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The News Air - NEWS-TICKER - Teachers Census Duty: 50% से ज्यादा टीचर्स को जनगणना ड्यूटी से मिली राहत, 25 अप्रैल तक रिपोर्ट भेजनी होगी

Teachers Census Duty: 50% से ज्यादा टीचर्स को जनगणना ड्यूटी से मिली राहत, 25 अप्रैल तक रिपोर्ट भेजनी होगी

लुधियाना के सरकारी स्कूलों के टीचर्स ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देकर आपत्ति जताई, प्रशासन ने माना 50 प्रतिशत से ज्यादा ड्यूटी नहीं लगेगी।

The News Air Team by The News Air Team
शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026
in NEWS-TICKER, पंजाब
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Teachers Census Duty
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Teachers Census Duty को लेकर बड़ी राहत की खबर है। लुधियाना के सरकारी स्कूलों के टीचर्स ने जब जनगणना ड्यूटी को लेकर आपत्ति जताई और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला दिया, तो जिला प्रशासन ने उनकी बात मान ली। अब जिला प्रशासन ने फैसला किया है कि किसी भी स्कूल से 50 प्रतिशत से ज्यादा टीचर्स की जनगणना ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने उन स्कूलों की रिपोर्ट मांग ली है जिनके 50 प्रतिशत से ज्यादा टीचर्स की ड्यूटी लगी है। स्कूल प्रिंसिपल्स को 25 अप्रैल सुबह 11 बजे तक यह जानकारी भेजनी होगी।

देखा जाए तो यह टीचर्स की एकजुटता और प्रशासन की समझदारी का नतीजा है। जब शिक्षा की गुणवत्ता दांव पर हो, तो ऐसे फैसले राहत देते हैं।

टीचर्स की आपत्ति: बच्चों को कौन पढ़ाएगा

हाल ही में जब जनगणना और चुनाव संबंधी कार्यों के लिए ड्यूटी लिस्ट जारी हुई, तो कई स्कूलों का 70 से 80 प्रतिशत स्टाफ फील्ड कार्य में तैनात कर दिया गया था। टीचर्स यूनियंस और स्कूल प्रभारियों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया।

समझने वाली बात है कि बोर्ड परीक्षाओं और नए शैक्षणिक सत्र के बीच अगर इतने बड़े पैमाने पर टीचर्स फील्ड में चले जाएं, तो स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। टीचर्स का तर्क था कि सरकारी स्कूलों में वैसे भी टीचर्स की कमी है, ऐसे में 70-80% स्टाफ को जनगणना में लगा देना बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब और पिछड़े परिवारों से आते हैं। अगर उनकी पढ़ाई रुकी, तो उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान होगा।

DEO ने उठाया मुद्दा, प्रशासन ने मानी बात

जिला शिक्षा अधिकारी ने 24 अप्रैल को एडीसी जगराओं की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह मामला उठाया। DEO ने साफ कहा कि अगर 50 फीसदी से ज्यादा टीचर्स जनगणना ड्यूटी पर रहेंगे, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो जाएगी।

एडीसी ने इस बात को गंभीरता से लिया और तुरंत फैसला किया कि स्कूल के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए 50 प्रतिशत स्टाफ को ड्यूटी से मुक्त रखा जाएगा।

अगर गौर करें तो प्रशासन ने माना कि शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूल के संचालन से समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए जिन स्कूलों में ड्यूटी की संख्या 50 प्रतिशत की सीमा पार कर गई है, उन्हें कम किया जाएगा।

प्रशासन का फैसला: 50% से ज्यादा ड्यूटी नहीं

जिला प्रशासन ने अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं:

  • किसी भी स्कूल से 50 प्रतिशत से ज्यादा टीचर्स की जनगणना ड्यूटी नहीं लगेगी।
  • जिन स्कूलों में यह सीमा पार हो गई है, उन्हें तुरंत रिपोर्ट करना होगा।
  • DEO उन स्कूलों की जानकारी ADC को सौंपेंगे।
  • ड्यूटी की संख्या कम की जाएगी ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।

दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला केवल लुधियाना के लिए नहीं, बल्कि पंजाब के दूसरे जिलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

25 अप्रैल सुबह 11 बजे तक का अल्टीमेटम

DEO लुधियाना द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक, अब स्कूलों को यह तय करना है कि वे किन कर्मचारियों की ड्यूटी कटवाना चाहते हैं।

इसके लिए एक खास प्रोफार्मा (Format) जारी किया गया है, जिसमें:

  • कर्मचारी का नाम
  • पद (Post)
  • HRMS आईडी
  • ड्यूटी कटवाने का ठोस कारण

स्कूल प्रिंसिपल्स को 25 अप्रैल सुबह 11 बजे तक यह जानकारी ईमेल के जरिए जिला शिक्षा अधिकारी को देनी होगी।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय तक जानकारी नहीं भेजी गई, तो माना जाएगा कि स्कूल का पूरा स्टाफ ड्यूटी करने के लिए तैयार है। इसके बाद किसी भी व्यक्तिगत प्रार्थना पत्र पर विचार नहीं किया जाएगा।

ब्लॉक अफसरों को भी जिम्मेदारी

इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए सभी ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारियों (BPEOs) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने अधीन आने वाले स्कूलों से जल्द से जल्द डेटा इकट्ठा कर विभाग को भेजें।

समझने वाली बात है कि यह एक समय-बद्ध (Time-bound) प्रक्रिया है। ब्लॉक अफसरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी स्कूल डेडलाइन मिस न करे।

टीचर्स को राहत, बच्चों को फायदा

इस फैसले से लुधियाना के सैकड़ों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है जो फील्ड ड्यूटी और क्लासरूम टीचिंग के बीच फंसे हुए थे।

अब टीचर्स:

  • आधे समय क्लासरूम में रह सकेंगे।
  • बच्चों की पढ़ाई जारी रहेगी।
  • बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित नहीं होगी।
  • नए सत्र की शुरुआत सुचारू रूप से होगी।

हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा फायदा बच्चों को हुआ है। अगर 70-80% टीचर्स जनगणना में चले जाते, तो स्कूल सिर्फ नाम के लिए खुले रहते।

जनगणना बनाम शिक्षा: संतुलन जरूरी

यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है – जनगणना जरूरी है या शिक्षा?

जवाब है – दोनों।

जनगणना देश के विकास के लिए जरूरी है। इससे:

  • जनसंख्या का सही आंकड़ा मिलता है।
  • योजनाएं बनाने में मदद मिलती है।
  • संसाधनों का सही बंटवारा होता है।

लेकिन शिक्षा भविष्य की नींव है। अगर बच्चों की पढ़ाई रुकी, तो देश का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

समझने वाली बात है कि प्रशासन को संतुलन बनाना होगा। 50-50 का फॉर्मूला इसी संतुलन का हिस्सा है।

दूसरे राज्यों के लिए मिसाल

पंजाब के इस फैसले को दूसरे राज्य भी अपना सकते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में भी जनगणना ड्यूटी के लिए टीचर्स लगाए जाते हैं।

अगर वहां भी 50% की सीमा तय कर दी जाए, तो शिक्षा और प्रशासनिक कार्य दोनों सुचारू रूप से चल सकते हैं।

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यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शिक्षा मंत्रालय को इस पर राष्ट्रीय स्तर के दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

टीचर्स यूनियंस की भूमिका

इस पूरे मामले में टीचर्स यूनियंस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने:

  • प्रशासन के सामने ठोस मुद्दे रखे।
  • धरना-प्रदर्शन की धमकी दी।
  • मीडिया के माध्यम से आवाज उठाई।
  • जनसमर्थन जुटाया।

