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The News Air - Breaking News - Punjab Stray Dog Removal पर SC सख्त, Bhagwant Mann के बयान वाली याचिका खारिज

Punjab Stray Dog Removal पर SC सख्त, Bhagwant Mann के बयान वाली याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा - सिर्फ मुख्यमंत्री के बयान से हुक्म नहीं बदलेंगे, NGO को भेजा हाईकोर्ट

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
सोमवार, 25 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Punjab Stray Dog
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Punjab Stray Dog Removal को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने एक NGO की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित बयान को चुनौती दी गई थी।

NGO का आरोप था कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अवारा कुत्तों को खत्म करने के लिए “खुल्ली छुट्टी” दे दी है। लेकिन जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने साफ कर दिया – सिर्फ इसलिए कि कोई मुख्यमंत्री बयान देता है, इसका मतलब यह नहीं कि कोर्ट अपना आदेश बदल देगा।

⭐ यह भी पढ़ें- Anti Defection Law के तहत AAP का बड़ा दांव, गद्दार सांसदों की छुट्टी!

क्या था NGO का आरोप?

‘एनिमल्स आर पीपल टू’ नाम की NGO की तरफ से एडवोकेट अनिल कुमार मिश्रा ने जरूरी सुनवाई के लिए मामले का जिक्र किया था। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के 19 मई के आदेश के बाद अवारा कुत्तों को मारा जा रहा है।

मिश्रा ने दोषारोपण किया कि भगवंत मान ने कथित तौर पर ट्वीट किया था: “माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, पंजाब सरकार कल से अवारा और खूंखार कुत्तों को खत्म करने के लिए एक विशाल मुहिम शुरू करेगी जो बच्चों और राहगीरों की जान को खतरे में डालते हैं… सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद।”

NGO का आरोप था कि मुख्यमंत्री के इस बयान से ऐसा लग रहा है जैसे सुप्रीम कोर्ट ने अवारा कुत्तों को मारने की खुली छूट दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

बेंच ने एडवोकेट मिश्रा से सीधे शब्दों में कहा: “सिर्फ इसलिए कि एक मुख्यमंत्री बयान देता है, क्या इसका मतलब यह है कि हमें अपना हुक्म बदलना पड़ेगा…”

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट जाने के लिए कहा। बेंच ने स्पष्ट किया:

“हुक्मों की सख्ती से पालना हाई कोर्ट्स द्वारा की जानी है। हमने आपको बताया था कि मामला हाई कोर्ट को सौंपा गया है। जाओ और हाई कोर्ट को बेनती करो।”

यह फैसला इस बात को साफ करता है कि सुप्रीम कोर्ट अपने आदेशों को राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं बदलता।

⭐ यह भी पढ़ें- Punjab Rajasthan Water Dispute: राजस्थान पर ₹1.44 लाख करोड़ का दावा, CM भगवंत मान बोले पानी का पैसा दो या लेना बंद करो

19 मई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या था?

देखा जाए तो पूरे भारत में अवारा कुत्तों के काटने और हमलों की घटनाएं “चिंताजनक बारंबारता और गंभीरता” से बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को पहली बार मानव जीवन के लिए खतरे को रोकने के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में अवारा कुत्तों को मारने की इजाजत दी थी।

लेकिन यह इजाजत बिना शर्त नहीं थी। कोर्ट ने साफ किया था कि सिर्फ इन स्थितियों में ही कुत्तों को मारा जा सकता है:

स्थितिशर्त
पागल कुत्तेयोग्य पशु चिकित्सक द्वारा प्रमाणित
लाइलाज बीमारविशेषज्ञों की राय के बाद
स्पष्ट रूप से खतरनाकउचित सत्यापन के बाद
ABC Rules 2023 के अनुसारसीमित परिभाषित हालातों में
Animal Birth Control (ABC) Rules 2023 क्या कहते हैं?

समझने वाली बात यह है कि Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023 के तहत कुत्तों को सिर्फ सीमित परिभाषित हालातों में और योग्य विशेषज्ञों द्वारा सही तस्दीक के बाद ही मारा जा सकता है।

ABC Rules का मकसद कभी भी यह नहीं था:

  • बड़े पैमाने पर अवारा कुत्तों को मारना
  • जहर देकर मारना
  • गैर-न्यायिक हत्या को अधिकृत करना
  • अन्य साधनों से क्रूरता से मारना

बल्कि इसका उद्देश्य था:

  • जन्म नियंत्रण के माध्यम से आबादी प्रबंधन
  • नसबंदी कार्यक्रम
  • टीकाकरण
  • मानवीय तरीके से उपचार
NGO ने क्या मांग की थी?

NGO ‘एनिमल्स आर पीपल टू’ चाहती थी कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट करे कि:

1. कुत्तों को मारने की सीमाएं क्या हैं

  • कौन से कुत्ते खतरनाक माने जाएंगे
  • कौन यह तय करेगा
  • कैसे सत्यापन होगा

2. सभी राज्यों के DGP को निर्देश दिया जाए

  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी कुत्ता गैर-कानूनी तरीके से न मारा जाए
  • जहर न दिया जाए
  • अन्य नुकसान न पहुंचाया जाए
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू करने के नाम पर अत्याचार न हो

3. जनता में गलत संदेश न जाए

  • कि सुप्रीम कोर्ट ने “खुल्ली छुट्टी” दे दी है
  • कि अब किसी भी कुत्ते को मारा जा सकता है
  • कि यह बिना नियमों का अभियान है
पंजाब सरकार की योजना क्या थी?

