wholesale Merger) के मामले में लागू होता है, न कि व्यक्तिगत दलबदली में।
  2. जो सदस्य नई पार्टी में जाते हैं और जो मूल पार्टी के साथ रहने का चुनाव करते हैं, दोनों सुरक्षित रहते हैं।
  3. सभी 10 सदस्यों की सीट सुरक्षित रहेगी – चाहे वे BJP में जाएं या AAP में रहें।

अगर गौर करें तो यह नियम 51वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 के तहत लाया गया था।

91वें संविधान संशोधन ने बदल दिए नियम

पहले संविधान में एक और प्रावधान था – एक-तिहाई विभाजन (Split by One-Third)। इसके तहत अगर किसी पार्टी के एक-तिहाई सदस्य अलग होना चाहें, तो वे नया गुट बना सकते थे और दलबदल कानून उन पर नहीं लगता था।

लेकिन 2003 में 91वें संविधान संशोधन अधिनियम ने इस प्रावधान को हटा दिया। अब केवल Two-Thirds Merger Rule ही वैध अपवाद है।

इसका मतलब है कि:

  • एक-तिहाई से पार्टी तोड़ना अब अवैध है।
  • केवल दो-तिहाई से विलय करना वैध है।

समझने वाली बात है कि राघव चड्ढा ने इसी कानूनी खामी का फायदा उठाया है।

राघव चड्ढा का कानूनी तर्क

राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारत का संविधान यह प्रोविजन देता है कि अगर दो-तिहाई से ज्यादा सांसद किसी दूसरी पार्टी में जाना चाहें, तो वे ऐसा कर सकते हैं। यह अधिकार हमें भारत के संविधान ने ही दिया है।”

दिलचस्प बात यह है कि राघव खुद चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रह चुके हैं और कानूनी प्रक्रियाओं को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने यह कदम पूरी तरह से कानूनी सलाह लेकर उठाया है।

किन 7 सांसदों ने BJP का रुख किया

राघव चड्ढा के अनुसार, निम्नलिखित 7 सांसद BJP में शामिल हो रहे हैं:

  1. राघव चड्ढा (पंजाब)
  2. संदीप पाठक (पंजाब)
  3. अशोक मित्तल (पंजाब)
  4. हरभजन सिंह (पंजाब)
  5. विक्रमजीत सिंह साहनी (पंजाब)
  6. स्वाति मालीवाल (दिल्ली)
  7. राजेंद्र गुप्ता (दिल्ली)

शुक्रवार शाम को राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने चंडीगढ़ स्थित BJP मुख्यालय पहुंचकर नितिन नवीन से पार्टी की सदस्यता ली। बाकी 4 सांसद अभी सामने नहीं आए हैं।

बाकी 3 सांसदों का क्या होगा

AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 BJP में जा रहे हैं। तो बाकी 3 सांसद क्या करेंगे?

यहां सबसे अहम बात यह है कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत:

  • जो 3 सांसद AAP में रहना चाहते हैं, वे सुरक्षित हैं।
  • उन पर दलबदल कानून नहीं लगेगा।
  • उनकी राज्यसभा सीट बरकरार रहेगी।

समझने वाली बात है कि विलय के नियम के तहत दोनों गुट सुरक्षित रहते हैं – चाहे वे बहुमत में हों या अल्पमत में।

स्वाति मालीवाल ने क्या कहा

जब मीडिया ने स्वाति मालीवाल से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा, “मैं अरुणाचल प्रदेश के इटानगर में हूं। शाम को दिल्ली लौटकर बात करूंगी।”

अभी तक स्वाति की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन राघव चड्ढा ने उनका नाम लिया है, इसलिए माना जा रहा है कि वह भी BJP में शामिल हो रही हैं।

AAP इसे ऑपरेशन लोटस क्यों बता रही है

AAP नेता संजय सिंह ने इस पूरे मामले को “ऑपरेशन लोटस” बताया है। उनका आरोप है कि BJP ने ED के डर से AAP सांसदों को तोड़ा है।

लेकिन कानूनी रूप से देखें तो:

  • राघव चड्ढा ने कोई अवैध काम नहीं किया है।
  • Two-Thirds Rule का इस्तेमाल पूरी तरह संवैधानिक है।
  • अदालत में यह मामला नहीं जाएगा क्योंकि यह कानूनी रूप से वैध है।

हां, नैतिक रूप से इसे सवालों के घेरे में जरूर रखा जा सकता है।

क्या राज्यसभा सभापति को इजाजत चाहिए

कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस विलय के लिए राज्यसभा सभापति (Chairman) की मंजूरी जरूरी है?

