Sugarcane Control Order 2026 से गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत आई है। किसानों को फायदा देने के लिए बदल गया 60 साल पुराना नियम। हाल ही में केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने साल 1966 के नियमों की जगह पर नया शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर जारी किया।
देखा जाए तो यह एक ऐतिहासिक कदम है क्योंकि 60 साल पुराने नियमों को पूरी तरह बदला जा रहा है। जिसके तहत गन्ना किसानों और चीनी मिलों को लेकर नया नियम लागू हो गया है।
इथेनॉल को मुख्य उत्पाद की मान्यता
नए ड्राफ्ट के मुताबिक चीनी मिलों के मुख्य उत्पाद के रूप में इथेनॉल को मान्यता देना है। सरकार का ध्यान इथेनॉल के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
अगर गौर करें तो सरकार का कहना है कि सिर्फ चीनी ही नहीं बल्कि इथेनॉल, बायो एनर्जी, डिजिटल ट्रैकिंग और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट भी बढ़ाना है। यह आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने ड्राफ्ट में बताया कि गन्ने के जूस, सिरप या मोलासिस से सीधे 600 लीटर इथेनॉल उत्पादन को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा।
नई चीनी मिल के लिए 25 किमी दूरी अनिवार्य
इसके अलावा चीनी मिलों के लिए भी नए नियम जारी किए गए हैं। 1966 के नियमों को रद्द कर नए शुगरकेन कंट्रोल ऑर्डर 2026 के तहत नई चीनी मिलों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि नई चीनी मिल खोलने के लिए पुरानी मिल से 25 किलोमीटर की दूरी का दायरा होना जरूरी है जो कि पहले 15 किमी था।
मतलब अब नई मिल खोलने के लिए 25 किमी का दायरा होना जरूरी है। इससे गन्ने के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा कम होगी और मिलों पर दबाव नहीं बढ़ेगा।
₹2 करोड़ की बैंक गारंटी
साथ ही नई शुगर मिल खोलने के लिए इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर मेमोरेंडम दाखिल करना होगा। साथ ही ₹2 करोड़ की बैंक गारंटी देनी होगी और 5 साल में उत्पादन शुरू करने की भी बात कही गई है।
समझने वाली बात यह है कि यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए है कि केवल गंभीर निवेशक ही चीनी मिल खोलें, न कि केवल लाइसेंस लेकर बैठे रहें।
7 सीजन बंद रही तो मान्यता खत्म
वहीं नए ड्राफ्ट के अनुसार अगर कोई पुरानी शुगर मिल सात शुगर सीजन तक बंद रहती है तो उसका प्लांट कोटा और मान्यता खत्म हो सकती है।
यह प्रावधान यह सुनिश्चित करेगा कि मिलें सक्रिय रहें और किसानों को समय पर गन्ना बेचने का मौका मिले। चिंता का विषय यह था कि कई मिलें बंद पड़ी रहती थीं लेकिन कोटा उनके पास बना रहता था।
14 दिन में भुगतान, देरी पर 15% ब्याज
अब सवाल यह है कि इससे किसानों को क्या फायदा होगा? नए ड्राफ्ट के अनुसार सरकार ने कई पुराने नियमों में बदलाव किया है। जिसके तहत गन्ना किसानों का भुगतान आसान बनाने की बात कही गई है।
और बस यहीं से शुरू होती है गन्ना किसानों की चांदी की कहानी। गन्ना खरीदने के बाद मिलों को 14 दिन के भीतर किसानों को भुगतान करना अब जरूरी होगा।
राहत की बात यह है कि अगर भुगतान में देरी हुई तो बकाया रकम पर 15% सालाना ब्याज देना होगा। इस फैसले से किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
किसानों को मिलेगी अच्छी कीमत
वहीं नई शुगर मिल की 25 किमी की दूरी बढ़ाए जाने से गन्ने के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा कम होगी और मिलों पर दबाव नहीं बढ़ेगा। साथ ही किसानों को गन्ने की अच्छी कीमत भी मिलेगी।
हैरान करने वाली बात यह है कि पहले किसानों को महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता था। कई बार तो साल भर से ज्यादा समय लग जाता था।
इथेनॉल उत्पादन से अतिरिक्त आय
Sugarcane Control Order 2026 के तहत इथेनॉल को मुख्य उत्पाद मानने से किसानों को अतिरिक्त लाभ होगा। क्योंकि इथेनॉल की कीमत चीनी से बेहतर मिलती है।
सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को बढ़ावा दे रही है। इससे चीनी मिलों को इथेनॉल बेचने का अच्छा बाजार मिल रहा है।
डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता
नए नियमों में डिजिटल ट्रैकिंग का भी प्रावधान है। इससे गन्ने की खरीद से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी।
यह पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा और किसानों को यह पता रहेगा कि उनका गन्ना कब खरीदा गया और भुगतान कब किया जाएगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- Sugarcane Control Order 2026 ने 60 साल पुराने 1966 के नियम बदले
- गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान अनिवार्य, देरी पर 15% सालाना ब्याज
- इथेनॉल को चीनी मिलों के मुख्य उत्पाद के रूप में मान्यता
- 600 लीटर इथेनॉल = 1 टन चीनी के बराबर माना जाएगा
- नई चीनी मिल के लिए पुरानी से 25 किमी दूरी अनिवार्य (पहले 15 किमी)
- नई मिल के लिए ₹2 करोड़ बैंक गारंटी और 5 साल में उत्पादन शुरू करना जरूरी
- 7 सीजन तक बंद रही मिल की मान्यता और कोटा खत्म हो सकता है
- डिजिटल ट्रैकिंग से पारदर्शिता, किसानों को आर्थिक सुरक्षा













