AAP MPs Defection Analysis पर गहन विश्लेषण में एक चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दलबदल का नाम धरपकड़ कर देना चाहिए। जिस तरह से दलबदल हो रहे हैं और एक ही दिशा में हो रहे हैं, उसके पीछे जांच एजेंसियों की भूमिका सामने आती है।
देखा जाए तो इससे यही लगता है कि भाजपा में आने वाले नेता दलबदल से नहीं धरपकड़ से लाए जा रहे हैं। दलबदल में राजनीति की स्वाभाविक बुराइयां होती हैं – पैसे से बिक जाना, समझौता कर लेना वगैरह-वगैरह।
दलबदल में जज्बा, धरपकड़ में मजबूरी
मगर कभी-कभी दलबदल में अलग से एक जज्बा भी होता है। अपनी अलग पार्टी बनाना, जनता के बीच जाकर समर्थन जुटाना और पुराने नेता को दिखा देना, सत्ता हासिल कर लेना वगैरह-वगैरह।
अगर गौर करें तो भाजपा ने दलबदल से इस वाले जज्बे की हवा निकाल दी है। पार्टी में ऐसा कोई भी क्रांतिकारी या बागी शामिल नहीं किया जाता। बल्कि शामिल किया जाने वाला बगावत के हर जज्बे से माइनस लगता है।
वह बागी नहीं दरबारी लगता है। जो इशारे के बाद उस पार्टी से कुर्सी लेकर भाजपा में आ जाता है। और बस यहीं से शुरू होती है “धरपकड़” की असली कहानी।
संदीप पाठक: “यह परिस्थिति है”
आम आदमी पार्टी से भाजपा में जाने वाले नेताओं में संदीप पाठक के एक बयान से लगा कि उन्हें शायद पता ही नहीं कि भाजपा में क्यों आ गए।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा में शामिल होने से पहले प्रेस वार्ता में संदीप पाठक ने कहा, “मेरी किसी से कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं है। यह परिस्थिति है। जो भी हो रहा हो मैं उन सभी लीडर्स का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने मेरी मदद की।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं अरविंद केजरीवाल को भी धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे मौका दिया और मौका दिया तो ईश्वर साक्षी है। उन्होंने जितना मौका दिया मैंने उससे कई गुना बढ़कर काम किया।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि उन्होंने कहा, “मेरा रास्ता आज से अलग है।” संदीप पाठक भी राज्यसभा के सदस्य हैं। सार्वजनिक रूप से कम ही बोलते हैं। पर्दे के पीछे से काम करने वाले नेता के रूप में जाने गए।
समझने वाली बात यह है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत में इनका बड़ा रोल बताया जाता है। इनके बयान को नोट किया जाना चाहिए क्योंकि इनके बयान में पार्टी छोड़ने का न तो गुस्सा है और न ही नई पार्टी में जाने का उल्लास नजर आता है।
अशोक मित्तल: ED छापे के 10 दिन बाद BJP में
सबसे बड़ा सवाल अशोक मित्तल के मामले में उठता है। इन जनाब ने बहुत अच्छा किया। छापा पड़ने के 10 दिनों के भीतर भाजपा में चले गए।
15 अप्रैल को वित्तीय गड़बड़ियां करने के आरोप में इनके खिलाफ FEMA के तहत जांच हुई। गुरुग्राम, जालंधर में इनके 10 ठिकानों पर रेड हुई। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) से जुड़ी इमारतों और इनके घर में भी छापे पड़े।
आरोप लगा कि अपनी शैक्षणिक संस्थाओं के लिए विदेशी स्रोत से पैसा लिया है। वित्तीय गड़बड़ियों का हवाला दिया गया। उस समय आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि इसके पीछे राघव चड्ढा का हाथ है।
रेड से करीब दो हफ्ते पहले AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया था। इसके बाद अशोक मित्तल को उपनेता बनाया गया। वही अशोक मित्तल अब राघव चड्ढा के साथ-साथ भाजपा में चले गए।
भगवंत मान का आरोप: ऑपरेशन लोटस
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया, “आज उस सरकार के साथ ऑपरेशन लोटस का खेल खेला जा रहा है। हमारे सांसदों को तोड़ा जा रहा है। उनको अपनी पार्टी में शामिल किया जा रहा है। ED, CBI का इस्तेमाल किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “आपको याद होगा अभी कुछ दिन पहले अशोक मित्तल के यहां ED का छापा पड़ा तो चीजें अपने आप में जुड़ती हैं। ED का छापा पड़ा और तोड़ लिया।”
