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The News Air - Breaking News - Punjab Education Revolution: पंजाब केरल को पीछे छोड़ नंबर-1, भगवंत मान का बड़ा ऐलान

Punjab Education Revolution: पंजाब केरल को पीछे छोड़ नंबर-1, भगवंत मान का बड़ा ऐलान

मुख्यमंत्री का दावा- अब बच्चों को कनाडा-ऑस्ट्रेलिया नहीं जाना पड़ेगा, यहीं मिलेगी विश्वस्तरीय शिक्षा, JEE में 359 सरकारी स्कूली छात्रों की सफलता

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
रविवार, 31 मई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब
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Punjab Education Revolution
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Punjab Education Revolution: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि पंजाब को देश का अग्रणी शिक्षा केंद्र बनाया जाएगा और यहां के बच्चों को कनाडा या ऑस्ट्रेलिया की ओर देखने की जरूरत नहीं रहेगी। उन्होंने दावा किया कि पिछले चार सालों के सामूहिक प्रयासों से शिक्षा क्षेत्र में केरल को पछाड़कर पंजाब देश का नंबर एक राज्य बन गया है। शनिवार को चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में ‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम के दौरान 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के टॉपर्स को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह बड़ी घोषणा की।

यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं बल्कि जमीनी हकीकत है। देखा जाए तो नीति आयोग के स्कूल शिक्षा मूल्यांकन में पंजाब के सरकारी स्कूलों ने पारंपरिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करने वाले कई राज्यों को पीछे छोड़कर शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस साल JEE Main में सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों ने सफलता पाई है, जो पंजाब की ‘शिक्षा क्रांति’ का जीता-जागता सबूत है।

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लड़कियों का दबदबा, टॉप रैंक में बेटियां आगे

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गर्व से बताया कि पंजाब की बेटियां अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इस साल आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षा के टॉपर्स में लड़कियों का दबदबा रहा है। यह दिखाता है कि पंजाब सरकार की लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने की नीतियां रंग ला रही हैं।

समझने वाली बात यह है कि जब लड़कियां शिक्षा में आगे बढ़ती हैं तो पूरा समाज आगे बढ़ता है। पंजाब में लड़कियों के लिए मुफ्त आवागमन की सुविधा, स्कूलों में बेहतर बुनियादी ढांचा और सुरक्षित माहौल ने इस बदलाव को संभव बनाया है।

ज़ीरा के एक सरकारी स्कूल की 11वीं कक्षा की विद्यार्थी अनमोलप्रीत कौर ने कार्यक्रम में बताया कि पंजाब सरकार ने लड़कियों के लिए आवागमन की सुविधाएं प्रदान करके शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया है। उनके स्कूल में लिफ्ट की स्थापना भी की गई है, जो दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी सुविधा है।

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अब बच्चे मुख्यमंत्री से भी सवाल पूछने से नहीं हिचकते

भगवंत सिंह मान ने एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा कि आज हमारे बच्चे मुख्यमंत्री से भी सवाल पूछने से नहीं हिचकते। उन्होंने कहा, “पहले कोई भी मुख्यमंत्री विद्यार्थियों से सीधा संवाद नहीं करता था। लेकिन हमारी सरकार ने बच्चों में आत्मविश्वास पैदा किया है।”

यह बयान बच्चों में आए आत्मविश्वास को दर्शाता है। अगर गौर करें तो पहले सरकारी स्कूलों के बच्चे खुद को कमतर समझते थे, लेकिन अब वे किसी से भी सवाल पूछने और अपनी बात रखने में सक्षम हैं। यह मानसिक बदलाव किसी भी शैक्षिक सुधार से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

फरीदकोट जिले के जैतो से हरलीन शर्मा और लुधियाना से सुहानी चौहान ने भी इस बात की पुष्टि की कि मुख्यमंत्री द्वारा विद्यार्थियों को सार्वजनिक मंच पर बोलने और अपने विचार रखने का मौका देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

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शिक्षकों को विदेश भेजा, बुनियादी ढांचा अपग्रेड किया

मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए ठोस कदमों का जिक्र करते हुए कहा, “हमने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा किया, शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा, बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया और नतीजे अब सबके सामने हैं।”

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब सरकार ने शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा है। वहां वे आधुनिक शिक्षण प्रणालियां सीखते हैं और वापस आकर इस ज्ञान को अपने विद्यार्थियों और साथी शिक्षकों के साथ साझा करते हैं।

मुख्यमंत्री ने समझाया, “हमारे अध्यापक बदलाव के दूत के रूप में काम कर रहे हैं। यह पहल अध्यापकों की निपुणता को निखारती है और उन्हें आधुनिक विधियों से लैस करती है ताकि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जा सके।”

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रट्टा नहीं, ज्ञान-आधारित शिक्षा पर जोर

भगवंत मान सरकार ने शिक्षा के तरीके में भी बुनियादी बदलाव किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार रट्टा लगाने की बजाय ज्ञान-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित कर रही है जो समझ और आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) को विकसित करती है।”

