Gen-Z Sleeper Cell: क्या भारत के अंदर एक ऐसी फौज तैयार की जा रही थी जो नेपाल और बांग्लादेश की तरह सत्ता को चुनौती दे सके? क्या जेन-जी यानी युवा पीढ़ी का इस्तेमाल हथियार के तौर पर करने की प्लानिंग की जा रही थी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन के पीछे कोई बाहरी हाथ है? नोएडा पुलिस के हाथ लगी 28 पन्नों की एक डायरी ने इन सभी सवालों के जवाब दे दिए हैं।
देखा जाए तो यह महज एक डायरी नहीं, बल्कि देश की जड़ों को खोखला करने वाली एक खतरनाक साजिश का दस्तावेज है। इस डायरी में कई सारे राज के साथ-साथ कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं।
सरकार विरोधी विचारधारा वाले जेन-जी को बनाया जा रहा था स्लीपर सेल
सरकार की नीति-विरोधी विचारधारा रखने वाले जेन-जी को उपद्रवी अपने साथ जोड़कर स्लीपर सेल की तरह तैयार कर रहे थे। एक टीम एनसीआर समेत देश भर के जेन-जी को चिन्हित कर रही थी, जबकि दूसरी टीम लीडर की तरह इन जेन-जी को अपने साथ जोड़ने में जुटी थी।
यह सारे सबूत और साक्ष्य गिरफ्तार आरोपियों के बरामद सामान में से एक 28 पन्नों की डायरी में मिले हैं। अगर गौर करें तो यह डायरी हिमांशु की बताई जा रही है और यह सब बातें नेपाल और बांग्लादेश की तरह जेन-जी की फौज तैयार कर देश में बड़ा हंगामा करने की साजिश की ओर इशारा कर रही हैं।
नोएडा पुलिस और जांच एजेंसी की जांच जारी है। हिमांशु गिरफ्तार आरोपियों में शामिल है, जिनके खिलाफ नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर संगठित अपराध और देश विरोधी साजिश के तहत कड़ी जांच चल रही है।
फंडिंग कहां से आ रही थी? बड़े नामों की तलाश जारी
जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि हिमांशु को इस काम के लिए फंडिंग कहां से मिल रही थी और उसके संपर्क में कौन बड़े लोग हैं? किन बड़े संगठनों या बाहरी ताकतों का हाथ है?
दिलचस्प बात यह है कि सूत्रों की मानें तो पुलिस को 28 पेज की डायरी में 18 से 20 नामों के बारे में जानकारी मिली है। यह जेन-जी इंटरनेट मीडिया पर देश और सरकार विरोधी विचारधारा रखते हैं। कैंपस आदि में विरोधी भाषणबाजी करते हैं।
उपद्रवियों की एक टीम इन पर काम करती है। इनसे संपर्क कर अपने संगठन की नीति-नीतियों से अवगत कराया जाता है। इनको ब्रेनवॉश किया जाता है। भविष्य में स्लीपर सेल की तर्ज पर उपयोग किया जाता है।
सफेदपोश अपराधियों का चेहरा: इंजीनियर से लेकर पीएचडी स्कॉलर तक
इस केस का सबसे डरावना पहलू यह है कि इसमें शामिल लोग कोई मामूली अपराधी नहीं हैं। बल्कि समाज के पढ़े-लिखे तबके से आते हैं। पकड़े गए आरोपियों में कोई इंजीनियर है तो कोई पीएचडी कर रहा है, और कोई इतिहास का एक्सपर्ट है तो कोई पत्रकारिता से जुड़ा हुआ है।
अधिवक्ता रजनीश यादव के मुताबिक, रूपेश नाम का आरोपी खुद को ऑटो चालक बताता था। लेकिन असल में वह एक शातिर सोशल वर्कर बनकर जाल फैला रहा था। वहीं मनीषा नाम की लड़की गारमेंट फैक्ट्री में काम करती थी और सृष्टि नाइट की कलाकार है।
समझने वाली बात है कि इन सभी का इस्तेमाल सिर्फ इसीलिए किया जा रहा था ताकि किसी को शक ना हो और यह आसानी से युवाओं के बीच में अपनी पैठ बना सके।
दो विंग में बंटी थी पूरी साजिश
ये लोग दो अलग-अलग विंग में काम कर रहे थे। पहली टीम का काम था इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ऐसे युवाओं को ढूंढना जो सिस्टम या सरकार के खिलाफ सख्त विचार रखते हों। इसके बाद दूसरी टीम लीडर बनकर उन युवाओं से संपर्क करती थी।