चिंता का विषय यह है कि भगवंत मान ने साफ शब्दों में कहा, “इसका मतलब भय दिखाकर प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग करके यह ऑपरेशन लोटस चलाया जा रहा है। मैं फिर दोहरा रहा हूं। पंजाब की जनता इन गद्दारों को कभी माफ नहीं करेगी।”
भाजपा: वाशिंग मशीन या पुलिस स्टेशन?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा राजनीति का वो पुलिस स्टेशन है जिसमें दूसरे दलों में घूम रहे भ्रष्टाचारियों को पकड़कर लाया जाता है ताकि वे भ्रष्टाचार का पैसा दूसरे दल में खर्च न कर दें।
हैरान करने वाली बात यह है कि इन्होंने भाजपा में जाकर आम आदमी पार्टी का नुकसान नहीं किया बल्कि ED का नुकसान होने से बचा लिया। वरना ED के अफसरों को मई और जून के महीने में इनके खिलाफ जांच करने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती।
राहत की बात यह है कि ED के छापे के दिन ही इन्हें भाजपा में चले जाना चाहिए था। मगर भारत में इतनी देर कभी-कभी हो जाती है।
411 विधायक 10 साल में BJP में गए: खरगे
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने एक आंकड़ा दिया कि 400 से अधिक विधायक एजेंसियों के भय के कारण भाजपा में चले गए हैं।
उन्होंने कहा, “411 MLAs को 10 साल में उन्होंने अपने तरफ लिया। अब मैं यह नहीं कहता कितना पैसा देके खरीदे, क्या करें वो नहीं। लेकिन आपको तो मालूम है कितने सरकारें हमारे इलेक्टेड थे। जैसा कि मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, गोवा, उत्तराखंड – यह सब आप जानते हैं कैसे गिरे ये।”
महाराष्ट्र: 25 नेता, 23 के मामले बंद
अप्रैल 2024 में इंडियन एक्सप्रेस में आनंद मोहन जे की रिपोर्ट छपी। इसमें बताया गया कि महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे 25 नेता भाजपा में शामिल हो गए।
बाद में 23 नेताओं के खिलाफ चल रहे मामले या तो बंद कर दिए गए या ठंडे बस्ते में डाल दिए गए। यह दर्शाता है कि भाजपा में जाने के बाद मामले कैसे “मैनेज” हो जाते हैं।
हर्षवर्धन पाटिल: “चैन की नींद सो रहा हूं”
महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हर्षवर्धन पाटिल भाजपा में चले गए और एक बयान दे दिया कि भाजपा में जाने के बाद चैन की नींद सो रहा हूं। अब कोई पूछताछ नहीं हो रही है।
बाद में हर्षवर्धन पाटिल अपने इस बयान से मुकर गए और कहा कि मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया। लेकिन यह स्लिप ऑफ टंग बहुत कुछ कह गई।
प्रताप सरनायक का पत्र: एजेंसियों से बचाओ
नवंबर 2019 में उद्धव ठाकरे बीजेपी के गठबंधन से अलग हुए। जून 2021 में प्रताप सरनायक ने उद्धव ठाकरे को पत्र लिखा कि मेरे और शिवसेना के दूसरे नेताओं के पीछे कई केंद्रीय एजेंसियां लगी हुई हैं।
अनिल परब, रविंद्र वाईकर और उनके परिवारों को परेशान किया जा रहा है। बेहतर होगा हम प्रधानमंत्री मोदी से फिर से हाथ मिला लें क्योंकि शिवसैनिकों को लगता है ऐसा करने से सेना के नेताओं को परेशान नहीं किया जाएगा।
यह पत्र बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो दिखाता है कि एजेंसियों के डर से नेता कैसे भाजपा में जा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी: राजनीतिक औजार मत बनो
खुद सुप्रीम कोर्ट ने ED से कहा राजनीतिक दल का औजार मत बनिए। इसका क्या मतलब रहा होगा? यह सवाल हर किसी को खुद से पूछना चाहिए।
समझने वाली बात यह है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत को यह कहना पड़े कि जांच एजेंसी राजनीतिक औजार न बने, तो स्थिति की गंभीरता समझी जा सकती है।
राहुल गांधी का “डरो मत” नारा
एजेंसियों का डर इतना गहरा हो चुका है कि राहुल गांधी को नारा देना पड़ा – “डरो मत। हिंदुस्तान की हर संस्था में है। ED में है, CBI में है, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में है।”
उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, “एक वरिष्ठ नेता – नाम नहीं लेना चाहता हूं – इसी प्रदेश के एक वरिष्ठ नेता कांग्रेस पार्टी को छोड़ते हैं और रो के कहते हैं मेरी मां से, रो के कहते हैं कि सोनिया जी, मुझे शर्म आ रही है। मेरे में इन लोगों से, इस शक्ति से डरने, लड़ने की हिम्मत नहीं है। मैं जेल नहीं जाना चाहता हूं।”
मनोज झा: वन नेशन वन पार्टी?