समझने वाली बात यह है कि पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में बच्चे सिर्फ रट्टा मारकर परीक्षा पास कर लेते थे, लेकिन उन्हें विषय की गहरी समझ नहीं होती थी। अब पंजाब के स्कूलों में बच्चों को सोचने, प्रश्न पूछने और तर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

यह बदलाव JEE Main जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के रूप में दिख रहा है। सरकारी स्कूलों के 359 बच्चों का JEE Main क्वालीफाई करना इस नई शिक्षा पद्धति की सफलता का प्रमाण है।

359 सरकारी स्कूली छात्रों ने JEE Main किया क्वालीफाई

मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया, “इस साल JEE Main में सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों की सफलता पंजाब की ‘शिक्षा क्रांति’ के प्रभाव को दर्शाती है।”

यह आंकड़ा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले यह माना जाता था कि सरकारी स्कूलों के बच्चे JEE जैसी कठिन परीक्षाएं पास नहीं कर सकते। लेकिन अब यह धारणा टूट रही है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग देने के लिए ‘फिजिक्स वाला’ जैसे कोचिंग संस्थानों के साथ भागीदारी भी की है।

यह कदम सुनिश्चित करता है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी महंगी कोचिंग का खर्च उठाए बिना अच्छी तैयारी कर सकें।

जन्म तिथि से नहीं, अंकों से तय होगी रैंक

मुख्यमंत्री ने एक बड़ा फैसला लेते हुए शिक्षा विभाग को विशेष हिदायतें जारी कीं कि जन्म तिथि के आधार पर रैंक तय करने की बजाय बराबर अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संयुक्त रूप से पहला स्थान दिया जाए।

यह निर्णय पूरी तरह से न्यायसंगत है। अगर गौर करें तो जन्म तिथि के आधार पर रैंक तय करना तर्कसंगत नहीं है। अगर दो बच्चों के समान अंक हैं तो दोनों को समान सम्मान मिलना चाहिए।

X (पूर्व में ट्विटर) पर कार्यक्रम की झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, “आज चंडीगढ़ में ‘सितारे ज़मीन पर’ कार्यक्रम के दौरान पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के होनहार टॉपर्स को सम्मानित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।”

ग्रास-रूट्स बनो, पैराशूट नहीं

विद्यार्थियों को जमीन से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “तुम्हें जीवन में ग्रास-रूट्स (जमीन से जुड़े) बनने की कोशिश करनी चाहिए न कि पैराशूट बनने की। ग्रास-रूट्स मेहनत और दृढ़ इरादे से जमीन से उठते हैं और दुनिया को जीतने के लिए आगे बढ़ते हैं। दूसरी ओर पैराशूट वाले आसमान से नीचे उतरते हैं और उनका देर-सवेर गिरना तय होता है।”

यह संदेश साफ है कि मेहनत और संघर्ष से मिली सफलता टिकाऊ होती है, जबकि बिना मेहनत के मिली सुविधाएं लंबे समय तक नहीं रहतीं।

हवाई जहाज से तुलना करते हुए उन्होंने कहा, “जिस तरह एक रनवे हवाई जहाज को सुचारू रूप से उड़ान भरने में सक्षम बनाता है, पंजाब सरकार विद्यार्थियों को ऐसे अवसरों के लिए तैयार कर रही है ताकि उनके सपनों को साकार करने में मदद मिले।”

घमंड नहीं, नम्रता जरूरी

सफलता के बावजूद विद्यार्थियों को विनम्र रहने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “तुम्हें अपनी उपलब्धियों से कभी भी घमंडी नहीं होना चाहिए। आत्मविश्वास और सकारात्मक रहना जरूरी गुण हैं, लेकिन घमंड कभी भी सफलता के साथ नहीं आना चाहिए।”

उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी सलाह दी कि जीवन में चाहे कितने भी सफल हो जाओ, हमेशा जमीन से जुड़े रहो। अपने अध्यापकों और माता-पिता का हमेशा सम्मान करो, क्योंकि एक विजेता को भी मेडल लेने के लिए झुकना पड़ता है।

पंजाब की महान विरासत का गौरव

पंजाब की शानदार विरासत का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब न सिर्फ देश को अनाज देता है बल्कि देश की रक्षा भी करता है। पंजाब के लोग अपनी बहादुरी, मेहनत और उद्यमी भावना के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं।”

उन्होंने आगे जोड़ा, “इस पवित्र धरती का एक-एक इंच महान गुरुओं, संतों, पीरों-पैगंबरों और शहीदों की महान विरासत को समर्पित है जिन्होंने हमें बेइंसाफी और जुल्म के विरुद्ध खड़े होने की शिक्षा दी।”

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री ने पंजाबी अस्मिता और गौरव को जगाने की कोशिश की। उन्होंने याद दिलाया कि पंजाबियों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई और देश के लिए बेमिसाल कुर्बानियां दीं।

चार लाख बच्चे फर्श पर बैठते थे, अब सबको कुर्सी-मेज

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “जब मैंने पद संभाला था तो पंजाब में लगभग चार लाख बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ रहे थे। आज पंजाब सरकार के प्रयासों से एक भी बच्चा फर्श पर बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर नहीं है।”