जवाब है – हां।

10वीं अनुसूची के तहत:

  • विलय की सूचना सदन के पीठासीन अधिकारी को देनी होती है।
  • राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) या उनकी अनुपस्थिति में उपसभापति को यह तय करना होता है कि क्या यह वैध विलय है।
  • अगर सभापति संतुष्ट हो जाते हैं कि दो-तिहाई शर्त पूरी हो रही है, तो विलय को मान्यता मिल जाती है।

अभी तक राज्यसभा सभापति की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। लेकिन गणित साफ है – 10 में से 7, यानी 70%, जो दो-तिहाई (66.66%) से ज्यादा है।

पहले भी हो चुका है ऐसा

Two-Thirds Merger Rule का इस्तेमाल पहले भी कई बार हुआ है:

  1. 2019 में गोवा: कांग्रेस के 10 में से 10 विधायकों ने BJP में विलय किया। चूंकि यह 100% था (दो-तिहाई से ज्यादा), इसलिए वैध माना गया।
  2. 2020 में मणिपुर: कांग्रेस के 7 विधायकों में से 7 ने BJP में विलय किया। यह भी 100% था, इसलिए कानूनी था।
  3. 2022 में महाराष्ट्र: शिवसेना के विधायकों का विभाजन हुआ। एकनाथ शिंदे के पास दो-तिहाई से ज्यादा विधायक थे, इसलिए उन्हें “असली शिवसेना” माना गया।

हर बार यही नियम लागू हुआ – Two-Thirds Merger Rule।

विलय और विभाजन में क्या फर्क

बहुत से लोग विलय (Merger) और विभाजन (Split) को एक ही समझते हैं, लेकिन यह गलत है।

विलय (Merger):

  • दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं।
  • पुरानी पार्टी का अस्तित्व खत्म नहीं होता।
  • बचे हुए सदस्य पुरानी पार्टी में रह सकते हैं।

विभाजन (Split):

  • पार्टी दो हिस्सों में बंट जाती है।
  • दोनों गुट अलग-अलग पार्टियां बन जाते हैं।
  • यह प्रावधान 2003 में खत्म हो गया।

राघव चड्ढा के मामले में यह विलय है, न कि विभाजन। क्योंकि वे AAP को छोड़कर BJP में शामिल हो रहे हैं।

AAP के बचे 3 सांसद कौन हो सकते हैं

अगर 7 सांसद BJP में जा रहे हैं, तो बाकी 3 सांसद AAP में ही रहेंगे। ये कौन हो सकते हैं?

पंजाब से (कुल 7 में से 5 जा रहे):

  • राघव चड्ढा (BJP में)
  • संदीप पाठक (BJP में)
  • अशोक मित्तल (BJP में)
  • हरभजन सिंह (BJP में)
  • विक्रमजीत सिंह साहनी (BJP में)
  • बचे 2 सांसद – नाम अभी स्पष्ट नहीं

दिल्ली से (कुल 3 में से 2 जा रहे):

  • स्वाति मालीवाल (BJP में)
  • राजेंद्र गुप्ता (BJP में)
  • बचा 1 सांसद – संभवतः संजय सिंह या कोई और

यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि बचे 3 सांसद कौन हैं। लेकिन कानूनी रूप से उनकी सीट सुरक्षित है।

क्या BJP इन्हें कोई पद देगी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP ने इन सांसदों को कुछ आश्वासन जरूर दिए होंगे। हो सकता है:

  • किसी को मंत्री पद मिले (केंद्र या राज्य में)।
  • किसी को संगठनात्मक जिम्मेदारी मिले।
  • 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव में टिकट का वादा हो।

लेकिन अभी तक BJP की तरफ से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

क्या यह लोकतंत्र के लिए सही है

Two-Thirds Rule Raghav Chadha के मामले में कानूनी रूप से सही है, लेकिन नैतिक रूप से सवालों के घेरे में है।

सवाल यह है:

  • क्या जनता ने AAP को वोट दिया था या इन सांसदों को?
  • क्या पार्टी बदलना जनादेश का अपमान नहीं है?
  • क्या विलय का नियम राजनीतिक हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देता है?

ये सवाल हमेशा उठते रहेंगे। लेकिन संविधान ने यह अधिकार दिया है, इसलिए इसका इस्तेमाल कानूनी है।

यह भी पढे़ं 👇

Punjab MC Elections

Punjab MC Elections: बैलट पेपर से चुनाव को Supreme Court ने दी हरी झंडी

सोमवार, 25 मई 2026
oil

US Iran Deal: क्रूड में गिरावट से Sensex में तेजी, क्या खत्म हुआ संकट?