भगवंत मान की सरकार ने कथित तौर पर यह घोषणा की थी कि:

“सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, पंजाब सरकार अवारा और खूंखार कुत्तों को खत्म करने के लिए एक विशाल अभियान शुरू करेगी।”

इस बयान पर ही विवाद खड़ा हुआ था। पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और NGOs ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या बताया।

अवारा कुत्तों की समस्या कितनी गंभीर है?

दिलचस्प बात यह है कि भारत में अवारा कुत्तों की समस्या वास्तव में गंभीर है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं:

  • हर साल लाखों लोग कुत्तों के काटने से प्रभावित होते हैं
  • रेबीज से सैकड़ों मौतें होती हैं
  • बच्चों पर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं
  • कुछ इलाकों में कुत्तों के गिरोह बन गए हैं

लेकिन समाधान क्या है?

गलत तरीकासही तरीका
बड़े पैमाने पर मारनाABC कार्यक्रम
जहर देनानसबंदी और टीकाकरण
पीट-पीटकर मारनाआश्रय गृह बनाना
गोली मारनाजिम्मेदार पालन प्रोत्साहन
कानूनी स्थिति: क्या है और क्या नहीं

अब समझते हैं कानूनी स्थिति को:

कानूनी तौर पर ALLOWED (अनुमत):

  • पागल कुत्ते को मारना (प्रमाणित होने पर)
  • लाइलाज बीमार कुत्ते को इच्छामृत्यु (Euthanasia)
  • सीधे मानव जीवन के लिए खतरा बन चुके कुत्ते को (साबित होने पर)

कानूनी तौर पर NOT ALLOWED (निषिद्ध):

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  • स्वस्थ अवारा कुत्तों को मारना
  • बिना सत्यापन के कार्रवाई
  • जहर देना
  • क्रूरता से मारना
  • बड़े पैमाने पर culling (हत्याकांड)
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की चिंताएं

पशु कल्याण संगठनों को मुख्य चिंता यह है कि राजनीतिक बयानों से जनता में गलत संदेश जाता है। वे कहते हैं:

“सुप्रीम कोर्ट ने जो permission दी है, वह बहुत specific और limited है। लेकिन मुख्यमंत्री के बयान से ऐसा लगता है जैसे कोई भी कुत्ते को मार सकता है।”

इससे हो सकता है:

  • भीड़ द्वारा कुत्तों की पिटाई
  • जहर खिलाना
  • गोली मार देना
  • निर्दयी तरीके से मारना
सुप्रीम कोर्ट का balanced approach

ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है:

एक तरफ: मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है
दूसरी तरफ: पशुओं के साथ क्रूरता भी गलत है

कोर्ट ने इसलिए एक मध्यम मार्ग निकाला:

  • खतरनाक कुत्तों को हटाने की अनुमति
  • लेकिन सख्त शर्तों के साथ
  • बिना क्रूरता के
  • विशेषज्ञों की देखरेख में
हाई कोर्ट का रोल अब क्या होगा?

चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने NGO को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट भेज दिया है, अब हाई कोर्ट को:

  1. पंजाब सरकार की कार्रवाई की निगरानी करनी होगी
  2. यह सुनिश्चित करना होगा कि ABC Rules का पालन हो रहा है
  3. किसी भी अत्याचार पर रोक लगानी होगी
  4. नियमित रिपोर्ट मांगनी होगी
आगे क्या होगा?

अब देखना यह होगा कि:

पंजाब सरकार:

  • अपने अभियान को कैसे चलाती है
  • ABC Rules का पालन करती है या नहीं
  • विशेषज्ञों की राय लेती है या नहीं

हाई कोर्ट:

  • कितनी सख्ती से निगरानी करता है
  • NGO की याचिका पर क्या फैसला देता है

जनता:

  • कानून को अपने हाथ में लेती है या नहीं
  • पशु क्रूरता से बचती है या नहीं

⭐ यह भी पढ़ें- Punjab Crop Insurance: सुनील जाखड़ की बड़ी मांग, 13 अप्रैल के विधानसभा सत्र में फसल बीमा का ऐलान करे सरकार


मुख्य बातें (Key Points)

• सुप्रीम कोर्ट ने Punjab के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित बयान पर NGO की याचिका सुनने से इनकार कर दिया

• कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ मुख्यमंत्री के बयान से आदेश नहीं बदला जा सकता

• 19 मई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ पागल, लाइलाज बीमार या स्पष्ट रूप से खतरनाक कुत्तों को मारने की सीमित अनुमति दी थी

• Animal Birth Control (ABC) Rules 2023 के तहत बड़े पैमाने पर culling की अनुमति नहीं है

• मामला अब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जाएगा जहां निगरानी होगी


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: क्या सुप्रीम कोर्ट ने सभी अवारा कुत्तों को मारने की अनुमति दी है?

A: नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केवल पागल, लाइलाज बीमार या स्पष्ट रूप से मानव जीवन के लिए खतरनाक कुत्तों को मारने की सीमित अनुमति दी है, वह भी विशेषज्ञों के सत्यापन के बाद।

Q2: Animal Birth Control (ABC) Rules 2023 क्या कहते हैं?

A: ABC Rules 2023 अवारा कुत्तों की आबादी को नसबंदी, टीकाकरण और मानवीय तरीकों से नियंत्रित करने पर जोर देते हैं। बड़े पैमाने पर culling या क्रूरता से मारने की अनुमति नहीं है।

Q3: पंजाब सरकार के अभियान में क्या होगा?

A: पंजाब सरकार ने अवारा और खूंखार कुत्तों को हटाने का अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। लेकिन अब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट इस पर निगरानी रखेगा कि यह ABC Rules और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार हो।

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अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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