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The News Air - Breaking News - Plastic Currency in India: RBI का नया प्लान, अब चलेंगे प्लास्टिक के नोट

Plastic Currency in India: RBI का नया प्लान, अब चलेंगे प्लास्टिक के नोट

डिजिटल क्रांति के बावजूद नकदी की मांग 42.86 लाख करोड़ पर, सरकार प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी में, नकली नोटों पर लगेगी रोक

Ajay Kumar by Ajay Kumar
सोमवार, 8 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, बिज़नेस
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Plastic Currency in India
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Plastic Currency in India: UPI और डिजिटल पेमेंट की क्रांति के बावजूद भारत में नकदी की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। RBI के अनुसार, मुद्रा की मांग 42.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। हर साल नोट छापने और खराब नोटों को नष्ट करने में सरकार को हजारों करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अब भारत सरकार एक नए समाधान पर काम कर रही है – प्लास्टिक के नोट।

देखा जाए तो दुनिया के 60 से ज्यादा देश पहले से ही प्लास्टिक नोट का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये नोट ज्यादा टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं। अब भारत भी इस दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी में है।

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UPI की क्रांति के बावजूद नकदी क्यों बढ़ रही है?

यह सवाल उठता है कि जब देश में हर महीने 20 अरब से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, तो फिर नकदी की मांग क्यों बढ़ रही है? दरअसल, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। भारत के करोड़ों किसान, मजदूर, रेड़ी-पटरी वाले और गांव के लोग अभी भी नकद से ही लेनदेन करते हैं।

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दिलचस्प बात यह है कि इंटरनेट न होना, बिजली चले जाना, फोन चार्ज न होना या सर्वर डाउन होने जैसी समस्याओं की वजह से नोट काफी काम आता है। RBI की रिपोर्ट कहती है कि नकदी की मांग हर साल 11.5% की दर से लगातार बढ़ रही है।

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नोट छापने में कितना खर्च?

अगर गौर करें तो सरकार हर साल नोट छापने और खराब नोटों को नष्ट करने में भारी-भरकम पैसा खर्च करती है। 2024-25 में नोट छापने पर ₹6,372 करोड़ खर्च हुए। साथ ही, 23.8 अरब खराब नोट नष्ट किए गए।

समझने वाली बात यह है कि यह खर्च हर साल बढ़ता जा रहा है। कागजी नोट जल्दी फट जाते हैं, पानी में भीगने से खराब हो जाते हैं और गंदगी भी आसानी से लग जाती है। इसीलिए सरकार को बार-बार नए नोट छापने पड़ते हैं।

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प्लास्टिक नोट आखिर है क्या?

प्लास्टिक नोट असल में पॉलीप्रोपाइलीन नाम के स्पेशल प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। देखने में ये बिल्कुल नॉर्मल कागजी नोट जैसे ही लगते हैं, लेकिन इनकी ताकत बहुत ज्यादा होती है। यह नोट पानी में भीगने पर खराब नहीं होते। गंदगी लगने पर भी आसानी से साफ हो जाते हैं और फटते भी बहुत कम हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इनकी उम्र सामान्य नोटों की तुलना में पांच से सात गुना ज्यादा होती है। मतलब एक नोट कई साल तक चल सकता है। तटीय इलाकों में नमी हो, धूल भरा राजस्थान हो या ठंडे पहाड़ी इलाके हों – हर जगह यह नोट आसानी से टिक जाते हैं।


प्लास्टिक नोट के फायदे

प्लास्टिक नोट के कई बड़े फायदे हैं। सबसे पहला और बड़ा फायदा है लंबी उम्र। कागजी नोट जल्दी फट जाते हैं और खराब हो जाते हैं। लेकिन प्लास्टिक नोट लंबे समय तक नए जैसे रहते हैं। इससे सरकार को हर साल नोट छापने पर कम पैसा खर्च करना पड़ेगा।

दूसरा बड़ा फायदा है सुरक्षा। आजकल नकली नोटों की समस्या बहुत बढ़ गई है। प्लास्टिक नोटों में खास माइक्रो-ऑप्टिक फीचर्स, होलोग्राम और स्पेशल स्याही लगाई जाती है। इनकी नकल करना जालसाजों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। आम आदमी भी आसानी से पहचान सकता है कि नोट असली है या नकली।

तीसरा फायदा है स्वच्छता। चिकनी सतह होने की वजह से बैक्टीरिया और वायरस आसानी से इन पर टिक नहीं पाते हैं। खासकर अस्पतालों, बाजारों और सार्वजनिक जगहों पर यह बहुत उपयोगी साबित होंगे।


दुनिया में पहले से चल रहे प्लास्टिक नोट

प्लास्टिक नोट कोई नई खोज नहीं है। दुनिया के लगभग 60 देश पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, वियतनाम जैसे देशों में प्लास्टिक मुद्रा आम है।

ये देश सालों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और बहुत फायदा उठा रहे हैं – कम खर्च, ज्यादा सुरक्षा और कम नकली नोट। भारत भी 2009 से इसके बारे में सोच रहा है। 2012 में कोच्ची, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला में ₹10 के प्लास्टिक नोट का ट्रायल भी हुआ था, लेकिन वो योजना बीच में ही अटक गई।


भारत में कैसे लागू होगा प्लास्टिक नोट?