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने इस धरपकड़ को अलग तरीके से देखा है। उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से कहा, “मैं इस सवाल को जरा बदल के कहूं। यह झटका किसी पार्टी को नहीं लगता है। जब ऐसा होता है तो यह झटका लोकतंत्र को लगता है।”
उन्होंने सवाल उठाया, “क्या हम चीन के मॉडल पर जा रहे हैं? हम वन नेशन वन इलेक्शन की बात सुन रहे थे। क्या अब हम वन नेशन वन पार्टी की तरफ जा रहे हैं? मैं उसके लिए ज्यादा चिंतित हूं। किसी व्यक्ति विशेष के कहीं से कहीं डिपार्चर से नहीं।”
प्रशांत भूषण का तीखा ट्वीट
AAP के पूर्व नेता, संस्थापक और वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया कि जिन सात लोगों ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा का हाथ पकड़ा है और जिन्होंने पहले आम आदमी पार्टी को छोड़ा था, उनमें क्या फर्क है?
उन्होंने कहा, “जिन्होंने पहले छोड़ा था, वह पार्टी से तब अलग हुए जब केजरीवाल ने उन सिद्धांतों से समझौता कर लिया जिन पर पार्टी की स्थापना हुई थी। राघव चड्ढा समेत बाकी लोगों के दल ने सत्ता के सारे सुख भोगे। राज्यसभा की टिकट मिली। इन्होंने सिर्फ और सिर्फ अवसरवाद के इरादे से भाजपा ज्वाइन की है। किसी सिद्धांत के लिए नहीं।”
RSS और अन्ना आंदोलन: वह सवाल जो पूछा जाना चाहिए
कई लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि आम आदमी पार्टी का आंदोलन आरएसएस का सेटअप किया हुआ आंदोलन था। Twitter पर कितने ही लोगों ने यह लिखा है कि बीजेपी की बी टीम बीजेपी में चली गई।
लेकिन यह भी सच है कि भाजपा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह को लंबे समय के लिए जेल में डाला। उनके परिवारों को भयंकर कष्ट से गुजरना पड़ा।
चिंता का विषय यह है कि क्या आरएसएस की मदद के लिए यह लोग जेल भी गए? और कष्ट सहने का नाटक किया? यह सवाल तर्कसंगत नहीं लगता।
प्रवेश वर्मा का Pinterest फोटो प्रकरण
दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक घर की तस्वीर दिखाई। कहा लोधी रोड के घर की तस्वीर है अरविंद केजरीवाल की है और इसके भीतर आलीशान सजावट की गई है। शीश महल है।
AAP के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा प्रवेश साहिब ने पूरी मीडिया को बुलाकर केजरीवाल के तथाकथित नए घर की तस्वीरें दिखाई। मगर मजे की बात यह है कि यह तस्वीरें केजरीवाल के घर की नहीं बल्कि Pinterest से डाउनलोड की गई।
ऑल्ट न्यूज़ के जुबैर ने भी लिखा कि लगता है गलती से Pinterest की साइट खोलकर मीडिया को दिखा दिया गया। यह दर्शाता है कि किस स्तर तक जाकर विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा है।
पवन खेड़ा बनाम प्रवेश वर्मा: दो कानून?
अब आप इस मामले की तुलना पवन खेड़ा के मामले से कीजिए। असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ पवन खेड़ा ने आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उनके खिलाफ कई मुकदमे हो गए।
दस्तावेज सही नहीं होने को लेकर बहुत सारे केस उनके खिलाफ कर दिए गए हैं। क्या प्रवेश वर्मा के खिलाफ भी इसी तरह की कारवाई होगी?
यहीं पर आपको दो कानून, दो देश, दो दल नजर आता है। और बस यहीं से शुरू होती है भारतीय लोकतंत्र के सामने खड़ी चुनौती की कहानी।
मुख्य बातें (Key Points)
- AAP MPs Defection को राजनीतिक विश्लेषक “धरपकड़” बता रहे हैं, न कि दलबदल
- अशोक मित्तल के यहां 15 अप्रैल को ED छापा, 10 दिन बाद BJP में शामिल
- संदीप पाठक ने कहा “यह परिस्थिति है”, पार्टी छोड़ने में न गुस्सा न उल्लास
- मलिकार्जुन खरगे के अनुसार 10 साल में 411 विधायक BJP में गए
- महाराष्ट्र में 25 भ्रष्टाचार के आरोपी नेता BJP में, 23 के मामले बंद
- प्रताप सरनायक का पत्र: एजेंसियों से बचने के लिए BJP से हाथ मिलाओ
- सुप्रीम कोर्ट ने ED को चेतावनी: राजनीतिक औजार मत बनो
- राहुल गांधी का “डरो मत” नारा, एक नेता ने सोनिया से रोकर कहा जेल से डर लगता है
- मनोज झा का सवाल: क्या वन नेशन वन पार्टी की ओर जा रहे हैं?
- प्रशांत भूषण: यह अवसरवाद है, किसी सिद्धांत के लिए नहीं
- प्रवेश वर्मा का Pinterest फोटो प्रकरण बनाम पवन खेड़ा के मुकदमे










