LIVE | ...
गुरूवार, 23 जुलाई 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Mailing Children History: जब डाक से भेजे जाते थे जीवित बच्चे

Mailing Children History: जब डाक से भेजे जाते थे जीवित बच्चे

अमेरिका में साल 1913 से 1920 के बीच चली इस हैरान करने वाली प्रथा की पूरी सच्चाई।

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शनिवार, 13 जून 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, स्पेशल स्टोरी
A A
0
Mailing Children History
104
SHARES
694
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Mailing Children History: क्या आप कभी सोच सकते हैं कि किसी बच्चे को डाकिया पार्सल की तरह झोले में डालकर किसी दूसरे शहर छोड़ आए? सुनने में यह बिल्कुल असंभव और डरावना लगता है। लेकिन साल 1913 में United States में कुछ ऐसा ही हकीकत में हो रहा था। दरअसल, वहां के US Post Office ने एक नई सेवा शुरू की थी, जिसके बाद लोगों ने नियमों की ढिलाई का फायदा उठाते हुए अपने बच्चों को ही डाक से भेजना शुरू कर दिया।

हैरान करने वाली बात यह है कि यह कोई अवैध काम नहीं था। शुरुआत में डाक विभाग के नियमों में ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी जो इंसान को भेजने से रोके। बस यहीं से शुरू हुई एक अजीब कहानी। माता-पिता अपने बच्चों के कपड़ों पर डाक टिकट चिपकाते थे और डाकिया उन्हें उनके रिश्तेदारों के घर सुरक्षित पहुंचा देता था।

🔍 यह भी पढ़ें- DSP Kalpana Verma Deepak Tandon Case: DSP पर ‘लव ट्रैप’ का आरोप, कारोबारी ने गंवाए ₹2 करोड़!

‘आखिर क्यों बच्चों को डाक से भेजने लगे थे माता-पिता’

अगर गौर करें, तो इस अजीबोगरीब फैसले के पीछे का सबसे बड़ा कारण पैसा था। उस समय ट्रेन टिकट की तुलना में बच्चों को डाक से भेजना बहुत सस्ता पड़ता था। यह सचमुच अनोखा था। अगर बच्चे का वजन 50 पाउंड से कम होता था, तो उसे Parcel Post के जरिए आसानी से भेजा जा सकता था। समझने वाली बात यह है कि गरीब परिवारों के लिए यह यात्रा का सबसे किफायती जरिया बन गया था।

नीचे दी गई तालिका में आप इस प्रथा के दौरान हुए कुछ प्रसिद्ध मामलों की सांख्यिकी देख सकते हैं:

यह भी पढे़ं 👇

PM Modi NEET

Paper Leak Fast Track Courts: पेपर लीक पर PM Modi का बड़ा ऐलान, फास्ट ट्रैक कोर्ट से मिलेगी सख्त सजा!

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
CJP Protest NIA Investigation

CJP Protest NIA Investigation: दिल्ली हाई कोर्ट में ‘संसद चलो’ प्रदर्शन की जांच पर सुनवाई, विदेशी फंडिंग के आरोप

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
UPS Pension Benefits

UPS Pension Benefits: रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, 25,756 पेंशनर्स को मिलेगा अतिरिक्त लाभ!

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
history

23 जुलाई का इतिहास: जब बने One Direction, Amy Winehouse की मौत और Boris Johnson बने PM

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
बच्चा (Child Entity)साल (Year)दूरी (Distance)कुल खर्च (Postage Cost)गंतव्य (Destination)
James Beagle19131 मील (लगभग)15 सेंट्स (Cents)दादी का घर (Glen Este, Ohio)
Charlotte May Pierstorff191473 मील53 सेंट्स (Cents)दादा-दादी का घर (Idaho)
Edna Neff1915720 मीलउपलब्ध नहींपिता का घर (Virginia)
‘इतिहास के पन्नों से: James Beagle और May Pierstorff की कहानियां’

