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The News Air - काम की बातें - Supreme Court Housewife Compensation: गृहिणी की मौत पर ₹30,000/माह मुआवजा, SC का ऐतिहासिक फैसला

Supreme Court Housewife Compensation: गृहिणी की मौत पर ₹30,000/माह मुआवजा, SC का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों में जान गंवाने वाली गृहिणियों के मुआवजे को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। घर संभालने वाली महिलाओं को राष्ट्र निर्माता का दर्जा देते हुए कोर्ट ने न्यूनतम ₹30,000 प्रति माह का मुआवजा तय किया।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 12 जून 2026
in काम की बातें, Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Supreme Court Housewife Compensation : देशभर में सड़क हादसों में जान गंवाने वाली गृहिणियों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि घर संभालने वाली महिलाओं को राष्ट्र निर्माता का दर्जा मिलना चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि उनके काम की तुलना किसी कुशल मजदूर की दिहाड़ी से करके उनके योगदान को कम नहीं आंका जा सकता।

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₹30,000 प्रति माह यानी ₹3.6 लाख सालाना

मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने एक नया सिद्धांत तय करते हुए कहा कि किसी हादसे में गृहिणियों की मौत होने पर उनके द्वारा की जाने वाली देखभाल और घरेलू काम की कीमत कम से कम ₹30,000 प्रति महीना यानी कि ₹3.6 लाख सालाना मानी जाएगी।

देखा जाए तो सर्वोच्च न्यायालय ने जोर दिया कि यह रकम प्रणय सेठी मामले में तय अन्य सभी मुआवजा नियमों के अलावा होगी।

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पुरानी व्यवस्था: काल्पनिक आय का सिद्धांत

बता दें कि इन मामलों में अब तक देश की अदालतें और एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल किसी हादसे में जान गंवाने वाली गृहिणियों का मुआवजा तय करने के लिए एक काल्पनिक आय मानती थीं। इसके लिए राज्य के न्यूनतम वेतन को आधार बनाया जाता था जो कि बहुत कम होता था।

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समझने वाली बात यह है कि ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पुराने तरीके को खारिज करते हुए कहा कि घरेलू काम और परिवार की देखभाल के असली आर्थिक और सामाजिक कीमत को सिर्फ मजदूरों के वेतन से नहीं तोला जा सकता।

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महिलाओं का योगदान अमूल्य है, भले ही उन्हें इसके लिए कोई सैलरी न मिलती हो।

पहले की व्यवस्थानई व्यवस्था (SC फैसला)
राज्य का न्यूनतम वेतन आधार₹30,000/माह तय रकम
काल्पनिक आय का सिद्धांतघरेलू कार्य का वास्तविक मूल्य
कुशल मजदूर से तुलनाराष्ट्र निर्माता का दर्जा
कम मुआवजा₹3.6 लाख/वर्ष + अन्य नियम
देरी पर सख्त टिप्पणी: एक साल में निपटारा जरूरी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों को लेकर सख्त और अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने मुआवजे के मामले में हो रही भारी देरी पर गहरी चिंता जताई।

दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटना के दावों का निपटारा आमतौर पर एक साल के भीतर हो जाना चाहिए। अगर पीड़ितों को दशकों तक इंतजार करना पड़े तो कानून का मकसद ही खत्म हो जाता है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों से अपील की है कि वे खुद ऐसे मामलों की निगरानी करें और प्रशासनिक निर्देश जारी कर तय समय में मामलों का निपटारा सुनिश्चित कराएं।

मुआवजा व्यावहारिक हो, लॉटरी या मजाक नहीं

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी दोहराया है कि मुआवजा व्यावहारिक होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि यह न तो किसी के लिए अचानक छप्पर फाड़ लॉटरी जैसा होना चाहिए और न ही इतनी कम रकम होनी चाहिए कि पीड़ित का मजाक बने।

पंजाब का मामला: 23 साल का इंतजार

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह ऐतिहासिक फैसला पंजाब के एक मामले की सुनवाई के दौरान आया। नवंबर 2001 में रेशमा नाम की एक महिला की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने 2003 में फैसला दिया, लेकिन यह मामला सालों साल कानूनी दांव-पेच में फंसा रहा।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर दिसंबर 2024 में जाकर फैसला सुनाया। यानी हादसे के 23 साल बाद।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस लंबे इंतजार ने ही सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों में तेजी लाने के लिए कड़े निर्देश देने को मजबूर किया।

राष्ट्र निर्माता का दर्जा: ऐतिहासिक मान्यता

इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों को ‘राष्ट्र निर्माता’ का दर्जा दिया है। कोर्ट ने माना कि:

  • घरेलू काम केवल ‘अवैतनिक श्रम’ नहीं है
  • परिवार की देखभाल का आर्थिक और सामाजिक मूल्य है
  • महिलाओं का योगदान समाज के विकास में अमूल्य है
  • मजदूरी के पैमाने से इसे नहीं नापा जा सकता
आगे क्या होगा?

यह फैसला देशभर के सभी मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के लिए मार्गदर्शक होगा। अब सड़क हादसों में मारी गई गृहिणियों के परिवारों को:

  • कम से कम ₹30,000/माह की दर से मुआवजा मिलेगा
  • प्रणय सेठी फॉर्मूला के अन्य लाभ अलग से मिलेंगे
  • मामले का निपटारा एक साल में होने की उम्मीद
  • देरी होने पर हाईकोर्ट की निगरानी
मुख्य बातें (Key Points)
  • सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों को ‘राष्ट्र निर्माता’ का दर्जा दिया
  • सड़क हादसे में मृत गृहिणी के लिए न्यूनतम ₹30,000/माह (₹3.6 लाख/वर्ष) मुआवजा तय
  • पुरानी ‘काल्पनिक आय’ व्यवस्था खारिज, घरेलू काम का वास्तविक मूल्य स्वीकार
  • मामलों का निपटारा एक साल में जरूरी, देरी पर हाईकोर्ट निगरानी करेगा
  • पंजाब के 23 साल पुराने मामले पर आया यह ऐतिहासिक फैसला

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणी के मुआवजे के लिए कितनी रकम तय की है?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसे में मारी गई गृहिणी के परिवार को कम से कम ₹30,000 प्रति माह यानी ₹3.6 लाख प्रति वर्ष का मुआवजा तय किया है। यह रकम अन्य मुआवजा नियमों के अतिरिक्त होगी।

प्रश्न 2: पहले गृहिणी का मुआवजा कैसे तय होता था?

उत्तर: पहले अदालतें राज्य के न्यूनतम वेतन को आधार बनाकर एक ‘काल्पनिक आय’ मानती थीं, जो बहुत कम होती थी। अब SC ने इसे खारिज कर घरेलू काम का वास्तविक मूल्य स्वीकार किया है।

प्रश्न 3: यह फैसला किस मामले पर आया?

उत्तर: यह फैसला पंजाब के एक मामले पर आया जहां 2001 में रेशमा नाम की महिला की सड़क हादसे में मौत हुई थी। मामला 23 साल तक चला और दिसंबर 2024 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला दिया।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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