राहुल गांधी, सुनील जाखड़ तथा नवजोत सिद्धू ने तीन सदस्यीय एसआईटी की ले ली है जगह

 चंडीगढ़, 26 जून, (The News Air)

शिरोमणी अकाली दल ने आज कहा है कि कांग्रेसी नेता राहुल गांधी, सुनील जाखड़ तथा नवजोत सिद्धू ने तीन मैंबरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) की जगह ले ली है, तथा पूर्व मुख्यमंत्री सरदार परकाश सिंह बादल तथा शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को कोटकपुरा गोलीकांड मामले में पहले ही दोषी ठहरा चुके हैं।

उन्होने कहा कि कोटकपुरा की घटना संभवत दुनिया की एकमात्र घटना है, जिसमें सिट जानना चाहती है  कि गोलीबारी का आदेश किसने दिया, संबंधित सक्षम अधिकारी एसडीएम द्वारा स्वीकार किए जाने के बाद भी कि उन्होने गोलीबारी का आदेश दिया था। ‘ एसआईटी ने एसडीएम से यह खुलासा न करने के लिए कहकर, यह दोष देकर साबित करना चाहती है कि गोलीबारी का आदेश बादल परिवार ने दिया।

यहां एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अकाली नेताओं बलविंदर सिंह भूंदड़, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, महेशइंदर सिंह ग्रेवाल तथा डा. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यह स्पष्ट है कि एसआईटी गांधी परिवार के हाथों की कठपुतली बन गई है, जो 10 जनपथ से रिमोट कंट्रोल के जरिए इसे नियंत्रित कर रही है। उन्होने कहा कि हालांकि यह बड़ा आदेश था, परंतु एसआईटी यदि अपनी विश्वसनीयता हासिल करना चाहती है तो उसे वरिष्ठ नेतृत्व को फंसाने की कोशिश करने के लिए सुनील जाखड़ , नवजोत सिद्धू, राहुल गांधी की भूमिका की जांच करनी चाहिए।

अकाली नेताओं ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने हाल ही में राहुल गांधी को पूरे मामले के बारे विस्तार से बताया था तथा बाद में राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सरदार परकाश सिंह बादल तथा सरदार सुखबीर सिंह बादल को  इस मामले में फंसाने के लिए कहा। उन्होने कहा कि नवजोत सिद्धू ने आज एक बयान में एसआईटी को भी ऐसा ही करने के लिए बयान जारी किया। नेताओं ने कहा कि जहां जाखड़ तथा सिद्धू ने अदालत की अवमानना की थी, वहीं राहुल गांधी के खिलाफ गलत कृत्य के उकसाने के लिए आरोप लगाए जाने चाहिए।

अकाली नेता जो पार्टी की कोर कमेटी के सदस्यों के साथ आए थे, ने कहा कि वे यह चाहते हैं कि एसआईटी उन घटनाओं में कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी की भूमिका की जांच करे , जिसके कारण 2015 में बेअदबी की घटनाएं हुई। उन्होने यह भी मांग की कि पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह के खिलाफ कोटकपुरा गोलीकांड में बादल परिवार को फंसाने के लिए दस्तावेज गढ़ने का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

इस पूरी घटना को राजनीतिक बदलाखोरी करार देते हुए सरदार महेशइंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि एसआईटी को कांग्रेस आलाकमान के दबाव के आगे इस्तेमाल नही होने देना चाहिए जैसा कि इंदिरा गांधी ने सिख संस्थाओं तथा उनके नेताओं पर हमला करने के लिए पहले किया था।‘ पूर्व निदेशक विजय सिंगला जैसे रिटायर्ड अधिकारियों को जांच में शामिल कर एसआईटी ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है’।

यह बताते हुए कि नई एसआईटी नई बोतल में पुरानी शराब की तरह है। अकाली नेताओं ने कहा कि ‘ इस मामले में कोई प्रगति करने की संभावना नही है, वे इसे  सुलझाने के लिए नही बल्कि  मामले को ज्वलंत रखने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं’। उन्होने कहा कि इस जांच को सुप्रीम कोर्ट को सौंपा जाना चाहिए तथा उसकी निगरानी में ही जांच की जानी चाहिए।

भूंदड़ तथा प्रो. चंदूमाजरा सहित वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि गांधी परिवार पंजाब में शिरोमणी अकाली दल और सिख नेतृत्व को कमजोर करने की इच्छा के साथ बादल परिवार को निशाना बना रहा है। उन्होने कहा कि जहां एक तरफ सरकार का मकसद अकाली दल को बदनाम करना है, वहीं वह कांग्रेस पार्टी में असंतोष दबाने के लिए इस मामले का इस्तेमाल कर रही है। ‘ पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री से कानून व्यवस्था से जुड़े मामले में  ऐसे सवाल करके एसआईटी ने नई मिसाल पैदा कर दी है’।

अकाली नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय ने हाल ही में पूर्व आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह दुर्भावनापूर्ण जांच को नकार कर , मुख्यमंत्री को पूरा अधिकार है कि कानून तथा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने लिए किसी भी सरकारी कमी को टेलीफोन करने का पूरा अधिकार है। ‘ जब नई एसआईटी ने कोटकपूरा में कानून तथा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के लिए अकाली दल के नेताओं से सवाल पूछे यह पूरी तरह से अदालत की अवमानना की गई है’।

डा. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस सरकार कोटकपुरा गोलीकांड मामले को आगे बढ़ा रही है, क्योंकि उसे लगा कि बादल परिवार को इसमें फंसा सकती है, लेकिन बरगाड़ी मामले यां बहबलकलां पुलिस फांयरिग मामले  में इसे जरा भी दिलचस्पी नही है, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। उन्होने सरकार से मांग की कि इस जघन्य अपराध के किसी भी दोषी को सजा दिलाने के लिए बरगाड़ी मामले में हर दिन सुनवाई की जानी चाहिए। उन्होने कहा कि इसी तरह बहबलकलां पुलिस फायरिंग मामले की जांच में भी तेजी लाई जानी चाहिए।

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