अगर टीचर्स यूनियंस चुप रह जातीं, तो शायद यह फैसला नहीं आता।

आम आदमी को क्या फायदा

इस फैसले का सीधा फायदा गरीब परिवारों के बच्चों को होगा। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ज्यादातर:

  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से होते हैं।
  • प्राइवेट ट्यूशन नहीं ले सकते।
  • स्कूल ही एकमात्र साधन है उनकी शिक्षा का।

अगर स्कूल बंद रहते या टीचर्स नहीं होते, तो इन बच्चों का सबसे ज्यादा नुकसान होता।

प्रशासन की जिम्मेदारी

अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि:

  • 25 अप्रैल तक सभी स्कूलों से रिपोर्ट मंगवाई जाए।
  • जिन स्कूलों में 50% से ज्यादा ड्यूटी लगी है, उन्हें तुरंत कम किया जाए।
  • विकल्प तलाशे जाएं – जैसे रिटायर्ड टीचर्स, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी, या अन्य विभागों के कर्मचारी।

समझने वाली बात है कि जनगणना भी रुकनी नहीं चाहिए। इसलिए दूसरे विकल्पों पर भी काम करना होगा।

जनगणना कब और कैसे होगी

भारत की जनगणना 2021 कोविड के कारण टल गई थी। अब 2025-26 में यह प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसमें:

  • घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा।
  • जनसंख्या, साक्षरता, रोजगार आदि का आंकड़ा लिया जाएगा।
  • डिजिटल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल होगा।

इस पूरे काम के लिए लाखों फील्ड कर्मचारियों की जरूरत है। सरकारी टीचर्स इसका एक बड़ा हिस्सा हैं।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें 25 अप्रैल पर हैं। उस दिन सुबह 11 बजे तक:

  • सभी स्कूल प्रिंसिपल्स अपनी रिपोर्ट भेजेंगे।
  • DEO उन रिपोर्ट्स को ADC को सौंपेंगे।
  • प्रशासन ड्यूटी लिस्ट में बदलाव करेगा।
  • संशोधित लिस्ट जारी होगी।

इसके बाद ही साफ होगा कि कितने टीचर्स को राहत मिली है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Ludhiana School Teachers Census Duty में बड़ी राहत, 50% से ज्यादा ड्यूटी नहीं लगेगी।
  • टीचर्स ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देकर आपत्ति जताई थी।
  • DEO ने 24 अप्रैल को एडीसी की बैठक में मुद्दा उठाया।
  • स्कूल प्रिंसिपल्स को 25 अप्रैल सुबह 11 बजे तक रिपोर्ट भेजनी होगी।
  • जिन स्कूलों में 50% से ज्यादा ड्यूटी लगी है, उन्हें कम किया जाएगा।
  • HRMS आईडी और ठोस कारण के साथ फॉर्मेट भरना होगा।
  • यह फैसला दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. लुधियाना में टीचर्स की जनगणना ड्यूटी क्यों कम की गई?

टीचर्स ने आपत्ति जताई कि 70-80% स्टाफ को जनगणना में लगाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इस पर प्रशासन ने फैसला किया कि किसी भी स्कूल से 50% से ज्यादा टीचर्स की ड्यूटी नहीं लगेगी।

2. स्कूलों को 25 अप्रैल तक क्या करना होगा?

जिन स्कूलों में 50% से ज्यादा टीचर्स की जनगणना ड्यूटी लगी है, उन्हें 25 अप्रैल सुबह 11 बजे तक DEO को रिपोर्ट भेजनी होगी। इसमें HRMS आईडी और ड्यूटी कटवाने का कारण देना होगा।

3. अगर स्कूल ने समय पर रिपोर्ट नहीं भेजी तो क्या होगा?

अगर 25 अप्रैल सुबह 11 बजे तक रिपोर्ट नहीं भेजी गई, तो माना जाएगा कि स्कूल का पूरा स्टाफ ड्यूटी के लिए तैयार है। इसके बाद व्यक्तिगत प्रार्थना पत्र पर विचार नहीं किया जाएगा।

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