भारत में प्लास्टिक नोट लागू करने के लिए कई कदम उठाने होंगे। सबसे पहले RBI को घरेलू छपाई की क्षमता बढ़ानी होगी। नासिक, देवास, मैसूर और सालबोनी के नोट छापने की जगहों को प्लास्टिक नोट छापने के लिए तैयार करना पड़ेगा।

भले ही शुरू में किसी विदेशी देश से टेक्नोलॉजी लेनी पड़े, लेकिन लंबे समय के लिए हमें आत्मनिर्भर होना होगा। दूसरा कदम होगा चरणबद्ध तरीके से शुरुआत। सबसे पहले ₹10 और ₹20 के नोट के ट्रायल शुरू किए जाएं क्योंकि ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और जल्दी खराब होने वाले नोट हैं।


ATM और बैंकों को भी तैयार करना होगा

प्लास्टिक नोट लाने से पहले एटीएम मशीनों को अपग्रेड करना बहुत जरूरी है। बैंकों और एटीएम कंपनियों के साथ मिलकर समय सीमा तय करनी होगी। साथ ही, जनता को जागरूक करना भी जरूरी है।

राहत की बात यह है कि प्लास्टिक नोट कैसे पहचाने, कैसे चेक करें – यह जानकारी आसान भाषा में हिंदी, बंगाली, तमिल, तेलुगु जैसी भाषाओं में गांव-गांव तक पहुंचानी होगी।


पर्यावरण का क्या होगा?

जब पुराने प्लास्टिक नोट वापस आएं तो उनका सही तरीके से निपटान करना भी जरूरी होगा। पर्यावरण के हिसाब से प्लान बनाना होगा ताकि इन्हें रिसाइकल किया जा सके। इससे प्लास्टिक वेस्ट भी कम होगा।

दरअसल, प्लास्टिक नोट पूरी तरह से रिसाइकल किए जा सकते हैं। कई देशों में पुराने प्लास्टिक नोटों को पिघलाकर दूसरे प्लास्टिक उत्पाद बनाए जाते हैं। यह एक पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रिया है।


UPI है तो प्लास्टिक नोट की जरूरत क्यों?

कई लोग कह रहे हैं कि UPI इतना आगे बढ़ गया है तो प्लास्टिक नोट पर समय क्यों बर्बाद करें? यह तर्क सही लगता है लेकिन पूरी सच्चाई नहीं है। हमारे 7 लाख गांवों में अभी भी कई जगहों पर इंटरनेट नहीं पहुंचा है।

बुजुर्ग, मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोग नकदी पर ही निर्भर हैं। बिजली चली गई, फोन बंद हो गया या नेटवर्क डाउन हुआ – तब भी नोट ही काम आता है। UPI और नकदी एक दूसरे के दुश्मन नहीं बल्कि साथी हैं। दोनों को मिलाकर चलाना होगा।


भारत की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद

आज भारत एक नए मोड़ पर खड़ा है। हमें सिर्फ आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले 10-20 सालों की चुनौतियों को भी देखना होगा। प्लास्टिक नोट सिर्फ एक सामग्री बदलने का तरीका नहीं है। यह है पैसे का बेहतर इस्तेमाल, नकली नोटों पर लगाम, कम खर्च और ज्यादा सुरक्षित मुद्रा।

शुरू में ज्यादा खर्च लगेगा, लेकिन आने वाले सालों में हजारों करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। प्लास्टिक नोट भारतीय अर्थव्यवस्था को और मजबूत बना सकते हैं।


सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम

RBI और सरकार को अब ठोस कदम उठाने चाहिए। अगर सही तरीके से प्लानिंग की गई तो न सिर्फ पैसे की बचत होगी बल्कि आम आदमी को भी ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ नोट मिलेंगे।

चिंता का विषय यह भी है कि अगर देरी हुई तो हम दुनिया से पीछे रह जाएंगे। जब 60 देश पहले से ही प्लास्टिक नोट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो भारत को भी जल्द से जल्द इस दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए।


पैरामीटरकागजी नोटप्लास्टिक नोट
उम्र1-2 साल5-7 साल
पानी प्रतिरोधनहींहां
सफाईमुश्किलआसान
सुरक्षा फीचर्ससीमितउन्नत
नकली की संभावनाज्यादाबहुत कम
लागत (लंबी अवधि)ज्यादाकम

मुख्य बातें (Key Points)
  • नकदी की मांग 42.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची।
  • हर साल ₹6,372 करोड़ नोट छापने पर खर्च।
  • 23.8 अरब खराब नोट नष्ट किए गए।
  • प्लास्टिक नोट 5-7 गुना ज्यादा टिकाऊ।
  • 60 देश पहले से प्लास्टिक नोट इस्तेमाल कर रहे।
  • 2012 में भारत में ट्रायल हुआ था।
  • नकली नोटों पर लगेगी रोक।

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: प्लास्टिक नोट कितने समय तक चलते हैं?

उत्तर: प्लास्टिक नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में 5 से 7 गुना ज्यादा समय तक चलते हैं। एक प्लास्टिक नोट आसानी से 5-7 साल तक इस्तेमाल में रह सकता है।

प्रश्न 2: क्या प्लास्टिक नोट पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं?

उत्तर: हां, प्लास्टिक नोट पूरी तरह से रिसाइकल किए जा सकते हैं। कई देशों में पुराने प्लास्टिक नोटों को पिघलाकर दूसरे उपयोगी प्लास्टिक उत्पाद बनाए जाते हैं।

प्रश्न 3: भारत में प्लास्टिक नोट कब से शुरू होंगे?

उत्तर: अभी सरकार और RBI योजना पर काम कर रहे हैं। 2012 में ट्रायल हुआ था लेकिन बीच में रुक गया। अब दोबारा से गंभीरता से विचार किया जा रहा है, लेकिन सटीक तारीख की घोषणा अभी नहीं हुई है।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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