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The News Air - Breaking News - Share Market Crash: Iran के हमले से शेयर बाजार में तबाही, ₹4.57 लाख करोड़ डूबे

Share Market Crash: Iran के हमले से शेयर बाजार में तबाही, ₹4.57 लाख करोड़ डूबे

8 जून को सेंसेक्स और निफ्टी में जबरदस्त गिरावट, निवेशकों को भारी नुकसान, अमेरिका के बाजार में 4% की गिरावट का असर

The News Air Team by The News Air Team
सोमवार, 8 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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Share Market Crash
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Share Market Crash: 8 जून को भारतीय शेयर बाजार में खुलते ही तबाही मच गई। इजराइल पर ईरान के ताजा मिसाइल हमले और अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट की वजह से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 1% धड़ाम से नीचे गिर गए। निफ्टी 23,000 के खतरनाक स्तर के करीब पहुंच गया था। निवेशकों को एक ही दिन में करीब ₹4.57 लाख करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।

हैरान करने वाली बात यह है कि यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी। दुनियाभर के बाजारों में दहशत का माहौल था क्योंकि मिडिल ईस्ट में जंग के बादल फिर से मंडराने लगे हैं।

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क्यों टूटा शेयर बाजार?

देखा जाए तो शेयर बाजार की इस भयानक गिरावट के पीछे तीन बड़े कारण हैं। सबसे पहला और सबसे बड़ा कारण है अमेरिकी बाजार का क्रैश। शुक्रवार को अमेरिका का शेयर बाजार बहुत भारी गिरावट के साथ बंद हुआ था। नैस्डेक इंडेक्स में 4% की गिरावट आई थी। जब दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार गिरता है, तो उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

दूसरा बड़ा कारण है ईरान-इजराइल के बीच बढ़ता तनाव। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 7 जून की रात ईरान ने इजराइल की तरफ 11 मिसाइलें दागी हैं। यह खबर आते ही निवेशकों में दहशत फैल गई। जैसे ही यह खबर आई कि मिडिल ईस्ट में समस्या बढ़ी है, तो निवेशकों ने अपना पैसा शेयर बाजार से निकालकर सुरक्षित बॉन्ड में शिफ्ट करना शुरू कर दिया।

तीसरा बड़ा कारण है विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली। पिछले कुछ समय से जब से मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू हुआ है, करीब-करीब ₹80,000 करोड़ विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से निकाला है। यह ध्यान देने वाली बात है कि विदेशी निवेशक (FII) जब बड़े पैमाने पर पैसा निकालते हैं, तो बाजार में भारी दबाव आता है।

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निफ्टी 23,000 के खतरनाक स्तर पर

8 जून को जब बाजार खुला, तो निफ्टी एकदम क्रैश वाली स्थिति में था। निफ्टी 23,000 के करीब-करीब पहुंच गया था। सटीक रूप से कहें तो निफ्टी 23,395 पॉइंट तक आ गया था। जानकारों का कहना है कि अगर निफ्टी इस स्तर के नीचे चला जाता तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 23,000 एक बहुत ही महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल है।

समझने वाली बात यह है कि सेंसेक्स भी करीब 1% गिरकर बंद हुआ। इस गिरावट का मतलब है कि बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹4.57 लाख करोड़ घट गया।

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निवेशकों को कितना नुकसान?

आज की गिरावट में निवेशकों को करीब-करीब ₹4.57 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। लेकिन यहां एक बात समझनी जरूरी है। यह नुकसान “नोशनल” यानी कागजी नुकसान है। अगर निवेशक अपने शेयर बेचते नहीं हैं और होल्ड करके रखते हैं, तो जब बाजार में सुधार होगा तब यह नुकसान रिकवर भी हो सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि अगर बाजार में और गिरावट आती है, तो यह नुकसान और भी बढ़ सकता है। इसीलिए मार्केट एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पैनिक में आकर शेयर नहीं बेचने चाहिए, बल्कि लंबी अवधि के लिए निवेश रखना चाहिए।


कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ईरान के हमले के बाद और होर्मुज की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावट की आशंकाओं के बीच कच्चा तेल 3% उछल गया है। कच्चा तेल 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। यानी 100 डॉलर के आसपास फिर से घूम रहा है।

