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The News Air - Breaking News - Grahan 2026: अगस्त में 15 दिन के अंदर Solar Eclipse और Lunar Eclipse, जानें क्या करें

Grahan 2026: अगस्त में 15 दिन के अंदर Solar Eclipse और Lunar Eclipse, जानें क्या करें

सावन के महीने में खगोलीय संयोग: 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण लगेगा, लेकिन भारत में नहीं दिखेगा।

Ajay Kumar by Ajay Kumar
सोमवार, 3 अगस्त 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Solar Eclipse
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Solar Eclipse August 2026 और चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। साल 2026 का सावन महीना खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। देखा जाए तो इस बार सावन में सिर्फ धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि एक बड़ा खगोलीय संयोग भी देखने को मिलेगा। अगस्त 2026 में सिर्फ 15 दिनों के अंतराल में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण लगने जा रहे हैं। साल की शुरुआत में पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को और पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लग चुका है। अब साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण तथा चंद्र ग्रहण अगस्त महीने में पड़ने जा रहा है।

🔍 यह भी पढ़ें- US ने Indian Solar पर लगाया 123% Anti-Dumping Duty, कुल टैरिफ 250%

12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण: हरियाली अमावस्या

दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण इस साल का लगेगा 12 अगस्त 2026 को। यह दिन सावन अमावस्या का होगा, जिसे कई जगहों पर हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा।

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हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी वजह से भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। यानी भारतीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो सावधानियां ग्रहण के समय बरती जाती हैं, वे इस बार लागू नहीं होंगी।

अगर गौर करें तो सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, जिससे दिन में अंधेरा छा जाता है। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना होती है।

🔍 यह भी पढ़ें- Solar Panel Rule Change: 1 जून से बदला नियम, Subsidy पर असर

28 अगस्त को चंद्र ग्रहण: रक्षाबंधन के दिन

इसके ठीक 15 दिन बाद यानी 28 अगस्त 2026 को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लगेगा। यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन होगा। खास बात यह है कि इसी दिन भारत में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जा रहा है।

यह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां रक्षाबंधन के पर्व पर इसका कोई सूतक प्रभाव नहीं माना जाएगा। भाई-बहन बिना किसी धार्मिक बाधा के रक्षाबंधन का त्योहार पूरी श्रद्धा के साथ मना सकेंगे।

समझने वाली बात यह है कि चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है और चंद्रमा अंधेरा या लाल दिखाई देता है।

क्या होता है सूतक काल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। यह अवधि ‘सूतक काल’ कहलाती है। परंपरागत रूप से:

  • ग्रहण के दौरान खाना-पीना वर्जित माना जाता है
  • गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है
  • मांगलिक कार्यों से बचने की परंपरा है
  • पूजा-पाठ और मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया जाता है

हालांकि, जब ग्रहण किसी देश में दिखाई न दे, तो वहां सूतक काल मान्य नहीं होता। यही कारण है कि 12 और 28 अगस्त के दोनों ग्रहणों का भारत में सूतक प्रभाव नहीं होगा।

स्वास्थ्य और बुजुर्गों की सेहत का ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह भी मान्यता है कि इस दौरान:

  • बुजुर्गों की सेहत का भी खास ख्याल रखना चाहिए
  • कई धार्मिक परंपराओं में ग्रहण के समय मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है
  • बड़े फैसले लेने में सावधानी बरतने की भी सलाह दी जाती है

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया है। इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं होता। लेकिन परंपराओं और आस्था का सम्मान करते हुए लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार सावधानियां बरतते हैं।

ग्रहण के बाद क्या करें?

ग्रहण के बाद धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • स्नान करना शुभ माना जाता है
  • शिवलिंग पर जल अर्पित करना पुण्यदायी माना जाता है
  • पूजा-पाठ करना शुभ है
  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कई लोग शुभ मानते हैं
  • ग्रहण काल के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करने की परंपरा भी बताई गई है

दिलचस्प बात यह है कि भारत में जब भी ग्रहण लगता है, तो गंगा घाट और तीर्थ स्थलों पर लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए जुटते हैं। लेकिन चूंकि यह दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए ऐसी कोई विशेष भीड़ नहीं होगी।

खगोलीय महत्व

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो ग्रहण अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक:

  • सूर्य के बाहरी वातावरण (कोरोना) का अध्ययन करते हैं
  • सूर्य की सतह पर होने वाली गतिविधियों को समझते हैं
  • अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन करते हैं

चंद्र ग्रहण से भी खगोलविद कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाते हैं।

सावन में ग्रहण: विशेष संयोग

खास बात यह है कि दोनों ग्रहण सावन के दौरान ही होंगे। सावन का महीना हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। इस महीने में:

  • सोमवार को शिव पूजा का विशेष महत्व
  • कांवड़ यात्रा निकाली जाती है
  • तीज और नाग पंचमी जैसे त्योहार आते हैं
  • रक्षाबंधन भी इसी महीने में होता है

ऐसे में सावन के दौरान दो ग्रहणों का होना एक दुर्लभ खगोलीय संयोग है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण (हरियाली अमावस्या के दिन)
  • 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण (रक्षाबंधन के दिन)
  • दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं
  • 15 दिन के अंतराल में दो ग्रहण – दुर्लभ खगोलीय संयोग

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 2026 में सूर्य ग्रहण कब लगेगा?

साल 2026 में दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह हरियाली अमावस्या के दिन पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा।

प्रश्न 2: क्या रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव होगा?

नहीं, 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण लगेगा लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन सामान्य रूप से मनाया जा सकेगा।

प्रश्न 3: ग्रहण के दौरान क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय खाना-पीना वर्जित, गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी और मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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