शिअद-बसपा के सांसदों ने किसानों के हक में किया अनोखा विरोध


नई दिल्ली, 2 अगस्त (The News Air)

शिरोमणी अकाली दल(शिअद)- बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सांसदों ने आज दिल्ली की सीमाओं पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हजारों किसानों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए सांसदों को  गेंहू के डंठल दिए और अन्नदाता के लिए न्याय की मांग की।

विरोध का नेतृत्व कर रही पूर्व केंद्रीय मंत्री सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने एनडीए के मंत्रियों और सांसदों को गेंहूं के डंठल दिए और केंद्र सरकार द्वारा किसानों के साथ किए जा रहे बर्ताव के बारे में आत्ममंथन करने को कहा। मंत्रियों ने जहां गेंहू की डंठल स्वीकार नही किए, वही कई सांसदों ने केवल स्वीकार ही नही किया , बल्कि रमा देवी जैसे कुछ सांसदों ने गेंहू के डंठल को भक्ति के निशान के रूप में अपने माथे पर लगाया।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरदारनी बादल ने कहा कि ‘‘ अगर हम खाना खा रहे हैं, तो इसके लिए हमें किसानों का आभार व्यक्त करना चाहिए। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस समुदाय के प्रति सबको कृतज्ञ होना चाहिए , केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ तीनों खेती कानून लाए तथा अब उन्हे निरस्त करने से इंकार कर दिया। आज हमने सांसदों को गेंहू के डंठल दिए ताकि वे  अपनी अंतरआत्मा की आवाज सुनकर नियम बनाने वालों से न्याय देने की मांग करें’’।

काला कानून वापिस लो, किसानों की मांगें पूरी करो, के नारों के बीच सरदारनी हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि यह निंदनीय है कि केंद्र सरकार ने पिछले आठ महीनों से दिल्ली से लगी सीमाओं पर बैठे किसानों की परेशानियों के प्रति आंखें मूंद रखी हैं। उन्होने कहा कि शिअद-बसपा के सांसद मानसून सत्र शुरू होने के पहले दिन से ही तीनों खेती कानूनों को निरस्त करने की मांग पर चर्चा करने की मांग कर रहे हैं। ‘‘ हमने बार बार स्थगन प्रस्ताव पेश किए । लेकिन अनुमति नही दी गई यह सरकार किसानों की आवाज सुनने को तैयार नही है।, यही कारण है कि हम रोज संसद के बाहर किसानों के साथ एकजुटता से विरोध कर रहे हैं। हम तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक कि काले कानूनों को रदद नही कर दिया जाता’’।

बादल ने केंद्र द्वारा न केवल किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की निंदा की , बल्कि इस नेक कार्य के लिए किसानों द्वारा किए गए बलिदानों को भी तुच्छ करार दिया। उन्होने कहा कि किसानों के लिए गलत शब्द‘ आंतकवादी ’ तथा ‘मवाली’  जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं, क्येांकि वे खेती क्षेत्र में कारपोराइजेशन के विरोध में खड़े हैं। बठिंडा के सांसद ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा आंदोलन में शहीद हुए किसानों के बलिदान को यह कहकर कि उनके पास आंदोलन में हुए शहीदों को कोई रिकार्ड नही है, की निंदा की। सरदारनी बादल ने कहा कि ‘‘जबकि  यह सार्वजनिक है कि चल रहे किसान आंदोलन में 537 किसानों की जानें गई हैं’’।


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