Pappu Yadav Attack Delhi की खबर रविवार को तब सामने आई जब बिहार के पूर्णिया से आजाद सांसद पप्पू यादव को नई दिल्ली में उनकी सरकारी रिहायश पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते समय निशाना बनाया गया। हमलावरों में से एक ने कथित तौर पर उनकी ओर जूता फेंका और एक के पास से चाकू भी बरामद किया गया। देखा जाए तो यह घटना राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विरोध में किए गए नाटकीय प्रदर्शन के ठीक बाद सामने आई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अचानक हमला
रविवार को पप्पू यादव अपनी सरकारी रिहायश पर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। तभी अचानक एक व्यक्ति ने उनकी तरफ जूता फेंका। इसके बाद मौके पर हड़कंप मच गया। यादव के समर्थकों और हमलावरों के बीच धक्का-मुक्की और खींचतान शुरू हो गई।
हमलावरों की पहचान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद तहसील के गांव शाहपानी के रहने वाले सुमित और हैप्पी के रूप में हुई है। दोनों को घटना के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया।
अगर गौर करें तो यह हमला संसद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन से सीधे जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। पप्पू यादव ने राम मंदिर में दान की कथित चोरी को लेकर एक नाटकीय प्रदर्शन किया था, जिसने हिंदू धार्मिक संगठनों को नाराज कर दिया था।
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चाकू लेकर आए थे हमलावर
घटना की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पुलिस ने हमलावरों में से एक के पास से चाकू बरामद किया। यादव के मीडिया कोऑर्डिनेटर जैद खान ने कहा, “जब हमले के लिए चाकू निकाला गया तो हमारे समर्थकों और साथियों ने हमलावर को काबू करने की कोशिश की। मैं हमलावर और पप्पू यादव के बीच आ गया और मुझे बुरी तरह पीटा गया।”
जैद खान ने आगे आरोप लगाया, “दिल्ली पुलिस मूक दर्शक बनी खड़ी रही और मारपीट होने दी। पुलिस ने यादव की कोई मदद नहीं की।” यह आरोप गंभीर है क्योंकि यह एक सांसद की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
दिलचस्प बात यह है कि पप्पू यादव के समर्थकों के पास से भी एक चाकू बरामद किया गया है। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
पप्पू यादव का दावा: मुझे मारने की साजिश
मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने दावा किया कि हमलावर उन्हें मारने के इरादे से आए थे। यादव ने कहा, “वह मुझे चाकू से मारने आया था। मुझे मारने की साजिश थी। मैंने सनातन का अपमान नहीं किया। मेरी रिहायश पर मुझ पर हमला किया गया।”
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पप्पू यादव ने साफ किया कि उन्होंने सनातन धर्म का अपमान नहीं किया। उनका कहना है कि वे राम मंदिर में दान की चोरी के आरोपों को उठा रहे थे, न कि धर्म का अपमान कर रहे थे।
लेकिन हरिद्वार के साधुओं और जूना अखाड़े के धार्मिक नेताओं ने इसे अलग नजरिए से देखा है। उन्होंने पप्पू यादव के प्रदर्शन को हिंदू धार्मिक परंपराओं के प्रति अपमानजनक बताया है और उनके खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शनों की घोषणा की है।
राम मंदिर दान चोरी विवाद: क्या था नाटक?
यह पूरा मामला संसद परिसर में विपक्ष के एक नाटकीय प्रदर्शन से शुरू हुआ। विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर में चढ़ावे के पैसों की कथित चोरी को नाटकीय ढंग से दिखाया था। इसके तहत उन्होंने संसद के मकर द्वार की ओर जाने वाली सीढ़ियों के सामने दान के बक्से रखे थे।
राहुल गांधी समेत कई सांसदों ने बक्सों में पैसे डाले, जबकि भगवे रंग के कपड़े पहने पप्पू यादव ने राम मंदिर में दान की चोरी के विपक्ष के आरोपों को दर्शाने के लिए कुछ पैसे अपनी जेबों में रख लिए। यही वह दृश्य था जिसने विवाद खड़ा किया।
समझने वाली बात यह है कि विपक्ष का आरोप है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के पैसों की चोरी हो रही है। लेकिन इस आरोप को नाटकीय तरीके से पेश करने का तरीका कई लोगों को अपमानजनक लगा।
हरिद्वार के साधुओं का गुस्सा
हरिद्वार के साधुओं ने मंदिर में कथित दान चोरी को लेकर यादव के प्रदर्शन पर सख्त आपत्ति जताई है। जूना अखाड़े के धार्मिक नेताओं ने इस कार्रवाई को हिंदू धार्मिक परंपराओं के प्रति अपमानजनक बताया है और सांसद के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शनों का ऐलान भी किया है।
एक धार्मिक नेता ने कहा, “राम मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक है। इसके साथ ऐसा नाटक करना अपमानजनक है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
यह गुस्सा ही संभवतः हमले का कारण बना। हमलावर सुमित और हैप्पी ने भी शायद इसी गुस्से में यह कदम उठाया होगा।
राजनीतिक घटनाक्रम
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। एक तरफ विपक्ष राम मंदिर में दान की चोरी के आरोप लगा रहा है तो दूसरी तरफ हिंदू संगठन इसे धर्म का अपमान बता रहे हैं।
पप्पू यादव एक विवादास्पद राजनेता रहे हैं। वे कभी कांग्रेस के साथ थे, फिर राजद के साथ रहे और अब आजाद सांसद हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही है।
इस घटना के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक सांसद की सरकारी रिहायश पर ऐसा हमला कैसे हो सकता है? दिल्ली पुलिस की भूमिका क्या थी?
सुरक्षा में चूक के सवाल
यादव के मीडिया कोऑर्डिनेटर जैद खान ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस मूक दर्शक बनी रही और मारपीट होने दी।
अगर यह सच है तो यह बेहद गंभीर मामला है। एक सांसद की सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस की है। अगर पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई तो इसकी जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, यह भी सवाल है कि हमलावर सांसद की रिहायश तक कैसे पहुंच गए? सुरक्षा जांच में क्या चूक हुई? क्या किसी की मिलीभगत थी?
आगे क्या होगा?
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह योजनाबद्ध हमला था या सहज घटना।
इसी बीच, पप्पू यादव ने अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि उन्हें जान का खतरा है।
राजनीतिक हलकों में इस घटना की चर्चा है। कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं के आहत होने का नतीजा बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक साजिश।
मुख्य बातें (Key Points)
- दिल्ली में सांसद पप्पू यादव की सरकारी रिहायश पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हमला
- बुलंदशहर के सुमित और हैप्पी नामक दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया
- हमलावरों के पास से चाकू बरामद, यादव ने कहा – मुझे मारने की साजिश थी
- राम मंदिर दान चोरी के विरोध प्रदर्शन के बाद हुई घटना, हरिद्वार के साधुओं ने जताया था विरोध