सोमवार, 25 मई 2026
Diljit Dosanjh Bomb Threat Ludhiana

Diljit Dosanjh के घर और Ludhiana Mayor Office को बम से उड़ाने की धमकी

सोमवार, 25 मई 2026
Akali Dal

बड़ा झटका: Akali Dal से Rajmahindra Singh Majithia निकले, AAP में हुए शामिल

सोमवार, 25 मई 2026
आम आदमी पर क्या असर

इस पूरे घटनाक्रम का असर पंजाब और दिल्ली के आम आदमी पर पड़ेगा। राज्यसभा में AAP की ताकत कमजोर होने से:

  • संसद में AAP की आवाज कमजोर पड़ेगी।
  • राज्यसभा में विधेयकों पर AAP का प्रभाव कम होगा।
  • 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में इसका असर हो सकता है।

लेकिन विडंबना यह है कि आम आदमी की जिंदगी में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। चाहे नेता किसी भी पार्टी में हों, समस्याएं वही रहती हैं।

अदालत में चुनौती हो सकती है

हालांकि Two-Thirds Rule कानूनी है, फिर भी AAP इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। वे तर्क दे सकते हैं कि:

  • यह जबरदस्ती की गई है।
  • ED के डर से सांसदों ने फैसला लिया है।
  • यह लोकतंत्र की हत्या है।

लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत इसे पलटने की संभावना कम है, क्योंकि गणित साफ है – 10 में से 7।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Two-Thirds Rule के तहत AAP के 10 में से 7 सांसद BJP में विलय हो रहे हैं।
  • दलबदल कानून नहीं लगेगा क्योंकि दो-तिहाई (66.66%) से ज्यादा सांसद साथ हैं।
  • सभी 10 सांसदों की सीट सुरक्षित रहेगी – चाहे वे BJP में जाएं या AAP में रहें।
  • 91वें संविधान संशोधन ने एक-तिहाई विभाजन का प्रावधान हटा दिया था।
  • राघव चड्ढा ने संविधान की 10वीं अनुसूची का कानूनी इस्तेमाल किया है।
  • राज्यसभा सभापति की मंजूरी जरूरी है, जो संभवतः मिल जाएगी।
  • AAP इसे ऑपरेशन लोटस बता रही है, लेकिन कानूनी रूप से यह वैध है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. Two-Thirds Rule क्या है और यह कैसे काम करता है?

Two-Thirds Rule संविधान की 10वीं अनुसूची का हिस्सा है। इसके तहत अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई (66.66%) से ज्यादा सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय पर सहमत हों, तो उन पर दलबदल कानून नहीं लगता। सभी सदस्यों की सीट सुरक्षित रहती है।

2. क्या राघव चड्ढा और बाकी सांसदों की सीट जाएगी?

नहीं। चूंकि AAP के 10 में से 7 सांसद (70%) BJP में जा रहे हैं, जो दो-तिहाई से ज्यादा है, इसलिए यह वैध विलय माना जाएगा। न तो BJP जाने वालों की सीट जाएगी, न AAP में रहने वालों की।

3. AAP में बचे 3 सांसदों का क्या होगा?

जो 3 सांसद AAP में रहना चाहते हैं, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन पर दलबदल कानून नहीं लगेगा और उनकी राज्यसभा सीट बरकरार रहेगी। संविधान के तहत दोनों गुट सुरक्षित रहते हैं।

Previous Post

Raghav Chadha Joins BJP: राघव चड्ढा समेत 7 सांसद BJP में, मजीठिया बोले- अभी तो ट्रेलर है

Next Post

Teachers Census Duty: 50% से ज्यादा टीचर्स को जनगणना ड्यूटी से मिली राहत, 25 अप्रैल तक रिपोर्ट भेजनी होगी

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

Punjab MC Elections

Punjab MC Elections: बैलट पेपर से चुनाव को Supreme Court ने दी हरी झंडी

सोमवार, 25 मई 2026
oil

US Iran Deal: क्रूड में गिरावट से Sensex में तेजी, क्या खत्म हुआ संकट?

सोमवार, 25 मई 2026
Diljit Dosanjh Bomb Threat Ludhiana

Diljit Dosanjh के घर और Ludhiana Mayor Office को बम से उड़ाने की धमकी

सोमवार, 25 मई 2026
Akali Dal

बड़ा झटका: Akali Dal से Rajmahindra Singh Majithia निकले, AAP में हुए शामिल

सोमवार, 25 मई 2026
Punjab Stray Dog

Punjab Stray Dog Removal पर SC सख्त, Bhagwant Mann के बयान वाली याचिका खारिज

सोमवार, 25 मई 2026
Airtel Priority Plan

Airtel Priority Plan सरकार की नज़र में, Net Neutrality खतरे में?

सोमवार, 25 मई 2026
Next Post
Teachers Census Duty

Teachers Census Duty: 50% से ज्यादा टीचर्स को जनगणना ड्यूटी से मिली राहत, 25 अप्रैल तक रिपोर्ट भेजनी होगी

Gen-Z Sleeper Cell

नोएडा में Gen-Z Sleeper Cell की साजिश: 28 पन्नों की डायरी से बड़ा खुलासा

Railway QR Ticket

Railway QR Ticket अब अनिवार्य: बिना Platform पर Entry नहीं मिलेगी

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।