बुधवार, 15 अप्रैल 2026
The News Air
No Result
View All Result
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • पंजाब
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • अंतरराष्ट्रीय
  • सियासत
  • नौकरी
  • LIVE
  • बिज़नेस
  • काम की बातें
  • स्पेशल स्टोरी
  • टेक्नोलॉजी
  • खेल
  • लाइफस्टाइल
    • हेल्थ
    • धर्म
    • मनोरंजन
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - NEWS-TICKER - भारत-नेपाल विवाद की जड़ महाकाली की धाराएं, क्यों अहम हैं लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा,

भारत-नेपाल विवाद की जड़ महाकाली की धाराएं, क्यों अहम हैं लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा,

जो नेपाली नोटों पर दिखेंगे

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 4 मई 2024
in NEWS-TICKER, लाइफस्टाइल
A A
0
nepal
104
SHARES
690
VIEWS
ShareShareShareShareShare

नई दिल्ली, 4 मई (The News Air): दो साल तक अंग्रेजों और नेपाल की बीच चली लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच 2 दिसंबर, 1815 को एक संधि हुई, जिसे सुगौली की संधि कहा जाता है। बिहार के चंपारण में स्थित सुगौली में हुई इस संधि पर 4 मार्च, 1816 को नेपाल की ओर से राजगुरु गजराज मिश्र के सहायक चंद्रशेखर उपाध्याय और ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से लेफ्टिनेंट कर्नल पेरिस ब्रेडशॉ ने दस्तखत किए थे। अंग्रेजों को यह डर था कि शायद नेपाल इस संधि को लागू न करे। ऐसे में तत्कालीन गवर्नर जनरल डेविड ऑक्टरलोनी ने ब्रिटिश सरकार की ओर से संधि पर उसी दिन आनन-फानन में मुहर लगा दी और इस संधि की कॉपी चंद्रशेखर उपाध्याय को सौंप दी। दरअसल, आज इस कहानी का जिक्र इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि नेपाल ने बीते शुक्रवार को 100 रुपए के नए नोट छापने का ऐलान किया है। इस नोट पर ऐसा मानचित्र होगा जिसमें भारत के लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को दर्शाया जाएगा। भारत इन इलाकों को लेकर पहले भी कड़ी प्रतिक्रिया दे चुका है। भारत ने कहा है कि ये तीनों इलाके भारत के अहम हिस्से हैं। इससे पहले 18 जून, 2020 को नेपाल ने अपने संविधान में संशोधन करके रणनीतिक रूप से अहम तीन इलाकों लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल का हिस्सा बताया था, तब भी भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। दरअसल, नेपाल में राजशाही खत्म होने के बाद से स्थिर लोकतंत्र कभी आया ही नहीं। वहां पर चीन का प्रभाव इतना ज्यादा रहा है कि आज भी नेपाल की कई सरकारें भारत के खिलाफ बयानबाजी से बाज नहीं आतीं। चीन वहां पर निर्माण कार्य के अलावा नेपाल के संविधान और प्रशासन में भी अपना प्रभुत्व जमा रहा है।

सुगौली की संधि से नेपाल और भारत को क्या मिला था
सुगौली की संधि से नेपाल ने बीते 25 साल में राजाओं के जीते और कब्जे किए हुए क्षेत्रों का करीब एक-तिहाई हिस्सा गंवा दिया। इसमें पूर्व में सिक्किम, पश्चिम में कुमाऊं और गढ़वाल राजशाही और दक्षिण में तराई का अधिकतर क्षेत्र शामिल था। तराई भूमि का कुछ हिस्सा 1816 में ही नेपाल को लौटा दिया गया। 1860 में तराई भूमि का एक बड़ा हिस्सा नेपाल को 1857 के भारतीय विद्रोह को दबाने में ब्रिटिशों की सहायता करने की एवज में पुन: लौटाया गया। इस संधि से काठमांडू में एक ब्रिटिश प्रतिनिधि की नियुक्ति की जानी थी और ब्रिटिश आर्मी में गोरखाओं की भर्ती की राह खुली। दिसंबर, 1923 में सुगौली संधि को ‘सतत शांति और मैत्री की संधि’ कहा जाने लगा और संधि में ब्रिटिश प्रतिनिधि की जगह सिर्फ दूत कर दिया गया। 1950 में भारत-नेपाल ने एक नई संधि पर दो स्वतंत्र देशों के रूप में हस्ताक्षर किए, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से स्थापित करना था।
जब गोरखाओं ने सिक्किम, गढ़वाल और कुमाऊं पर कर लिया था कब्जा

