Punjab DA Arrear: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) का बकाया 22,818 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। राज्य सरकार ने आज पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में यह बात खुद स्वीकार की है। कर्मचारियों और पेंशनरों की कुल लंबित देनदारी करीब 32,418 करोड़ रुपये बताई गई है।
हलफनामा मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से दाखिल हुआ। उसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के तहत बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।
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‘सुप्रीम कोर्ट ने रोक नहीं लगाई, तो जिम्मेदारी बनी हुई है’
सरकार ने अपने जवाब में एक बात साफ मानी है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए उसे मानने की जिम्मेदारी सरकार पर बनी हुई है।
यानी मामला अब सिर्फ “देंगे या नहीं देंगे” का नहीं रहा। अब सवाल यह है कि कितना, कब और किस खजाने से।
‘एक नज़र में: आंकड़ों की पूरी तस्वीर’
हलफनामे में रखे गए मुख्य आंकड़े इस तरह हैं।
| बिंदु | आंकड़ा |
|---|---|
| डीए-डीआर का बकाया | 22,818 करोड़ रुपये |
| कर्मचारियों-पेंशनरों की कुल लंबित देनदारी | करीब 32,418 करोड़ रुपये |
| बकाये पर ब्याज (हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के अनुसार) | 6 प्रतिशत सालाना |
| केंद्र के समान दर से डीए देने पर सालाना अतिरिक्त बोझ | करीब 4,712 करोड़ रुपये |
| वित्त वर्ष 2025-26 में वेतन और पेंशन पर खर्च | करीब 58,064 करोड़ रुपये |
‘हर साल 4,712 करोड़ का अतिरिक्त बोझ’
सरकार ने अदालत को बताया कि केंद्र के बराबर दर से डीए देने पर खजाने पर हर साल करीब 4,712 करोड़ रुपये का बोझ और पड़ेगा। पिछले वित्त वर्ष में वेतन और पेंशन का खर्च ही करीब 58,064 करोड़ रुपये रहा है।
इसी वजह से हलफनामे के मुताबिक बकाया भुगतान के लिए सरकार को विशेष बजटीय प्रावधान करना पड़ सकता है। देखा जाए तो यह आम बजट से निकलने वाली रकम नहीं है। इसके लिए अलग इंतजाम की जरूरत पड़ेगी।
’18 सितंबर का फैसला: डीए 42 से 50 प्रतिशत’
हलफनामे के अनुसार 18 सितंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में डीए में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। फिर 23 सितंबर को वित्त विभाग ने आदेश जारी कर दर 42 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी।
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 18 सितंबर | मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक, डीए में 8% वृद्धि का फैसला |
| 23 सितंबर | वित्त विभाग का आदेश, डीए 42 से बढ़कर 50% |
| 1 सितंबर 2026 | बढ़ी हुई दर लागू |
| अक्टूबर | सितंबर के वेतन और पेंशन में बढ़ी दर का लाभ |
दिलचस्प बात यह है कि बढ़ी हुई दर 1 सितंबर 2026 से लागू की गई, यानी फैसले की तारीख से पहले की तारीख से। कर्मचारियों के हाथ में इसका असर अक्टूबर में दिखा।
‘सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और रजिस्ट्री की खामियां’
पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के 3 अगस्त के फैसले को चुनौती देते हुए 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की थी। रजिस्ट्री ने उसमें प्रक्रियागत खामियां बताईं।
इसके बाद सरकार ने 1 अक्टूबर को याचिका दोबारा दाखिल की। यानी सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है, लेकिन हाईकोर्ट का आदेश फिलहाल अपनी जगह कायम है।
‘जानबूझकर अवहेलना नहीं: सरकार का तर्क’
सरकार ने बकाया भुगतान में हुई देरी को जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना मानने का विरोध किया है। मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया कि सरकार अदालत के आदेशों का सम्मान करती है। साथ ही कर्मचारियों और पेंशनरों को 6 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित बकाया देने की देनदारी भी उसने स्वीकार की।
‘आंकड़ों के पीछे की कहानी: कबूलनामे का मतलब’
अगर गौर करें, तो इस हलफनामे की सबसे बड़ी बात खुद आंकड़ा है। जो रकम पहले मांग के रूप में उठती थी, वह अब सरकार के अपने शपथ-पत्र में देनदारी के रूप में दर्ज है। इससे साफ होता है कि बकाये से इनकार का रास्ता अब बंद है, बहस सिर्फ भुगतान के तरीके और समय पर बची है।
समझने वाली बात है कि 4,712 करोड़ का सालाना बोझ वेतन-पेंशन के 58,064 करोड़ के खर्च का करीब 8 प्रतिशत बैठता है। ऊपर से बकाये पर 6 प्रतिशत ब्याज हर बीतते महीने के साथ देनदारी को बढ़ाएगा। इसलिए जितनी देर होगी, राज्य के खजाने पर बोझ उतना भारी होता जाएगा।
सवाल यह भी है कि 22,818 और 32,418 करोड़ में करीब 9,600 करोड़ का अंतर किस मद का है। हलफनामे के ब्योरे में यह साफ नहीं हुआ है।
आम कर्मचारी और पेंशनर के लिए इसका मतलब सीधा है। बकाये पर सरकार की देनदारी अब कागज पर कबूल हो चुकी है। पर पैसा कब और कितनी किस्तों में हाथ आएगा, यह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार के बजटीय इंतजाम पर टिका है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को आदेश दिया था कि बकाया राशि पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की, लेकिन आदेश पर रोक नहीं लगी। इसी बीच सितंबर में सरकार ने डीए की दर 42 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत की। अब हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बकाये के पूरे आंकड़े सामने आए हैं।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में माना कि डीए-डीआर का बकाया 22,818 करोड़ रुपये है और कुल लंबित देनदारी करीब 32,418 करोड़ रुपये है।
- हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के तहत बकाये पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक नहीं लगाई है।
- केंद्र के समान दर से डीए देने पर सालाना करीब 4,712 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, इसके लिए विशेष बजटीय प्रावधान करना पड़ सकता है।
- 23 सितंबर के आदेश से डीए 42 से बढ़कर 50 प्रतिशत हुआ, जो 1 सितंबर 2026 से लागू है।