यह आंकड़ा बुनियादी ढांचे में हुए सुधार को दिखाता है। हर बच्चे को कुर्सी-मेज मिलना सुनिश्चित करना कोई छोटा काम नहीं है। इससे बच्चों की पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है और उनके स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

शिक्षा मंत्री ने जोड़ा, “पंजाब अब शिक्षा क्षेत्र से संबंधित लगभग हर राष्ट्रीय रिपोर्ट में शीर्ष स्थान हासिल कर रहा है।”

मनीष सिसोदिया ने उठाई परीक्षा सुधार की मांग

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “देश में पुरानी परीक्षा प्रणाली को बदलना चाहिए। NEET जैसी परीक्षाओं के लीक होने जैसी घटनाएं लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को बर्बाद कर रही हैं।”

यह टिप्पणी NEET पेपर लीक विवादों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। समझने वाली बात यह है कि एक परीक्षा के लीक होने से लाखों ईमानदार छात्रों की मेहनत बर्बाद हो जाती है।

मनीष सिसोदिया ने आगे कहा, “19वीं सदी की प्रणाली पर भरोसा करने की बजाय परीक्षाएं विद्यार्थियों की समग्र योग्यता और क्षमताओं का मूल्यांकन करने वाली होनी चाहिए, न कि तीन घंटे की परीक्षा तक सीमित।”

माता-पिता-शिक्षक मिलनी पहल

भगवंत मान सरकार ने लगभग 19,000 सरकारी स्कूलों में माता-पिता-शिक्षक मिलनी पहल शुरू की है। इससे लगभग 25 लाख माता-पिता और 1.8 लाख से अधिक स्कूल स्टाफ को बच्चों के विकास पर चर्चा करने का मौका मिला है।

यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चे की शिक्षा में माता-पिता की भागीदारी जरूरी है। जब माता-पिता और शिक्षक मिलकर काम करते हैं तो बच्चे का समग्र विकास बेहतर होता है।

स्कूल ऑफ एमिनेंस का विस्तार

पंजाब सरकार ने पंजाब के बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की स्थापना की है और अब इनका विस्तार किया जा रहा है। इन स्कूलों में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा, आधुनिक बुनियादी ढांचा और विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध है।

देखा जाए तो यह पहल सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर और कई मामलों में उनसे बेहतर बना रही है।

छात्रों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने शिक्षा को मजबूत करने के लिए पंजाब सरकार के प्रयासों की भरपूर प्रशंसा की। श्री मुक्तसर साहिब जिले के सरकारी स्कूल रुपाणा के विद्यार्थी निखिल पांडे ने अपने अध्यापकों को समर्पित एक कविता पेश की और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करने के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।

यह दिखाता है कि बच्चों में सरकार के प्रयासों के प्रति आभार और उत्साह है।

मुख्य बातें (Key Points)
  • मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब ने शिक्षा में केरल को पछाड़कर नंबर-1 स्थान हासिल किया
  • इस साल JEE Main में सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों ने सफलता पाई
  • 8वीं, 10वीं और 12वीं की टॉप रैंक में लड़कियों का दबदबा
  • शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया
  • चार लाख बच्चों को फर्श से उठाकर कुर्सी-मेज दी गई
  • रट्टा शिक्षा की जगह ज्ञान-आधारित शिक्षा पर जोर

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पंजाब ने शिक्षा में केरल को कैसे पछाड़ा?

उत्तर: नीति आयोग के स्कूल शिक्षा मूल्यांकन में पंजाब के सरकारी स्कूलों ने पारंपरिक रूप से बेहतर प्रदर्शन करने वाले केरल और अन्य राज्यों को पछाड़कर देश भर में शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि पिछले चार सालों में शिक्षकों के विदेश में प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे में सुधार और ज्ञान-आधारित शिक्षा को अपनाने का नतीजा है।

प्रश्न 2: JEE Main में पंजाब के सरकारी स्कूली छात्रों की सफलता क्या दर्शाती है?

उत्तर: इस साल JEE Main में सरकारी स्कूलों के 359 विद्यार्थियों ने सफलता पाई है, जो पहले असंभव माना जाता था। यह पंजाब की ‘शिक्षा क्रांति’ का प्रत्यक्ष प्रमाण है और दिखाता है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे अब देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं। सरकार ने इसके लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था भी की है।

प्रश्न 3: पंजाब सरकार ने शिक्षा में क्या मुख्य सुधार किए हैं?

उत्तर: पंजाब सरकार ने शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर में प्रशिक्षण के लिए भेजा, चार लाख बच्चों को कुर्सी-मेज उपलब्ध करवाई, 19,000 स्कूलों में माता-पिता-शिक्षक मिलनी शुरू की, स्कूल ऑफ एमिनेंस का विस्तार किया, लड़कियों के लिए मुफ्त परिवहन शुरू किया और रट्टा शिक्षा की जगह ज्ञान-आधारित शिक्षा पर जोर दिया।

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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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