दरअसल, 1765 में नेपाल में एक हिंदू राजा पृथ्वीनारायण शाह ने गोरखा साम्राज्य की स्थापना की। पृथ्वीनारायण ने गोरखाओं की मदद से नेपाल के छोटे-छोटे राजे-रजवाड़ों और रियासतों को जीतकर मिला लिया। इसके बाद 1790 में गोरखा आर्मी ने तिब्बत पर आक्रमण कर दिया। 1792 में चीन ने तिब्बत के साथ मिलकर गोरखाओं को खदेड़ दिया। इसके बाद गोरखा आर्मी ने भारत की ओर अपना कब्जा जमाना शुरू किया और 25 साल में गोरखा आर्मी ने भारत से सटे हिमालयी राज्यों सिक्किम, गढ़वाल और कुमाऊं पर अपना कब्जा जमा लिया।

क्या सुगौली की संधि से निकल पाया कोई समाधान

सार्क यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ. देवनाथ पाठक बताते हैं कि सुगौली की संधि से अंग्रेजों का हित ही सधा। इससे भारत और नेपाल के बीच वास्तविक सीमा रेखा का निर्धारण नहीं हो पाया। आज भी कई स्थानों पर सीमा तय करने और सीमा स्तंभों की स्थापना को लेकर विवाद है। एक अनुमान के अनुसार, दोनों देशों के बीच 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विवादित स्थान हैं, जिन पर बहस जारी है। नेपाल-भारत की सीमा रेखा के 54 स्थानों पर अतिक्रमण और विवादों के आरोप हैं। इनमें कालापानी-लिंपियाधुरा, सुस्ता, मेची क्षेत्र, टनकपुर, संदकपुर, पशुपतिनगर, हिले थोरी जैसे विवादित स्थान हैं।

यह भी पढे़ं 👇

World Bank Jobs Crisis Warning

World Bank Jobs Crisis Warning: Ajay Banga ने दी चेतावनी, 80 करोड़ नौकरियों की होगी कमी

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
TCS Nashik Scandal

TCS Nashik Scandal: कॉर्पोरेट ऑफिस में ग्रूमिंग ट्रैप से शोषण का खुलासा

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
Hyderabad 1948 Massacre

Hyderabad 1948 Massacre: रजाकारों का खूनी इतिहास और ऑपरेशन पोलो की पूरी कहानी

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
महाकाली नदी को लेकर सुगौली संधि में क्या कहा गया था

सुगौली की संधि में यह कहा गया था कि महाकाली नदी के पश्चिम हिस्से पर नेपाल का अधिकार नहीं है। यह वही महाकाली नदी है, जिसे भारत में शारदा नदी भी कहते हैं। यही वजह है कि भारत इस इलाके में सड़क बना रहा है। वहीं, संधि के अनुसार, नेपाल के हिस्से में इसी महाकाली नदी का पूर्वी हिस्सा आता है। वहीं, नेपाल सरकार कहती है कि संधि में महाकाली नदी के पश्चिमी हिस्से पर भी नेपाल का अधिकार की बात है। जबकि सुगौली संधि में यह कहा गया था कि नेपाल की सीमा पश्चिम में महाकाली और पूरब में मैची नदी तक होगी।

भारत-नेपाल में विवाद की जड़ महाकाली नदी की धाराएं

गोरखपुर में इतिहासकार डॉ. दानपाल सिंह बताते हैं कि नेपाल यह कहता है कि महाकाली नदी की मुख्य धारा लिंपियाधुरा से शुरू होती है। ऐसे में इसे ही उद्गम स्थल माना जाएगा। अब चूंकि उद्गम स्थल लिंपियाधुरा है तो लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी नेपाल के हिस्से हुए। वहीं, भारत का कहना है कि महाकाली नदी की सभी धाराएं कालापानी गांव में आकर मिलती हैं, ऐसे में इसे ही नदी का उद्गम स्थल माना जाए। चूंकि, कालापानी ही महाकाली नदी का उद्गम स्थल है तो लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी भारत के हिस्से में है। भारत ये भी कहता है कि सुगौली संधि में मुख्य धारा को नदी माना गया था। ऐसे में लिपुलेख को नेपाल का हिस्सा मानना गलत है। महाकाली और गंडक (नारायणी) जैसी नदियां जिन इलाकों में सीमा तय करती हैं, वहां मानसूनी बाढ़ से तस्वीर बदल जाती है।

