Nifty 50 Longest Losing Streak Stock Market Crash –Nifty 50 Longest Losing Streak Stock Market Crash ने भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मचा दिया है। दलाल स्ट्रीट पर जारी बिकवाली के तूफान के कारण पिछले लगातार 8 हफ्तों से शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई है, जिसने पिछले 25 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जनवरी 2026 में 26,373 के अपने ऑल टाइम हाई (All-Time High) को छूने के बाद से निफ्टी में अब तक लगभग 15% की बड़ी गिरावट आ चुकी है, जिससे निवेशकों के मन में बियर मार्केट (Bear Market) में प्रवेश करने का खौफ बैठ गया है।
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| आंकड़ा/पैरामीटर (Parameter) | वर्तमान स्थिति (Current Value) | ऐतिहासिक/तुलनात्मक संदर्भ (Historical Context) |
| निफ्टी 50 का स्तर (Nifty Level) | ~22,421 अंक (शुक्रवार बंद) | ऑल टाइम हाई 26,373 (जनवरी 2026) से ~15% नीचे |
| गिरावट की अवधि (Losing Streak) | लगातार 8 हफ्ते (-8.7%) | साल 2001 (9 हफ्ते) के बाद सबसे लंबी गिरावट |
| FII बिकवाली (Foreign Outflow) | ₹2.6 लाख करोड़ निकला | वर्ष 2026 में अब तक की कुल निकासी |
| यूएस 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड | 5.3% (उच्चतम स्तर) | 2007 के वित्तीय संकट के बाद सबसे उच्चतम स्तर |
| निफ्टी 500 शेयर स्थिति | 81% शेयर 50-SMA से नीचे | 500 में से 400 कंपनियों के शेयर भारी नुकसान में |
| बियर मार्केट ट्रिगर स्तर | 21,100 अंक से नीचे | पीक से 20% से अधिक गिरावट पर बियर मार्केट |
’25 साल में सबसे लंबी गिरावट का दौर’
देखा जाए तो 7 अगस्त को निफ्टी 50 24,500 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो 1 अक्टूबर तक गिरकर 22,421 अंक पर आ गया। यानी महज 8 हफ्तों में बाजार ने 2,149 अंकों (8.7%) का गोता लगाया है।
अगर गौर करें तो केवल बीते सितंबर महीने में ही शेयर बाजार में 6% से ज्यादा की बड़ी गिरावट देखने को मिली है। साल 2001 में लगातार 9 हफ्तों तक बाजार गिरा था, जबकि 2008 के वैश्विक मंदी और 2020 के कोरोना काल में भी गिरावट का सिलसिला 6 से 7 हफ्तों तक ही चला था। यदि यह गिरावट अगले दो हफ्ते और जारी रहती है, तो 1993 के 10 हफ्तों की गिरावट का 33 साल पुराना रिकॉर्ड भी ध्वस्त हो जाएगा।
‘क्या बाजार बियर मार्केट में प्रवेश कर चुका है?’
समझने वाली बात यह है कि तकनीकी परिभाषा के अनुसार किसी भी शेयर बाजार को बियर मार्केट में तब माना जाता है, जब वह अपने उच्चतम स्तर (Peak) से 20% या उससे अधिक गिर जाता है।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी: चूंकि निफ्टी अपने 26,373 के पीक से गिरकर फिलहाल 22,421 पर है, इसलिए यह तकनीकी रूप से अभी बियर मार्केट में नहीं आया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी का स्तर गिरकर 21,100 अंक से नीचे चला जाता है, तब इसे आधिकारिक तौर पर बियर मार्केट घोषित किया जाएगा।
‘बाजार में गिरावट के 5 मुख्य कारण’
हैरान करने वाली बात यह है कि गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि निफ्टी 500 के 81% शेयर अपने 50-डे सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। बाजार में मंदी के 5 प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
FII की भारी बिकवाली: वर्ष 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹2.6 लाख करोड़ से ज्यादा की निकासी की है।
यूएस ट्रेजरी यील्ड में उछाल: अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.3% पर पहुंच गई है जो 2007 के बाद सबसे ज्यादा है। सुरक्षित और 5% से अधिक तय रिटर्न मिलने के कारण विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर अमेरिका में लगा रहे हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल के दाम फिर से चढ़ गए हैं, जिससे भारत का आयात बिल और चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ रहा है।
रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और भारतीय रुपये के कमजोर होने से विदेशी निवेशकों पर दोहरा दबाव बन रहा है।
ग्लोबल रिस्क एवर्जन: दुनिया भर के निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों जैसे यूएस डॉलर और गोल्ड (सोने) में शिफ्ट कर रहे हैं।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
भारतीय शेयर बाजार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जनवरी 2026 में अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर थे। इसके बाद वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिका में ब्याज दरों के ऊंचे स्तर और भू-राजनीतिक तनावों के कारण विदेशी निवेशकों ने आक्रामक बिकवाली शुरू कर दी, जिससे भारतीय शेयर बाजार लगातार दबाव में आ गया।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
निफ्टी 50 में लगातार 8 हफ्तों की गिरावट से पिछले 25 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है।
जनवरी 2026 के ऑल टाइम हाई (26,373) से निफ्टी अब तक लगभग 15% नीचे गिर चुका है।
वर्ष 2026 में FIIs ने भारतीय बाजार से ₹2.6 लाख करोड़ से अधिक की पूंजी निकाली है।
यदि निफ्टी 21,100 के स्तर से नीचे जाता है, तो बाजार तकनीकी रूप से बियर मार्केट में आ जाएगा।