उन्हें धीरे-धीरे अपने साथ जोड़ा जाता, उनका ब्रेनवॉश किया जाता और आखिर में उन्हें स्लीपर सेल की तरह तैयार किया जाता था। यानी वह युवा समाज के बीच सामान्य बनकर रहेंगे। लेकिन आदेश मिलते ही सड़कों पर उतरकर हिंसा, उपद्रव शुरू कर देंगे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पुलिस को मिली डायरी में यह साफ इशारा है कि यह पूरा मॉडल बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में हुए हालिया आंदोलनों से प्रेरित था। वहां जिस तरह से युवाओं की भीड़ ने सड़कों पर उतरकर सत्ता का तख्ता पलट दिया, ठीक वैसे ही फौज भारत में खड़ी करने की कोशिश हो रही थी।
यूनिवर्सिटी कैंपसों में भड़काऊ भाषण
डायरी में करीब 20 ऐसे नाम दर्ज हैं जो इंटरनेट मीडिया पर देश विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर हैं। यह लोग यूनिवर्सिटी कैंपसों में जाकर भड़काऊ भाषण देते थे ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को अपने जाल में फंसा सकें।
नोएडा पुलिस और देश की बड़ी जांच एजेंसियां अब उन नामों की तलाश में जुटी हुई हैं जिनका जिक्र इस डायरी के पन्नों में दर्ज है।
जेन-जी ने बदल दी सत्ता कई देशों में
जेन-जी बांग्लादेश और श्रीलंका से लेकर नेपाल तक में सत्ता परिवर्तन करवा चुके हैं। जनरेशन जेड का मतलब 1997 और 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी से है। इन्हें इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बढ़ी हुई पहली पीढ़ी माना जाता है।
हैरान करने वाली बात यह है कि वहीं मामले की बात की जाए तो पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने साफ कर दिया है कि यह एक संगठित अपराध है और इसकी जांच के तार बहुत दूर तक जा सकते हैं।
क्या भारत का युवा इतना कमजोर है?
अब सवाल है क्या हमारे देश का युवा इतना कमजोर है कि उसे चंद लोग भड़काकर देश के ही खिलाफ खड़ा कर सकें? इस 28 पन्नों की डायरी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां भी संभव मानी जा रही हैं।
चिंता का विषय यह है कि समाज के पढ़े-लिखे तबके, पीएचडी स्कॉलर, इंजीनियर और पत्रकार इस षड्यंत्र के पीछे मास्टरमाइंड बनकर काम कर रहे थे। इनका मकसद सिर्फ विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन मासूम युवाओं को स्लीपर सेल में तब्दील करना था जो आने वाले कल में भारत की पहचान बनने वाले हैं।
पुलिस की सख्ती ने टाली बड़ी अनहोनी
नोएडा पुलिस को मिली यह 28 पन्नों की डायरी महज एक नोटबुक नहीं है, बल्कि देश की जड़ों को खोखला करने वाली एक खतरनाक साजिश का कच्चा चिट्ठा है। हिमांशु और उसके साथियों ने जिस तरह से नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तर्ज पर देश की जेन-जी यानी कि सबसे ऊर्जावान पीढ़ी को गुमराह करने का खाका खींचा, उसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
राहत की बात यह है कि पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की सख्ती और जांच एजेंसियों की मुस्तैदी ने फिलहाल एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया है। लेकिन डायरी में दर्ज वह 20 नाम अभी भी कहीं ना कहीं सक्रिय हो सकते हैं।
आने वाले दिनों में होने वाली गिरफ्तारियां इस साजिश के कई और पन्ने खोलेंगी, कई और राज सामने आएंगे। उम्मीद है कि जो युवा हैं वो इनके जाल में ना फंसें।
मुख्य बातें (Key Points)
• नोएडा पुलिस ने 28 पन्नों की डायरी बरामद की जिसमें Gen-Z Sleeper Cell बनाने की साजिश का खुलासा हुआ
• नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की तर्ज पर भारत में तख्तापलट की योजना बनाई जा रही थी
• डायरी में 18-20 ऐसे नामों का जिक्र है जो इंटरनेट मीडिया पर देश विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाते हैं
• पकड़े गए आरोपियों में इंजीनियर, पीएचडी स्कॉलर, पत्रकार और सोशल वर्कर शामिल हैं
• पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर जांच जारी, जल्द बड़ी गिरफ्तारियां संभव