अगर गौर करें तो कच्चा तेल भी एक बड़ा कारण है जो शेयर बाजार को प्रभावित करता है। जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो शेयर बाजार पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। खासकर भारत जैसे देश के लिए जो दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देशों में से एक है, यह बहुत बड़ी चुनौती है।


अमेरिकी बाजार का असर

जैसा कि हमने शुरुआत में बताया, अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ था। नैस्डेक इंडेक्स में 4% की गिरावट दर्ज की गई थी। यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका में व्यापार युद्ध और आर्थिक मंदी की आशंकाओं के कारण आई।

यहां समझने वाली बात यह है कि भारतीय बाजार अमेरिकी बाजार से बहुत ज्यादा जुड़ा हुआ है। जब अमेरिका में बाजार गिरता है, तो एशियाई बाजारों में भी गिरावट आती है। 8 जून को जब भारत में बाजार खुला, तो अमेरिकी बाजार की गिरावट का सीधा असर दिखा।


विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में जब से मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू हुआ है, करीब ₹80,000 करोड़ की बिकवाली हो चुकी है।

देखा जाए तो यह बहुत बड़ा कारण है जिसकी वजह से बाजार लगातार गिर रहा है। और फिलहाल रिकवरी की कोई मजबूत उम्मीद नहीं दिख रही है। जब तक मिडिल ईस्ट में शांति नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।


निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे समय में पैनिक सेलिंग से बचना चाहिए। अगर आपने लंबी अवधि के लिए निवेश किया है, तो अपने शेयर होल्ड करके रखें। जब बाजार में सुधार होगा, तो आपका नुकसान रिकवर हो जाएगा।

लेकिन दूसरी तरफ, अगर युद्ध और बढ़ता है और बाजार में और गिरावट आती है, तो नुकसान भी बढ़ सकता है। इसलिए निवेशकों को अपनी रिस्क लेने की क्षमता के अनुसार ही फैसला लेना चाहिए।


भारत के लिए क्यों बड़ी चिंता?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। अगर मिडिल ईस्ट में युद्ध लंबा चलता है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली जाती हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

चिंता का विषय यह है कि महंगाई बढ़ेगी, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे और आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही, सरकार का राजकोषीय घाटा भी बढ़ सकता है।


क्या है आगे का रास्ता?

फिलहाल शेयर बाजार का भविष्य मिडिल ईस्ट की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम होता है और सीजफायर की स्थिति बनती है, तो बाजार में सुधार हो सकता है। लेकिन अगर युद्ध बढ़ता है, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

इसके अलावा, अमेरिकी बाजार की रिकवरी भी जरूरी है। अगर अमेरिका में बाजार स्थिर होता है, तो भारतीय बाजार को भी राहत मिलेगी।


मुख्य बातें (Key Points)
  • 8 जून को शेयर बाजार खुलते ही क्रैश हो गया।
  • सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1% गिरे।
  • निवेशकों को ₹4.57 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।
  • ईरान ने इजराइल पर 11 मिसाइलें दागीं।
  • अमेरिकी नैस्डेक इंडेक्स में 4% की गिरावट।
  • कच्चा तेल 3% उछलकर 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
  • विदेशी निवेशकों ने ₹80,000 करोड़ निकाले।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 8 जून को शेयर बाजार क्यों गिरा?

उत्तर: शेयर बाजार में गिरावट के तीन मुख्य कारण थे – अमेरिकी बाजार में 4% की गिरावट, ईरान द्वारा इजराइल पर मिसाइल हमला, और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली।

प्रश्न 2: कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं?

उत्तर: मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल तनाव बढ़ने और होर्मुज की जलडमरूमध्य में रुकावट की आशंका के कारण कच्चे तेल की कीमतें 3% बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं।

प्रश्न 3: निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

उत्तर: मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि पैनिक सेलिंग से बचें। अगर लंबी अवधि के लिए निवेश किया है तो होल्ड करें। लेकिन अपनी रिस्क क्षमता के अनुसार ही फैसला लें।

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