इतिहास के पन्नों को पलटें तो कई रोचक मामले सामने आते हैं। साल 1913 में ओहायो के रहने वाले जेसी और बीगल दंपत्ति ने अपने 8 महीने के बेटे James Beagle को उसकी दादी के घर डाक से भेजा था। इसके लिए उन्होंने सिर्फ 15 सेंट के डाक टिकट खरीदे थे। यह इतिहास का पहला ऐसा दर्ज मामला था।

इसके बाद साल 1914 में 4 साल की बच्ची Charlotte May Pierstorff को उसके माता-पिता ने लगभग 73 मील दूर रहने वाले दादा-दादी के घर डाक से भेज दिया। बच्ची के कोट पर ही डाक टिकट लगा दिए गए थे। दिलचस्प बात यह है कि उस समय ट्रेन की मेल कार में ही उसे यात्रा करनी पड़ी थी। यह पूरी तरह से डाक कर्मियों के भरोसे पर टिकी व्यवस्था थी।

🔍 यह भी पढ़ें- AI Book for Children : World Book Fair 2026 में बच्चों के लिए AI किताब लॉन्च

‘डाक विभाग के कर्मचारियों पर अटूट भरोसा’

क्या यह खतरनाक नहीं था? बिल्कुल था। लेकिन उस दौर में ग्रामीण इलाकों के डाकिए लोगों के बेहद करीबी और भरोसेमंद हुआ करते थे। माता-पिता अपने बच्चों को बिना किसी डर के डाकिया को सौंप देते थे। इसका मतलब है कि यह सिर्फ एक सरकारी सेवा नहीं थी, बल्कि आपसी विश्वास की पराकाष्ठा थी।

वैसे तो कई डाकिया बच्चों को गोद में लेकर या सुरक्षित डिब्बों में बैठाकर ले जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे जैसे-जैसे यह खबरें अखबारों में छपने लगीं, चिंता का विषय बनने लगीं। सरकार को समझ आने लगा कि इंसान कोई सामान या जानवर नहीं है जिसे इस तरह भेजा जाए।

‘जून 13, 1920: जब कानूनन बंद करना पड़ा यह अजीब सिलसिला’

आखिरकार डाक विभाग को कड़ा फैसला लेना ही पड़ा। June 13, 1920 को पोस्ट ऑफिस विभाग ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी कि अब किसी भी बच्चे को डाक के जरिए नहीं भेजा जा सकेगा। प्रशासन ने साफ किया कि बच्चे किसी भी श्रेणी के ‘हानिरहित जीवित जानवरों’ की सूची में नहीं आते हैं। इस ऐतिहासिक फैसले से सुरक्षा संबंधी बड़ी खामी को दूर किया गया।

‘कानूनी खामियों और सामाजिक सुरक्षा का आईना’

इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर डालें तो यह इतिहास का एक ऐसा अनोखा पहलू है जो हमें बताता है कि कानून में छोटी सी भी खामी कितनी बड़ी विसंगति पैदा कर सकती है। उस समय का समाज आधुनिक दुनिया से काफी अलग था, जहां आपसी भरोसा सुरक्षा नियमों से कहीं अधिक बड़ा था। लेकिन आज के समय में बाल सुरक्षा और परिवहन नियमों के कड़े होने के पीछे इतिहास के ऐसे ही अजीबो-गरीब अनुभव रहे हैं। यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे समाज का विकास हुआ, वैसे-वैसे लोगों की सुरक्षा को लेकर नीतियां भी अधिक परिपक्व होती गईं।

‘क्या है पृष्ठभूमि’

दरअसल, यह पूरा मामला 1 जनवरी, 1913 को शुरू हुआ था जब अमेरिका में Parcel Post सेवा शुरू की गई थी। इससे पहले डाक विभाग केवल छोटे पत्र और दस्तावेज ही भेजता था, लेकिन इस नई सेवा ने लोगों को भारी वजन के सामान भेजने की इजाजत दे दी। इसी के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने इस नए और सस्ते माध्यम का इस्तेमाल अपने बच्चों को रिश्तेदारों के घर भेजने के लिए करना शुरू कर दिया था, जिसे आखिरकार साल 1920 में बंद करना पड़ा।