लिपुलेख में सड़क बनने से कैलाश मानसरोवर यात्रा 3 दिन में ही

लिपुलेख दर्रा भारतीय सीमा के एकदम आखिर में है, जहां भारत, नेपाल और चीन (तिब्बत) की सीमा आकर मिलती है। 2020 में जब भारत ने सड़क बनाई तो नेपाल ने आपत्ति जताई। दरअसल, भारत का कहना है कि यहां सड़क बनने से कैलाश-मानसरोवर यात्रा तीन दिन में ही पूरी हो जाएगी। वहीं सिक्किम के रास्ते से जाने पर कम से कम इस यात्रा में 20 दिन लगते हैं। सिक्किम के नाथूला दर्रे से कैलाश मानसरोवर के बीच करीब 900 किमी का फासला है, जबकि नेपाल के रास्ते से जाने पर यह दूरी 540 किमी पड़ती है। वहीं लिपुलेख से मानसरोवर की दूरी महज 90 किमी ही है।

कभी वाजपेयी से विवाद सुलझाने की अपील की थी, चीन से समझौते पर चिढ़ा था नेपाल

भारत के आजाद होने के बाद जब 1962 में भारत-चीन जंग हुई तो उसके कुछ समय बाद ही नेपाल ने अपना तेवर दिखाते हुए लिपुलेख पर अपना हक जताया था। 1981 में दोनों देशों की सीमाएं तय करने के लिए एक संयुक्त दल बना था, जिसने 98% सीमा तय भी कर ली थी। वहीं, 2000 में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री गिरिजाप्रसाद कोइराला ने भारतीय पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से इस विवाद को बातचीत से सुलझाने का आग्रह भी किया था। इसके बाद 2015 में भारत ने चीन के साथ उत्तराखंड के लिपुलेख से होते हुए एक व्यापारिक मार्ग का समझौता किया था। उस समय नेपाल ने यह आपत्ति जताई थी कि यह समझौता करने से पहले दोनों देशों को उससे पूछना चाहिए था। जबकि, भारत बरसों से लिपुलेख को अपने नक्शे में दिखाता रहा है।

Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Mumbai में गैस पाइपलाइन लीक होने से लगी आग में चार लोग घायल

Next Post

पलामू में बोले PM, कहा-एक-एक वोट की ताकत से नया भारत बना जो घर में घुसकर मारता है

The News Air Team

The News Air Team

द न्यूज़ एयर टीम (The News Air Team) अनुभवी पत्रकारों, विषय विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का एक समर्पित समूह है, जो पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और त्वरित समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी टीम राजनीति, सरकारी योजनाओं, तकनीक और जन-सरोकार से जुड़े मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण कर तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग करती है। 'द न्यूज़ एयर' का मुख्य उद्देश्य डिजिटल पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना और समाज के हर वर्ग को जागरूक करना है। हम हर खबर को पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आप तक पहुँचाते हैं, ताकि आपको मिले केवल भरोसेमंद जानकारी।

Related Posts

World Bank Jobs Crisis Warning

World Bank Jobs Crisis Warning: Ajay Banga ने दी चेतावनी, 80 करोड़ नौकरियों की होगी कमी

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
TCS Nashik Scandal

TCS Nashik Scandal: कॉर्पोरेट ऑफिस में ग्रूमिंग ट्रैप से शोषण का खुलासा

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
Hyderabad 1948 Massacre

Hyderabad 1948 Massacre: रजाकारों का खूनी इतिहास और ऑपरेशन पोलो की पूरी कहानी

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
Breaking News Live Updates 15 April 2026

Breaking News Live Updates 15 April 2026: Big Alerts, हर खबर सबसे तेज

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
IMD Weather Alert

IMD Weather Alert: Northwest India में 5°C तापमान बढ़ेगा, कई राज्यों में Heatwave की चेतावनी

बुधवार, 15 अप्रैल 2026
Next Post
पलामू में बोले PM, कहा-एक-एक वोट की ताकत से नया भारत बना जो घर में घुसकर मारता है

पलामू में बोले PM, कहा-एक-एक वोट की ताकत से नया भारत बना जो घर में घुसकर मारता है

पूर्व गेंदबाज़ ‘Irfan Pathan’ ने उठाये हार्दिक की कॅप्टेन्सी पर सवाल

पूर्व गेंदबाज़ ‘Irfan Pathan’ ने उठाये हार्दिक की कॅप्टेन्सी पर सवाल

Gold price today, silver price today, MCX gold rates, gold price January 2025, BIS hallmark gold, gold HUID code, silver investment, gold and silver rates India, certified gold purchase, gold price drop, सोने की कीमत, चांदी की कीमत, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज, BIS certified gold benefits, gold market trends, सोना और चांदी निवेश।

सोना के भाव में भारी गिरावट, क्या खरीदने का यही सही समय है? जानें एक्सपर्ट राय

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।