🔍 यह भी पढ़ें- Chandigarh Missing Children News: UP में मिले बच्चे, CCTV ने खोला गहरा राज

‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • अजीबो-गरीब प्रथा: अमेरिका में साल 1913 से 1920 के बीच लोग अपने बच्चों को डाक पार्सल की तरह भेज देते थे क्योंकि यह ट्रेन टिकट से बहुत सस्ता पड़ता था।
  • पहला ऐतिहासिक मामला: साल 1913 में ओहायो के James Beagle पहले ऐसे बच्चे बने जिन्हें महज 15 सेंट के डाक टिकट लगाकर भेजा गया था।
  • मशहूर सफ़र: 4 साल की बच्ची Charlotte May Pierstorff का 73 मील लंबा सफर सबसे लोकप्रिय रहा, जिसे बाद में कहानियों में भी दर्ज किया गया।
  • आधिकारिक पाबंदी: बढ़ते मामलों और सुरक्षा की चिंताओं को देखते हुए US Post Office ने June 13, 1920 को बच्चों को डाक से भेजने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या वाकई में बच्चों को डाक से भेजा जाता था?

हां, साल 1913 में अमेरिका में पार्सल पोस्ट सेवा शुरू होने के बाद कुछ माता-पिताओं ने अपने बच्चों पर डाक टिकट लगाकर उन्हें डाकिया के जरिए रिश्तेदारों के घर भेजा था।

बच्चों को डाक से भेजना कब बंद किया गया?

अमेरिकी डाक विभाग ने June 13, 1920 को आधिकारिक तौर पर आदेश जारी कर बच्चों को डाक से भेजने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।

लोग बच्चों को डाक से क्यों भेजते थे?

उस समय ट्रेन की सवारी टिकट की तुलना में बच्चों का डाक पार्सल बनाना काफी सस्ता पड़ता था, इसलिए लोग नियमों के लूपहोल का फायदा उठाते थे।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

IMD Weather Alert: Southwest Monsoon ने पकड़ी रफ्तार, Delhi में 80 kmph आंधी का अलर्ट, 10 राज्यों में Heavy Rain

Next Post

Punjab CBI Raid: 60 हजार की रिश्वत मांगने पर Railway के दो अधिकारी गिरफ्तार

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

PM Modi NEET

Paper Leak Fast Track Courts: पेपर लीक पर PM Modi का बड़ा ऐलान, फास्ट ट्रैक कोर्ट से मिलेगी सख्त सजा!

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
CJP Protest NIA Investigation

CJP Protest NIA Investigation: दिल्ली हाई कोर्ट में ‘संसद चलो’ प्रदर्शन की जांच पर सुनवाई, विदेशी फंडिंग के आरोप

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
UPS Pension Benefits

UPS Pension Benefits: रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत, 25,756 पेंशनर्स को मिलेगा अतिरिक्त लाभ!

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
history

23 जुलाई का इतिहास: जब बने One Direction, Amy Winehouse की मौत और Boris Johnson बने PM

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
IMD

IMD Weather Alert: गुजरात में 42 सेमी बारिश, कई राज्यों में रेड अलर्ट जारी

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
Breaking News Live Updates 23 July 2026

Breaking News Live Updates 23 July 2026: Big Breaking, हर पल की सबसे बड़ी खबर

गुरूवार, 23 जुलाई 2026
Next Post
CBI

Punjab CBI Raid: 60 हजार की रिश्वत मांगने पर Railway के दो अधिकारी गिरफ्तार

Indian_Air_Force_

Jorhat Plane Crash: IAF का AN-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त, 5 जवानों की मौत

Punjab BJP Meeting

Punjab BJP Meeting: अमित शाह का बड़ा मंत्र, 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी BJP

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।